मेरी "SC Certificate holder" बहन ने क्या खूब कहा। 🔥🔥
Caste-based Reservation का असली नुकसान तब समझ आएगा, जब आप स्कूल जाकर कहें कि मेरे बच्चे को वही SC का 0 नंबर वाला शिक्षक पढ़ाए। तब आपको भी सबसे अच्छा शिक्षक ही चाहिए होगा। 🙏🙏
अगर ऐसा नहीं है, तो एक बार स्कूल में सेक्शन A, B, C की जगह ऐसा करके देख लीजिए—
• एक सेक्शन सामान्य वर्ग (General) का
• एक SC का
• एक OBC का
और हर सेक्शन को उसी वर्ग का शिक्षक पढ़ाए, उसी वर्ग के बच्चे पढ़ें।
फिर अंतर अपने-आप साफ़ दिखाई दे जाएगा। 🙏🙏
@NITIAayog@PMOIndia@MLJ_GoI
#EndReservation
#educationreform#reservationreform राष्ट्र के लिए.
एजुकेशन रिफॉर्म और रिजर्वेशन रिफॉर्म राष्ट्र के भविष्य से जुड़े विषय हैं। मैं सभी राष्ट्रहित में सोचने वाले नागरिकों से अनुरोध करता हूँ कि वे इस विषय पर खुली और रचनात्मक चर्चा का समर्थन करें। यह आंदोलन किसी जाति या समुदाय के विरोध में नहीं, बल्कि शिक्षा व्यवस्था में सुधार की मांग के लिए है।
मेरा मानना है कि यदि गरीब, वंचित और शोषित वर्गों को कक्षा 1 से लेकर कक्षा 12 तक गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, बेहतर विद्यालय, आवश्यक संसाधन और आर्थिक सहयोग उपलब्ध कराया जाए, तो उन्हें अपने सपनों को पूरा करने के लिए अधिक अवसर प्राप्त होंगे। हमें ऐसी व्यवस्था बनानी चाहिए, जहाँ प्रत्येक बच्चे को समान प्रारंभिक अवसर मिलें और वह अपनी क्षमता के आधार पर आगे बढ़ सके।
आज भारत को स्वास्थ्य, विज्ञान और अनुसंधान जैसे क्षेत्रों में विश्व के अग्रणी देशों की श्रेणी में लाने के लिए शिक्षा में व्यापक सुधारों की आवश्यकता है। एक मजबूत और समावेशी शिक्षा प्रणाली ही देश की वास्तविक शक्ति बन सकती है। हमें इस बात पर गंभीरता से विचार करना होगा कि आने वाली पीढ़ियों को कैसे बेहतर अवसर और उच्च गुणवत्ता वाली शिक्षा प्रदान की जाए।
यदि हम भारत को इन क्षेत्रों में नंबर वन बनाना चाहते हैं, तो शिक्षा सुधारों पर राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा और ठोस कदम उठाना आवश्यक है। आप सभी से अनुरोध है कि इस विषय पर अपनी आवाज़ उठाएँ, सकारात्मक संवाद को आगे बढ़ाएँ और इसे सभी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर साझा करें।
चूँकि मेरे दिए गए समाधान न तो जनवरी में माने गए, न फ़रवरी में (नीचे कमेंट में), और आज पुनः हम उसी मोड़ पर हैं जहाँ भाँग खाने वाले सलाहकारों और पे-रोल पर पलने वाले चापलूस 'कीप काम एंड ट्रस्ट मोदी' का जाप कर रहे हैं, मैं फिर भी पतितों की तरह कुछ समाधान बिंदु लिख रहा हूँ।
यह मैं इसलिए नहीं करता कि कोई इसे पढ़ कर अपनी अंतरात्मा जगा लेगा या सरकार मेरी बात मान लेगी, ये मैं केवल डॉक्यूमेंटेशन के लिए लिखता हूँ कि मैं केवल समस्या बताने वालों में से नहीं था, बल्कि मैं समाधान भी दे रहा था।
1. PM को सामने आ कर विद्यार्थियों, उनके परिजनों से सीधे बात करनी चाहिए। वहाँ स्वीकारिए कि यह समस्या है और सरकार उसे अभी तक केवल आंशिक रूप से सही कर पायी है, वृहद समाधान में समय लगेगा, और आप तत्परता से उस पर कार्य कर रहे हैं। क्या कर रहे हैं, उसकी एक झलक भी दिखाएँ/बताएँ।
2. अब धर्मेंद्र प्रधान को हटाना उचित नहीं लगता क्योंकि यदि अभी ऐसा होता है तो 'जो सबसे लंबा अनशन करेगा, उसके हिसाब से मंत्री हटाए जाएँगे' की एक परिपाटी बनेगी। वो हटे, पर अभी तो बिल्कुल नहीं। बात यह नहीं है कि कॉकरोच की डिमांड क्या है, बात यह है कि 28 करोड़ लोगों के द्वारा चुनी सरकार को अराजकतावादियों के हिसाब से मंत्री नहीं बदलना चाहिए। समर्थकों के कहने पर नहीं हटाया तो इन पर तो बिल्कुल नहीं।
