@RahulGandhi इन सांपो को इलाज करते है या नहीं ये समय बताएगा.!
वैसे ये हार नहीं क्यूँकि nsui की एक बड़ी लॉबी , भाजपा का पूरा तंत्र विजय शंकर को हराने में लगा सब कुछ करके मात्र दो हज़ार का मार्जिन था , अपने साथ दे देते तो वक़्त जज़्बात बदल जाता.!
#DUSU के अध्यक्ष जाट या गुर्जर ही क्यों होते हैं..? DUSU की राजनीति का एक सटीक विश्लेषण जरूर पढ़िए👇
दिल्ली विश्वविद्यालय में देशभर से विद्यार्थी पढ़ने आते हैं। SC, ST और OBC समेत अलग-अलग सामाजिक वर्गों की बड़ी हिस्सेदारी है। फिर भी 2010-11 से 2025-26 तक हुए 13 DUSU चुनावों में हर निर्वाचित अध्यक्ष जाट या गुर्जर समुदाय से रहा। ABVP ने 9 बार अध्यक्ष पद जीता, उसके 7 विजेता गुर्जर और 2 जाट थे। NSUI के विजेता भी इसी दायरे से आए..!
क्या यह सिर्फ संयोग है, या इसके पीछे कोई गहरा सामाजिक-राजनीतिक गणित है..?
इसकी एक अहम कड़ी है दिल्ली-NCR की स्थानीयता। ग्रामीण और बाहरी इलाकों में पुराने रिश्ते, गांव-बिरादरी के नेटवर्क, स्थानीय छात्र नेता, वाहन और समर्थकों को जुटाने की क्षमता चुनावी संसाधन बन सकती है। DUSU के कॉलेज पूरी दिल्ली में फैले हैं, इसलिए प्रचार और लॉजिस्टिक्स में ऐसे नेटवर्क मददगार हो सकते हैं। इसे सिर्फ “जातीय वोट” कहना ��धूरा होगा यह सोशल कैपिटल का मामला भी है..।
चुनावी खर्च की सीमा ₹5,000 है, लेकिन 2026 में महंगी गाड़ियों के काफिलों, बिना नंबर प्लेट वाले वाहनों, हथियार दिखाने और हिंसा की शिकायतों का मामला दिल्ली हाईकोर्ट तक पहुंचा। पुलिस ने 49 वाहन रोके, 5,400 से ज्यादा चालान किए और चार लोगों को गिरफ्तार किया। Newslaundry ने ABVP, NSUI और निर्दलीय दीपांशु शौकीन के समर्थकों के काफिलों का जिक्र किया। यानी सवाल सिर्फ उम्मीदवार के खर्च का नहीं, पूरे campaign ecosystem का है..!
लगातार जीतने वाले समुदायों को संगठन भविष्य में भी “winnable” मान सकते हैं। फिर टिकट, नेटवर्क और संसाधन उसी दिशा में मजबूत होते है। स्थानीयता से नेटवर्क, नेटवर्क से लॉजिस्टिक्स, लॉजिस्टिक्स से दृश्यता, और दृश्यता से टिकट व जीत का चक्र बन सकता है..!
2026 ने इस पैटर्न में एक नया मो��़ जरूर दिखाया..!
NSUI ने राजस्थान के आदिवासी छात्र विजय शंकर मीणा को अध्यक्ष पद पर उतारा। ABVP के यश डबास को 24,576 और मीणा को 22,523 वोट मिले—अंतर सिर्फ 2,053 वोट। 2025 में यह अंतर 16,196 था। यानी अध्यक्ष पद का मुकाबला काफी करीबी हुआ। हालांकि NSUI केंद्रीय पैनल की कोई सीट नहीं जीत सकी और ABVP ने तीन पद जीते..!
