आज जंतर मंतर पर सच्ची आवाज गूंज रही है— आरक्षण हटाओ!
जाति के नाम पर दशकों से मेरिट की हत्या हो रही है। योग्य युवा पीछे धकेले जा रहे हैं, जबकि क्रीमी लेयर वाले आरक्षण का मजा लूट रहे हैं। गरीबी किसी जाति की बपौती नहीं है। फिर भी सिस्टम जाति को जिंदा रखने पर तुला हुआ है।
आर्थिक आधार पर आरक्षण दो — असली गरीब को मदद मिले, चाहे वह किसी भी जाति का हो। बाकी सब सिर्फ वोट बैंक का खेल है।
और जो मीडिया? जो CJP पर घंटों चिल्लाती थी, आज चुप है। डर है “जातिवादी” कहलाने का। सच्चाई से भागना मीडिया का नया धर्म बन गया है वह केवल नक्सली मानसिकता वाले लोगों जो देश में प्रोटेस्ट के आड़ में अराजकता फैलाने का काम करते है उनका न्यूज कवर करते है।
अब और बर्दाश्त नहीं। मेरिट को कुचलने वाली व्यवस्था बदलनी ही पड़ेगी।
#ReservationHatao #JantarMantar #MeritFirst #AarakshanHatao
@arakshan_hatao1
#rollbackUGC
#removescstact
Important tweet -
जंतर मंतर पर आंदोलन कर रहे अपने भाइयों को भोजन की व्यवस्था हम लोगों को करवाना होगा,
इसके लिए कल सुबह 8:00 बजे स्कैनर डाला जाएगा,
आप लोग से जो सहयोग हो सके अपने भाईयों के लिए आगे जरूर आएं ,
ट्वीट करके आगे पहुंचाएं!
#21augustreservationhataoandolan #jantarmantar #raisefund
आज के स्कूलों की कहानी - सभी को सरकारी कॉलेज चाहिए लेकिन स्कूल नहीं।
सरकारी स्कूल की बातें करेंगे पर न ही कभी भी सरकारी स्कूल में पढ़े है और ना ही अपने बच्चों को पढ़ाएंगे पर आने वाले generation और युवा वर्ग को भड़काएंगे, RSS व स्वर्ण पे आरोप लगाएंगे केवल अपने राजनीति लाभ के लिए जैसे ये,
CJP वाले अब स्कूलों में घुस-घुसकर “स्कूल ठीक करो” का ढोंग कर रहे हैं।
लेकिन असलियत ये है कि ये लोग सुधार नहीं, अराजकता फैला रहे हैं।
सोचो जरा…
बिना अनुमति स्कूल परिसर में घुसना, बच्चों के सामने हंगामा करना, टीचरों से बहसबाजी, फोटो-वीडियो बनाना, प्रशासन को धमकाना…
ये स्कूल सुधार है या जानबूझकर शिक्षा व्यवस्था को अस्थिर करना?
कानून साफ कहता है:
स्कूल से जानकारी कौन ले सकता है?
अभिभावक अपने बच्चे की रिपोर्ट मांग सकते हैं।
SMC के सदस्य स्कूल की निगरानी कर सकते हैं।
कोई भी नागरिक RTI फाइल करके सरकारी स्कूल की हर जानकारी ले सकता है।
RTI क्या है?
सूचना का अधिकार अधिनियम 2005।
ये जनता का सबसे ताकतवर हथियार है।
आप ₹10 में आवेदन करके स्कूल की छत, शौचालय, पानी, टीचर अटेंडेंस, फंड, मिड-डे मील… सबकी लिखित जानकारी 30 दिन में मांग सकते हो।
जवाब नहीं दिया तो अपील कर सकते हो।
ये तरीका कानूनी है, सभ्य है, और असरदार है।
लेकिन CJP वाला तरीका क्या है?
बिना RTI, बिना अनुमति, बिना प्रक्रिया… सीधा स्कूल में घुस जाना और अराजकता मचाना।
ऐसा करने पर कानून क्या कहता है?
बिना अनुमति प्रवेश = आपराधिक अतिक्रमण (BNS धारा 329)
स्कूल को प्रॉपर्टी की कस्टडी की जगह माना जाता है, इसलिए हाउस ट्रेसपास भी बन सकता है
क्लास बाधित करना, नारेबाजी, स्टाफ को धमकाना = अतिरिक्त धाराएं
बच्चों की बिना अनुमति फोटो-वीडियो = POCSO, Juvenile Justice Act और IT Act के दायरे में आ सकता है
प्रिंसिपल तुरंत पुलिस और DEO को बुला सकते हैं
FIR, गिरफ्तारी, जुर्माना और जेल तक हो सकती है
राजस्थान जैसे राज्यों में सरकार ने साफ आदेश जारी कर दिया है – बिना प्रिंसिपल की अनुमति के कोई बाहरी व्यक्ति स्कूल में घुस नहीं सकता। उल्लंघन पर सख्त कार्रवाई होगी।
अब सवाल ये है…
अगर वाकई स्कूल सुधारना है तो RTI फाइल क्यों नहीं करते?
