Just a reminder, if you put forth your demands in a peaceful way like General Category (For UGC), you’ll not be allowed to protest & people will be detained.
If you cause riots like cockroaches, govt will allow you protest site, give you legitimacy, & accept your demand.
हमारे देश में जो सिस्टम में फैक्ट ,प्रूफ से बदलाव की बात करेगा , उसको FIR मिलेगी,
जो अराजकता, गुंडागर्दी और अन्य तरीकों से सरकार को गाली देगा, ये सरकार उसके साथ झुक जायेगी
घंटे का लोकतंत्र
देश यह कभी नहीं भूलेगा की यह आग @dpradhanbjp की लगाई हुई है,
माननीय @narendramodi जी, आज जहाँ छात्रो को अपनी शिक्षा पर फोकस करना चाहिए था वहाँ कैंपस में सामान्य वर्ग की मॉब लिंचिंग हो रही है और इसके 100% जिम्मेदार धर्मेंद्र प्रधान है, देश का सामान्य वर्ग आपसे अपेक्षा करता है की आप अविलंब कारवाई करते हुए धर्मेंद्र प्रधान को पार्टी से निष्कासित करे,
I hope the government and administration are awake and active.
No girl, regardless of caste, class or background, deserves to be violated so brazenly.
This is not just a crime. It is a shame on all of us.
I can only imagine what will happen if new UGC laws are implemented.
जातिवाद के नाम पर शिक्षा के मंदिर को हमने क्या बना दिया ?
एक लड़की को लड़कों ने घेर रखा है, सरेआम उसके साथ हाथापाई की जा रही है.
इनका नाम रूचि तिवारी है, पेशे से यूट्यूबर है. जरा सोचिये किसी भी और जाति धर्म से जुड़ी कोई दूसरी लड़की होती तो देश में क्या हो रहा होता. जाति के नाम पर सामान्य वर्ग के बच्चों के साथ घिनौना व्यवहार हो रहा है. उनके साथ जातिवादी टिप्पणी की जा रही है. ये सब हो रहा है देश की राजधानी दिल्ली में.
बेहद शर्मनाक, घृणा से भरा हुआ .
हम कहाँ थे और कहां जा रहे हैं?
“They wanted to parade me naked. My clothes were torn. I was touched inappropriately. All this because I am a Brahmin.”
Spine chilling testimony of Ruchi Tiwari. Would those claiming she provoked the attack on her also justify Godhra riots as a reaction to 59 Hindus burnt alive?
दिल्ली यूनिवर्सिटी में पीटने वाले भी छात्र, पिटने वाले भी छात्र लेकिन “एक हैं तो सेफ़ हैं” वालों के कांड की वजह से अब सब की पहचान SC/ST/OBC और जनरल की बन कर रह गई है।
UGC ने कैसे एक साथ पढ़ने वाले छात्रों को बाँटकर रख दिया है खुल्ला दिखने लगा है।
जो लोग कह रहे थे कि “किसी के साथ अन्याय नहीं होने दिया जाएगा” वो कहाँ हैं?
कुछ मंत्री कह रहे थे कि UGC के नए नियमों का दुरुपयोग नहीं होगा, लेकिन हालात तो नियम लागू होने से पहले ही साफ दिखने लगे हैं।
जिन्हें मिलकर नक़ल माफिया और पेपर लीक के खिलाफ लड़ना था, वे आज जात-पात में बँट गए हैं। असली लड़ाई सिस्टम से होनी चाहिए थी, पर हम आपस में उलझ गए। एक फैसले ने ऐसी दरार पैदा कर दी है, जिसे भरने में शायद दशकों लग जाएँ।
पैदा हुई तो सरकारी योजनाओं से वंचित हुई क्योंकि ठाकुर थी।
स्कूल गई तो सरकारी छात्रवृतियों से वंचित हुई क्योंकि ठाकुर थी।
कॉलेज गई तो सबसे ऊँचा कटऑफ लाना पड़ा क्योंकि ठाकुर थी।
नौकरी करने गई तो सबसे महंगा फॉर्म भरना पड़ा क्योंकि ठाकुर थी ।
फिर क्यों ना यह लड़की गर्व से ख़ुद को ठाकुर कहे।
-मैं तो कहता हूँ सरकार को अनारक्षित वर्ग के आधार कार्ड पर लिख के देना चाहिए कि यह वहीं त्यागी लोग है, जो इस देश में परजीवियों को पाल रहे हैं।
कैसे मरोगे बे जीसी? भाजपाई हलाल या कॉन्ग्रेसी झटके से?
अब कुछ लोग थ्योरी लिख कर बता रहे हैं कि विरोध कैसे करना चाहिए। विरोध ऐसा होना चाहिए कि ‘लव यू’ ही बोलो पर थोड़ा कड़े मन से बोलो!
समर्थन जब आँख मूँद कर, विश्वास के साथ किया था तब तो आप राजनीति विज्ञान के सूत्र तो नहीं समझा रहे थे कि इतना भी समर्थन मत दे दो कि सामने वाला पगला ही जाए। तब तो बहुत आनंद हो रहा था कि ‘मोदी जी ने किया है तो सही ही किया होगा’।
अब जो विरोध है वह किसी एक उपक्रम का विरोध नहीं है, वह ऐसे कई मूर्खतापूर्ण, तुष्टिकरण की सीमा के पार जा कर, सामान्य वर्ग के लोगों की आँखों में उँगली करते हुए पूछने का है कि ‘यदि अब तुम्हारे पिछवाड़े में बाँस ही डाल दूँ, तो तुम मोदी का क्या उखाड़ लोगे?’
