जिस देश की राष्ट्रपति की पहचान डेढ़ अरब लोगों की प्रथम नागरिक होने के बावजूद भी आदिवासी ही है,
जिस देश का प्रधानमंत्री 12 साल मुख्यमंत्री और 12 साल प्रधानमंत्री बनने के बाद भी अभी भी खुद को पिछड़ा बताता हो,
वो देश महान ही है।
यहां सिर्फ जाति के आधार पर तीन पीढ़ियों से क्लास वन अफसर रही फैमिली अभी भी शोषित मानी जाती है और सिर्फ जाति के आधार पर केवल दो बीघा जमीन पर गुजारा करने वाला परिवार सक्षम।
धन्य है भारत देश हमारा।
मरे जानवर का चमड़ा कोई भी उतार सकता है, भाई! आजीवन ठाकुर के कुएँ की कविता पढ़ कर विक्टिम कार्ड खेलते रहे, अब चमड़े का काम याद आ रहा है, तो वही करो, धमकी किसको दे रहे हो?
तुम ये सोचो कि ये काम तो तुम्हें लंबे समय से आता होगा, फिर भी काठ का खड़ाऊँ पहनने वाले मनुवादियों ने तुम्हें इतना कैसे सताया कि तुम जल तक नहीं पी पा रहे थे और गले में हाँडी, पैर में झाड़ू का झूठ गाते रहे!
ऐसा इसलिए है क्योंकि कुछ जातिवादी लोग, सांसद बनने के बाद भी, सड़कछाप भाषा बोल कर ही स्वयं को राजनीति में प्रासंगिक बनाए रख सकते हैं। पर ध्यान रहे 'भैया के आवे दे सत्ता में कट्टा सटा के उठा लेबू घारा से रे' वाले अपना राजनैतिक अस्तित्व तलाश रहे हैं। तुम तो संख्या में शून्य से थोड़ा ही ऊपर हो।
आप या तो जूता बनाने वाले हो सकते हैं, या मारने वाले। एक ही दिन में ये दोनों काम, विक्टिम भी, राजा भी, वो हास्यास्पद लगता है। बाक़ी, आग मूतने वाले भाई को जरा भेजना, इन्वर्टर चल नहीं रहा, थोड़ा गेट पर ३० मिनट आग मूत दे तो रोशनी होती रहेगी।
ब्राह्मण अब UGC का विरोध भी नहीं कर सकता उत्तर प्रदेश में।
ये विमल पंडित हैं, ये बहराइच से अयोध्या अकेले UGC विरोध में यात्रा कर रहे थे तो इनको उत्तर प्रदेश पुलिस द्वारा रोक दिया गया।
उसके बाद ये किसी काम से कॉलेज जाते हैं जहां कुछ लोग इनपर जानलेवा हमला कर देते हैं और कहते हैं तुम UGC का विरोध करोगे।
और अब जब थाने गए हैं तो इनकी कोई सुनने वाला भी नहीं है।
सोचिए जब UGC अगर लागू होगा तब किस तरह व्यवहार किया जाएगा।
“ब्राह्मण हो तो औक़ात में रहो “
मध्य प्रदेश के रीवा के दयाशंकर पांडे ने 200 करोड़ रु के घोटाले के खिलाफ आवाज उठाई। उन पर चार बार जानलेवा हमला किया गया। उन्होंने पुलिस से कई बार शिकायत की, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई।
एक दिन उनकी कार का एक्सीडेंट हो गया, जिसमें उनकी गर्भवती पत्नी भी थीं। बच्चे ने पेट में ही दम तोड़ दिया। अपनी आवाज सुनाने के लिए दयाशंकर पांडे हाईकोर्ट पहुंचे और जज की टेबल पर मृत भ्रूण रख दिया।
जब मामला सामने आया तो तुरंत कार्रवाई की गई और चार पुलिस वालों को सस्पेंड कर दिया गया।
इसलिए नहीं कि पुलिस ने दयाशंकर पांडे की मदद क्यों नहीं की, बल्कि इसलिए कि एक आम नागरिक, बिना वकील जज साहब की टेबल तक पहुंचने की हिम्मत कैसे कर सका..
‼️2 दिन पहले समस्तीपुर में 5 गुंडे दलितों ने पंडित जी का सर काट लिया और जमीन में गाड़ दिया
तब मैंने
NCRB का CRIME सेक्शन देखा ‼️
‼️2023 में भारत में कुल 27727 मर्डर हुए पर दलितों के हुए हैं सिर्फ 908 ‼️
यानी कुल मर्डर का सिर्फ तीन प्रतिशत
यानी शोषित पीड़ित नैरेटिव फर्जी है
सारण जिले में जो SP है जो इस दरिंदगी को आत्महत्या और प्रेम प्रसंग बता रहा था, वो Sc/St से है, जो इस मामले को लीपापोती कर रहा था,
वो अब सवालों से दूर भाग रहा है??
