विशेष कार्यकारी अधिकारी, Special Executive Officer Government of Maharashtra,
Member Of
INTERNATIONAL PRESS COMMUNITY,
PRESIDENT OF HINDU EKTA SANGH TITWALA
क्या बिहार पुलिस की बंदूक में गोलियां खत्म हो गईं या गाड़ी में पेट्रोल? निर्दोष भरत तिवारी को तो पांच गोलियां मारी थीं। क्या ये बलात्कारी एक गोली के भी काबिल नहीं है? मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी इसका इनकाउंटर कब होगा?
कार्यवाही , कार्यवाही , कार्रवाही , कार्यवाही , कार्यवाही , कार्रवाही सुनकर थक गया हूं ,
ये बताओ जब तुमलोगों ने भरत तिवारी को बेवजह मार दिया तो इन दरिंदो का एनकाउंटर क्यों नहीं किया ??
क्या मुख्यमंत्री जी के जाति के लोग है इसलिए एनकाउंटर के बदले कार्यवाही कर रहे हो ???
मुझे मोदी साहब का एक भाषण याद है उन्होंने उसमें कहा था कि "मेरे दलित भाइयों को कोई कुछ न कहें, गोली मारनी है तो मुझे मारे।" ये बयान अपने आपमें एक ऐसा बयान है कि पूरे विश्व को लगे कि भारत में दलित खतरे में है।
एक प्रधानमंत्री को ऐसा बयान देना अशोभनीय है।
अगर इस बयान को IIT Bombay के परिप्रेक्ष्य में देखा जाये तो प्रोफेसर ने मोदी जी के नाती पोते को नकल करने देना चाहिए था। भाषण के माध्यम से मोदी जी ने यही संदेश दिया है। अब ये हिन्दू समाज पूरी तरह से जातिवाद में बंट चुका है।
छात्र के पिता का कहना है कि उसके बेटे को तीन महीने से जातिगत आधार पर परेशान किया जा रहा था।
मेरा सवाल है कि पूरे कालेज में क्या एक ही दलित छात्र था। भारत के शिक्षा के स्तर को दलितों को मिलने वाली सुविधाओं ने चौपट कर दिया है। अब ये स्थिति नियंत्रण से बाहर हो गई है। कोई भी सरकार आये जाये लेकिन इस विभीषिका से कोई न निपटना चाहेगा और न ये यहीं स्वत: रूकेगी। हर दल इन्हीं के बल पर चुनाव लड़ता है और लड़ता रहेगा। भारत के सर्वनाश की पूरी पटकथा लिखी जा चुकी है।
माननीय @narendramodi जी आपकी सवर्णों को लतियाने वाली इच्छा अब पूर्ण होते दिख भी रही है
छात्र को नकल करते पकडने की सजा एक प्रोफेसर को मिल रही है
शर्मनाक है...
एक प्रोफेसर को SC/ST Act के दबाव में लेकर इस्तीफा लिया जा रहा और छात्र ताली बजा रहे..
IIT बॉम्बे का स्टूडेंट, एग्जाम में ChatGPT से नकल करते पकड़े गया था..छात्र ने बाद में आत्महत्या कर ली थी..छात्र के के माता-पिता ने प्रोफेसर पर आरोप लगाए हैं कि उनके बेटे को परीक्षा में जातिसूचक गालियां देकर आत्महत्या के लिए उकसाया गया।
ये देश किस दिशा में आगे बढ़ रहा है
एक अपील
यूथ फॉर इक्वलिटी 91% आरक्षण वाला केस योगी के विरुद्ध सुप्रीम कोर्ट में भी लड़ने जा रही है
तो जिनके पास भी पैसे हो जरूर इन्हें सपोर्ट करना चाहिए
चुना था JNU साफ करने के लिए
आपने IIT को भी JNU बना दिया
चुना था हिंदुओं को जोड़ने के लिए
आपने ऐसा बांट दिया कि जोड़ना संभव नहीं
चुना था अच्छे दिन दिखाने के लिए
अब हर दिन ही बुरा सपना बनता जा रहा है
अब और कितनी सेवा???
प्रो. केदारे जी ने अठारह सूत्री एजेंडा मान लिया और उस पर sign कर दिया।
आप sign करते समय, उनका चेहरा देखिए, nonchalant (कोई फर्क नहीं पड़ रहा है) मानिए। हावभाव देखकर लग रहा है कि जो मांग रहे हैं, चलो sign करके बात खत्म करो, दे दो भाई।
उन्होंने ऐसा क्यों किया होगा? उसमें बहुत सारी मांगें हैं। कोई Director इस तरह से क्यों कर रहा होगा?