क्यों सीधे बच्चों के बीच घुसकर शोर मचाते हो?
क्यों पढ़ाई का माहौल बिगाड़ते हो?
स्कूल बच्चों के भविष्य बनाने की जगह है, किसी की राजनीतिक रैली या वायरल कंटेंट का स्टूडियो नहीं।
सुधार चाहिए तो सिस्टम के अंदर रहकर करो।
कानून का सम्मान करो।
बच्चों की सुरक्षा और पढ़ाई को प्राथमिकता दो।
वरना याद रखना –
अराजकता फैलाने वालों पर कानून चुप नहीं बैठता।
#SchoolThikKaro_लेकिन_कानूनी_तरीके_से
#RTI_ही_सही_रास्ता_है
#बिना_अनुमति_घुसना_अपराध_है
#CJP_अराजकताबंदकरो
#बच्चोंकीपढ़ाई_बचाओ
@EduMinOfIndia@RSSorg@BajrangDalOrg
जतिवाद खत्म करना है तो पहले आरक्षण हटाओ।
तथ्य 1:
संविधान में राजनीतिक आरक्षण (लोकसभा/विधानसभा सीटें) मूल रूप से सिर्फ 10 साल के लिए था (अनुच्छेद 334)।
1950 से लेकर अब तक हर 10 साल में बढ़ाया जाता रहा है। आखिरी बार 2030 तक बढ़ाया गया।
75+ साल बाद भी “अस्थायी” व्यवस्था स्थायी बन चुकी है।
तथ्य 2:
केंद्र में मौजूदा आरक्षण:
SC – 15%
ST – 7.5%
OBC – 27%
EWS – 10%
कुल ≈ 59.5%
सुप्रीम कोर्ट के इंद्रा साहनी फैसले (1992) में 50% की सीमा तय की गई थी। कई राज्यों में यह 60-75% तक पहुंच चुका है।
तथ्य 3:
रोहिणी आयोग की रिपोर्ट के अनुसार OBC आरक्षण के 97% लाभ सिर्फ 25% जातियों को मिलते हैं।
बाकी सैकड़ों जातियां लगभग शून्य लाभ पाती हैं।
SC/ST में क्रीमी लेयर का सिद्धांत अभी भी लागू नहीं है (जबकि OBC में है)। यानी अमीर परिवार भी बार-बार फायदा उठाते हैं।
तथ्य 4:
आरक्षण लेने के लिए जाति प्रमाणपत्र अनिवार्य है।
हर फॉर्म, हर एडमिशन, हर नौकरी में जाति लिखवानी पड़ती है।
नतीजा? जाति की पहचान और मजबूत होती जा रही है, कमजोर नहीं हो रही।
जब तक सरकारी नौकरी, शिक्षा और राजनीति में जाति का प्रमाणपत्र सबसे बड़ा दस्तावेज रहेगा,
तब तक समाज जाति के आधार पर बंटा रहेगा।
असली समानता = मेधा + आर्थिक आधार
न कि जन्म प्रमाणपत्र।
जतिवाद मिटाना है?
पहले जाति आधारित आरक्षण मिटाओ।
#आरक्षणहटाओ #मेरिटसेभारत #तथ्यबात
@Bharat_Yatra_@arakshan_hatao1
UGC हटाना क्यों जरूरी है?
भारत की उच्च शिक्षा अब भी पुरानी व्यवस्था के जाल में फंसी हुई है। UGC सालों से काम कर रहा है, लेकिन आज यह सुधार की सबसे बड़ी बाधा बन चुका है।
बहुत ज्यादा नियम-कानून
हर छोटी बात के लिए अनुमति, फॉर्म और इंस्पेक्शन। संस्थान innovate नहीं कर पाते।
Bureaucracy का बोझ
फाइलें घूमती रहती हैं, फैकल्टी और स्टूडेंट्स का सालों का समय बर्बाद होता है।
Autonomy की कमी
यूनिवर्सिटीज खुद फैसला नहीं ले सकतीं। NEP 2020 ने साफ कहा था — “Light but Tight” रेगुलेशन चाहिए।
ओवरलैपिंग सिस्टम
UGC + AICTE + NCTE = भ्रम, देरी और दोहरी-तिहरी पाबंदियां।
पुराना मॉडल
21वीं सदी की जरूरतों (स्किल, रिसर्च, ग्लोबल कॉम्पिटिशन) के हिसाब से UGC का ढांचा तैयार नहीं है।
समाधान क्या है?
NEP 2020 के अनुसार एक आधुनिक, सिंगल और एफिशिएंट रेगुलेटर (HECI/VBSA) लाना। इससे:
ज्यादा स्वायत्तता मिलेगी
तेज और पारदर्शी प्रक्रिया होगी
क्वालिटी सुधरेगी
भारत की हायर एजुकेशन दुनिया से मुकाबला कर पाएगी
पुरानी व्यवस्था बदलनी ही पड़ेगी।
आपकी राय क्या है? UGC रिफॉर्म या पूरी तरह हटा देना चाहिए?
