#शुद्ध_जल_पियेगा_हिंदुस्तान
संत रामपाल जी महाराज द्वारा
मात्र 3 दिनों के भीतर 3.5 किलोमीटर दूर से 10,500 फीट लंबी पाइपलाइन बिछाकर और समर्सिबल पंप की निःशुल्क व्यवस्था गाँव की प्यास बुझाई गई
#शुद्ध_जल_पियेगा_हिंदुस्तान
#न_जन्म_हुआ_न_मरा_कबीरा
ज्येष्ठ पूर्णिमा, विक्रमी संवत् 1455 (सन् 1398) की ब्रह्म मुहूर्त की वह घड़ी जब कबीर परमेश्वर सतलोक से सशरीर चलकर लहरतारा तालाब के कमल पर शिशु रूप में प्रकट हुए।
#न_जन्म_हुआ_न_मरा_कबीरा
ऋग्वेद मण्डल 9, सूक्त 93, मंत्र 2 प्रमाणित करता है कि पूर्ण परमात्मा कभी माता के गर्भ से जन्म नही लेता, वह शिशु रूप मे प्रकट होता है। वही कबीर साहेब है।
न तस्य माता न पिता न बन्धुः न जन्म।
न कर्मणा न प्रजया धनेन त्यागेनैके अमृतत्वमनशुः ।।
#न_जन्म_हुआ_न_मरा_कबीरा
कबीर परमात्मा आज से 600 वर्ष पहले काशी शहर में लहरतारा तालाब में सशरीर प्रकट हुए थे कमल के फूल पर और आज वर्तमान में संत रामपाल जी महाराज के रूप में धनाना आश्रम में विराजमान है दुनिया वालों पहचाना हो तो पहचान लो।
2Days Left Kabir Prakat Diwas
#न_जन्म_हुआ_न_मरा_कबीरा
600 साल पुराना रहस्य, आज भी काशी की धरती गवाह है!कबीर साहेब वह अविनाशी परमात्मा हैं जो हर युग में जन्म नहीं लेते बल्कि सशरीर प्रकट होते हैं। कलियुग में वे काशी के लहरतारा तालाब में, कमल के फूल पर, विक्रमी संवत् 1455 (सन् 1398
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#न_जन्म_हुआ_न_मरा_कबीरा
कबीर साहेब प्रकट दिवस वह पावन दिन है, जब सर्व ब्रह्मांडो के रचनहार स्वयं कबीर परमेश्वर सत्यलोक से चलकर, हम भटकती हुई जीवात्माओ को तारने के लिए पृथ्वी पर सशरीर अवतरित हुए।
पांच तत्व की देह ना मेरी, ना कोई माता जाया। जीव उदारन तुम को तारन, सीधा जग में आया।।
#न_जन्म_हुआ_न_मरा_कबीरा
गरीब, साहिब पुरुष कबीर कूँ,
जन्म लिया नहीं कोय।
शब्द स्वरूपी रूप है, घट घट बोलै सोय।।
ज्येष्ठ पूर्णिमा, विक्रमी संवत् 1455 (सन् 1398) की ब्रह्म मुहूर्त की वह घड़ी जब कबीर परमेश्वर सतलोक से सशरीर चलकर लहरतारा तालाब के कमल पर
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#न_जन्म_हुआ_न_मरा_कबीरा
गरीब, साहिब पुरुष कबीर कूँ,
जन्म लिया नहीं कोय।
शब्द स्वरूपी रूप है, घट घट बोलै सोय।।
ज्येष्ठ पूर्णिमा, विक्रमी संवत् 1455 (सन् 1398) की ब्रह्म मुहूर्त की वह घड़ी जब कबीर परमेश्वर सतलोक से सशरीर चलकर लहरतारा तालाब के कमल पर
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#न_जन्म_हुआ_न_मरा_कबीरा
कबीर साहेब वह अविनाशी परमात्मा हैं जो हर युग में जन्म नहीं लेते बल्कि सशरीर प्रकट होते है। कलियुग में वे काशी के लहरतारा तालाब में, कमल के फूल पर,विक्रमी संवत् 1455 (सन् 1398) की ज्येष्ठ पूर्णिमा को सशरीर प्रकट हुए और इसके साक्ष्य आज भी काशी में मौजूद है।
#न_जन्म_हुआ_न_मरा_कबीरा
संत गरीबदास जी महाराज ने भी अपनी अमरवाणी में स्पष्ट किया हैं कि
जिसके जन्मदाता कोई माता-पिता नहीं हैं और जिसके जन्म का कोई प्रमाण नहीं हैं वह केवल पूर्ण ब्रह्म कबीर साहेब है।
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#न_जन्म_हुआ_न_मरा_कबीरा
कबीर साहेब के न कोई माता-पिता है, न उनका जन्म-मृत्यु का कोई बंधन है। वे अविनाशी और सर्वशक्तिमान पूर्ण परमात्मा है, जो हर युग में जीवों के उद्धार हेतु सशरीर धरती पर प्रकट होते हैं।
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वे सन् 1398, विक्रमी संवत् 1455 में, काशी के पवित्र लहरतारा तालाब में खिले कमल के पुष्प पर शिशु रूप में सशरीर प्रकट हुए थे।
यह कोई सामान्य जन्म नहीं, बल्कि साक्षात् परमात्मा का प्राकट्य था।
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जगत के तारणहार #संतरामपालजी_का_वरदान शुद्ध पेयजल अभियान से गांव बिधलान को खारे पानी से मुक्ति मिली। 15 घंटे में मीठे पानी का प्रबंध कर भावी पीढ़ियों का स्वास्थ्य सुधारा।
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#संतरामपालजी_का_वरदान
जींद के मेहरड़ा गांव में 3.5 किलोमीटर लंबी पाइपलाइन बिछाकर और समसिंबल पंप लगवाकर संत रामपाल जी महाराज ने 30 साल पुरानी जल किल्लत का स्थायी समाधान किया।
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संत रामपाल जी महाराज का वरदान
शुद्ध जल पियेगा हिंदुस्तान गांब मेहरड़ा, जींद (HR) को संत रामपाल जी महाराज ने पीने के पानी की 3.5 KM पाइपलाइन व टयूबवेल दिया।
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