किठौर मे बिजली विभाग के अधिकारी एक चोरी मामले खुद ही असमंजस मे है कॉपर चोरी करते मजदूर मोके पर पकड़े गए जाई ने पकड़े एसडीओ किठौर ने छुड़ाया
इस मामले कई सवाल खड़े हो रहे तत्काल जाँच हो अधिकारियो की सेटिंग भी हो सकती है. @uppcl@md pvvnl
मेरठ किठौर के ग्राम महलवाला में फेरी करने वाले मजदूर को नफरती व्यक्ति द्वारा मुस्लिम होने की वजह से निशाना बनाकर मारपीट व पैसे छीनने की घिनोनी हरकत की गई हैं समाज में भाईचारा को आग लगाने वाले व्यक्ति पर मुकदमा दर्ज कर गिरफ्तार किया जाए
साथ ही एनएएस की कार्यवाही भी हो
मेरठ किठौर के ग्राम महलवाला में फेरी करने वाले मजदूर को नफरती व्यक्ति द्वारा मुस्लिम होने की वजह से निशाना बनाकर मारपीट व पैसे छीनने की घिनोनी हरकत की गई हैं समाज में भाईचारा को आग लगाने वाले व्यक्ति पर मुकदमा दर्ज कर गिरफ्तार किया जाए
साथ ही एनएएस की कार्यवाही भी हो
लखनऊ यूनिवर्सिटी में यह मस्जिद 100 सालों से बनी हैं लेकिन विश्विद्यालय प्रशासन विश्विद्यालय को नफरत की प्रयोगशाला बनाना चाहता हैं जबकि छात्र एकजुट है। जात पात में नही बाटेंगे
मिलकर हम संघर्ष करेंगे। @lu
UP : लखनऊ यूनिवर्सिटी की मस्जिद के बाहर छात्रों का प्रदर्शन
◆ यूनिवर्सिटी के अंदर बनी लाल बारादरी मस्जिद के बाहर मस्जिद बंद होने को लेकर छात्रों ने किया प्रदर्शन
◆ छात्र मस्जिद का दरवाजा खुलवाने के लिए धरने पर बैठे हैं
#UttarPradesh | Uttar Pradesh | #LucknowUniversity | Lucknow University
UP : लखनऊ यूनिवर्सिटी की मस्जिद के बाहर छात्रों का प्रदर्शन
◆ यूनिवर्सिटी के अंदर बनी लाल बारादरी मस्जिद के बाहर मस्जिद बंद होने को लेकर छात्रों ने किया प्रदर्शन
◆ छात्र मस्जिद का दरवाजा खुलवाने के लिए धरने पर बैठे हैं
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अगर हाथ में “भाजपा” के झंडे की जगह इन “पत्थरबाज़ों” के सर पर टोपी होती तो पूरी गोदी मीडिया ने इनके “आतंकी” और “दंगाई” बता दिया होता ।
भाजपा शासित राज्य की पुलिस ने इन पर गोलियाँ चला दी होती ।
यूथ कांग्रेस का अहिंसक लोकतांत्रिक प्रदर्शन “शर्मनाक” था तो फिर भाजपा का हिंसक प्रदर्शन “राष्ट्रवादी” कैसे ??
अब सारे गोदी मीडिया के मुँह में दही कैसे जम गई है ?
क्या जवाब दे सकती है देश की बिकी हुई मीडिया ??
मजहब से ऊपर रिश्ता... बिजनौर में बिना भाई की बहन को मिला 'मुस्लिम परिवार' का साथ, रोजे में घर पहुंचकर भरा 'भात'
Bijnor News: बिजनौर के गांव गाजीपुर कुतुब में रिश्तों की एक ऐसी डोर देखने को मिली, जो दो अलग-अलग मजहबों के बीच पीढ़ियों से चली आ रही मोहब्बत को दर्शाती है. चतर सिंह और अल्लादिया की वर्षों पुरानी दोस्ती को आज उनकी संतानों ने एक भावुक रस्म के जरिए जिंदा रखा.