#ChhapraNews
बिहार के सारण जिले में पासवान समुदाय के 5 सदस्यों द्वारा राजपूत लड़की के बलात्कार और हत्या के बाद, अब बिहार में फिर से विवेक पासवान ने अपने दोस्त सुधांशु शर्मा को मटन पार्टी में बुलाया, उसे नशीली दवा दी, भागने से रोकने के लिए उसका पैर काट दिया और फिर तलवार के एक ही वार से उसका सिर धड़ से अलग कर दिया।
कोई मामला दर्ज नहीं किया गया क्योंकि पीड़िता उच्च जाति की थी और हत्यारा दलित था।
आरएसएस-भाजपा ने एससी/एसटी अधिनियम, यूजीसी अधिनियम और आगामी ओबीसी अधिनियम के माध्यम से तथाकथित "वंचित, शोषित और दलितों" को अतिरिक्त संरक्षण देकर 12 वर्षों में यह परिणाम हासिल किया है।
आज @ajeetbharti ने सच कहा, जिसे कहने की हिम्मत सिर्फ बहादुरों में होती है। उन्होंने मोहन भगवत और उस विचारधारा की कड़ी आलोचना की, जो दावा करती है कि जातियों ने 5000-2000 वर्षों तक उत्पीड़न किया है।
अजीत पूछते हैं: किस पाठ्यपुस्तक में यह लिखा है कि दलितों पर 2000 से 5000 वर्षों तक अत्याचार किए गए थे?
बिहार में एक लड़की को घसीटकर बलात्कार किया गया और उसकी हत्या कर दी गई, सुधांशु शर्मा की हत्या उसके दोस्त विवेक पासवान ने की - यही झूठा नैरेटिव भगवत वोटों के लिए फैला रहे हैं।
@RSSorg@BJP4India
सारण पुलिस शांति और कानून व्यवस्था बनाने का काम तुम्हारा है।
और ये काम तुमने किया होता तो एक नाबालिग राजपूत लड़की का बलात्कार कर उसकी नृशंस हत्या करने वाले “महादलित” पुरुष को तुम रोमियो नहीं बना रहे होते।
लड़के को प्रेमी, लड़की को प्रेमिका बता दिया क्यूंकि आरोपी कह रहा है? झूठे बयान प्रेस रिलीज़ में छाप रहे हो?
तुम्हारे अफ़सर लड़की को ही दोषी और चरित्रहीन ठहराने पर तुले हैं। पिछले डेढ़ दिन में तीन प्रेस रिलीज़ निकल चुके हो। एक में दिनांक भी ग़लत लिखा था। ये तुम्हारी दुरुस्त जाँच है?
सोशल मीडिया हैंडल का नहीं, अपने अफ़सरों की जाँच करवाओ और कार्यवाही करो।
और तुम्हें दोषसिद्धि करने में नहीं दोषी को बचाने में रुचि है।
This is how you have already botched up the Prosecution case. You have character-assassinated the MINOR girl on social media and lied about statements from “eye-witnesses” and you will do a “nishpaksh” investigation?
You have already rigged the case of the prosecution to save your own face.
Shame!
आज पूरे देश में ब्राह्मण समाज की स्थिति बेहद चिंताजनक हो गई है। ब्राह्मणों की लगातार हो रही हत्याएँ यह सवाल खड़ा करती हैं कि क्या इस देश में ब्राह्मणों के जीवन की कोई कीमत नहीं रह गई है?
प्रतीक पटेल आरोपियों की जाति नहीं बता रहे क्यूंकि इस अपराध में 3 आरोपी प्रतीक पटेल के ओबीसी समाज से हैं !
यूजीसी का विरोध इसलिए था इसमें ओबीसी को क्यूं शोषित बताया गया जबकि इसी मामले को देख लीजिए ओबीसी समाज कैसे दलितों का उत्पीड़न कर रहा है ।
सारण की राजपूत बेटी के साथ हुई दरिंदगी ने पूरे समाज को झकझोर कर रख दिया है।
अब एक ही मांग है दरिंदों का एनकाउंटर किया जाए, ताकि समाज में एक कड़ा संदेश जाए कि बेटियों के साथ दरिंदगी करने वालों को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा।
अब पूरे समाज की एक ही आवाज है
सारण की बेटी को न्याय दो, दरिंदों का एनकाउंटर करो।
#JusticeForSaranKiBeti
#सारण_की_बेटी_को_न्याय
#दरिंदों_का_एनकाउंटर
@HDFC_Bank
Dear Bank please don't disturb me
Everyday 3 times call received regarding credit card service I don't want your credit card please Stop your advertisement
सवर्णों की बहन बेटियों से शाब्दिक बलात्कर तो सोशल मीडिया पर रोज किया जा ही रहा है अब इन जाति-अपराधियों के हाथ हमारी बेटियों की अस्मत तक पहुँच जा रहे हैं न तो सरकार हमारे लिए संवेदनशील है न ही राजनैतिक दल यदि हम अपनी बेटियों को भी नहीं बचा सकते तो हमारे पर भी थू है।
राजपूत लड़की से हुए घिनौने अपराध को देखिए और समझिये:👇
वो जो अपराधी है कितने जाहिल होंगे?