#UGC #EducationReform #NEP2020 #HigherEducation #India
@Bharat_Yatra_@arakshan_hatao1
भारत में चल रहे मुख्य चर्चाओं में एक मुद्दा FCRA का इसपे हमे भी अपना पक्ष रखना चाहिए इसलिए मैं अपने अनुभव को सांझा करता हु, world vission एक अंतर्राष्ट्रीय संस्था है जो लगभग 100 से अधिक देशों में सक्रिय हैं। भारत में कई शहरों व छोटे इलाके में वर्ल्ड विजन शाखाएं चल रही है जो आर्थिक रूप से कमजोर परिवार के बच्चे को राहत देती है, कई स्कूलों में वर्ल्ड विजन में रेजिस्ट्रेशन के नाम से बच्चों को बुलाते है, उन्हें उपहार जरूरत की वस्तु और खाने के चीजे जैसे बिस्कुट,चिप्स आदि देते है परंतु activity के नाम से उसने bibal पढ़ाया जाता है bibal फ्री में उन्हें पढ़ने के लिए देते है bibal से जुड़े टास्क देते है और बच्चों को बताते है bibal में जो लिखा है वही सत्य है। इसका उदाहरण मै खुद हु, मै जहाँ रहता हु वहां एक स्कूल है मै सार्वजनिक नाम नहीं लेना चाहता पर उसमें ये होता था तो बात करते है मै उदाहरण कैसे हु जब मैं छोटा था 9th class में पढ़ता था तब मेरे आस पास के बच्चे उसमें जाते थे उसमें क्या मिलता है बताते थे उनके माता पिता भी तारीफ करते थे तो मैने अपने माता पिता से पूछ कर वहां जाना शुरू किया सिर्फ लालच में क्योंकि उस समय मै भी तो बच्चा ही था और वहां बस आपको 1 घंटे के लिए ही बुलाया जाता था मैने इसे अनुभव किया अब आप मुझे बताए उन्हें इसके लिए फंड कहा से मिलता था स्कूल से हुए income को तो स्कूल के रख रखाव और शिक्षक के ऊपर लग जाता होगा जो बचता होगा वो पर्सनल उसे में आता होगा तो ये एकत्र एक्टिविटी कैसे इसका फंड कहा से आता है इसमें न ही रजिस्ट्रेशन fee लगता है और न ही activity पार्टीफिकेशन fee
इसलिए FCRA bill amendment जरूरी है।
पुरानी FCRA vs नया FCRA बिल 2026 – तुलना और संशोधन क्यों जरूरी है?
पुरानी FCRA (2010 + 2020 संशोधन) में मुख्य खामियाँ:
• Section 15 में संपत्ति के “vesting” का प्रावधान तो था, लेकिन उसकी निगरानी, प्रबंधन और निपटान का कोई पूरा कानूनी ढाँचा नहीं था। कोई Designated Authority अधिसूचित नहीं थी।
• रजिस्ट्रेशन समाप्त (cessation) होने पर स्पष्ट प्रावधान नहीं – रिन्यूअल न कराने पर संपत्ति का क्या होगा, अस्पष्ट।
• निलंबन (suspension) के दौरान संपत्तियों के उपयोग पर अस्पष्टता।
• कई एजेंसियों द्वारा एक साथ जाँच → भ्रम और असंगति।
• दंड में एकरूपता नहीं (अधिकतम 5 साल की सजा)।
• फंड उपयोग की समय-सीमा स्पष्ट नहीं।
• रजिस्ट्रेशन व्यापक श्रेणियों में था → उद्देश्य और भौगोलिक क्षेत्र पर कम नियंत्रण।
परिणाम: विदेशी फंड से बनी संपत्तियों के दुरुपयोग की गुंजाइश, प्रशासनिक अनिश्चितता और राष्ट्रीय हित पर संभावित असर।
📌 नया FCRA Amendment Bill 2026 + Rules 2026 क्या लाता है?
