ममता सरकार के दौरान जो घुसपैठिये बांग्लादेश से भारत आ कर आईडी कार्ड बनवा रहे थे |
वहीं घुसपैठिये आज भाजपा सरकार में अपने फिंगरप्रिंटर दे कर कभी ना वापस आने वाली प्रक्रिया करवा रहे हैं |
मतलब देश का हिंदू जिन घुसपैठियों को कैंसर समझता था वह सरकार के लिए वह बुखार भी नहीं है | 😡
“अरे होने दो नुकसान… हम कहीं और से थोड़े ही लाए थे.. इसी देश से कमाया और यहीं दे जाएंगे”
पीएम की सोना न ख़रीदने की अपील पर सोना कारोबारी Manohar Jewellers के मालिक सुधीर सिंघल की भावुक प्रतिक्रिया
Dear @Infosys_GSTN
GST Portal is not Working Properly Since Today Morning, Users are Facing Following Issue
➡️Difficulty in Login on Portal
➡️Captcha is not Loading
➡️Again and Again Logout From Portal
➡️Problem in saving GSTR-3B
➡️Payment and Proceed to file are working only after 6-7 attempts
Kindly solve this problems as soon as possible.
@cbic_india As users are unable to file GSTR-3B , Kindly Extend the due date. Why taxpayers suffers the inability of tech company. @nsitharamanoffc@nsitharaman@FinMinIndia
लड़कियों को देखते ही कपड़े उतार देता है मुबीन सैफी,
बरेली के सीबीगंज में अनस नाम से चलाता है जिम,
इसी पार्क में दिखाई गई थी गांधी से भी अश्लीलता,
फ़िलहाल राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा में है जिम जिहाद..
#Bareilly#GymJihad#Crime@bareillypolice
श्रीराम नवमी महामहोत्सव की मंगल बधाई!!
आज श्री रामनवमी के पावन पर्व पर प्रभु के पंचामृत अभिषेक तथा तत्पश्चात जन्म आरती एवं सूर्यतिलक का सीधा प्रसारण श्री राम जन्मभूमि तीर्थक्षेत्र के सभी सोशल मीडिया प्लेटफार्म पर किया जाएगा।
Heartfelt greetings on the auspicious festival of Shri Ram Navami!
On this sacred occasion of Shri Ram Navami, the Panchamrit Abhishek of Prabhu will be performed, followed by the Janm Aarti and Surya Tilak. The entire ceremony will be webcast LIVE on all social media platforms of Shri Ram Janmabhoomi Teerth Kshetra.
परेश रावल अभिनीत फिल्म “डियर फादर” का छोटा सा ट्रेलर, इस बेहतरीन अभिनेता ने सरल भाषा में नई पीढ़ी को कितना बड़ा संदेश दिया है...वही देखिये,
परेश रावल की एक्टिंग भी देखने लायक है...
@SirPareshRawal 🙏🏻
✌🏻☺️🌹😊
शरीर से मांस का एक-एक कतरा गल चुका था। पसलियां बाहर आ गई थीं। हिलने-डुलने तक की ताकत नहीं बची थी।
जब अंग्रेजों ने देखा कि यह 25 साल का लड़का टूट नहीं रहा, तो उन्होंने जबरदस्ती नाक में नली ठूंसकर दूध पिलाने की कोशिश की। वह नली खाने की नली की जगह फेफड़ों में चली गई।
दूध फेफड़ों में भर गया। वो तड़पते रहे, खून की उल्टियां करते रहे, लेकिन अनशन नहीं तोड़ा।
13 सितंबर 1929 को लाहौर जेल में एक क्रांतिकारी ने अपने प्राण त्याग दिए। 63 दिन... जी हाँ, 63 दिन तक बिना अन्न का एक दाना खाए।
इतिहास के पन्नों में अक्सर हम भगत सिंह की फांसी की बात करते हैं, लेकिन उस साथी को भूल जाते हैं जिसने भगत सिंह की बाहों में दम तोड़ा था।
आज हम बात कर रहे हैं 'यतींद्र नाथ दास' की, जिन्हें दुनिया 'जतिन दा' के नाम से जानती थी।
पेशे से वो बम बनाने में माहिर थे, लेकिन उनका हथियार बना उनका अपना शरीर।
वो चाहते तो माफी मांग सकते थे, खाना खा सकते थे। लेकिन मांग सिर्फ एक थी - "भारतीय राजनीतिक कैदियों के साथ जानवरों जैसा सलूक बंद करो।"
अंग्रेजों को लगा कि भूख इसे तोड़ देगी। लेकिन उन्हें नहीं पता था कि यह शरीर मिट्टी का नहीं, फौलाद का बना है।
जब जतिन दा की हालत बिगड़ने लगी, तो अंग्रेजों ने क्रूरता की सारी हदें पार कर दीं। जेल के डॉक्टर और सिपाहियों ने उन्हें दबोच लिया। नाक से नली डाली। दर्द से वो चीखते रहे, लेकिन उनका संकल्प नहीं डिगा।
उनकी शहादत की खबर जब बाहर आई, तो पूरा देश रो पड़ा था।
कहा जाता है कि जब उनका शव लाहौर से कलकत्ता ले जाया जा रहा था, तो हर स्टेशन पर हजारों लोग फूल लेकर खड़े थे। कलकत्ता में उनकी अंतिम यात्रा में 6 लाख से ज्यादा लोग शामिल हुए।
सुभाष चंद्र बोस ने खुद उनके पार्थिव शरीर को कंधा दिया था।
लेकिन आज? आज कितने लोग उस 63 दिन की तपस्या को याद करते हैं?
मरते वक्त जतिन दा ने कहा था, "मैं कोई साधु नहीं हूँ, मैं बस एक साधारण इंसान हूँ जो अपने देश की गरिमा के लिए मरना चाहता है।"
आजादी चरखे से आई या बिना खड्ग-ढाल के, यह बहस का विषय हो सकता है। लेकिन यह सच है कि आजादी की नींव में जतिन दा जैसे नौजवानों की गल चुकी हड्डियां गड़ी हैं।
हमें यह आजादी खैरात में नहीं मिली, इसके लिए किसी ने अपनी जवानी के 63 दिन भूखे रहकर कुर्बान किए हैं।
हर भारतीय का कर्तव्य है कि वो जाने कि जिस हवा में वो सांस ले रहा है, उसकी कीमत क्या थी।
इस जानकारी को साझा करें ताकि आने वाली पीढ़ियां जान सकें कि असली 'हीरो' कौन थे।
यह पोस्ट केवल उन भूले-बिसरे नायकों को नमन करने के लिए है।