खबर https://t.co/M9LBTPv9kq
#BijnorNews #HinduMuslimUnity #CommunalHarmony #Roza #ATCard #AajTakSocial
भंवरलाल शर्मा को पश्चिमी राजस्थान में युवकों से लाखों रुपये ऐंठने के लिए लड़कियों और महिलाओं की तस्करी कर जबरन शादी कराने का नेटवर्क संचालित कर रहा था। भंवर लाल एक संगठित गिरोह के माध्यम से आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों की लड़कियों को निशाना बनाता था। उन्हें नौकरी या बेहतर जीवन के नाम पर पश्चिम बंगाल, असम, बिहार, उत्तर प्रदेश और झारखंड से राजस्थान लाया जाता था। इसके बाद सीमावर्ती जिलों में रहने वाले अविवाहित पुरुषों से मोटी रकम लेकर उनकी शादी करवा दी जाती थी। केरला फाइल जैसे मिथ्य के माध्यम से समाज में नफ़रत फैलाने वाला ‘जागा हुआ हिंदू’ इस ख़बर पर पूर्णतः मौन रहेगा, क्योंकि भंवर लाल शर्मा उसके पाठ्यक्रम में ही नहीं है। ह्वाटसप ‘विषद्यालय’ ने उसे जो पाठ्यक्रम दिया है उसमें सिर्फ ‘अब्दुल’ ही है। लिहाज़ा ‘जागे हुए हिंदू जेन-जी’ से भंवर लाल की करतूत के खिलाफ उद्वेलित होनी की उम्मीद ना रखें।
उत्तर प्रदेश में बिजली बिलों पर 10% फ्यूल सरचार्ज और एफपीपीए चार्ज के नाम पर की जा रही अतिरिक्त वसूली अब गंभीर जनचिंता का विषय बन चुकी है। महंगाई के इस दौर में घरेलू उपभोक्ताओं, छोटे व्यापारियों और उद्योगों पर अचानक डाला गया यह अतिरिक्त बोझ अनुचित और अन्यायपूर्ण है।
जिन दरों पर बिजली खरीदी जा रही है, उससे कई गुना अधिक मूल्य पर बेची जा रही है। ऐसी आवश्यक सेवा में सीमित लागत वृद्धि का पूरा भार सीधे उपभोक्ताओं पर डालना अनुचित है। बिजली विभाग पहले से ही ऊँची दरें वसूल रहा है, इसलिए अतिरिक्त लागत का समायोजन प्रबंधन सुधार और कार्यकुशलता बढ़ाकर किया जाना चाहिए, न कि सीधे जनता पर बोझ डालकर।
प्रदेश में ऐसे अनेक परिवार हैं, जिनके लिए सामान्य बिजली बिल जमा करना भी कठिन होता है। लोग अपने जरूरी खर्चों में कटौती करके बिल भरते हैं, फिर भी उन्हें अतिरिक्त सरचार्ज से कोई राहत नहीं दी गई। यह व्यवस्था की संवेदनहीनता को दर्शाता है।
उद्योग संगठनों का भी कहना है कि यह बढ़ोतरी छोटे और मध्यम उद्योगों की कमर तोड़ देगी। उत्पादन लागत बढ़ेगी, प्रतिस्पर्धा घटेगी और रोजगार पर भी असर पड़ेगा।
हमारा सवाल है मुख्यमंत्री @myogiadityanath जी, थोड़ा सा खर्च बढ़ने की सज़ा उपभोक्ता क्यों भुगतें?
बिना पारदर्शी सूचना के बिलों में “ईंधन एवं बिजली अधिभार / एफपीपीए चार्ज” जोड़कर हजारों रुपये की अतिरिक्त राशि वसूलना उपभोक्ता अधिकारों के खिलाफ है। छोटे उपभोक्ताओं पर यह अतिरिक्त बोझ अस्वीकार्य है।
@UPGovt से हमारी मांग है कि-
1. 10% फ्यूल सरचार्ज को तुरंत वापस या स्थगित किया जाए।
2. छोटे उपभोक्ताओं और MSME इकाइयों को विशेष राहत दी जाए।
3. बिल निर्धारण और अधिभार की पूरी प्रक्रिया पारदर्शी बनाई जाए।
4. विद्युत वितरण कंपनियों के पास जमा अधिशेष धन से उपभोक्ताओं को राहत दी जाए।
बिजली आवश्यक सेवा है — अतिरिक्त वसूली का माध्यम नहीं।
@aksharmaBharat