ये एक पक्ष है, ऐसे भी हजारों पोस्टर लगे हैं जो राहुल जी का महिमामंडन भी कर रहे हैं। एक मजबूत नेता के समर्थक और विरोधी दोनों होते हैं, और होना भी चाहिए। लेकिन ये आपका slective पत्रकारिता है कि आप केवल नकारात्मक पक्ष को प्रचारित करेंगे।
@MediaHarshVT
@MediaHarshVT ये एक पक्ष है, ऐसे भी हजारों पोस्टर लगे हैं जो राहुल जी का महिमामंडन भी कर रहे हैं। एक मजबूत नेता के समर्थक और विरोधी दोनों होते हैं, और होना भी चाहिए। लेकिन ये आपका slective पत्रकारिता है कि आप केवल नकारात्मक पक्ष को प्रचारित करेंगे।
@MediaHarshVT
जैसा बोओगे वैसा ही काटोगे। इन्हीं कृत्यों के वजह से आज दिन रात विश्वगुरु और तुम जैसे विश्वगुरु के नाजायज वंशज माँ बहन की गालिया सुनते रहते हो।
अब ऐसे वक्तव्यों पर @MediaHarshVT जैसे दरबारी पत्रकार मौन धारण कर लेंगे।
@dineshbjp09#पंजाब
जुकरबर्ग का माफी मांगना सामान्य शिष्टाचार है।
हालांकि आप जैसे गोदी पत्रकारों को इससे मोदी को विश्वगुरु कहने का खोखला मौका जरूर मिल जाएगा।
लेकिन इससे इतर मोदीजी मेटा को नहीं नियंत्रित कर पाएंगे, अभी ट्रंप का एक कॉल आ जाएगा तो आपके मालिक तुरंत सरेंडर कर देंगे।
#Meta@MediaHarshVT
मार्क जकरबर्ग ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का वीडियो हटाने के लिए माफी माँगी, लेकिन इतने से बात नहीं बनेगी। सरकार को नियम कानूनों का कड़ाई से पालन कराना चाहिए
प्रशांत जी की यह जीत बहुत बड़ी है। अपने पहले चुनाव में ही भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष और उनके पारंपरिक सीट पर जिस प्रकार से प्रशांत जी ने उन्हें पराजीत किया है, वह बेहद दिलचस्प है। बिहार के लोगों को अब प्रशांत जी के रूप में एक बेहद उत्कृष्ट विकल्प मिला है।
चुनाव आयोग के आँकड़े बता रहे हैं कि, 28 दौर की मतगणना के बाद प्रशांत किशोर 19419 मतों से आगे हैं। कुल 31 दौर की मतगणना होगी। वैसे प्रशांत किशोर की जीत की खबर आ चुकी है। अब प्रशांत किशोर को बधाई दी जा सकती है
आप जैसे दरबारी और भाजपा हिंदुओं की ठेकेदार नहीं हैं। धर्म व्यक्तिगत विषय है और इसे सार्वजनिक बनाकर आप लोग धार्मिक कट्टरता की गहराई बढ़ाते हैं। युवा की पहली प्राथमिकता शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार है, इसके कहीं बाद धर्म है, इन्हीं कारणों से 29 में वह तख्तापलट करेगा।
@MediaHarshVT
तय मानिए, राहुल गांधी हिन्दू आस्था का मजाक बनाते मजाक बनते दिख रहे हैं। पप्पू यादव को पुजारी बनाया है, इसे भी सामान्य मत समझिए, समझकर ही बनाया होगा। अब रामजी ही तय करेंगे
अजीत भारती जैसे लोग पत्रकारिता के नाम पर जैसे अस्लील शब्दों का प्रयोग करते हैं, क्या उसपर आप कुछ कहने की हिम्मत करेंगे?
अभी आज ही सुबह अजीत ने आपको भी लताड़ा है।
@MediaHarshVT
Nadda Ji, were you involved in activism during your 8th standard? Or have you been born as an infant activist?
I can't remember any 8 th standard student going to any college or university. What was the age criteria during those days for college admission?
@JPNadda
When I was a student activist, I was arrested many times from my classroom during the Emergency, when the Congress Party was in power. Such circumstances are a part of a student activist's journey.
सारे पत्रकार तुम जैसे सरकार की गोदी में नहीं बैठे रहते हैं। आज राहुल जी की बात ठिकाने पर लगी है तभी तुम जैसे सारे इडीयट और अंधभक्त विक्षिप्त हो गए हैं @MediaHarshVT
@MediaHarshVT भाजपा की गोदी में पल रहे तुम इतने निष्पक्ष पत्रकार हो कि राहुल गांधी के बयान से तिलमिला गए हो उनकी आलोचना कर रहे हो। लेकिन निशिकांत दुबे जैसा बदतमीज़ कल नेहरू जी के बारे में जो शब्द बोला उसपर खामोशी बनाए रखे हो। सत्ता की गोदी से उतरो फिर तुम्हारा सड़क पर ही इलाज हो जाएगा
Dharmendra Pradhan resigns from education ministry. This decision should be welcomed. I think government have now gauged the situation and made an attempt to contain the protest from turning into extreme turmoil.