एक तो यह है कि भाई, वो care कर रहे हैं students के बारे में। और thanks to, again नरेंद्र मोदी, 2020 में उन्होंने STEM वाले colleges में Arts, Humanities और Liberal Arts पढ़ाना mandatory बना दिया।
जहाँ पहले केवल Science पढ़ाया जाता था और एकाध Masters या PhD के लिए Arts या Humanities का कुछ-कुछ हुआ करता था, वहाँ अब ये subjects पढ़ाने ही होंगे।
अब Liberal Arts क्या है? जिस हिसाब से Liberal Arts के नाम पर नौटंकी होती है, वो सिर्फ बवासीर है।
IIT प्रोफेसर के लिए फांसी मांगने वाले ये वो नितिन मेश्राम हैं, जिन्होंने ख़ुद एक 4 साल की छोटी बच्ची के बलात्कारी और हत्यारे फ़िरोज़ को ना सिर्फ फांसी से बचाया,, बल्कि उसकी खुशी ज़ाहिर करते हुए कहा था-
"Live your life Firoz"
और बता दें कि SC/ST एक्ट frame करने में इनकी भी भूमिका थी!
यही वह दृश्य है जहाँ योग्यता, @narendramodi के भीड़तंत्र के समक्ष झुक कर बिछ जाने के सामने, कलम निकाल कर अपनी अंतिम यात्रा का आरंभ कर रही है।
डायरेक्टर केदारे साहब शांत हैं, 18 माँगें हों या 180, वो स्वीकार कर लेंगे क्योंकि @PMOIndia से कारण बताओ नोटिस आ जाएगा कि आपसे एक छोटा सा प्रोटेस्ट नहीं सँभलता, जबकि हमने तिलचट्टों के प्रोटेस्ट में पूरे देश को बताया है कि करना क्या है।
भीड़ ही ‘लोकतंत्र’ का ‘लोक’ है, अतः वह जो भी कहे, वह जाँच से पहले ही कर दीजिए। मुझे थूकने की इच्छा हो रही है किसी के मुँह पर!
मोदी सरकार का पक्ष सामने आ गया है। बीड़ी बंडल ने प्रोफेसर को दोषी मान लिया है क्योंकि प्रोफेसर को डीन के पद से हटाया जा चुका है एयर डायरेक्टर ने 18 माँगों पर इस रीढ़हीन सरकार के रवैये को देखते हुए हस्ताक्षर कर दिया है।
गिल्टी या इनोसेंट लिखने से पूर्व ही यदि प्रोफेसर का अपमानित किया जा चुका हो तो फिर 'जाँच हो जाने दो' लिखना विशुद्ध बकलोली और दोहरापन है।
मोदी ने शिक्षा व्यवस्था पर माचिस मार कर छोड़ दिया है।
रोहित वेमुला की मौत पर चंद वोटों के लिए रोने की इस एक्टिंग ने
शिक्षा संस्थानों में होने वाली हर "आत्महत्त्या" का एजेंडा हमेशा के लिए सेट कर दिया था..!!
एक ऐसा ही ब्रो है, हमारे मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी जी का जात भाई रुद्रप्रताप कुशवाहा। उसके जितने वीडियो हैं, सबमे वो ब्राह्मणों को कुछ ना कुछ कहता पाया जाता है।
रुद्रप्रताप जी की वीडियो को म्यूट करके देखेंगे तो लगता है कि किसी का बँधा हुआ पालतू कुत्ता भौंक रहा है सामने वाले खुले कुत्ते पर।
और वैसे भी उनका मुख्य कार्य भौंकना ही है क्योंकि इनके हर ऐसे जातिघृणा के पोस्ट पर बिहार पुलिस को टैग किया जाता है, पर कुशवाहा टाइटल देख कर,
और सम्राट चौधरी की जाति जानते हुए, पुलिस ऐसे व्यवहार करती है कि अरे साले सवर्ण, तुम कौन सा हमारे मुख्यमंत्री जी के वोटबैंक हो बे! क्या हुआ कि ब्राह्मणों पर इतना बोलते थे, वीडियो कुछ दिन से वायरल हो रहा था, कोई आया और उस्तरे से उनकी भवें मूड़ कर भाग गया।
अनट्रेंड था, अभी सीख रहा होगा दाढ़ी बनाना क्योंकि आम तौर पर गाल से नीचे होते हुए गर्दन की ओर जाता है उस्तरा। और बाइक पर बैठे व्यक्ति की दाढ़ी कौन बनाता है! लेकिन रुद्र भाई दहाड़ते हुए सामने आए।
जंतर मंतर पर protest करने गए थे @tehseenp
उनको दिल्ली पुलिस detain करके ले गयी!
