#किसको_मिले_कबीरभगवान
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यहूदी धर्म के प्रवर्तक माने जाने वाले हज़रत मूसा जी को उनके अल्लाह ने, उनसे अधिक ज्ञानी 'अल-खिज्र' के पास जाकर इल्म (ज्ञान) प्राप्त करने का निर्देश दिया था।
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किस किसको मिले भगवान
की पावन उपस्थिति में 629 वां कबीर परमेश्वर प्रकट दिवस 29 जून 2026
इसका उल्लेख पवित्र कुरआन शरीफ़ के सूरा काफ़ 18 आयत 60 से 82 में है और वह अल-खिज्र' जो हजरत मूसा को मजमा-ए-बाहेरन में मिला था वह कोई और नहीं, बल्कि स्वयं कबीर जी थे।
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किस किसको मिले भगवान
कबीर परमात्मा, इस्लाम धर्म के प्रवर्तक पैगंबर हज़रत मुहम्मद जी से भी मिले थे।
इस विषय में संत गरीबदास जी ने कहा है:
होते नबी मुहम्मद पीरा। जाकूं मुर्शिद मिले कबीरा ॥
अमरग्रन्थ साहिब, पृष्ठ 569
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तैमूर लंग को कबीर परमात्मा ने 'जिंदा महात्मा' के रूप में तब दर्शन दिए थे, जब वह भेड़-बकरियाँ चरा रहा था। संत गरीबदास जी ने कहा है:
गरीब, तैमूरलंग को तालिब मिले, एक रोटी की चाहय।
जिंदा रूप कबीर धरहीं, सुनी तैमूरलंग की माय।।
गरीब, हिंद जिंद सब ही दी,
#किसको_मिले_कबीरभगवान
कबीर परमात्मा, संत दादू दयाल जी से सन् 1551 में आमेर (राजस्थान) में मिले थे।
इस पर दादू जी ने कहा है:
जिन मोकुं निज नाम दिया, सोइ सतगुरु हमार । दादू दूसरा कोई नहीं, कबीर सृजन हार ।। कबीरपंथी शब्दावली, पृष्ठ 233
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कबीर परमात्मा, संत दादू दयाल जी से सन् 1551 में आमेर (राजस्थान) में मिले थे।
इस पर दादू जी ने कहा है:
जिन मोकुं निज नाम दिया, सोइ सतगुरु हमार । दादू दूसरा कोई नहीं, कबीर सृजन हार ।। कबीरपंथी शब्दावली, पृष्ठ 233
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त्रेता युग में हनुमान जी को मिले कबीर परमात्मा
श्री रामचंद्र द्वारा रावण वध के बाद माता सीता की अयोध्या वापसी पर जब एक घटनाक्रम के दौरान माता सीता जी ने हनुमान जी का अपमान किया तो हनुमान जी वापिस जंगल में चले गए।
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त्रेता युग में हनुमान जी को मिले कबीर परमात्मा
श्री रामचंद्र द्वारा रावण वध के बाद माता सीता की अयोध्या वापसी पर जब एक घटनाक्रम के दौरान माता सीता जी ने हनुमान जी का अपमान किया तो हनुमान जी वापिस जंगल में चले गए।
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आज जानिएं आप कि #किसको_मिले_कबीरभगवान
"होते नबी मुहम्मद पीरा...जाकूँ मुर्शिद मिले कबीरा!!"
