जब मोदी जी इटली में टॉफी खिलाते हुए reels बना रहे थे - पेपर लीक से त्रस्त भारत के युवा सड़कों पर न्याय मांग रहे थे।
क्योंकि NEET Paper Leak ने लाखों छात्रों का भविष्य बर्बाद कर दिया। कई बच्चों ने तो अपनी जान तक गंवा दी।
और मोदी जी ने न ज़िम्मेदारी ली, न धर्मेंद्र प्रधान को हटाया, न एक शब्द कहा।
अब जब छात्र, NSUI और INC के कार्यकर्ता न्याय की आवाज़ उठा रहे हैं - BJP की प्रदेश सरकारें उन पर लाठियाँ बरसा रही हैं।
जो सरकार छात्रों के सवालों का जवाब लाठी से देती है, वो जवाबदेही से नहीं - डर से चलती है।
पर हम डरने वाले नहीं हैं।
हम तब तक नहीं रुकेंगे जब तक धर्मेंद्र प्रधान इस्तीफ़ा नहीं देते और देश में पेपर लीक रोकने के लिए एक मज़बूत और सुरक्षित सिस्टम नहीं बनता।
यह लड़ाई हर उस छात्र के लिए है जिसका भविष्य इस नाकाम सरकार ने चुराया।
BJP is full of goons!
See the sanskari behaviour of Gadkari when someone questioned him.
Instead of responding, he’s threatening to throw him out using the police.
When there is nothing to hide, there is nothing to fear.
What happens to India’s image when the world sees a compromised PM panic and run from a few questions?
Primeminister of India, Narendra Modi, would not take my question, I was not expecting him to.
Norway has the number one spot on the World Press Freedom Index, India is at 157th, competing with Palestine, Emirates & Cuba.
It is our job to question the powers we cooperate with.
बिहार पुलिस के एक जवान की शर्मनाक हरकत , भारत के राष्ट्रीय ध्वज तिरंगे का अपमान किया , फिर उसे पैरो से कुचल दिया ,
बिहार के पटना में BPSC TRE -4 के प्रदर्शन के दौरान कल एक पुलिस वाले ने पहले तिरंगा झंडे से पसीना साफ किया , फिर उसे ज़मीन पर फेंक दिया और पैरो से कुचल दिया ,
ये शर्मनाक हरकत है, तिरंगे का अपमान नाकाबिले बर्दाश्त है ,
शुभेंदु अधिकारी कितने बड़े वाले भ्रष्ट हैं, ये बात नरेंद्र मोदी बता रहे हैं.
ये वीडियो 2016 का है.
अब उन्हीं शुभेंदु अधिकारी को मोदी ने पश्चिम बंगाल का मुख्यमंत्री बना दिया है.
मोदी का फंडा साफ है- खूब खाओ, मुझे भी खिलाओ.. जमकर भ्रष्टाचार फैलाओ.
পঁচিশে বৈশাখের এই পুণ্য দিনে বিশ্ববন্দিত শ্রেষ্ঠ চিন্তাবিদ, কবিগুরু রবীন্দ্রনাথ ঠাকুরের চরণে নিবেদন করি আমার অন্তহীন প্রণাম। রবীন্দ্রজয়ন্তী আমাদের কাছে বাংলা ভাষা-সংস্কৃতি ও ঐতিহ্যেরই এক নবজন্মের মহোৎসব। তাঁর সুগভীর জীবনদর্শন আমাদের প্রাত্যহিক পথচলার অবিনাশী আলোকবর্তিকা। তিনি আমাদের শিখিয়েছেন- বিভেদ নয়, মিলনই সত্য। উগ্র জাতীয়তাবাদের ঊর্ধ্বে উঠে সমগ্র মানবসভ্যতা যেন ঐক্যের মহামন্ত্রে দীক্ষিত হয়, এই শিক্ষাই তিনি বিশ্বচরাচরকে দিয়ে গেছেন।
“হে মোর চিত্ত, পুণ্য তীর্থে জাগো রে ধীরে
এই ভারতের মহামানবের সাগরতীরে।”
বিশ্ববরেণ্য কবির এই শাশ্বত আদর্শ, সুদূরপ্রসারী চিন্তাধারা, চেতনাবোধ এবং সৃষ্টিশীলতা আরও নিবিড়ভাবে প্রোথিত হোক বিশ্ববাসীর মননে।