END OF DAY 17 OF #CLIMATEFAST
I'm fine, just a bit tired.
More than a 1000 joined me for the fast. Snowfall in the afternoon. Leaders from Kargil visited & announced fast from Sunday the 24th to 27th March in Kargil city.
Hope you too are joining such gatherings & fasts in your city this Sunday.
#SaveLadakh #SaveHimalayas #SaveGlaciers #6thSchedule
हमारी टीम ने मिलकर यह ज्ञापन तैयार कि��ा है. देश भर के सभी जागरूक नागरिकों से हम यह अपील करते हैं कि आप इस ज्ञापन को अपने संगठन, व्यक्ति या संस्था के नाम से अपने आपने ज़िले में ज़िलाधिकारी को सौंपें. जिससे यह महामहिम तक देश के कोने कोने से पहुँच सके. यह एक शिक्षा क्रां��ि के आग़ाज़ के जैसा हो सकता है. यह भारत की सबसे बड़ी ज़रूरत है कि हम क़लम क़िताब की हिफ़ाज़त में एक बड़े जन-आंदोलन का आग़ाज़ करें. अगर आप सभी सहमत हों तो सोमवार, दिनांक 18 दिसंबर को देश भर में यह ज्ञापन सौंपें और शिक्षा क्रांति जुलूस निकालें, क़लम क़िताब लेकर सड़क को गुलज़ार करें. ये हमारी ज़िम्मेदारी है. ज्ञापन ये है-
प्रति,
महामहिम राष्ट्रपति महोदया
भारत गणराज्य
विषय: उच्च शिक्षा पर ख़तरे औ��� अन्यायपूर्ण भेदभाव के ख़िलाफ़ ज्ञापन
महोदया,
विश्वविद्यालय किसी भी देश और समाज की बुनियाद होते हैं। विश्वविद्यालयों को किसी भी एक विचारधारा, सरकार, जाति, धर्म, भाषा, क्षेत्र का न होकर सभी का होना होता है। विश्वविद्यालय का ‘विश्व’ इन्हें वैश्विक ज्ञान, विज्ञान, अनुसंधान, विमर्श, संवाद का केंद्र बनाता है। भारत के संविधान की प्रस्तावना के मूल न्याय, समता, बंधुता के मूल्यों पर ही उच्च शिक्षा का वजूद होना चाहिए। मगर मौजूदा दौर में उच्च शिक्षा के केंद्र इन विश्वविद्यालयों पर कई तरह के ख़तरे आन पड़े हैं। हम भारत के नागरिक इन ख़तरों की तरफ़ आपका ध्यान आकृष्ट कराते हुए निम्नलिखित माँग करना चाहते हैं-
1.देश भर के विश्वविद्यालयों पर एक विचारधारा को थोपा जा रहा है, जिससे उच्च शिक्षा का स्वायत्त, निष्पक्ष, तटस्थ, समावेशी व संविधान पर आधारित चरित्र नष्ट हो रहा है।
2.विश्वविद्यालयों में प्रोफ़ेसरों की नियुक्ति प्रक्रिया बेहद भेदभावकारी, अपारदर्शी और भ्रष्टाचारी है। जिसके चलते वास्तविक प्रतिभा का हनन हो रहा। कम प्रतिभावान लोगों के हाथों विद्यार्थियों का भविष्य संकट में है। बिहार, यूपी में नियुक्ति प्रक्रिया ज़्यादा पारदर्शी व न्यायप्रिय है। योग्यता को परखने की पात्रता अर्थहीन है। इसलिए नियुक्ति प्रक्रिया तत्काल बदली जाए।
3.केंद्रीय विश्वविद्यालयों के भीतर हर स्तर पर जातिगत, लैंगिक और अन्य कई क़िस्म के शोषण व भेदभाव बदस्तूर जारी हैं, जिसके चलते देश भर के विश्वविद्यालयों से वंचित शोषित जमात के विद्यार्थियों, शोधार्थियों और प्रोफ़ेसरों के साथ अनवरत अन्याय हो रहा है।
4.सरकार व एक विचारधारा विशेष के प्रभाव में पाठ्यक्रम बदले जा ���हे हैं, पीएचडी एडमिशन तक में घोर धांधली की जा रही है, विद्यार्थियों की सीटों व फ़ेलोशिप में कटौती हो रही, फ़ीस बेतहाशा बढ़ाई जा रही है, उच्च शिक्षा का क्रमिक निजीकरण किया जा रहा है।
5.अभी हाल ही में दिल्ली विश्वविद्यालय से तक़रीबन एक हज़ार से ज़्यादा बेहद प्रतिभावान, अनुभवी शिक्षकों को नौकरी से निकाल दिया गया है। जो बेहद आपत्तिजनक है।
