हमारे महान पूर्वजों के 500 वर्षों का इतिहास आखिर कहाँ गायब हो गया है?
712 ईस्वी से 1192 ईस्वी के बीच के 480 वर्षों के कालखंड में हुए बप्पा रावल, रावल खुमान और नागभट जैसे महान योद्धाओं के योगदान को इतिहास की पाठ्यपुस्तकों में उचित स्थान क्यों नहीं मिला है?
🌍 दुनिया के कई देशों में अराजकता, हिंसा और आगजनी के दृश्य… 🔥
वहीं भारत में 🇮🇳 माँ दुर्गा की आराधना, गरबा की धूम और उत्सव का उल्लास! 💃🪔🚩
यही है शांति, संस्कृति और संस्कारों की शक्ति! 🙏
अपनी सभ्यता, संस्कृति और सामाजिक सौहार्द पर गर्व कीजिए।
#Garba#SanatanDharma
🔥 इतिहास के पन्ने पलटिए
सवालों की कड़ियाँ जोड़िए
कहीं संयोग हैं, कहीं गंभीर आरोप!
लेकिन सच क्या है? जवाब तो देना पड़ेगा! 🇮🇳
📌 1991: राजीव गांधी की हत्या के बाद लोकसभा चुनाव स्थगित हुए। कांग्रेस को सहानुभूति का लाभ मिलने की चर्चा हुई और पी. वी. नरसिंह राव के नेतृत्व में सरकार बनी।
📌 राजीव गांधी फाउंडेशन: सोनिया गांधी की अध्यक्षता वाले इस संस्थान की गतिविधियों और विदेशी संस्थाओं से कथित संबंधों को लेकर समय-समय पर सवाल उठे। सवाल उठाना गलत नहीं, लेकिन जवाब तथ्यों के साथ मिलना चाहिए।
📌 कंधार कांड, 1999: IC-814 के अपहरण के बाद तीन आतंकवादियों की रिहाई हुई। उनमें मसूद अजहर भी था, जिसने बाद में जैश-ए-मोहम्मद की स्थापना की। आज भी यह घटना भारत की सुरक्षा व्यवस्था और आतंकवाद से निपटने की चुनौतियों की याद दिलाती है।
📌 संसद पर हमला, 2001: देश के लोकतंत्र के मंदिर पर आतंकवादी हमला हुआ। ऐसे मामलों में राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप से आगे बढ़कर राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े हर तथ्य की गंभीरता से पड़ताल होनी चाहिए।
📌 UPA सरकार और POTA: आतंकवाद विरोधी कानून को समाप्त करने के फैसले पर बहस हुई। सवाल यह है कि उस समय सरकार की सुरक्षा नीति कितनी प्रभावी थी और उसके पक्ष-विपक्ष में क्या तर्क थे?
📌 विदेशी फंडिंग और NGO: यदि किसी संगठन को विदेशी धन मिलता है, तो उसके स्रोत, खर्च और गतिविधियों की पारदर्शी जाँच होनी चाहिए। देश की एकता और अखंडता से जुड़े मामलों में किसी को भी सवालों से ऊपर नहीं होना चाहिए।
📌 आज की राजनीति: जब अलगाववाद, राष्ट्रीय सुरक्षा और विरोध प्रदर्शनों को लेकर विवाद उठते हैं, तो सवाल पूछना नागरिकों का अधिकार है। लेकिन किसी व्यक्ति या संगठन पर गंभीर आरोप लगाने के लिए प्रमाण भी उतने ही जरूरी हैं।
🔥 और अब ज़रा व्यंग्य समझिए!
आम आदमी अपने बैंक खाते में आए छोटे-से लेन-देन का हिसाब देने में परेशान हो जाता है, लेकिन राजनीति की दुनिया में बड़े-बड़े आरोप वर्षों तक बहस का विषय बने रहते हैं!
जनता पूछती है—फंडिंग कहाँ से आई? किस उद्देश्य से आई? किस काम में खर्च हुई? और यदि कोई गड़बड़ी नहीं है, तो पारदर्शी जवाब देने में परेशानी कैसी?
