#WATCH | Noida, UP: On the cancellation of the NEET-UG 2026 exam, Educator Khan Sir says, "This is nothing short of playing games with the lives of lakhs of students. Their confidence is being shattered, and the most unfortunate part of this whole situation is that just two years ago, in 2024, the exact same incidents occurred. A CBI inquiry was conducted, yet it yielded absolutely no results. The most astonishing thing is that no government agency detected or reported this paper leak; rather, it was the students themselves who were the first to alert the government to the situation..."
इनसे मिलिए- ये हैं IAS सुबोध कुमार सिंह।
जब 2024 में NEET का पेपर लीक हुआ था, लाखों बच्चों की मेहनत बर्बाद हुई थी, तब सुबोध कुमार सिंह NTA के DG थे।
लोगों के गुस्से को शांत करने के लिए मोदी सरकार ने चाल चली और इन्हें पद से हटा दिया।
लेकिन जैसे ही लोगों का गुस्सा शांत हुआ, इन्हें स्टील मिनिस्ट्री में पोस्टिंग दे दी और अब ये छत्तीसगढ़ में मुख्यमंत्री के Principal Secretary हैं।
BJP सरकार में इसी तरह छात्रों के भविष्य से खिलवाड़ करने वालों को इनाम दिया जाता है, उन्हें बड़े-बड़े पदों पर बैठाया जाता है।
कारण साफ है- पेपर लीक के इस गोरखधंधे में BJP सरकार खुद ही साझेदार है, जिसका खामियाजा देश के मेहनती छात्रों को चुकाना पड़ रहा है।
BJP का फंडा साफ है- जितनी बड़ी चोरी, उतना बड़ा इनाम
देश के युवाओं के सामने एक गंभीर बात रखना चाहता हूँ।
एक काम कीजिए - खुद Google कीजिए: “NEET 2024 की भयंकर चोरी के दौरान NTA का DG कौन था, और मोदी सरकार ने उसे आज कहां बैठाया है?”
देखा? समझ आया?
BJP इसी तरह आप जैसे लाखों मेहनती विद्यार्थियों के भविष्य से खिलवाड़ करने वालों को इनाम देती है - उनकी रक्षा करती है, ऊपर से उन्हें तरक्की देती है।
साफ़ है - मोदी जी और भाजपा आपके भविष्य की चोरी में ख़ुद साझेदार हैं।
जिस बाज़ार में आपकी मेहनत, आपके सपने नीलाम हो रहे हैं, उसका एक ही उसूल है - जितनी बड़ी चोरी, उतना बड़ा इनाम।
नरेंद्र मोदी ने अभी शपथ भी नहीं ली है और NEET परीक्षा में हुई धांधली ने 24 लाख से अधिक स्टूडेंट्स और उनके परिवारों को तोड़ दिया है।
एक ही एग्जाम सेंटर से 6 छात्र मैक्सिमम मार्क्स के साथ टॉप कर जाते हैं, कितनों को ऐसे मार्क्स मिलते हैं जो टेक्निकली संभव ही नहीं है, लेकिन सरकार लगातार पेपर लीक की संभावना को नकार रही है।
शिक्षा माफिया और सरकारी तंत्र की मिलीभगत से चल रहे इस ‘पेपर लीक उद्योग’ से निपटने के लिए ही कांग्रेस ने एक रोबस्ट प्लान बनाया था। हमने अपने मैनिफेस्टो में कानून बना कर छात्रों को ‘पेपर लीक से मुक्ति’ दिलाने का संकल्प लिया था।
आज मैं देश के सभी स्टूडेंट्स को विश्वास दिलाता हूं कि मैं संसद में आपकी आवाज़ बन कर आपके भविष्य से जुड़े मुद्दों को मज़बूती से उठाऊंगा।
युवाओं ने INDIA पर भरोसा जताया है - INDIA उनकी आवाज़ को दबने नहीं देगा।
एक बार फिर से NEET UG की परीक्षा में बड़े पैमाने पर गड़बड़ी को लेकर खबरें छप रही हैं। भाजपा राज में पिछले कई साल से परीक्षाओं में व्याप्त भ्रष्टाचार देश के युवाओं से उनका भविष्य छीन रहा है। इस बार भी तकरीबन 23 लाख छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़ किया गया।
NEET जैसी परीक्षाओं के लिए बच्चे जी-जान से मेहनत करते हैं। माता-पिता अपना सबकुछ दांव पर लगाते हैं ताकि बच्चों का भविष्य बने। लेकिन हर परीक्षा भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ जाती है। संसद में पेपर लीक के खिलाफ लाये गये कथित सख्त कानून का क्या फायदा हुआ अगर ज़मीनी तौर पर वही भ्रष्टाचार जारी है?