यहूदी धर्म के हज़रत मूसा को मिले 'अल-खिज़्र' कोई और नहीं, स्वयं कबीर परमात्मा थे! हजरत मुहम्मद और हजरत अली को भी कबीर साहेब मिले।
अधिक जानकारी के लिए देखिए Sant RampalJi YouTube चैनल।
#किसको_मिले_कबीरभगवान
गुरु नानक देव जी को कबीर परमात्मा बेई नदी के किनारे 'जिंदा महात्मा' के रूप में मिले थे और उन्हें सचखंड (सतलोक) का साक्षात्कार कराया था।
गुरु नानक देव जी ने कहा
यक अर्ज गुफतम पेश तो दर गोश कुन करतार। हक्का कबीर करीम तू बेएब परवरदिगार।।
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कबीर परमेश्वर सन् 1727 में खेतों में 'जिंदा महात्मा' के रूप में मिले और उन्हें सतलोक का साक्षात्कार कराया। इस पर संत गरीबदास जी ने कहा है:
गरीब, परमेश्वर एक कबीर है, दूजा नहीं आधार।
दास गरीब सकल सृष्टि का, यो ही सिरजन हार।।
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मंसूर अली और उनकी बहन शिमली से भी कबीर परमात्मा ने शम्स तबरेज़ के रूप में भेंट की थी, जिसका वर्णन 'कबीर मंशूर' नामक पुस्तक में मिलता है।
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♦️ संत नामदेव जी से कबीर परमात्मा एक संत के रूप में पंढरपुर में मिले और उनके साथ अनेक लीलाएँ कीं। इस विषय में संत गरीबदास जी ने कहा है:
मूंज अरू बांस सर खूब चोखे लिये, नामदेव की छांन तहां खूब छाई।
पातशाह मस्क जद बांध नामा लिया, गऊ तत्क
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Divine Meeting
On the morning of 9th March, 1997 at 10:00 AM, a divine meeting occurred between Supreme God Kabir Saheb and Saint Rampal Ji Maharaj of Village Dhanana, Sonipat.
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गुरु नानक देव जी को कबीर परमात्मा
बेई नदी के किनारे 'जिंदा महात्मा' के रूप में मिले थे और उन्हें सचखंड (सतलोक) का साक्षात्कार कराया था।
गुरु नानक जी ने कबीर प्रभु के विषय में कहा:
यक अर्ज गुफतम पेश तो दर गोश कुन करतार। हक्का कबीर करीम तू बेएब परवरदिगार।।
#किसको_मिले_कबीरभगवान
त्रेता युग में कबीर परमेश्वर मुनींद्र नाम से प्रकट हुए तथा नल व नील को शरण में लिया।
उनकी कृपा से ही समुद्र पर पत्थर तैरे। धर्मदास जी की वाणी में इसका प्रमाण है:-
रहे नल नील जतन कर हार, तब सतगुरु से करी पुकार।
जा सत रेखा लिखी अपार, सिंधु पर शिला तिराने
#किसको_मिले_कबीरभगवान
संत रविदास जी और कबीर जी समकालीन थे। कबीर परमात्मा की समर्थता से परिचित होकर उन्होंने कबीर जी को अपने आध्यात्मिक मार्गदर्शक के रूप में स्वीकार किया था। पुस्तक रैदास
सो तुम गावौ सो हूं गांऊं, तेरा ग्यान विचारुं।
कहै रैदास कबीर गुर मेरा, भरम करम धोइ डारुं।।
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मंसूर अली और उनकी बहन शिमली से भी कबीर परमात्मा ने शम्स तबरेज़ के रूप में भेंट की थी, जिसका वर्णन 'कबीर मंशूर' 📗नामक पुस्तक में मिलता है
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♦️ संत नामदेव जी से कबीर परमात्मा एक संत के रूप में पंढरपुर में मिले और उनके साथ अनेक लीलाएँ कीं। इस विषय में संत गरीबदास जी ने कहा है:
मूंज अरू बांस सर खूब चोखे लिये, नामदेव की छांन तहां खूब छाई।
पातशाह मस्क जद बांध नामा लिया, गऊ
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गुरु नानक देव जी को कबीर परमात्मा
बेई नदी के किनारे 'जिंदा महात्मा' के रूप में मिले थे और उन्हें सचखंड का साक्षात्कार कराया था।
यक अर्ज गुफतम पेश तो दर गोश कुन करतार। हक्का कबीर करीम तू बेएब परवरदिगार।।
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