#DharmendraPradhan
बीजेपी के पूर्व अध्यक्ष, पार्टी मार्गदर्शक मंडल के सदस्य और पूर्व शिक्षा मंत्री मुरली मनोहर जोशी ने छात्र आंदोलन पे लिखा है -
इस आंदोलन को सिर्फ़ क़ानून व्यवस्था की समस्या के तौर नहीं देखा जाना चाहिये।मुझे ये देखकर पीड़ा हुई कि महिलाओं और युवतियों पर निर्मम बल प्रयोग किया गया।
केंद्र सरकार और बीजेपी कोई भी मसला हो, ऐसे क्यों एक्ट कर रही है मानो उसे कोई फर्क ही नहीं पड़ता है! इसके पीछे तीन कारण है
1-इलेक्टोरल प्रभुत्व का अर्रोगंस-पार्टी और सरकार ने मान लिया है गवर्नेंस का एकमात्र पैमाना चुनावी जीत हो गयी है! पिछले दिनों इस बार में सरकार के समर्थक सुरजीत भल्ला ने भी लिखा था! अब हर मोर्चे पर यह अर्रोगंस दिखने लगा है! 2004 और 2009 में लगातार जीतने के बाद यही चीज तब उपा में आ गयी थी
2-फीडबैक सिस्टम का टूट जाना- सराकर अब आलोचक और आलोचना से दूर हो गयी है! सभी "वाह वाह" क्लब के मेंबर हो गए हैं! "आल इज़्ज़ वेल" का फिक्स्ड फीडबैक दिया जाता है! एक स्तर के बस सभी इतने कम्फर्ट लेवल में चले जाते हैं की वे कोई लीक से हटकर फीडबैक देकर "कम्फर्ट" लेवल नहीं खोना चाहते हैं! नहीं तो 2014 में इस सरकार की यह खासियत थी की वह फीडबैक पर एक्ट करती थी! पिछले कुछ सालों से यह टूट गया
3-मीडिया का More Loyal Than the King मोड में चला जाना-पहले मीडिया कम के कम इतना संकेत जरूर दे देती थी की किन बातों में सरकार को दिक्कत हो रही है! जन मानस की क्या दिक्कते हैं! अब मीडिया सरकार से जिसको दिक्कत है उसे अपना "पर्सनल" विरोधी बना लेती है! तो बीच का माध्यम टूट गया!
रवीश कुमार जी अपना एक जूता बेचकर तुम जैसे १०० चाटुकार ख़रीद लेंगे। तुम्हारी हैसियत नहीं कि रवीश कुमार के सामने आँख उठाकर भी बात कर पाओ।
दलाल हो दलाल की तरह उसी पहचान में रहो, पत्रकार तुम नहीं हो। अब ये बच्चा बच्चा जानता है।
पूरे देश में कहीं भी जाते हो, लोग थूकते है तुम पर।
जहर का कारोबार, ये है रवीश कुमार
नौकरी जाने की आशंका के साथ ही इस व्यक्ति ने गोदी मीडिया का राग अलापना शुरू कर दिया था। इसका पूरा जीवन गोदी में ही बीता है और इसे लगा कि, गोदी में बैठकर लोग ताक़तवर हो जाते हैं। यह व्यक्ति समाज में सडांध पैदा कर रहा है। इसके न रहने पर एनडीटीवी बंद हो जाए, इसकी यह मंशा पूर्ण न हो सकी। यह पत्रकारिता पर धब्बे जैसा है। आज इसे पत्रकारों पर हुए हमले पर बोलना था, लेकिन यह उलटबाँसी कर रहा है। दुर्भाग्यपूर्ण है कि, भारत को कमजोर करने के एवज में इसे अंतरराष्ट्रीय मंचों पर बुलाया गया। इससे देश में एक बड़ा वर्ग इसके जहर का शिकार हो रहा है।
चित्रा जी आप पत्रकारिती सिखाएंगी रवीश जी को जो स्वयं विपक्ष से देश की बदहाली का सवाल पूछती हैं और सरकार का पीठ थपथपाती हैं।आप लोगों को इसके उचित पारितोषिक पर सरकार का नैरेटिव सेट करने को रखा गया है। गोदी मीडिया के साथ जो हो रहा वह ही उपयुक्त है #संसद_मार्च#JantarMantarprotests
ये व्यक्ति पत्रकारों के खिलाफ भीड़ को “लिचिंग” के लिये भड़का रहा है.
एक पॉलिटिकल पार्टी की राजनीतिक यात्रा में हिस्सा लेकर अपनी पत्रकारिता बेच देने वाला शख़्स पत्रकारिता सिखाने में लगा हुआ है.
त्रिपाठी जी फांसीवाद दक्षिणपंथियों की उच्च अवस्था है और नाजीवाद वामपंथियों की उच्च अवस्था है। आप यह भी जानते हैं कि भाजपा दक्षिणपंथी विचारधारा की है अतः भारत में फांसीवादी प्रवृत्ति को वही बल दे रही है। यह अच्छा हैं कि आप स्वयं स्वीकार रहे कि देश को फासीवाद की तरफ ले जाया जा रहा।
ऐसा जहर लोगों के मन में भर दिया गया है कि, किसी भी पत्रकार के लिए गोदी मीडिया हाय-हाय के नारे लगा दो। यह फासीवादी प्रवृत्ति है। रवीश रंजन शुक्ला शानदार रिपोर्टर है और हमने 2001 के महाकुम्भ में प्रयागराज में साथ में रिपोर्टिंग की है। रवीश जैसा सुलझा रिपोर्टर भी गोदी मीडिया लगने लगे तो समझ जाना चाहिए कि, जहर लोगों के दिमाग में कैसे प्रवेश कर गया है।