#गुड्डा_गुड्डी_का_खेल_बंद_करो
♦️ श्रीमद्देवीभागवत, भाग 1, स्कन्ध 4, अध्याय 13, श्लोक 27-29 और श्रीमद्देवीभागवत, भाग 1, स्कन्ध 5, अध्याय 27, श्लोक 31-33 में स्पष्ट लिखा है कि आयु के समाप्त होने पर ब्रह्मा, विष्णु व शिव (महेश) की भी मृत्यु होती है।
#ढंग_की_पूजा_करो
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शिव जी हैं जन्म-मृत्यु में; जिसका प्रमाण श्रीमद्देवीभागवत, स्कंध 3, अध्याय 4-5 में है। जबकि गीता अध्याय 15 श्लोक 17 के अनुसार उत्तम पुरुष, अर्थात अविनाशी पूर्ण परमात्मा तो अन्य है जो सर्व का धारण पोषण करने वाला है।
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गुड्डा गुड्डी का खेल बंद करो, शिव जी की सात साधना करो।
क्या भगवान शिव अविनाशी हैं❓उनकी सत साधना किस प्रकार की जाती है।
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#गुड्डा_गुड्डी_का_खेल_बंद_करो#ढंग_की_पूजा_करो कांवड़ यात्रियों को अक्सर बम-बम बोलते हुए देखा जा सकता है यानी उन्होंने शिव जी का मूल मन्त्र छोड़ मनमाना मंत्र प्रारंभ कर दिया; जिसका न गीता में वर्णन है और न वेद में।
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कांवड़ लाने का प्रमाण न गीता में है और न वेद में और न परमात्मा प्राप्त संतों की वाणी में। इसलिए यह एक शास्त्र विरुद्ध साधना है और इस बारे में श्रीमद्भागवत महापुराण, स्कन्ध 5, अध्याय 26, श्लोक 15 में भी लिखा है l
जल चढ़ाने और बेलपत्र भटकाने से पाप नहीं कटते, इसके लिए पूर्ण परमात्मा की शरण जरूरी है। अब नासमझी छोड़िए, #गुड्डा_गुड्डी_का_खेल_बंद_करो और वेदों-गीता आधारित #ढंग_की_पूजा_करो। जगतगुरु तत्वदर्शी संत रामपाल जी महाराज का सत्संग ही जीवन का सही मार्ग दिखाता है।
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शिव जी हैं जन्म-मृत्यु में; जिसका प्रमाण श्रीमद्देवीभागवत, स्कंध 3, अध्याय 4-5 में है। जबकि गीता अध्याय 15 श्लोक 17 के अनुसार उत्तम पुरुष, अर्थात अविनाशी पूर्ण परमात्मा तो अन्य है जो सर्व का धारण पोषण करने वाला है।
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कांवड़ यात्रियों को अक्सर बम-बम बोलते हुए देखा जा सकता है यानी उन्होंने शिव जी का मूल मन्त्र छोड़ मनमाना मंत्र प्रारंभ कर दिया; जिसका न गीता में वर्णन है और न वेद में; इसलिए यह एक शास्त्र विरुद्ध साधना है।और
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शिव जन्म और मृत्यु के चक्र में हैं; इसका प्रमाण श्रीमद् देवी भागवतम्, स्कंद 3, अध्याय 4-5 में मिलता है। जबकि गीता के अध्याय 15 श्लोक 17 के अनुसार, उत्तम पुरुष, अर्थात् अविनाशी पूर्ण ईश्वर, एक अन्य हैं जो सभी के पालनहार हैं
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और गीता अध्याय 16 श्लोक 23 के अनुसार इससे कोई लाभ नहीं होता। शिव जी और पूर्ण परमात्मा कि भक्ति का मूल मन्त्र जानने के लिए देखिए Sant Rampal Ji Maharaj YouTube Channel
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♦️ कांवड़ यात्रियों को अक्सर बम-बम बोलते हुए देखा जा सकता है यानी उन्होंने शिव जी का मूल मन्त्र छोड़ मनमाना मंत्र प्रारंभ कर दिया; जिसका न गीता में वर्णन है और न वेद में; इसलिए यह एक शास्त्र विरुद्ध साधना है
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कांवड़ लाने का प्रमाण न गीता में है और न वेद में और न परमात्मा प्राप्त संतों की वाणी में। इसलिए यह एक शास्त्र विरुद्ध साधना है
वैदिक मार्ग को छोड़कर जो पाखंड यानी कर्मकांड करता है उसे नरक में डाला जाता है।
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सावन में सबसे ज्यादा जीव उत्पन्न होते हैं जिससे कांवड़ के लाने में सबसे ज़्यादा जीव मरते हैं।
इस विषय में परमेश्वर कबीर जी ने कहा है:
“ कबीर, तीर्थ कर कर जग मुवा, ऊड़े पानी न्हाय। रामहि राम ना जपा, काल घसीटें जाय।।
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#गुड्डा_गुड्डी_का_खेल_बंद_करो#शिवजी_की_सत_साधना_करो
कांवड़ यात्रा और शिवलिंग पर जल चढ़ाने की परंपरा के बीच शास्त्रसम्मत भक्ति को समझना जरूरी है। गीता जी अध्याय 16 श्लोक 23 बताया है कि शास्त्रविधि का त्याग करके मनमाना आचरण करने से न सिद्धि मिलती है, न सुख मिलता।
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क्योंकि शिव हैं जन्म-मृत्यु में; जिसका प्रमाण श्रीमद्देवीभागवत, स्कंध 3, अध्याय 4-5 में है। जबकि गीता जी अध्याय 15 श्लोक 17 के अनुसार उत्तम पुरुष, पूर्ण परमात्मा यानी असली शिव तो अविनाशी है जो सर्व का धारण पोषण करने वाला है।
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