दिल्ली की सत्ता और DUSU की राजनीति भी अलग-अलग समीकरणों पर चलती हैं। दिल्ली विधानसभा में 22 विधायकों वाली AAP के अध्यक्ष उ��्मीदवार अश्मित कुमार को 1,388 वोट मिले, जबकि विधानसभा में शून्य विधायक वाली कांग्रेस की NSUI अध्यक्ष पद पर जीत से केवल 2,053 वोट दूर रही। इससे साफ है कि विधानसभा की ताकत अपने आप कैंपस में स्थानांतरित नहीं होती। DUSU में ABVP और NSUI की दशकों पुरानी संगठनात्मक मौजूदगी, कॉलेज इकाइयां और पुराने छात्र नेताओं के नेटवर्क बड़ी भूमिका निभाते हैं..!
NSUI में टिकट वितरण को लेकर विवाद भी ��ामने आया। NSUI से जुड़े दीपांशु शौकीन ने निर्दलीय उपाध्यक्ष पद का चुनाव लड़ा और 30,615 वोट लेकर जीत हासिल की। टिकट और उम्मीदवारों के बीच संभावित समझ को लेकर कुछ दावे रिपोर्ट हुए, लेकिन उन्हें आरोप के रूप में ही देखा जाना चाहिए, स्थापित तथ्य के रूप में नहीं..!
तो असली सवाल किसी जाति को दोष देने का नहीं है। जाट या गुर्जर विद्यार्थियों का चुनाव लड़ना और जीतना अपने आप में समस्या नहीं। सवाल यह है कि क्या ���र विद्यार्थी चुनाव में समान शुरुआती अवसर के साथ उतरता है? जब किसी के पास पहले से स्थानीय नेटवर्क, संगठन, गाड़ियां और प्रचार संसाधन हों, जबकि किसी दूसरे के पास मुख्यतः उसके मुद्दे और वोट—तो मुकाबला कितना बराबरी का रह जाता है..?
दिल्ली विश्वविद्यालय पूरे भारत का विश्वविद्यालय है। उसके छात्र लोकतंत्र की चुनौती भी यही है कि वह इस विविधता और बराबरी को कितना प्रतिबिंबित कर पाता है।
बहस जातियों के बीच नहीं, उस व्यवस्था पर होनी चाहिए जो कुछ उम्मीदवारों को पहले दिन से बढ़त देती है और दूसरों को बराबरी की शुरुआत के लिए संघर्ष करना पड़ता है..!
🔥कुछ मुकाबले सिर्फ जीते नहीं जाते, अपनी छाप छोड़कर इतिहास में दर्ज किए जाते हैं.!
DUSU Election 2026 में विजय शंकर मीणा ने अध्यक्ष पद के लिए मुकाबला कि��ा। नतीजा भले ही उनके पक्ष में नहीं आया, लेकिन एक बात तय है—किसी का राजनीतिक सफर एक चुनाव के नतीजे से न शुरू होता है, न खत्म.!
विजय भाई, चुनाव हारे हैं, हौसला नहीं..!
सियासत में भीड़ अक्सर जीत के पीछे चलती है, लेकिन असली साथ वही होता है जो मुश्किल वक्त में भी डटकर खड़ा रहे। आज आपके साथ खड़े लोगों का भरोसा किसी नतीजे का मोहताज नहीं है..!
याद रखिए, मैदान में उतरने वाले ही अपनी पहचान बनाते हैं। रास्ते म��ं रुकावटें आएंगी, चुनौतियां सामने आएंगी, लेकिन संघर्ष करने वालों के लिए हर मुश्किल एक नया सबक लेकर आती है..!
आज नतीजा आपके पक्ष में नहीं आया, लेकिन आपकी कहानी अभी बाकी है। आपकी कहानी का अंत लिखने का अधिकार किसी एक चुनाव को नहीं है..!
मैदान बदलेगा, वक्त बदलेगा, और संघर्ष जारी रहेगा..!
✊ हौसला कायम है, साथ बरकरार है...!