6.शिक्षकों को ठेके पर रखकर विश्वगुरु बनने का ख़्वाब देखा जा रहा है, जो बेहद ख़तर���ाक है। छात्र शिक्षक अनुपात के वैश्विक मानक के तहत सभी पदों पर स्थाई नियुक्ति हो।
भारत के सभी नागरिक उक्त तमाम विषयों को लेकर बेहद चिंतित हैं और इसे लेकर आपसे निवेदन करना चाहते हैं कि तत्काल आप कुछ ठोस क़दम उठाएँ और उच्च शिक्षा को बचाएँ। महामहिम सभी केंद्रीय विश्वविद्यालयों की कुलाधिपति भी हैं और भारत की प्रथम नागरिक भी। भारत के हम आम नागरिक आपसे गुज़ारिश करते हैं कि यदि उच्च शिक्षा किसी ���रकार या किसी एक विचारधारा की गिरफ़्त में चली जाएँगी, तो ये पूरे समाज और देश का नुक़सान होगा। हम आपसे गुज़ारिश करते हैं कि आप इस बेहद गंभीर मसले को गंभीरता से लें।
आभार
भारत के नागरिक
यह नियति की क्रूरता ही है कि बाबा साहेब को समय थोड़ा कम मिला, अगर उनको दस-पन्द्रह साल और मिल जाते तो नि:संदेह हमारा देश आज जैसा है उससे बहुत बेहतर होता।
- डॉ. विकास दिव्यकीर्ति #Ambedkar
जब मैं कोलंबिया विश्वविद्यालय गया तो मुझे यह जानकर बहुत अच्छा लगा कि कोलंबिया विश्वविद्यालय आज भी यह मानता है कि डॉ आंबेडकर उनके आज तक के सबसे शानदार विद्यार्थियों में से एक थे।
- डॉ विकास दिव्यकीर्ति #Ambedkar
बाबा साहब सन् 1900 में आज ही के दिन यानी 7 नवंबर को पहली बार सातारा के स्कू��� में गए थे, जहां शिक्षकों का व्यवहार उनके प्रति अच्छा नहीं था। इसलिए बाबा साहब ने देश का नियम ही बदल दिया।
आज विद्यार्थी दिवस है।
Breaking News: ये भारत के इतिहास का सबसे बड़ा नौकरी घोटाला है। एससी की 8%, एसटी की 4% और ओबीसी की 11% सीटें कौन बेईमान खा रहे हैं?
@narendramodi जवाब दें। कौन हैं वे शैतान जो संवैधानिक आरक्षण से खिलवाड़ कर रहे हैं। जेल में डालो उन #आरक्षण_चोर को।
(आँकड़े राज्य सभा में केंद्र सरकार द्वारा 23 मार्च 2023 को दिए गए उत्तर से)
कश्मीर में तैनात पंजाब के रहने वाले अमृतपाल सिंह अग्निवीर के तौर पर सेना में भर्ती हुए, 10 अक्टूबर को गोली लगने से वे शहीद हो गए थे!
सबसे दुखद यह है कि देश के लिए शहीद होने वाले वीर अमृतपाल जी को सैन्य सम्मान के साथ अंतिम विदाई भी नहीं दी गई!
उनका पार्थिव शरीर एक आर्मी हवलदार और दो जवान लेकर आए , इसके अलावा आर्मी यूनिट ना कोई अफसर आया हद तो यह है कि उनके पार्थिव शरीर को आर्मी वाहन के बजाए प्राइवेट एंबुलेंस से लाया गया।
देश के लिए अपना सर्वोच्च बलिदान देने वाले वीर शहीदों का अपमान, देश का अपमान है।शहीदों का अपमान किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नही किया जा सकता है।
केंद्र में बैठी अहंकारी , असंवेदनशील मोदी सरकार को इसका जवाब देना होगा।
प्रेस कांफ्रेंस का कमरा पत्रकारों से खचाखच भरा हुआ था. राहुल जी से जातिगत जनगणना पर एक सवाल पूछा गया- जवाब में उन्होंने पूछा
- आपमें से कितने दलित हैं?
एक हाथ नहीं उठा
- आपमें से कितने आदिवासी हैं?
एक हाथ नहीं उठा
- आपमें से ���ितने लोग OBC हैं?
एक हाथ नहीं उठा
उनका जवाब साफ़ था - यही कारण है कि जाति जनगणना की आवश्यकता है, सच्चाई जानने के लिए
@RahulGandhi
Where is Dr Ambedkar - Biden
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G20 सम्मेलन में आये विदेशी राष्ट्रध्यक्षों को @narendramodi जी द्वारा #राजघाट गांधीजी की समाधि स्थल ले जाया गया तो उन्होंने अनायास ही पूछ लिया (Where is Dr Ambedkar) डॉअंबेडकर कहां है?
