ये 19 जून की ख़बर है। चढ़ावा चोरी को लेकर योगी आदित्यनाथ का बयान है।
"15 दिन रुकिए, दूध का दूघ, पानी का पानी होगा।"
योगी आदित्यनाथ,
चंपत राय, अनिल मिश्रा सबके सब मौज में हैं। किसी पर जांच की खरोंच तक नहीं आई है।
हो गया दूध का दूध, पानी का पानी?
रोज सुबह आपकी मीटिंग में शिरकत करने वाले आपके प्रिय IAS विशाल सिंह पर खुद को व्यापारी दिखाकर भदोही में करोड़ों की ज़मीनें खरीदने के सबूत हैं,
कर लिया दूध का दूध और पानी का पानी?
यूपी की विधानसभा और विधानपरिषद में नेताओं और अधिकारियों के लड़के बच्चों वाली भर्ती की सीबीआई जांच रुकवाने के लिए आपकी सरकार सुप्रीम कोर्ट क्यों दौड़ी थी,
दूध का दूध और पानी का पानी करने के लिए?
IAS अभिषेक प्रकाश से जुड़े मामले में कर लिया दूध का दूध और पानी का पानी?
करप्शन चारों तरफ इस कदर बजबजा रहा है,
कि दूध का कतरा कतरा भी पानी हुआ जा रहा है!!
“उस मासूम की क्या गलती थी?”
सत्य निकेतन की त्रासदी में अपने बेटे, अर्पित जाज, को खोने वाला परिवार डबडबाई आंखों से यही सवाल पूछ रहा है।
अगर अच्छे और सुरक्षित हॉस्टल होते, तो उन्हें अपने बच्चे को ऐसी खतरनाक जगह में रखने के लिए मजबूर न होना पड़ता। और अगर सुरक्षा मानकों का सच में पालन होता, तो शायद यह त्रासदी होती ही नहीं - एक ऐसी त्रासदी, जिसकी कल्पना उन बच्चों और उनके माता-पिता ने सपने में भी नहीं की होगी।
सिस्टम की गैर-जिम्मेदारी और भ्रष्टाचार ने सपनों से भरी कई जिंदगियां छीन लीं और उम्मीदों से भरे कई परिवारों को उजाड़ दिया।
अर्पित का परिवार भी पूरे देश की तरह जवाबदेही मांग रहा है। वे चाहते हैं कि छात्रों की जिंदगी की जिम्मेदारी तय हो, ताकि फिर किसी माता-पिता को अपने बच्चे को इस तरह खोने का दर्द न सहना पड़े।
सिस्टम से मेरा सीधा सवाल है: नए और सुरक्षित हॉस्टल क्यों नहीं बनाए जा रहे? छात्रों को असुरक्षित PG में रहने के लिए मजबूर क्यों होना पड़ रहा है? सत्य निकेतन हादसे की जांच कहां तक पहुंची?
देश पर एक system का कब्ज़ा है - परत दर परत।
कौन है ये सिस्टम?
RSS और "हम दो, हमारे दो" की अगुवाई में गिनती के लोगों ने मिल कर भारत की हर संस्था पर अपना नियंत्रण कर लिया है।
सरकार हो, व्यापार हो, शिक्षा हो, स्वास्थ्य हो, खेल हो, मीडिया हो, न्यायपालिका हो, चुनाव आयोग हो या bureaucracy - इस सिस्टम में हुनर नहीं, पैसा और पहुंच मायने रखता है।
इस क़ब्ज़े के खिलाफ, भ्रष्टाचार के खिलाफ, अन्याय के खिलाफ छात्रों की आवाज़ ही सिस्टम के लिए सबसे बड़ी चुनौती है।
इसीलिए system को students से खतरा है - क्योंकि वो सवाल पूछते हैं, जवाबदेही मांगते हैं।
इसी डर से सिस्टम छात्र नहीं, अंधभक्त चाहता है - छात्रों को प्रताड़ित करता है, अंधभक्त को बढ़ावा देता है, ताकि कोई सवाल न उठे और मनमानी चलती रहे।
#ChhatronKiGoonj
"सरकार के पास दिया जलाने के लिए पैसा है - हमारे हॉस्टल के लिए क्यों नहीं?"
यह सवाल कल इंदौर में एक छात्रा ने मुझसे पूछा।
गाँव से पढ़ने शहर आई। हॉस्टल है नहीं, तो PG में रहना पड़ता है। सिर्फ़ सुरक्षित रहने में लाखों ख़र्च हो जाते हैं। हर महीने किराए की चिंता, और बेघर होने का डर - इसी में पढ़ाई करनी पड़ती है।
कई लड़कियाँ इसी वजह से पढ़ाई छोड़ देती हैं। सिर्फ़ इसलिए कि रहने की जगह नहीं है।
और आवास भत्ता? महंगाई के साथ बढ़ता नहीं, ऊपर से भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ जाता है।
@narendramodi जी - उस बच्ची के सवाल का कोई जवाब है आपके पास?