#VijayShankarMeena #DUSU2026 #DUSUElection #DelhiUniversity
कांग्रेस में बीजेपी से ज्यादा संघी भरे पड़े है.!
इनमे जातिवाद का जहर इतना भरा हुआ है कि एक दलित का राष्ट्रीय अध्यक्ष बनना और एक आदिवासी का dusu अध्यक्ष बनना इनसे देखा नहीं जाता.!
रोनक खत्री और निर्मल चौधरी जैसे छात्रसंघ अध्यक्ष जिनको nsui से क्या कुछ नहीं दिया लेकिन ये जातिवादी मानसिकता से इतने भरे पड़े है कि ये एक गरीब आदिवासी छात्र जो सही मायने में अध्यक्ष पद डिज़र्व करता था उसका प्रचार करने तक नहीं आये.!
दीपेंदर हूडा जो dusu ��ी राजनीति में बहुत सक्रिय रहते है वो दूर दूर तक नहीं दिखे.!
इनके लिए संगठन पैर की जूती के बराबर है.!
जब जातिवाद ही करना है तो क्या मतलब रह जाता है इन संगठनों का.!
विजय शंकर मीणा सिर्फ यश डबास के खिलाफ चुनाव नहीं लड़ा वो BJP RSS ABVP धनबल बाहुबल और अपने ही संगठन के जातिवादी मानसिकता से कुंठित लोगों के खिलाफ चुनाव लड़ा था.!
#DUSU
विनोद जाखड भले ही NSUI का राष्ट्रीय अध्यक्ष हो…!
लेकिन टिकट किस��� मिलेगी… ये आज भी आलाकमान ही तय करता हैं…!
पदाधिकारी केवल हार की ज़िम्मेदारी लेने तक सीमित है…!
निर्णय लेना… और जीत का श्रेय लेना… ये आज भी आलाकमान के ही हिस्से आता है…!!
#DUSU
कांग्रेस को संगठन सृजन के साथ अब टिकट वितरण और सिफारिश मॉडल की भी सर्जरी कर देनी चाहिए.!
संगठन को ऐसे लोगों पर भी ध्यान देना होगा जो जात पात और आपसी जलन के कारण संगठन का नुकसान करते है.!
संगठन को विनोद जाखड़, अर्जुन चपराना और राहुल झांसला(यादव) जैसे ओर लोगों की जरूरत है जो धरातल पर संघर्ष करते है न कि सिर्फ सोशल मीडिया पर रीलबाजी.!
दिल्ली विश्वविद्यालय चुनाव में हमने देखा कि NSUI ने इतनी मजबूत स्थिति में होते हुए भी अपने ही संगठन के कुछ गद्दारों के कारण पूरा पैनल गँवा दिया.!
#DUSU
विजय हारकर भी विजय रहा... राजस्थान के लाडले ने तमाम बाधाओं के बाद अच्छा चुनाव लड़ा... कोई नहीं ब्रो चुनाव में हार-जीत चलती रहती है... अभी तो खूब सफ़र शेष है, तेरी हार के चर्चे तो जीत से ज्यादा है....