लोकतंत्र कोई निजी कंपनी नहीं, देश की जनता की अमानत है! यहाँ सत्ता पक्ष हो या विपक्ष, NGO हो या राजनीतिक संगठन—सवाल सब से पूछे जाने चाहिए और जवाब तथ्यों के साथ मिलने चाहिए।
याद रखिए, हर संयोग साजिश नहीं होता और हर आरोप सच नहीं होता। लेकिन गंभीर सवालों को केवल राजनीतिक विरोध कहकर खारिज कर देना भी जवाबदेही नहीं है।
🇮🇳 न अंधसमर्थन, न अंधविरोध—सच सामने आए, प्रमाण सामने आएँ और देशहित सर्वोपरि रहे!
इस पोस्ट को साझा कीजिए, ताकि राजनीतिक बहस अफवाहों पर नहीं, तथ्यों और जवाबदेही पर हो।
जय हिंद! भारत माता की जय! 🚩
Happiness Index Rank
फ्रांस = 35
इटली = 38
भारत = 116
मॉल और शोरूम की लूट में रैंक
फ्रांस = 1 (वीडियो 1)
इटली =2 (वीडियो 2)
भारत = दिल्ली पुलिस 😀
जब भी ये अराजक तत्व दोबारा दिल्ली जलाने का प्रयास करें,आपको एक मंत्र जाप करना है।
"दिल्ली पुलिस लट्ठ बजाओ, हम तुम्हारे साथ हैं।"
फ्रांस:भयानक दृश्य!
जब वामपंथियों को ज्यादा छूट दे दी जाती है
तो ऐसा परिणाम होता है।
कारें जल रही हैं
लूटपाट-तोड़फोड़ चल रही है।
यदि CJP के दोनों प्रोटेस्ट में वांगचुक या किसी अन्य की मृत्यु हो जाती
या फिर पुलिस वाले सहनशीलता न दिखा पाते तो
पूरे भारत में भी ये ही हो रहा होता।
भाग्यनगर (इस्लामी नाम हैदराबाद) में हुआ हिन्दफोबिया का अक्षम्य दुस्साहस..
माँ दुर्गा के मंदिर के पास हो रहे भंडारे के प्रसाद में हिजाब वाली खातून ने फेंक दिया मछली धुला पानी, छत से नीचे आईं हड्डियां और खाल भी।
बिलकुल वैसे ही जैसे त्रेता में ऋषियों के यज्ञ में राक्षस फेंकते थे।
🚨 Army को हथियार छोड़कर सरकार के खिलाफ प्रदर्शन में शामिल होने की सलाह — Rathee!
📍 Central Park, Delhi में प्रदर्शन करेंगे — Dipkee!
🔥 “India में Regime Change करना है” — Prashant Bhushan!
और फिर भी कहते हैं कि भारत में Democracy नहीं है! 🤦♂️
जब ऐसे बयान देने के बावजूद इन पर अब तक NSA या UAPA के तहत कोई केस नहीं हुआ, तो सवाल उठता है—भारत में Regime Change का सपना आखिर कितना हकीकत के करीब है? 🇮🇳
सोशल मीडिया पर अनेक भ्रमित करने वाले नरेटिव चलाये जा रहे हैं।
सनातनियों! इस भ्रमजाल कारण अपना मुख्य लक्ष्य ना भूलें।
याद रहे अभी मात्र रामलला के जन्मस्थान को ही मुक्त करवा पाए हो।
बहुत लम्बी सूची शेष है।
इसलिए जातियों में बंटकर अपनी शक्ति को क्षीण ना होने दें।
बिहार से अब्दुल भी आया धरना देने पर अपने आप ही ड्रामे का सच सामने आ गया।
सोचने वाली बात है फिर ये ड्रामा हो क्यों रहा था?
इसका उत्तर सिंगर @MaryMillben के पोस्ट से मिलता है क्यूंकि कोई भारतीय बोलेगा तो किसी को विश्वास नहीं होगा।
तो अमरीकी गायका ने क्या लिखा वो ही सर्च कर लो।