उससे भी जाहिल वो है जो इस पर लिपापोती कर रहे हैं।
उससे ज्यादा जाहिल है जो लड़की का ही चरित्रहनन कर रहे हैं।
उससे जाहिल वो है जो कठोर कार्यवाही की मांग नही कर रहे।
उससे जाहिल वो है जो इस घटना पर लिख रहे उन्हें ही ज्ञान दे रहे हैं।
आखिर सामान्यवर्ग के लड़कियों पर होने वाले अपराधियो को कैसे सुनियोजित तरीके से बचाने का प्रयास किया जा रहा हैं।
न्याय मिले - यथाशीघ्र मिलें।।
अन्यथा यमराज के न्याय से तो बचोगे नहीं।
ये उस मृतक बच्ची की मां हैं। शक्ल सूरत और पहनावा देखकर आसानी से अनुमान लगाया जा सकता हैं कि इनके पास ले देके बस एक ठाकुर/राजपूत सरनेम ही था। लड़की इनकी लकड़ी बिना करती थी ताकि घर का चूल्हा जल सके। ये वो लोग हैं जो आर्थिक सम्पन्न हो चुके अपनी ही बिरादरी के लोगों द्वारा अनदेखा हुए होंगे हजारों बार। लेकिन सरकार और सरकारी विभाग आप को ठाकुर सरनेम लगा होने से हर उस सरकारी अनुदान से वंचित कर देती हैं जिसके आप वाजिब हकदार हो। दीन दयाल का अंत्योदय ऐसे ही हाशिये पर पड़े लोगों के लिए था न ? इनके पास बस एक जाति का प्रिविलेज था। लेकिन आप कमजोर हो तो आप को जाति का प्रिविलेज भी नहीं बचा पाएगा। आप किसी से उम्मीद मत रखो कि कोई आप के लिए खड़ा होगा। अगर एक पानी पर रहने वाले इंसान हो तो अपना स्वाभिमान बचा के रखना और इसका उपयोग पोलिंग बूथ पर करना चुनाव वाले दिन। उसी दिन मैं असली न्याय मानूंगा जब ये बेहूदे लोग सत्ता से बाहर होंगे।
"सारण SSP विनीत कुमार ने मीडिया में आकर कहा की लड़की कुएं में कूद कर मर गई, एक गिरफ्तारी हुई है, पोस्टमार्टम रिपोर्ट नहीं आई है अभी, हमलोग जांच कर रहे हैं।"
यही रवैया है बिहार में पुलिस का हर जगह। दुष्कर्म जैसे अपराध के बाद पुलिस अपराधी को पकड़ने के बजाय मामले को दबाने में लग जाती है। NEET छात्रा मामले में भी यही हुआ था, पहले सुसाइड बताया गया था। बाद में जब लोगों ने लड़ा तो फिर मामला सामने आया। सारण मामले में भी यही हो रहा है। पुलिस मामले को दबाने में लगी है, भटकाने में लगी है। जबकि लड़की की मां, परिवारवाले मीडिया में स्पष्टता से कह रही है की सामूहिक दुष्कर्म किया है 5 लड़कों ने और कुएं में फेंका है। फिर पुलिस कैसे इन आरोपों को सिरे से खारिज कर रही है और कह रही है की कुएं में कूदने से नाबालिग की मौत हुई है ? जब कुएं में कूदने से मौत हुई है तो गिरफ्तारी किस वजह से की गई है ?
विगत 21 वर्षों के कुशासन में नीतीश सरकार का रवैया रहा है अपराध को छुपाने का, दबाने का, अपराधियों को बचाने का, उन्हें प्रश्रय देने का। दुष्कर्म जैसे जघन्य मामले सामने आने के बाद नीतीश सरकार के कुशासन में कानून व्यवस्था की स्थिति सामने आ जाती है। इसलिए किसी भी तरह हरेक केस को दबा देना इनका एकमात्र लक्ष्य होता है।
एक ऐसा अस्पताल बनाया जाए जहाँ सबसे कम अंक वाले दलित डॉक्टर ही नियुक्त हों, और इलाज सिर्फ MLA, MP, PM, CM व उनके परिवारों का हो।
इससे पता चल जाएगा कि “मेरिट” सच में मायने रखती है या केवल एक मिथक है।
ख़ासकर उस अस्पताल में राहुल गांधी का इलाज हो।
कॉमेंट में जरूर बताना मित्रों