बाबासाहब डॉ अंबेडकर जी के नाम पर वोट मांगने वाले @narendramodi के पास कोई जवाब नहीं था।
“भाजपा को संविधान से छेड़छाड़ का मौका विपक्ष ने अपने गठबंधन का नाम इंडिया रख���र दिया है”
बीएसपी प्रमुख बहन मायावती का बयान पढ़ें। बहन जी कभी हल्की राजनीति नहीं करतीं। ये एक परिपक्व राजनेता का वक्तव्य है।
जम्मू कश्मीर में हमारे वीर जवान शहीद।
मणिपुर जल रहा है।
चीन हमारे देश में घुस रहा है।
छात्र,नौजवान,कर्मचारी,व्यापारी,खिलाड़ी त्रस्त।
गुजरात से 5 साल में 40,000 महिलाएं गायब।
लेकिन प्रधानमंत्री और गृहमंत्री चुनाव प्र��ार में मस्त और देश अस्त-व्यस्त।
मीडिया द्वारा निर्मित इन लोगों ने लोकतंत्र, सद्भाव, चुनावी राजनीति और पद की गरिमा को एकदम तार-तार कर दिया है।
जानते है!
जब " टाई���ेनिक " समुन्द्र मे डूब रहा था, तो उसके आस पास तीन ऐसे जहाज़ मौजूद थे, जो टाईटेनिक के मुसाफिरों को बचा सकते थे!
सबसे करीब जो जहाज़ मौजूद था उसका नाम "SAMSON " था और वो हादसे के वक्त टाईटेनिक से सिर्फ 7 मील की दुरी पर था !
सैमसन के कैप्टन ने न सिर्फ टाईटेनिक की ओर से फायर किए गए सफेद शोले (जोकि इन्तेहाई खतरे की हालत मे हवा मे फायर किया जाता है) देखे थे, बल्कि टाईटेनिक के मुसाफिरो के चिल्लाने के आवाज़ को भी सुना भी था, लेकिन सैमसन के लोग गैर कानूनी तौर पर बहुत कीमती समुन्द्री जीव का शिकार कर रहे थे और नही चाहते थे कि पकडे जाए, लिहाजा वो टाईटेनिक की हालात को देखते हुए भी मदद न करके, अपनी जहाज़ को दूसरे तरफ़ मोड़ कर चले गए!
"ये जहाज़ हम मे से उनलोगों की तरह है, जो अपनी गुनाहों भरी जिन्दगी मे इतने मग़न ह��� जाते हैं कि उनके अंदर से इन्सानियत का एहसास खत्म हो जाता है और फिर वो सारी जिन्दगी अपने गुनाहो को छिपाते गुजार देते हैं...."
दूसरा जहाज़ जो करीब मौजूद था, उसका नाम "CALIFORNIAN " था जो हादसे के वक्त, टाईटेनिक से 14 मील दूर था. उस जहाज़ के कैप्टन ने भी टाईटेनिक की तरफ़ से मदद की पुकार को सुना और बाहर निकल कर सफेद शोले अपनी आखो से देखा, लेकिन क्योकि टाईटेनिक उस वक्त बर्फ़ की चट्टानो से घिरा हुआ था, उसे उन चट्ट��नों के चक्कर काट कर जाना पड़ता, इसलिए वो कैप्टन मदद को ना जा कर, अपने बिस्तर मे चला गया और सुबह होने का इन्तेजार करने लगा!
सुबह को जब वो टाईटेनिक के लोकेशन पर पहुँचा तो टाईटेनिक को समुन्द्र की तह में पहुँचे हुए, 4 घंटे गुज़र चुके थे और टाईटेनिक के कैप्टन Adword Smith समेत 1569 मुसाफिर डूब चुके थे......!
"ये जहाज़ हमलोगो मे से उनकी तरह है जो किसी की मदद करने अपनी सहूलत और असानी देखते है और अगर हालात सही ना हो तो ��िसी की मदद करना अपना फ़र्ज़ भूल जाते है!"
तीसरा जहाज़ "CARPHATHIYA" था जो टाईटेनिक से 68 मील दूर था. उस जहाज़ के कैप्टन ने रेडियो पर टाईटेनिक के मुसाफारो की चीख पूकार सुनी, जबकि उसका जहाज़ दूसरी तरफ़ जा रहा था. उसने फौरन अपने जहाज़ का रुख मोड़ा और बर्फ़ की चट्टानों और खतरनाक़ मौसम की परवाह किए बेगैर, मदद के लिए रवाना हो गया. अगरचे वो दूर होने की वजह से टाईटेनिक के डूबने के दो घंटे बाद लोकेशन पर पहुँच सका, लेकिन यही वो जहाज़ था जिसने लाईफ ��ोट्स की मदद से टाईटेनिक के बाकी 710 मुसाफिरो को जिन्दा बचाया था और उसे हिफाज़त के साथ न्यूयार्क पहुँचा दिया था!
