@KavitaTwoFifty सोचा मनुष्य ने,
बुद्धि बनाई,
लोहे में साँसें सजाई।
डेटा है भोजन,
सीखना काम,
हर मुश्किल को
कर दे आसान।
न रुके, न झुके,
चलता ही जाए,
AI हर समस्या का समाधान लाए।
AI नयी राह दिखाए,
राह बनाए।
#Kavita250@KavitaTwoFifty
सदा न फूलै केतकी, सदा न सावन होय।
सदा न विपदा रह सके, सदा न सुख भी होय॥
सदा न मौज बसन्त री, सदा न ग्रीष्म भाण।
सदा न जोवन थिर रहे, सदा न संपत माण॥
सदा न काहू की रही, गल प्रीतम की बांह।
ढ़लते ढ़लते ढ़ल गई, तरवर की सी छाँह॥
~ अज्ञात