बिंदु, पुरानी व्यवस्था | नया बिल/नियम 2026
संपत्ति प्रबंधन | अधूरा Section 15 | नया Chapter IIIA – Designated Authority (अस्थायी + स्थायी vesting) |
| रजिस्ट्रेशन समाप्त | अस्पष्ट | स्पष्ट cessation (रिन्यूअल न करने/मना करने पर) |
| जाँच | कई एजेंसियाँ स्वतंत्र | राज्य एजेंसियों को केंद्र की पूर्व अनुमति जरूरी |
| दंड | अधिकतम 5 साल | अधिकतम 1 साल (तर्कसंगत) |
| रजिस्ट्रेशन | व्यापक श्रेणी | उद्देश्य + राज्य/UT विशिष्ट (105 अनुमत गतिविधियों की Schedule) |
| Key Functionary | सीमित | व्यापक परिभाषा (ट्रस्टी, डायरेक्टर आदि जिम्मेदार) |
| उपयोग मानक | नहीं | रिन्यूअल के लिए पिछले 2 साल में कम से कम ₹10 लाख उपयोग |
क्यों पास होना आवश्यक है? (सरकार के Statement of Objects & Reasons के अनुसार)
कानूनी खामियाँ बंद करना – विदेशी फंड से बनी संपत्तियों का सही प्रबंधन सुनिश्चित करना, ताकि संगठन बंद होने पर भी वे सार्वजनिक हित में इस्तेमाल हों।
दुरुपयोग रोकना – प्रशासनिक अनिश्चितता और फंड/संपत्ति के गलत इस्तेमाल की गुंजाइश खत्म करना।
पारदर्शिता और जवाबदेही – उद्देश्य-विशिष्ट, भौगोलिक-विशिष्ट रजिस्ट्रेशन + विस्तृत रिपोर्टिंग।
राष्ट्रीय सुरक्षा – विदेशी प्रभाव को नियंत्रित रखना और समन्वित जाँच सुनिश्चित करना।
स्पष्टता – धार्मिक स्थलों का धार्मिक चरित्र बरकरार रखने का प्रावधान + अपील का अधिकार।
निष्कर्ष:
पुरानी FCRA सिर्फ फंड के प्रवाह को नियंत्रित करती थी। नया बिल संपत्तियों तक नियंत्रण लाकर सिस्टम को पूरा और मजबूत बनाता है। वैध संगठनों के लिए यह स्पष्ट नियम लाता है, जबकि दुरुपयोग की संभावनाएँ कम करता है।
#FCRA2026 #Transparency #NationalInterest #ViksitBharat
#स्वतंत्रता_दिवस
🇮🇳 जय अखंड भारत! 🇮🇳
15 अगस्त के पावन अवसर पर एक यात्रा।
प्रिय देशवासियों,
आज जब हम स्वतंत्रता दिवस मना रहे हैं, तो आइए एक पल रुककर उस महान सभ्यता को याद करें जिसका नाम है अखंड भारत– भारतवर्ष। यह कोई आधुनिक कल्पना नहीं, बल्कि हजारों वर्षों से चली आ रही सांस्कृतिक, आध्यात्मिक और भौगोलिक एकता का जीवंत प्रतीक है। विष्णु पुराण का श्लोक आज भी गूंजता है:
“उत्तरं यत्समुद्रस्य हिमाद्रेश्चैव दक्षिणम्।
वर्षं तद् भारतं नाम भारती यत्र संततिः॥”
अर्थात् हिमालय से लेकर समुद्र तक फैला यह भूभाग भारतवर्ष है, जहाँ भारतीयों की संतति निवास करती है। प्राचीन काल में इसे जम्बूद्वीप और आर्यावर्त भी कहा जाता था। इसकी सीमाएँ कभी उत्तर-पश्चिम में हिन्दुकुश, अफगानिस्तान और ईरान तक, पूर्व में
म्यांमार-थाईलैंड-इंडोनेशिया तक, दक्षिण में श्रीलंका और मालदीव तक फैली हुई थीं।
अखंड भारत का इतिहास
इतिहास गवाह है कि इस विशाल भूभाग को राजनीतिक रूप से एक सूत्र में बाँधने वाले महान सम्राट हुए। सबसे पहले चंद्रगुप्त मौर्य (लगभग 321-297 ईसा पूर्व) ने आचार्य चाणक्य के मार्गदर्शन में नंद वंश को पराजित कर मौर्य साम्राज्य की नींव रखी। उन्होंने सेल्यूकस निकेटर को हराकर अफगानिस्तान के बड़े हिस्से को भारत का अंग बनाया। उनके पौत्र सम्राट अशोक के समय साम्राज्य हिन्दुकुश से गोदावरी तक फैला।