उस जहाज़ के कैप्टन "आर्थो रोसट्रन" को ब्रिटेन के तारीख के चंद बहादुर कैप्टनों में शूमार किया जाता है और उनको कई समाजिक और सरकारी आवार्ड से भी नवाजा गया था...!
याद रखिए!---
हमारी जिन्दगी मे हमेशा मुश्किलात रहती हैं, चैलेंज रहते हैं, लेकिन जो इस मुश्किलात और चैलेंज का सामना करते हुए भी इन���सानियत की भलाई के लिए कुछ कर जाए, उन्ह�� ही इन्सान और इन्सानियत याद रखती है!
दुआ करें कि खुदा किसी की मदद की तौफीक दे, क्योंकि ये इन्सानियत की सबसे ऊँची और आला तरीन दर्ज़ा है!
(William Thomas की यादगार पोस्ट
(पोस्ट साभार - सोशल मीडिया)
एक विधवा बहू ने अपनी सास को बताया कि, वह तीन माह के गर्भ से है परिवार में हंगामा मच गया, समाज में भूचाल आ गया, लोगों ने पंचायत जुटाई और उस बहू से बच्चे के बाप का नाम जानना चाहा, भरी पंचायत में बहु ने बताया कि, तीन माह पूर्व मैं प्रयागराज, त्रिवेणी संगम स्नान करने गई थी, स्नान के समय मैंने गंगा का आहवान करते हुए तीन बार गंगा जल पी लिया था हो सकता है, उसी समय किसी ऋषि महात्मा, महापुरुष का गंगा में वीर्य अस्खलन हो गया और वो आहवान के साथ मैं पी गयी, उसी से मैं गर्भवती हो गई।
सरपंच जी ने कहा, यह असंभव है, ऐसा कभी हो नहीं ��कता कि, किसी के वीर्य पी लेने से कोई गर्भवती हो जाय, उस महिला ने सरपंच को जवाब दिया और कहा, हमारे धर्म ग्रंथों में यही बात तो दिखाई गई है कि, विभँडक ऋषि के वीर्य स्खलन हो जाने से श्रृंगी ऋषि पैदा हुए,
हनुमान जी का पसीना मछली ने पी लिया, वह गर्भवती हुई और मकरध्वज पैदा हुए, सूर्य के आशीर्वाद से कुंती गर्भवती हो गई और कर्ण पैदा हुए, मछली के पेट से मत्स्यगंधा (सत्यवती) पैदा हुई, खीर खाने से राजा दशरथ के त��नों रानियां गर्भवती हई और चार पुत्र पैदा हो गये, जमीन के अंदर गड़े हुए घडे से सीता पैदा हुई! ये सारी बातें संभव है, किन्तु मेरी बात असंभव है!
वैसे मैं बताना चाहती हूं कि मैं गर्भवती नहीं हूँ मैंने यह नाटक इसलिए किया था कि, इस पाखंडी समाज की आंख खुल जाय, आप लोग ऐसे धर्म पुस्तकों को आज के समाज को जरूरत नहीं है जिससे कि पाखंड, अविश्वास एवं अज्ञानता परोसा जाए, जिस��े ऐसी कहानियाँ लिखी गयी है आप लोग चाहें तो मेरा मेडिकल परीक्षण कर सकते हैं!
हमारे समाज को वैज्ञानिक एवं तार्किक सोच की जरूरत है, अंधविश्वास, पाखंडी एवं अंधभक्ति से मुक्त हो।🙏
इतिहास की गति भी न्यारी है। समाज ने कभी गाँव के बाहर रहने को मजबूर किया था। अब हमारे महानायक की विशाल बारह मंज़िला मूर्ति हैदराबाद शहर के बीचों बीच है। वहीं जो लोग समाज के शिखर थे, उनके नायक राम��नुजाचार्य को हैदराबाद शहर के बाहर जगह जगह मिली। लगभग 30 किलोमीटर दूर।
उस समय की कामना है जब सब साथ साथ रहेंगे। भवतु सब्ब मंगलम।
नीरव मोदी घोटाला- 14,000 Cr
ललित मोदी घोटाला- 425 Cr
मेहुल चोकसी घोटाला- 13,500 Cr
जिन लोगों ने देश का पैसा लूटा, भाजपा उनके बचाव में क्यों उतरी है? जांच से क्यों भाग रही है?
जो लोग ��स पर सवाल उठा रहे हैं उन पर मुकदमे लादे जाते हैं।
क्या भाजपा भ्रष्टाचारियों का समर्थन करती है?