@Benarasiyaa मुझे लगा था साउथ इंडियन है शायद थोड़े वेल्यू होगे ! लेकिन नॉर्थ हो या साउथ पद पर आते ही आका को खुश करने लगते हैं!आम जनता को क्या ही समझेंगे !
बालाघाट में 30 से ज़्यादा आदिवासी बच्चों की बीमारी, कुपोषण और बुनियादी स्वास्थ्य सुविधाओं की कमी के बीच मौत हो चुकी है।
संवेदनहीनता का आलम यह है मासूमों की मौतें होती रहीं, लेकिन कार्रवाई सुस्त रही, सरकार सोती रही।
मुख्यमंत्री जी, दीये जलाने और उत्सव मनाने से फुर्सत मिल गई हो तो ज़रा राज्य की ज़मीनी हालत भी देखिए।
बीमारी, पोषण और साफ पानी की कमी और चरमराती स्वास्थ्य व्यवस्था नन्हें बच्चों की जान ले रही है।
मिलावटी दवाइयां और जहरीली अवैध शराब सैकड़ों परिवारों को तबाह कर रही हैं।
मैं इंदौर आ रहा हूं और लगातार प्रदेश के छात्रों, युवाओं और आम लोगों से feedback ले रहा हूं। सामने आ रही भयावह घटनाएं बता रही हैं कि मध्यप्रदेश की शिक्षा व्यवस्था आज देश भर में सबसे ज़्यादा बर्बाद है।
छात्र, बच्चे, गरीब, दलित, आदिवासी, पिछड़े या महिलाएं - हर वर्ग प्रताड़ित है, कोई खुश नहीं।
मध्य प्रदेश सरकार आज भारत की सबसे भ्रष्ट और सबसे कुशासित सरकार है - यही सच्चाई है।
पहले शिवसेना, फिर NCP और अब तृणमूल कांग्रेस।
हर बार एक ही पैटर्न - BJP और चुनाव आयोग मिलकर एक पार्टी को तोड़ते हैं। फिर उसका चुनाव चिन्ह छीन लिया जाता है।
जब पूरी की पूरी पार्टी चोरी हो सकती है, तो करोड़ों भारतीयों के वोट चोरी होना भी हैरानी की बात नहीं।
वोट चोरी। सरकार चोरी। अब पार्टी चोरी - ये हमारे लोकतांत्रिक पतन के प्रतीक बन गए हैं।
ECI की संवैधानिक ज़िम्मेदारी जनादेश की रक्षा करना है - मगर उल्टा वो उन ताकतों की मदद कर रहा है, जो जनता के फैसले को ही पलट देते हैं।
यह लड़ाई सिर्फ़ ममता बनर्जी जी की नहीं है। यह हर राजनीतिक दल, हर मतदाता की लड़ाई है जो स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव चाहता है।
मोदी सरकार ने चुपचाप UPI पर फ़ीस लगाने का रास्ता खोल दिया है।
अब ₹2,000 से ऊपर के merchant UPI लेन-देन पर MDR लगाया जा सकता है। इन ट्रांजैक्शंस की संख्या भले ही सिर्फ़ 5% हो, लेकिन UPI के कुल transaction value का करीब 65% इन्हीं में है।
सरकार कहती है कि ग्राहक से कोई फ़ीस नहीं ली जाएगी। लेकिन दुकानदार पर लगने वाली फ़ीस आखिर आएगी कहां से? कीमतों में जुड़कर ग्राहक की जेब से।
अमेरिकी payment कंपनियां लंबे समय से भारत की zero-MDR नीति का विरोध करती रही हैं। अब मोदी सरकार ने ठीक उसी दिशा में नीति बदलने का रास्ता खोल दिया है।
US Trade Deal की तरह ही, Compromised PM मोदी एक बार फिर अमेरिकी दबाव के सामने surrender कर रहे हैं।
India's education system is failing the very generation it was meant to lift.
Paper leaks. Crushing fees. Decaying infrastructure. Millions of young Indians work honestly, and the system still lets them down.
Fixing it begins with listening to those who experience its failures every day.
Students, parents, teachers, tell me: why have you lost hope in the education system?
Share your experiences, evidence and ideas at the link. Together, we will bring hope back.
https://t.co/LJKkkNMrGM
#ChhatronKiGoonj
एकदम खाली सड़कें!
