#राधास्वामीपंथ_का_खुलासा राधा स्वामी का मनमानी ज्ञान है। शिवदयाल जी का कोई गुरु नही था, और गुरु बिन ज्ञान नही। मृत्यु पश्चात अपनी शिष्या बुक्की में प्रवेश करके पितरो व भूतो की तरह बोल कर आदेश देते थे अर्थात बुक्की जी के मुख से हुक्का पीते थे तथा अंतिम स्वास तक प्रवेश रहे
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#राधास्वामीपंथ_का_खुलासा राधा स्वामी का मनमानी ज्ञान है। शिवदयाल जी का कोई गुरु नही था, और गुरु बिन ज्ञान नही। मृत्यु पश्चात अपनी शिष्या बुक्की में प्रवेश करके पितरो व भूतो की तरह बोल कर आदेश देते थे अर्थात बुक्की जी के मुख से हुक्का पीते थे तथा अंतिम स्वास तक प्रवेश रहे
#राधास्वामीपंथ_का_खुलासा राधा स्वामी का मनमानी ज्ञान है। शिवदयाल जी का कोई गुरु नही था, और गुरु बिन ज्ञान नही। मृत्यु पश्चात अपनी शिष्या बुक्की में प्रवेश करके पितरो व भूतो की तरह बोल कर आदेश देते थे अर्थात बुक्की जी के मुख से हुक्का पीते थे तथा अंतिम स्वास तक प्रवेश रहे
#राधास्वामीपंथ_का_खुलासा राधा स्वामी का मनमानी ज्ञान है। शिवदयाल जी का कोई गुरु नही था, और गुरु बिन ज्ञान नही। मृत्यु पश्चात अपनी शिष्या बुक्की में प्रवेश करके पितरो व भूतो की तरह बोल कर आदेश देते थे अर्थात बुक्की जी के मुख से हुक्का पीते थे तथा अंतिम स्वास तक प्रवेश रहे
#राधास्वामीपंथ_का_खुलासा राधा स्वामी का मनमानी ज्ञान है। शिवदयाल जी का कोई गुरु नही था, और गुरु बिन ज्ञान नही। मृत्यु पश्चात अपनी शिष्या बुक्की में प्रवेश करके पितरो व भूतो की तरह बोल कर आदेश देते थे अर्थात बुक्की जी के मुख से हुक्का पीते थे तथा अंतिम स्वास तक प्रवेश रहे
#राधास्वामीपंथ_का_खुलासा राधा स्वामी का मनमानी ज्ञान है। शिवदयाल जी का कोई गुरु नही था, और गुरु बिन ज्ञान नही। मृत्यु पश्चात अपनी शिष्या बुक्की में प्रवेश करके पितरो व भूतो की तरह बोल कर आदेश देते थे अर्थात बुक्की जी के मुख से हुक्का पीते थे तथा अंतिम स्वास तक प्रवेश रहे
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#राधास्वामीपंथ_का_खुलासा राधा स्वामी का मनमानी ज्ञान है। शिवदयाल जी का कोई गुरु नही था, और गुरु बिन ज्ञान नही। मृत्यु पश्चात अपनी शिष्या बुक्की में प्रवेश करके पितरो व भूतो की तरह बोल कर आदेश देते थे अर्थात बुक्की जी के मुख से हुक्का पीते थे तथा अंतिम स्वास तक प्रवेश रहे
#राधास्वामीपंथ_का_खुलासा राधा स्वामी का मनमानी ज्ञान है। शिवदयाल जी का कोई गुरु नही था, और गुरु बिन ज्ञान नही। मृत्यु पश्चात अपनी शिष्या बुक्की में प्रवेश करके पितरो व भूतो की तरह बोल कर आदेश देते थे अर्थात बुक्की जी के मुख से हुक्का पीते थे तथा अंतिम स्वास तक प्रवेश रहे
#राधास्वामीपंथ_का_खुलासा राधा स्वामी का मनमानी ज्ञान है। शिवदयाल जी का कोई गुरु नही था, और गुरु बिन ज्ञान नही। मृत्यु पश्चात अपनी शिष्या बुक्की में प्रवेश करके पितरो व भूतो की तरह बोल कर आदेश देते थे अर्थात बुक्की जी के मुख से हुक्का पीते थे तथा अंतिम स्वास तक प्रवेश रहे
#राधास्वामीपंथ_का_खुलासा राधा स्वामी का मनमानी ज्ञान है। शिवदयाल जी का कोई गुरु नही था, और गुरु बिन ज्ञान नही। मृत्यु पश्चात अपनी शिष्या बुक्की में प्रवेश करके पितरो व भूतो की तरह बोल कर आदेश देते थे अर्थात बुक्की जी के मुख से हुक्का पीते थे तथा अंतिम स्वास तक प्रवेश रहे
#राधास्वामीपंथ_का_खुलासा राधा स्वामी का मनमानी ज्ञान है। शिवदयाल जी का कोई गुरु नही था, और गुरु बिन ज्ञान नही। मृत्यु पश्चात अपनी शिष्या बुक्की में प्रवेश करके पितरो व भूतो की तरह बोल कर आदेश देते थे अर्थात बुक्की जी के मुख से हुक्का पीते थे तथा अंतिम स्वास तक प्रवेश रहे
#राधास्वामीपंथ_का_खुलासा राधा स्वामी का मनमानी ज्ञान है। शिवदयाल जी का कोई गुरु नही था, और गुरु बिन ज्ञान नही। मृत्यु पश्चात अपनी शिष्या बुक्की में प्रवेश करके पितरो व भूतो की तरह बोल कर आदेश देते थे अर्थात बुक्की जी के मुख से हुक्का पीते थे तथा अंतिम स्वास तक प्रवेश रहे
#राधास्वामीपंथ_की_सच्चाई. राधा स्वामी का मनमानी ज्ञान है। शिवदयाल जी मृत्यु पश्चात अपनी शिष्या बुक्की में प्रवेश करके पितरो व भूतो की तरह बोल कर आदेश देते थे अर्थात बुक्की जी के मुख से हुक्का पीते थे तथा अंतिम स्वास तक प्रवेश रहे
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