इसके बाद गुप्त वंश का स्वर्ण युग आया। समुद्रगुप्त (335-380 ईस्वी) को इतिहासकार “भारत का नेपोलियन” कहते हैं। उन्होंने उत्तर से दक्षिण तक विजय यात्राएँ कीं और अखंड भारत की भावना को मजबूत किया। उनके पुत्र चंद्रगुप्त विक्रमादित्य के शासन में कला, विज्ञान, साहित्य और समृद्धि चरम पर पहुँची। बाद में हर्षवर्धन, राजेंद्र चोल, कृष्णदेवराय जैसे राजाओं ने इस सांस्कृतिक एकता को जीवित रखा।
यह सांस्कृतिक भारत सिर्फ राजनीतिक सीमाओं तक सीमित नहीं था। अंकोरवाट (कंबोडिया), बोरोबुदुर (इंडोनेशिया) और दक्षिण-पूर्व एशिया के हिंदू-बौद्ध साम्राज्य भारतीय संस्कृति की विस्तारित छाया थे।सनातन संस्कृति–अखंड भारत की आत्मा अखंड भारत की असली शक्ति उसकी सनातन संस्कृति में है। वेद, उपनिषद, रामायण, महाभारत, पुराण–ये सिर्फ ग्रंथ नहीं, बल्कि पूरे उपमहाद्वीप की साझा धरोहर हैं। संस्कृत भाषा ज्ञान की कड़ी थी। मंदिर, तीर्थ, कुंभ मेला, चार धाम की यात्रा–ये सब उत्तर से दक्षिण और पूर्व से पश्चिम को एक सूत्र में बाँधते रहे।
आदि शंकराचार्य ने चार मठ स्थापित कर देश को आध्यात्मिक एकता दी। ॐ, स्वस्तिक, शिव लिंग, त्रिशूल, कमल–ये प्रतीक आज भी हर भारतीय के हृदय में बसते हैं। अनेकता में एकता–यही हमारी पहचान है। जाति, भाषा, क्षेत्र अलग होने पर भी सनातन धर्म की धारा सबको जोड़ती रही।
महान सनातन धार्मिक राजा
ये राजा सिर्फ शासक नहीं, धर्म के रक्षक थे:
चंद्रगुप्त मौर्य–चाणक्य नीति से अखंड भारत की नींव।समुद्रगुप्त–अश्वमेध यज्ञ करने वाले पराक्रमी सम्राट, कला और विद्या के संरक्षक।
चंद्रगुप्त विक्रमादित्य–गुप्त काल का स्वर्ण युग, जहाँ नालंदा और तक्षशिला जैसे केंद्र फल-फूल रहे थे।राजा राजेंद्र चोल और राजा राजा चोल–दक्षिण भारत से समुद्र पार संस्कृति का विस्तार, बृहदीश्वर मंदिर जैसे अद्भुत स्मारक।
कृष्णदेवराय–विजयनगर साम्राज्य के रक्षक, हिंदू धर्म और संस्कृत-तेलुगु साहित्य के पोषक।
छत्रपति शिवाजी महाराज–स्वराज्य और सनातन धर्म की रक्षा के प्रतीक, जिन्होंने हिंदवी स्वराज्य की स्थापना की।ये राजा धर्म,न्याय,प्रजा-कल्याण और संस्कृति की रक्षा के लिए लड़े। उन्होंने मंदिर बनवाए, विद्या को बढ़ावा दिया और विदेशी आक्रमणों का मुकाबला किया। भारत की अद्वितीय समृद्धि प्राचीन भारत दुनिया का सबसे समृद्ध देश था। रोमन साम्राज्य तक भारतीय मसाले, रेशम, हीरे-जवाहरात और सूती कपड़े पहुँचते थे। सिल्क रूट और समुद्री मार्गों से व्यापार फलता-फूलता था। गुप्त काल में गणित (शून्य, दशमलव), खगोल, आयुर्वेद और धातुकर्म में अद्वितीय प्रगति हुई। विदेशी यात्री मेगस्थनीज, फाह्यान और ह्वेनसांग भारत की समृद्धि और शांति की प्रशंसा करते नहीं थकते थे।
भारत कभी सोने की चिड़िया कहलाता था। ज्ञान, व्यापार और कृषि की बदौलत यहाँ समृद्धि चरम पर थी।
15 अगस्त का संदेश आज जब हम स्वतंत्रता दिवस मनाते हैं, तो सिर्फ 1947 की आजादी याद न करें। याद करें उस अखंड भारत को, जिसकी सांस्कृतिक एकता हजारों वर्षों से अटूट है। विभाजन भले हुआ, लेकिन सनातन संस्कृति, महान राजाओं की विरासत और समृद्धि का स्वप्न आज भी जीवित है।
आइए, हम अपनी जड़ों को याद रखें, एकता को मजबूत करें, ज्ञान और समृद्धि के मार्ग पर आगे बढ़ें।अखंड भारत कोई नक्शा भर नहीं–यह हमारी आत्मा है।
वंदे मातरम्! जय हिंद जय अखंड भारत!
#स्वतंत्रतादिवस #सनातनधर्म
आज मैं गुरुग्राम के मानसून जिसे हम बरसात का मौसम भी कहते है उस पर बात करते है।
गुरुग्राम में बारिश = सड़कें नदी!