और कॉकरोचों को ससम्मान आमंत्रण देने जाती है, पुलिस स्टेशन में घुसकर धमकी देने देती है, उनके कहने पर 2 महीने पहले के केस में SC/ST एक्ट और POCSO लगवाती है!
क्यों भाई,
कोई खास दोस्ती है कॉकरोचों से?
बताइए, अब रविशंकर प्रसाद जी भी झूठ बोलने लगे? ये कह रहे हैं कि UGC को लेकर लोग नाराज़ थे।
ऐसे मंच पर ये सब स्वीकार थोड़ी किया जाता है, रविशंकर जी। इसीलिए आपको मंत्रिमंडल से हटा दिया गया था। ये कोई बताने वाली बात थोड़ी है।
UGC तो बस अजीत भारती जैसे लोगों का बनाया हुआ हौआ है।
Social media अलग चीज़ है, actual ground अलग चीज़ है। इसी वीडियो में देखें नितिन नबीन जी को; वो actual ground पर हैं, कुर्सियां खाली नहीं हैं, वीडियो AI है।
नक़ल पकड़ना भी शैक्षणिक दायित्व ही है, अगर OBC प्रोफेसर सूर्यनारायण डूल्ला पर केवल इसीलिए SC/ST एक्ट लग गया है क्योंकि उन्होंने अपनी ड्यूटी की, तो इससे बुरी बात कुछ नहीं हो सकती।
लेकिन, इन सबके बीच जातिगत उत्पीड़न का मामला जुड़ गया और आ गया एक्ट! चलिए, एक मिनट के लिए इस मामले को सत्य भी मान लेते हैं। फिर तो जिस व्यक्ति ने आईआईटी बॉम्बे से एमटेक और आईआईटी दिल्ली से पीएचडी कर रखी है, वो इतनी विशिष्ट डिग्रियों व इतने लंबे अनुभव के बावजूद अगर जातिवाद नहीं छोड़ रहा है फिर तो इसका निष्कर्ष यही निकलता है कि OBC समाज भी जातिवादी है।
यहाँ नब्बे बनाम दस की धारणा स्वतः ही टूट जाती है, क्योंकि जिन्हें कथित नब्बे कहा जा रहा है उसमें भी कई स्तरों पर भेदभाव है। मृतक छात्र का पिता तो IIT के निदेशक तक को घसीट रहा है, कह रहा है कि उसके कहने पर ऐसा हुआ। जो लोग इंजीनियरिंग कॉलेजों में पढ़े हैं, वो जानते हैं कि डीन तक का सभी छात्रों से वन-टू-वन संवाद नहीं हो पाता, निदेशक या कुलपति तो दूर की बात है। फिर हर छात्र की जाति पता हो, ऐसा संभवतः नहीं ही होता है।
एससी/एसटी प्रकोष्ठ को साहिल की कोई शिकायत नहीं मिली, ऊपर से उसके पास परीक्षा हॉल में फोन मिला। क्या इसके पीछे भी कोई जाति वाली समस्या थी?
अगर ऐसा ही चलता रहा तो इस देश में प्रतिभा, अनुभव और योगदानों का कोई महत्व नहीं रह जाएगा। जब सबकुछ जाति ही तय करेगी तो कौन यहाँ रहना चाहेगा एक्ट लगवाने के लिए? गिरफ़्तारी हो रही है या नहीं, ये जुदा बात है। मीडिया ट्रायल तो हो ही जाता है। सोशल मीडिया ट्रायल तो हो ही जाता है। जान पर तो बन ही आती है। बहिष्कृत तो कर ही जाता है व्यवस्था से।
हमारा प्रसाद नामक एक्टिविस्ट और लेखक को अम्बेडकर के खिलाफ किताब लिखने पर तेलंगाना पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है!
उनपर धारा 353(2), 196, 350 और 61(2) लगाई गईं हैं!
बता दें कि हमारा प्रसाद खुद दलित हैं, इसलिए गनीमत ये कि SC/ST एक्ट नहीं लगा उनपे!
सोचिये, गांधी/नेहरू पर कितनी किताबें छपीं जिनमें उनके खिलाफ लिखा गया, लेकिन कोई जेल नहीं गया!
किसी नेता को भगवान बना देने से यही होता है!
खैर हमको क्या?