जूही मुस्लिम का नाम आया मीडिया चिलाने लगा बाक़ी दो हिंदू थे उनका नाम नहीं लिया और पुलिस ने भी उनको कुछ नहीं कहा👇
जब अपराध एक जैसा तो सजा एक जैसी क्यूं नहीं ???
बेटी ने जाति से बाहर जीवनसाथी चुना, तो सवाल सिर्फ परिवार की पसंद का नहीं रह जाता—सवाल उसकी अपनी ज़िंदगी चुनने के अधिकार का भी है।
क्या जाति की दीवारें बेटी की autonomy से बड़ी हैं?
#Caste#WomenAutonomy#InterCasteMarriage#GenderEquality
BREAKING: SSR ह... त्याकांड का सबसे सनसनीखेज सबूत लीक! 😱
ये तस्वीरें सिर्फ CCTV फुटेज नहीं हैं, ये बॉलीवुड के सबसे बड़े झूठ का पर्दाफाश हैं!
2020-06-14, रात 11:48:32 - बेडरूम में आखिरी बार कौन था?
किचन वाला ये सीन क्यों आज तक छुपाया गया?????
इस 21 मिनट के खोज-परक वीडियो में ऐसे-ऐसे परिस्थितिजन्य साक्ष्य और टाइमलाइन का खुलासा हुआ है जिसे सुनकर आपके रोंगटे खड़े हो जाएंगे।
यकीन मानिए, इस वीडियो के बाद इस केस में बहुत बड़ा बवंडर मचने वाला है। अगर CBI ने इस एंगल से जांच की तो बड़े-बड़े नाम बेनकाब होंगे!
पूरा वीडियो बहुत ध्यान से देखिए और अपना निष्कर्ष कमेंट में बताइए - क्या ये आ.. त्म।ह।। त्या थी या ह.. त्या?
क्या आपने एक ऐसी औरत को देखा है जो कभी लड़की -लड़के को संबंध बनाते हुए पकड़ लेती है और बात छुपाने के लिए लड़के से अपने साथ संबंध बनाने की मांग करती है?!
नहीं न!?
लेकिन मैने ऐसी सैकड़ों घटनाएं सुनी है जहां अगर कोई लड़का, किसी लड़का - लड़की को संबंध बनाते हुए पकड़ लेता है तो लड़की को ब्लैकमेल कर संबंध बनाने की मांग करता है।
ऐसा इसलिए क्योंकि यह समाज "पुरुषवाद" के ज़हर में घुला हुआ है।
अपना समाज लड़की को इज़्ज़त का ठेका दे दिया है और कुछ भी होने पर लड़की को गलत ठहरा देता है।
क्यों भाई क्यों?!
पहली बात तो गलत कुछ भी नहीं है अगर दोनों अपनी सहमति से प्रेम संबंध बना रहे हैं।
दूसरी बात लड़कियों को इज़्ज़त का ठेकदार बनाकर उसकी इज़्ज़त लूटना बंद करो।
ऐसे हैवानो का औज़ार काट देना चाहिए।
बिहार के जमुई में बीच सड़क पर एक लड़की के साथ बलात्sकार की कोशिश की गई. कहाँ हैं मोदीजी? बेटियाँ बच नहीं पा रही हैं. आप बेटियों को बचा नहीं पा रहे हैं या उन्हें बचाना ही नहीं चाहते? खैर! बेटियों से माफ़ी मंगवाने वालों से बेटियों का सम्मान बचाने की उम्मीद करना मूर्खता ही है
@narendramodi@AmitShah
डॉ. सोनेलाल पटेल जी ने पटेल समाज को एकजुट कर उसकी सामाजिक-राजनीतिक ताकत खड़ी की और कमेरा समाज के हर वर्ग को साथ जोड़ा।
उनकी राजनीति का मूल मंत्र था—हर समाज की हिस्सेदारी, हर कमेरा की भागीदारी और सबके सम्मान की लड़ाई।
दिल्ली पुलिस की सारी “बहादुरी” क्या छात्रों और महिला पत्रकारों पर लाठियाँ बरसाने के लिए ही बची है? कहाँ हैं मोदी जी? ये कबूलनामा सुना या नहीं? अमित शाह जी, आप तक आवाज़ पहुँची या नहीं?
रौब और रसूख़ का अंदाज़ देखिए - मानो सत्ता से लेकर पुलिस-प्रशासन तक सबकी डोर इनके ही हाथ में हो! सवाल सिर्फ़ एक व्यक्ति के दावे का नहीं है, सवाल उस व्यवस्था का है जिसमें कोई इतनी बेख़ौफ़ी से प्रधानमंत्री, गृहमंत्री और दिल्ली पुलिस तक का नाम लेकर अपना प्रभाव जताने लगे।
अगर ऐसे दावों पर भी सत्ता और पुलिस खामोश रहें, तो जवाबदेही किसकी होगी?
सोशल मीडिया कंटेंट क्रिएटर निशु आजाद के पिता श्री संजय कुमार पर हमला जातीय विद्वेष के कारण सत्ता संरक्षण के दंभ पर किया गया था, अब यह बातें पूर्णतया स्पष्ट है।
भाजपा सरकार के रहते हुए वंचित वर्ग के साथ हो रहे अन्याय की श्रृंखलाएं समाप्त नहीं हो सकती। सत्ता परिवर्तन कर व्यवस्था बदलना पड़ेगा।
कठोर वैधानिक कार्यवाही तत्काल की जाये।
“तुम हमारे गिलास में पानी कैसे पी लिए?”
बस यह एक सवाल सुनिए और फिर उन तमाम दावों को याद कीजिए कि अब जाति कहाँ बची है, भेदभाव तो कब का खत्म हो चुका है, अब तो सब बराबर हैं!
जिस पानी पर किसी जाति का अधिकार नहीं, जिस प्यास में कोई ऊँच-नीच नहीं, उसी पानी का एक गिलास आज भी किसी इंसान को उसकी जाति याद दिला देता है। सोचिए, उस व्यक्ति पर क्या गुजरती होगी जिसे केवल पानी पी लेने भर से उसकी सामाजिक हैसियत बताने की कोशिश की जाए।
जातिवाद केवल किताबों में दर्ज इतिहास नहीं है। वह आज भी भाषा, व्यवहार, अपमान और रोज़मर्रा की छोटी-छोटी घटनाओं में दिखाई देता है।
इसलिए सवाल आरक्षण कब खत्म होगा का नहीं, सवाल यह है - जाति के नाम पर यह अपमान कब खत्म होगा?
भाजपाई JPNIC जैसी अद्भुत सिग्नेचर बिल्डिंग को सिर्फ़ बेच सकते हैं, उतना बड़ा कभी सोच नहीं सकते हैं क्योंकि भ्रष्टाचार ने उनकी सोच को संकीर्ण, कुंठित और संकुचित कर दिया है।
भाजपा जाएगी, बड़ी सोच आएगी!