प्रधानमंत्री जी देश के युवाओं के प्रति जवाबदेह हैं। युवाओं का भविष्य बर्बाद करने का यह सिलसिला कब तक चलेगा?
हर साल 7 करोड़ युवा इंजीनियरिंग, मेडिकल कॉलेजों में दाखिले और सरकारी नौकरियों के लिए परीक्षाएँ देते हैं। लेकिन राजनीतिक संरक्षण में चल रहे पेपर लीक गिरोह इन युवाओं का भरोसा और हौसला तोड़ रहे हैं।
पेपर लीक में शामिल माफ़िया और उन्हें संरक्षण देने वाले नेता देश के दुश्मन हैं। ये लोग देश की नींव को खोखला कर रहे हैं। सरकारें इस अपराध की साझेदार बन चुकी हैं।
इसके खिलाफ युवाओं को देशभर में एक निर्णायक लड़ाई छेड़नी होगी।
NEET 2026 के पेपर लीक की खबर सुनी।
परीक्षा नहीं - NEET अब नीलामी है।
कई सवाल परीक्षा से 42 घंटे पहले WhatsApp पर बिक रहे थे।
22 लाख से ज़्यादा बच्चे साल भर रात-रात भर आँखें जलाकर पढ़ते रहे और एक रात में उनका भविष्य बाज़ार में सरेआम नीलाम हो गया। यह पहली बार नहीं है। 10 साल में 89 पेपर लीक - 48 बार दोबारा परीक्षा। हर बार वही वादे, और फिर वही ख़ामोशी।
मोदी जी, जब आप अपनी हर नाकामी का बिल जनता पर डालते हैं, तो ग़रीब के बच्चों का भविष्य भी उसी बिल में आता है।
22 लाख बच्चों का भरोसा टूटा है। और मोदी सरकार से बड़ा ख़तरा भारत के युवाओं के सपनों के लिए कोई नहीं।
मैं भारत के युवा के साथ हूँ। यह वक़्त बेहद मुश्किल है - मैं जानता हूँ। लेकिन यह व्यवस्था ऐसे नहीं रहेगी। हम मिलकर इसे बदलेंगे।
जस्टिस स्वर्णकान्ता शर्मा जी से न्याय मिलने की मेरी उम्मीद टूट चुकी है।
अपनी अंतरात्मा की आवाज़ सुनते हुए, गांधी जी के सिद्धांतो को मानते हुए और सत्याग्रह की भावना के साथ, मैंने फ़ैसला किया है कि मैं इस केस में उनके सामने पेश नहीं हूंगा और कोई दलील भी नहीं रखूँगा।
उत्तर प्रदेश के ग़ाज़ीपुर में विश्वकर्मा समाज की एक बेटी के साथ बलात्कार और निर्मम हत्या - और फिर परिवार को FIR दर्ज कराने से रोकने के लिए धमकियाँ, हिंसा।
हाथरस, कठुआ, उन्नाव और आज ग़ाज़ीपुर - यह एक पैटर्न है। मणिपुर की बेटी ने न्याय की राह देखते-देखते दम तोड़ दिया।
हर बार वही चेहरा - पीड़िता दलित, पिछड़ी, आदिवासी, ग़रीब।
हर बार वही सच्चाई - अपराधी को संरक्षण, पीड़ित को प्रताड़ना।
हर बार वही चुप्पी - सत्ता की, जिन्हें बोलना चाहिए था।
जिस देश और प्रदेश में माँ-बाप को अपनी बेटी की FIR लिखवाने के लिए भीख माँगनी पड़े, उस देश की सरकार को सत्ता में रहने का कोई नैतिक अधिकार नहीं।
दोषी पुलिस अफ़सरों पर कार्रवाई हो, परिवार को सुरक्षा मिले - उच्च स्तरीय जांच हो और तुरंत न्याय मिले।
मोदी जी, मुख्यमंत्री जी जवाब दीजिए - आपके राज में बेटियाँ इतनी असुरक्षित क्यों हैं?
ऐसे हालात में न्याय माँगा नहीं, छीना जाता है - और हम छीनकर लाएँगे।