#dusu
चुनाव का परिणाम हमारे पक्ष में नहीं आया। हम 2,053 वोटों से चुनाव हार गए, लेकिन यह हार हमारे लिए सिर्फ एक चुनाव का परिणाम है, संघर्ष की हार नहीं।
छोटे भाई विजय शंकर मीणा ने पूरी मजबूती, ��ेहनत और ईमानदारी के साथ चुनाव लड़ा। एक गरीब आदिवासी परिवार के इस बेटे ने दिल्ली विश्वविद्यालय जैसे बड़े विश्वविद्यालय में जिस तरह हजारों युवाओं के बीच अपनी आवाज़ बुलंद की और चुनाव लड़ा, वह अपने आप में बड़ी बात है।
इस पूरे संघर्ष में दिन-रात मेहनत करने वाले सभी साथियों का दिल से धन्यवाद। जिस तरह इतने नौजवानों और युवाओं का हमें समर्थन मिला, वह हमारे लिए सबसे बड़ी ताकत है।
विनोद भाई का विशेष धन्यवाद, जिन्होंने एक गरीब आदिवासी बेटे पर भरोसा जताया और उसे दिल्ली विश्वविद्यालय में चुनाव लड़ने का अवसर दिया। भाई राहुल झांसला का भी दिल से धन्यवाद, जिन्होंने हर कदम पर मजबूती से साथ दिया।
जब सरकार, प्रशासन और पूरा तंत्र आपके खिलाफ खड़ा हो जाए, तब एक गरीब के बेटे के लिए लड़ाई कितनी मुश्किल होती है, यह हमने इस चुनाव में देखा। सरकार की तानाशाही और दबाव के बावजूद विजय शंकर मीणा ने जिस हिम्मत और मजबूती से लड़ाई लड़ी, वह हमेशा याद रहेगी।
दिल्ली विश्वविद्यालय में एक गरीब आदिवासी बेटे का इतनी मजब��ती से चुनाव लड़ना ही अपने आप में बड़ी जीत है।
यह हार नहीं है। यह हमारे संघर्षों की जीत है, उन हजारों युवाओं के भरोसे की जीत है जिन्होंने हमारे साथ खड़े होकर अपनी आवाज़ बुलंद की।
लड़ाई जारी रहेगी।
इंक़लाब ज़िंदाबाद @RahulGandhi @VinodJakharIN @rahuljhanslaa @Vijay_DUSU
#DUSU
आज एक बार फिर साबित हो गया कि अगर छात्रसंघ के चुनाव में हार का अंतर बहुत कम है
तो उसे ही जिताया जाएगा जिसका प्रभाव होगा।
विजय शंकर मीणा का करीब 1000 वोटों से हारना कोई हारना नहीं है। बहुत बढ़िया चुनाव लड़ा है राजस्थान के शेर ने। सबकी नाक में दम कर दिया था।
NSUI और हम सभी को गर्व है। विजय शंकर मीणा वो शेर है जिसे हराने के लिए लोगों की साज़िशें भी शायद कम पड़ गईं होंगी।
बहुत सालों बाद NSUI ने अध्यक्ष पद के लिए काफी तगड़ा कैंडिडेट खड़ा किया था।
शाबाश! विजय शंकर मीणा आपने अच्छी लड़ाई लड़ी है इसके लिए आपको बधाई आपका भविष्य उज्ज्वल है।🔥
#DUSU
#Dusu election
दिल्ली विश्वविद्यालय चुनाव 2026💥
फाइनल पदवार स्थिति--
अध्यक्ष (President)
यश डबास (ABVP) — 22,434 वोट
विजय शंकर मीणा (NSUI) — 21,390 वोट
अंतर: करीब 1,044 वोट
अध्यक्ष पद पर कांटे की टक्कर रही। बीच-बीच में लीड बदली, बाद के राउंड में ABVP आगे निकला।
उपाध्यक्ष (Vice-President)
दीपांशु शौकीन (निर्दलीय) — 28,873 वोट
ईशू मौर्य (ABVP) — 15,346 वोट
वीर चतरथ (NSUI) — 4,010 वोट
सचिव (Secretary)
रिया छावड़ी (ABVP) — 19,846 वोट
नम्रता चौधरी (NSUI) — 13,963 वोट
ABVP की रिया छावड़ी यहाँ साफ बढ़त बनाए हुए थीं।
संयुक्त सचिव (Joint Secretary)
यह पद सबसे कड़ा रहा:
लक्ष्य राज सिंह (ABVP) — लगभग 14,965
विशेष यादव (समाजवादी छात्र सभा / निर्दलीय समर्थन) — लगभग 14,836
गोपाल चौधरी (NSUI) — लगभग 14,482
तीनों के बीच बहुत कम अंतर रहा, लीड कई बार बदली।
#dusu #dusu2026