हीरो होंडा चौक, सुभाष चौक, राजीव चौक और कई अन्य जगहों पर हर मानसून वही पुरानी कहानी…
मै अपने पिछले मानसून के अनुभवों पर बात करो तो एक रात मै और मेरे साथ के मेरे दोस्त बहादुर गढ़ से रात 11 बजे निकले उस समय तक द्वारका बहादुर गढ़ लिंक रोड बन गया था पर उद्घाटन न होने के कारण ब्लॉक किया गया था तो हमने दूसरा रास्ता लिया जो नजफगढ़ से होते हुए आता है फिर द्वारका एक्सप्रेस से मिलता है बारिश तेज था हम मध्यम गति से चल रहे थे सड़क पे पानी बहुत लगा था तो हमने फ्लाईओवर से जाना चुना लीला एंबियंस मॉल से होते हुए हम साइबर सिटी के पास जयपुर हाईवे पर थे ट्रैफिक काफी था हम धीरे धीरे राजीव चौक पहुंचे क्योंकि हमें सुभाष चौक से फ्लाईओवर पर जाना था जो भोंडसी जेल रोड पर निकला है राजीव चौक पहुंचने में हमें 2 बज गया वहां पानी ज्यादा लगने से कई suv और truck बंद पड़ गया तो हमने अपने कार को बचाने करने के लिए हीरो होंडा चौक होते हुए सुभाष चौक का प्लान किया पर वहां भी पानी लगा था इस समय तक 4 बजे तक सुबह का हो गया था बारिश अभी भी बंद नहीं हुआ था फिर हमने किसी तरह अपने कार को बैक कर मानेसर से सोहना हाईवे लेने का सोचा हमे मारुति कुंज पहुंचने में सुबह के 5 बज गए इस पूरे ट्रिप में कितना ट्रैफिक होगा और हमारे कार की स्पीड क्या रहा होगा आप सोचिये।
अब जानते है क्यों लगता है पानी? (मुख्य कारण)
शहर गड्ढे जैसी टोपोग्राफी में बसा है, अरावली से भारी रन-ऑफ सीधे बादशाहपुर ड्रेन में आता है
बादशाहपुर ड्रेन ओवरलोड हो जाता है
माइक्रो-ड्रेन्स बंद, सिल्ट-कचरा भरा और पंपिंग क्षमता कम
तेजी से कंक्रीट का जंगल बनने से प्राकृतिक तालाब, नाले और सोखने वाली जगह खत्म
अधूरा ड्रेनेज नेटवर्क + रखरखाव की कमी
इसमें सिर्फ सरकार की गलती नहीं है आम नागरिकों का भी है सड़क पर कचरा फेंकने से वो नालियों में जाता है जिससे नली ब्लॉक हो जाते है और ड्रेनेज सिस्टम काम नहीं करते।
इसका समाधान क्या है?
तत्काल उपाय:
नालों की गहरी सफाई, अतिरिक्त पंप-समपवेल, सैकड़ों नई रोड गलियाँ और रियल-टाइम मॉनिटरिंग।
मध्यम अवधि के प्रोजेक्ट (चल रहे हैं):
₹105 करोड़ का नया Leg-4 ड्रेन (बादशाहपुर पर दबाव कम करने वाला)
हीरो होंडा चौक पर नरसिंगपुर ड्रेन + कनेक्टिविटी सुधार
राजीव चौक पर नई 1.1 किमी स्टॉर्मवॉटर ड्रेन
सुभाष चौक पर 7.5 किमी ड्रेन सफाई + 300+ नई गलियाँ
स्थायी समाधान:
प्राकृतिक नाले-तालाब बहाल करना, रेनवॉटर हार्वेस्टिंग + अंडरग्राउंड स्टोरेज टैंक, अतिक्रमण हटाना, पर्मीएबल सरफेस और ग्रीन कवर बढ़ाना, एजेंसियों में बेहतर समन्वय, नागरिकों में सफाई के प्रति जागरूकता और जरूरत पड़ने पर दंड विधान।
सिर्फ नाले बनाने से नहीं चलेगा — पानी को तेज़ी से निकालने के साथ ज़्यादा से ज़्यादा सोखना और स्टोर करना होगा।
आप भी इन चौकों पर फँस चुके हैं? अनुभव कमेंट में लिखें।
शेयर करें ताकि आवाज़ पहुँचे!
\#GurugramFloods \#HeroHondaChowk \#SubhashChowk \#RajivChowk \#Waterlogging \#FixGurugramDrainage \#GurgaonMonsoon
सिर्फ एक घंटे में लगा पानी।
आज बसई में अवैध पानी कनेक्शनों पर एमसीजी का बड़ा एक्शन देखने को मिला है
नगर निगम गुरुग्राम ने 20 अवैध व्यावसायिक पानी कनेक्शन काटे।
जेई तिलक शर्मा की मौजूदगी में हुई कार्रवाई के दौरान नियमों के विपरीत पाए गए कनेक्शनों को मौके पर ही डिस्कनेक्ट किया गया।
परंतु पानी की सप्लाई से दूषित जल बसई क्षेत्र में पीछे 17 दिनों से आ रहा जो वहां के स्थाई नागरिको के घरों में जा रहा है जल हमारे जीवन में अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका निभाता हैं जल के लिए विश्वविख्यात स्लोगन जल ही जीवन है जग विहित है जल को हम रोजमर्रा के कार्य प्रणाली में व रसोई के खाद्य पदार्थ भोजन और पीने के कार्य में लिया जाता हैं अतः मैं आपसे अनुरोध करता हूं कि आप इस विषय को गंभीरता से ले क्योंकि दूषित जल हमारे स्वास्थ्य के लिए अत्यंत हानिकारक होता है।
धन्यवाद।
जय श्री राम।
@MunCorpGurugram@mcgurgaon
गुरुग्राम नगर निगम (MCG) द्वारा अतिक्रमण के खिलाफ सख्त कार्रवाई
अतिक्रमण मुक्त गुरुग्राम की दिशा में नगर निगम गुरुग्राम का अभियान जोरों पर है!