3. चाहे NEET हो, SSC हो या अन्य परीक्षा, इसे ऑब्जेक्टिव तक ही सीमित ना रख कर इसका एक-दो चरण ऐसा हो कि केवल MCQ ही उनका भविष्य तय ना करे। बोर्ड तक उसकी सतत समझ की क्षमता के साथ साक्षात्कार आदि को भी डाला जाए या IIT की तरह उसे भी बड़ा बनाया जाए। यदि यह संभव ना हो तो आप IIT या UPSC से सीखें कि उनकी परीक्षा के प्रश्न लीक क्यों नहीं होते।
4. हर कोचिंग संस्थान, विद्यालयों और महाविद्यालयों में विद्यार्थियों के मानसिक स्वास्थ्य का ध्यान रखने के लिए मनोवैज्ञानिक परामर्शदाता की नियुक्ति अनिवार्य की जाए ताकि हर 40 मिनट में एक विद्यार्थी आत्महत्या ना करते रहें।
5. हर विभाग का परीक्षा कैलेंडर (हर चरण का दिन पूर्व निर्धारित) हर वर्ष निकले और परीक्षा केंद्र छात्रों की सहजता के हिसाब से हो ना कि रैंडम। अभी ऐसी स्थिति है कि सेंटर अनावश्यक रूप से 4-500 किलोमीटर दूर तक दे दिए जाते हैं। इसका कोई तर्क नहीं होता।
6. पेपर लीक से जुड़ी फर्म ही नहीं, उनसे जुड़े व्यक्ति और उनके परिजन तक ब्लैकलिस्टेड होने चाहिए कि ये लोग इसी व्यवसाय में पुनः कहीं से भी नहीं आ सकते। यदि कोई सरकारी व्यक्ति पैसा खा कर ऐसा कुछ भी करता है, उन्हें कोई टेंडर आदि दे देता है तो उस पर देशद्रोह का केस चले और न्यूनतम 20 वर्ष का दंड हो।
7. ऐसे अपराध से जो जुड़े हों, उन्हें शिक्षा मंत्रालय का अपना ट्रिब्यूनल हैंडल करे और ऐसी सुनवाई 'इन कैमरा' होने के स्थान पर 'ऑन कैमरा' सार्वजनिक रूप से हो। इसे एक तय समयसीमा में निपटाने की बाध्यता हो। यदि यह सार्वजनिक नहीं होता तो फिर से हर चीज मैनेज हो जाएगी और इसका कोई महत्व नहीं रहेगा।
8. इस नौटंकी आंदोलन में जो भी हैं, एक-एक को चिह्नित कर, उनका उदाहरण बनाया जाए। हाँ, कुछ वास्तविक विद्यार्थी भी होंगे, तो उन्हें काउंसलिंग के साथ छोड़ दिया जाए, परंतु अराजक तत्वों को, यदि वो किसी पार्टी से हैं, 18 वर्ष से ऊपर के हैं, तो उन्हें जेल में डाला जाए, उन्हें जीवन में कोई नौकरी ना मिले यह सुनिश्चित किया जाए और यह हर हिंसक आंदोलनकारी को बताया जाए कि प्रदर्शन का अधिकार है, आगजनी और हिंसा का नहीं।
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और भी कुछ सुझाव होंगे, परंतु अभी इतना ही। सरकार ऐसा कुछ नहीं करेगी पर 'दिल के ख़ुश रखने को 'ग़ालिब' ये ख़याल अच्छा है' के लिए मैं यह लिख रहा हूँ।
हमारी कैब ने एक थार वाले को ओवरटेक कर लिया। और उसने ऐसा हो जाने दिया। लाल बत्ती पर वह एकदम ही स्लो हो गया और दो कौड़ी के सभ्य ड्राइवरों की तरह गाड़ी चलाता रहा।
@anandmahindra जी, ऐसे लोगों को आप थार क्यों बेचते हो जो पूरे ब्रांड का नाम मिट्टी में मिला रहे हैं? कम से कम कैब को चेज कर के एक अच्छे थार उपभोक्ता की तरह धक्का तो मारना चाहिए था। ये क्या बात हुई कि वो इतना पीछे रह गया कि मिरर में नहीं दिख रहा!
लानत है!
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खेल मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि वो एशिया कप में पाकिस्तान के साथ खेलेंगे क्योंकि ये ‘इंटरनेशनल/मल्टीलेटरल इवेंट’ है। @mansukhmandviya चुल्लू भर पानी में डूब क्यों नहीं मरते?
@narendramodi जी, ऐसी निर्लज्जता की आशा आपकी सरकार से नहीं थी। @BCCI तो बिकी हुई दोगली संस्था है, पर आपसे आशा है कि पहलगाम के हिन्दुओं का नाम लेने से पहले और ऑपरेशन सिंदूर के नाम पर ‘खून-पानी’ वाले संवाद बोलने से पहले एक बार खाँसी अवश्य कीजिएगा।