@Akhand_Bharat_S दुबेजी,मैं आपका प्रशंसक हूं।आपके रांची में एक CPSU,HEC है। उसके रिटायर्ड कर्मचारियों/अधिकारियों को अप्रैल 2017 से ग्रेच्युटी और लीव इनकेशमेंट का भुगतान नहीं हुआ है। उनके स्थिति की कल्पना कीजिए, जिनके जीवन की पूरी कमाई भारत सरकार दाब कर बैठी है। आशा है इस संबंध में आप कुछ करेंगे।
@amitmalviya HEC, रांची के सेवानिवृत कर्मचारियों/अधिकारियों को अप्रैल 2017 से ग्रेच्युटी और लीव इनकेशमेंट का भुगतान नहीं किया जा रहा है। यह भारत सरकार का उपक्रम है। इससे बड़ा पाखण्ड और अमानवीयता और क्या हो सकती है।
@AnjayBose Have you heard about HEAVY ENGINEERING CORPORATION, RANCHI a CPSU. Gratuity and other legal dues are not being paid to retired employees from APRIL 2017.
SHOULD WE WAIT FOR BJP Government in Jharkhand?
@BJP4India आप HEC राँची से सेवानिवृत कर्मचारियों/अधिकारियों को पिछले 8 साल से ग्रेच्युटी और लीव इनकेशमेंट का भुगतान नहीं किया है जो उनके जिंदगी की पूरी कमाई है।पैसे के अभाव में लोग भूखे मर रहे हैं, बीमारी में इलाज के बगैर मर रहे हैं।आपलोग मुफ़्त में प्रति वर्ष लाखों करोड़ बांट रहे हैं।
#AnilSinghvi
STT की बढ़ोतरी और LTCG ने शेयर मार्केट को बहुत नुकसान किया है।NIFTY/BANKNIFTY के एक लॉट की खरीद/बिक्री में करीब ₹1000 लग जाता है। इस संबंध में आप कुछ कीजिए।
@PMOIndia@narendramodi@byadavbjp@DC_Ranchi
HECरांची से SDGM के पद से 2019 में रिटायर हुआ।RLC रांची ने 3.9.2025 को सूद समेत ग्रेच्युटी डिक्री (Letter 36(71)/2023-RLC(R) दी,पर₹1 नहीं मिला।मेरी पत्नी लकवा के कारण बेड रिडेन है,मैं खुद मरीज हूं।इलाज के पैसे नहीं। न्याय दिलवाएं।
@IndianOilcl@IndaneLPG
I booked for LPG refill on 11.5.2026.Received DAC on https://t.co/W03w8aCjcl delivery yet.Earlier SRN https://t.co/PsnbonBPMb SRN:https://t.co/eRKDJ8ZvBc one is responding.Arrange to deliver LPG REFILL.
LPG ID:7500000007680176
Distributor:FFCCS Ltd. Ranchi
भारत में योग्य लोगो की भयंकर कमी हो गई है •आपको यह जानकर आश्चर्य होगा कि रांची स्थित दो दिग्गज संस्थान एच•ई•सी एवं रिनपास वर्षों से वगैर CMD एवं DIRECTOR के चल रही हैं • सरकार भी क्या करें, योग्य अधिकारी हीं नहीं मिल रहे हैं •वैसे आपकी क्या राय है?
@ajitanjum प्रथम स्वतंत्रता संग्राम सन् 1857 में हुआ था,उस समय भी कुछ आबादी का स्थानांतरण हुआ होगा •इसलिए झारखंड में स्थानीयता वर्ष सन् 1855 घोषित होना चाहिए न कि सन् 1932•इससे अधिक लोगों को न्याय मिल पायेगा •