अभी सबको याद आ रहा है कि आलोचना तो रचनात्मक होनी चाहिए, नस मत काटो, ब्लैकमेल मत करो… यही बात भाजपा को क्यों नहीं समझा पा रहे कि समर्थन भी नीतिगत हो सकता है, समर्थकों की पीड़ा का उपहास मत करो, नेता-मंत्री-चिरकुट आइटी सेलियों से कटाक्ष मत करवाओ…
वहाँ तो तुम रुके नहीं। लगे रहे क्योंकि तुम्हें अश्लील आनंद मिल रहा था कि ‘वो तो साला कॉन्ग्रेसी है’, ‘उसने तो 2013 में कुरान को डिफेंड किया था’, ‘ये तो पेड आउटरेज कर रहे हैं’, ‘आज का आउटरेज सूचकांक थोड़ा कम है’। ये तो आप ही के सामूहिक शब्द थे, तब तो आप दूसरों को अपमानित करने से पहले नहीं सोच रहे थे।
अब जो भी है, वह केवल यूजीसी नहीं है। अब हर नीति, हर बात, आज की हो या पहले की, काट कर लाई जाएगी। हम उसे केवल अभी आक्रमण के लिए प्रयोग नहीं करेंगे, बल्कि उस वीडियो से हम यह दिखाना चाह रहे हैं कि हमने तुम्हें ऐसी ही हरकत पर इग्नोर किया था, विष तो समाज में तुम तब भी घोल रहे थे।
जल में एक बूँद विष मिले, तो वह दिखता नहीं। दस बूँद मिले तो घुल जाता है, हल्का रंग बदलता है। पर वही मात्रा जब आधी हो जाए तो वह जल नहीं रहता, वह विष हो जाता है। यूजीसी वह बूँद है जिसने जल का रंग और स्वभाव बदल दिया है। यूजीसी सामाजिक रसायन के घोल में ब्यूरेट से गिरती वह अंतिम बूँद है जो पूरे फ्लास्क का रंग बदल देती है।
भाजपा के चाटुकार यह समझे या न समझें, उगे चाँद को न देखने से चंद्र अस्त नहीं हो जाता। यूजीसी पर आप जितना प्रतिकार देख रहे हो, यह प्रबल ही होगा। इस पर आप कोई भी क्रेडिट लेना चाहोगे, गाली ही सुनोगे। इसे आप किसी योजना के तहत बढ़ने दोगे कि ठीक है, लोग टूटी सड़क पर बात नहीं कर रहे, वह भी मूर्खता ही होगी।
अब नीति और क्रियान्वयन की हर छोटी गलती को वही लोग मॉक करेंगे, बड़ा बना कर दिखाएँगे जो अभी तक इग्नोर करते थे। सामान्य वर्ग यह समझ चुका है कि उसका चुनाव हलाल और झटके में है।
उसका मरना तय है, पर भाजपा गले पर छुरी धीरे चलाती है, कहती है हाथ से दबा कर रखो, बचे रहोगे। फिर दो दिन बाद नया चीरा मारती है। कॉन्ग्रेस से भय यह है कि एक बार में गड़ाँसा मार देगी।
जिसको जो पसंद है, वह मृत्यु का उचित मार्ग चुनेगा। विकल्प नहीं है, तो विकल्प उत्पन्न हो जाएगा। भाजपा भी कभी दो सीट पर थी, कॉन्ग्रेस का एकछत्र राज था। दोनों की स्थिति आज क्या है?
भाजपा तो स्वयं ही कॉन्ग्रेस के सारे कार्य ढोल बजा कर कर कर रही है, फिर उसका भय क्यों दिखा रहे हो। यदि तुम्हें यह घमंड है कि सामान्य वर्ग की जातियाँ वोटबैंक नहीं हैं, तुम्हारे वैचारिक बाप के चेहरे की चमक कम नहीं कर सकते, तो तीन किलोमीटर लम्बे लेख क्यों लिख रहे? इग्नोर करो।
इग्नोर नहीं कर पा रहे क्योंकि तुम जानते हो कि जिता सकने के लिए संख्या बल अधिक चाहिए, पर हरा सकने की क्षमता तो एक-दस-सौ-हजार-दस हजार में भी होती है। और सामान्य वर्ग न केवल वोट देता है, बल्कि वह वोट प्रभावित भी करता है।
गेंद भाजपा के पाले में है कि उन्हें क्या करना है। पेड ट्रेंड 25 दिन नहीं चलते। यदि तुम्हें यह ऑर्गेनिक नहीं लग रहा, यदि मैं कॉन्ग्रेसी एजेंट हूँ, तो बधाई हो- आप जीत गए हैं सात करोड़!
यह बड़े दुख व चिन्ता की बात है कि पिछले कुछ समय से अकेले यू.पी. में ही नहीं बल्कि अब तो फिल्मों में भी ’पंडत’ को घूसखोर आदि बताकर पूरे देश में जो इनका अपमान व अनादर किया जा रहा है तथा जिससे समूचे ब्राह्मण समाज में इस समय ज़बरदस्त रोष व्याप्त है, इसकी हमारी पार्टी भी कड़े शब्दों में निन्दा करती है। ऐसी इस जातिसूचक फिल्म (वेब सीरीज) ’घूसखोर पंडत’ पर केन्द्र सरकार को तुरन्त प्रतिबन्ध लगाना चाहिये, बी.एस.पी. की यह माँग। साथ ही, इसको लेकर लखनऊ पुलिस द्वारा प्राथमिकी दर्ज करना उचित कदम।
I had 7 reserved caste workers (1 ST, 2 SC & 4 OBC) from UP & Bihar working at my company. They shared Anti-Brahman posts on WhatsApp in support of new #UGC rules.
I fired all 7 reserved caste workers and will only employ general category people now.
#UGC_RollBack#BoycottSCST