आज न्यू कॉलोनी, ज्योति पार्क, मदनपुरी सर्कुलर रोड, बादशाहपुर, सीआरपीएफ रोड, सेक्टर-63, सैक्टर 70 एवं सुखराली एन्क्लेव में व्यापक एंटी-एन्क्रोचमेंट ड्राइव चलाया गया।
सड़कें और फुटपाथ अतिक्रमण मुक्त कराए गए। बस स्टैंड क्षेत्र से अवैध यूनिपोल, रेहड़ी-पटरी व अन्य अस्थायी स्ट्रक्चर हटाए गए। मुनादी के जरिए नागरिकों से अतिक्रमण स्वयं हटाने की अपील भी की गई।
मंथ-लॉन्ग अभियान लगातार जारी है। सार्वजनिक स्थानों की सुरक्षा और नागरिकों की सुगम आवाजाही एमसीजी की प्राथमिकता है।
#TeamMCG #AntiEncroachmentDrive #EncroachmentFreeGurugram #NurturingGurugram #Gurugram #MCG #अतिक्रमणमुक्तगुरुग्राम
मैने पिछले कई सप्ताह से कुछ वीडियो देखे है जो जंतर मंतर और झारखंड में चल रहे प्रदर्शन में से एक है। और इन वीडियो में हमेश सवर्ण को अपमानीत करने की कोशिश करते है कुछ कहते है उन्हें अपने स्वर्ण होने पर घिन आती हैं और अपने कुल व अपने वरिष्ठों पर घिन आती हैं और हमारे धर्म व हमारे धार्मिक आस्था को ठेस पहुंचाते है और हमारे भगवान श्री राम जी, भगवान शिव जी, भगवान कृष्ण जी को अपमानीत करने में जुटे रहते है। सीता माता जैसी पवित्र जो नारी शक्ति का स्वरूप है उनका नाम लेकर अनादर करते हैं।
परंतु पिछले कई सप्ताह से अलग अलग राज्य में हुए प्रोटेस्ट से जैसे
जंतर मंतर से झारखंड तक… युवाओं ने जाति की दीवारें तोड़ दीं!
हाल के प्रदर्शनों में SC, ST, OBC और सामान्य वर्ग के छात्र-अभ्यर्थी एक साथ खड़े हुए। पेपर लीक, परीक्षा धांधली और बेरोजगारी के खिलाफ। जाति का नारा नहीं, सिर्फ जवाबदेही और पारदर्शिता की माँग।
है मै यह मानता हु कि बीच में कई वामपंथी देश विरोधी नारे लगाए और कई ऐसे मुख्य चेहरे जो केवल अपने निजी राजनीतिक स्वार्थ को पूर्ण करने में जुटे थे।
परंतु यह साबित करता है कि फर्जी राजनीतिक नैरेटिव “जाति-भेदभाव चरम पर है” सिर्फ वोटबैंक का खेल है। असली मुद्दा सिस्टम की खामियाँ हैं, न कि जन्म।
हमारे ग्रंथ यही कहते हैं:
🔹 निरालंब उपनिषद: “न चर्मणो न रक्तस्य… न जातिरात्मनो जातिर्व्यवहारप्रकल्पिता”
(शरीर और आत्मा की कोई जाति नहीं, जाति सिर्फ कल्पना है)
🔹 ऋग्वेद: समान हृदय, समान मन… सब एक
🔹 यजुर्वेद: ज्ञान ब्राह्मण से शूद्र तक सबके लिए
🔹 उपनिषद: आत्मा = ब्रह्म, सबमें एक परमात्मा
🔹 सत्यनारायण कथा: गरीब ब्राह्मण, लकड़हारा, राजा, वैश्य – सबने व्रत किया, फल पाया। जाति नहीं, सत्य और भक्ति मायने रखती है।
युवा सनातन भावना को जी रहे हैं – एकता, गुण-कर्म और सत्य।
जो जाति का झूठा प्रचार कर रहे हैं, वे वेद-उपनिषद और भगवान सत्यनारायण के खिलाफ हैं।
।।सीता राम।। ॐ नमो नारायण।।ॐ नमः शिवाय।।
#युवाएकता #सनातनसत्य #जातिवादखत्म #JantarMantar #JharkhandProtest
झारखंड में छात्र आंदोलन जारी! रांची के जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में JPSC-JSSC परीक्षाओं में कथित धांधली और अनियमितताओं के खिलाफ हजारों नौकरी अभ्यर्थी पिछले कई दिनों से धरने पर बैठे हैं। मुख्य मांगें:14वीं JPSC सिविल सेवा परीक्षा और JSSC-CGL समेत कई परीक्षाओं को रद्द किया जाए
पूरे मामले की CBI या बाहरी हाईकोर्ट जजों की स्वतंत्र जांच हो
JPSC और JSSC में पारदर्शिता और बड़े पैमाने पर सुधार
प्रदर्शनकारी भूख हड़ताल पर भी हैं। 10 अगस्त को विधानसभा मार्च के दौरान पुलिस ने वाटर कैनन, आंसू गैस और लाठीचार्ज का इस्तेमाल किया। सरकार का दावा है कि 98% मांगें मान ली गई हैं, लेकिन छात्र इसे अधूरा बता रहे हैं और आंदोलन जारी रखने का फैसला किया है।युवाओं का भविष्य और सरकारी नौकरियों की साफ-सुथरी प्रक्रिया का सवाल है। न्याय मिलना चाहिए! #JharkhandProtest #JPSC #JSSC #StudentProtest #Ranchi #CBIInquiry
पोस्ट 1
संसद चलाने में एक दिन का खर्च कितना आता है?