लुटियंस जोन दिल्ली में ऐसा लग रहा है जैसे कर्फ्यू लगा हो।
कोई वाहन नहीं।
पैदल को भी जगह-जगह रोक रहे हैं।
ब्रिक्स सम्मेलन में शामिल होने जो राष्ट्राध्यक्ष आ रहे हैं खाली सड़कें देखकर क्या सोच रहे होंगे?
सुरक्षा बहुत जरूरी है।
अच्छी बात है।
लेकिन सड़कों को पूरी तरह खाली कर देना क्या कोई अच्छा असर डालता है?
@shakeelNBT Log jo jaam or lambe rout se Jane ko majbur ha unka to haal bura ha, or jo garib india gate k pass kaam karte ha ya metro par auto eriksha chalte ha vah kaam band karke bethe ha
पंजाब के लोगों, और खासकर दलितों को, AAP सरकार द्वारा सत्ता के दुरुपयोग को लेकर सतर्क हो जाना चाहिए।
गुलज़ार सिंह जी जो वाल्मीकि समुदाय से थे, उनपर उनके आखिरी दिनों में जो बीती है वो खुद उनके परिवार की, उनकी मां की, उनकी पत्नी की और उनके भाई की ज़ुबानी सुनिए।
जिंदगी में तो प्रताड़ना दी ही, मृत्यु में भी गुलज़ार सिंह जी का अपमान कर रहे हैं। शोकाकुल परिजन ही कह रहे हैं कि उनसे उनके पारंपरिक अंतिम संस्कार का हक तक छीन लिया गया।
मैं फिर कह रहा हूं - मुख्यमंत्री तत्काल वित्त मंत्री का इस्तीफा लें, FIR में उनका नाम दर्ज हो और पूरे मामले की स्वतंत्र, निष्पक्ष और समयबद्ध जांच हो। इससे कम कुछ भी न्याय नहीं, खानापूर्ति है।
मेरे प्यारे छात्रों, युवाओं और भारत के Gen Z,
आपके साथ सारा देश देख रहा है कि आज एक टूटी हुई शिक्षा व्यवस्था ने आपकी उम्मीदों की लौ को बुझा कर आपके भविष्य को अंधेरे में धकेल दिया है।
‘छात्रों की गूंज’ के माध्यम से मैं अलग-अलग शहरों में आपसे मिलकर आपकी चुनौतियां समझ रहा हूं। इसी मुहिम के साथ 19 सितंबर को मैं फिर आपके बीच, इंदौर में रहूंगा।
मगर इस सिस्टम को बदलने के लिए पूरे देश के हर छात्र की आवाज़, उनका दर्द और उनकी राय सुनी जानी ज़रूरी है।
नीचे दिए लिंक पर जाकर बताइए - आपको अपने सपने पूरे करने से क्या रोक रहा है? आप वीडियो बनाकर भी अपनी बात हम तक पहुंचा सकते हैं।
आपकी समस्याएं। आपके सुझाव। हम मिलकर उम्मीद फिर से लौटाएंगे।
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#ChhatronKiGoonj
भारत की सबसे भ्रष्ट सरकार वाले राज्य मध्यप्रदेश में शासन नाम की कोई चीज़ बची ही नहीं।
जहरीली शराब ने प्रदेश के सागर में अनेक लोगों की जान लेकर उन सभी घरों में मातम पहुंचा दिया है। मगर पूरे मध्यप्रदेश को पता है आगे क्या होगा - कुछ गिरफ्तारियां होंगी, कुछ अधिकारी सस्पेंड होंगे, जांच के आदेश होंगे, क्योंकि ये पहली बार नहीं है।
कुछ ही वक्त पहले इंदौर में दूषित पानी पीने से कई लोगों की मौत हुई। पिछले साल जहरीली cough syrup से जाने कितने छोटे बच्चों की जान चली गई।
दवा ज़हरीली। शराब ज़हरीली। पानी ज़हरीला। नए कानून बना दिए जाते हैं, लेकिन उन्हें किसी तहखाने में डाल दिया जाता है - अगले हादसे तक।
20 साल से ज्यादा समय से BJP की सरकार मध्यप्रदेश में है। हादसे की कोई रोकथाम नहीं, उसके बाद नाम की कार्रवाई - कहां है जवाबदेही? आखिर कब तक लोगों की जान की कीमत सिर्फ हादसे के बाद की कार्रवाई होगी?
निष्पक्ष जांच हो, इन मौतों की पूरी सच्चाई सामने आए और सिर्फ छोटे कर्मचारियों पर कार्रवाई नहीं - जिसकी भी लापरवाही या मिलीभगत सामने आए, उसकी जवाबदेही तय हो।