लगभग ₹9 करोड़!
हर मिनट ≈ ₹2.5 लाख
हर घंटा ≈ ₹1.5 करोड़
6 घंटे की बैठक ≈ ₹9 करोड़
यह आंकड़ा 2012 का है, लेकिन आज भी सबसे ज्यादा इस्तेमाल होता है। महंगाई के साथ असल खर्च और ज्यादा हो सकता है।
#संसद #MonsoonSession2026 #TaxpayersMoney
पोस्ट 2:
पैसा कहाँ खर्च होता है?
• सांसदों के वेतन, भत्ते और सुविधाएं
• सचिवालय कर्मचारियों का वेतन
• सुरक्षा (CRPF + दिल्ली पुलिस)
• बिजली, पानी, AC और भवन रखरखाव
• CCTV, IT सिस्टम और संसद टीवी
• भोजन, लॉजिस्टिक्स और प्रशासनिक खर्च
सालाना बजट (2026-27): करीब ₹1,492 करोड़
(लोकसभा ≈ ₹1,009 करोड़ | राज्यसभा ≈ ₹483 करोड़)
#ParliamentCost
पोस्ट 3:
मानसून सत्र 2026 (20 जुलाई – 13 अगस्त)
19 बैठकें निर्धारित थीं।
उत्पादकता:
• लोकसभा: सिर्फ 19%
• राज्यसभा: 39%
विपक्ष के लगातार विरोध (नीट पेपर लीक, छात्रों पर पुलिस कार्रवाई, राम मंदिर चढ़ावा चोरी आदि) के कारण ज्यादातर समय हंगामा और स्थगन में बीता।
12 बिल पास हुए, लेकिन ज्यादातर बिना बहस के।
#MonsoonSession
पोस्ट 4:
व्यर्थ हुआ कितना पैसा?
अनुमान: ₹100 से ₹200 करोड़ के बीच
करीब 7,000+ मिनट का समय बर्बाद।
प्रश्नकाल और शून्यकाल लगभग पूरी तरह ठप रहे।
नोट: वेतन-सुरक्षा-बिजली जैसे खर्च तो वैसे भी लगते हैं। नुकसान “अवसर लागत” का है — बहस, जवाबदेही और कानून-निर्माण का मौका गंवाया गया।
#PublicMoney
पोस्ट 5 (समापन):
दोनों पक्ष एक-दूसरे पर आरोप लगाते रहे।
सवाल ये है — टैक्सपेयर का पैसा और संसद का समय इस तरह बर्बाद होना कितना जायज है?
आप क्या सोचते हैं? कमेंट में बताएं।
(सभी आंकड़े मीडिया रिपोर्ट्स, PRS और संसदीय बयानों पर आधारित अनुमान हैं।)
#संसदभवन #IndianParliament #Accountability
संसद का एक दिन = ₹9 करोड़
एक मिनट = ₹2.5 लाख
मानसून सत्र 2026 में हंगामे के कारण अनुमानित ₹100-200 करोड़ का नुकसान।
टैक्सपेयर का पैसा कहाँ जा रहा है?
मानसून सत्र 2026: लोकसभा 19% उत्पादकता, राज्यसभा 39%।
12 बिल पास, ज्यादातर बिना चर्चा।
प्रश्नकाल लगभग शून्य।
क्या यही लोकतंत्र की कार्यशैली होनी चाहिए?
यह पैसा हम आम नागरिको से टैक्स के रूप में लिया जाता है। क्या यह पैसे का दुरूपयोग नहीं है, अब इसका जिम्मेदार कौन है।
राजनीति करना चाहिए परंतु अपने अहम के कारण अपने प्रभुत्व को स्थापित करने के लिए सामान्य नागरिकों का सहयोग व्यर्थ नहीं करना चाहिए इसलिए मैं विपक्ष से अनुरोध करता हूं कि कार्य प्रणाली में अवरोध उचित नहीं है।
यदि आप इससे सहमत हैं तो वोट करे।
धन्यवाद।
जय हिन्द जय भारत।
जय श्री राम।