The video from Jamui, Bihar is deeply disturbing.
Two Class 10 students were stopped on a road. Harassed. Humiliated. Molested. A young girl, hands folded, begged to be let go while goons groped her and dragged her away.
Who gave these men the right to behave like this? This is not "culture." It is patriarchy: the belief that any man can police a girl's body, her movement, her choices.
When control is mistaken for culture, and such attitudes are normalised by Andhbhakts, mobs start believing they are the law.
Every individual in that video must be identified and prosecuted under POCSO, and justice must be swift. And if the incident happened on September 19th, why are the culprits not behind bars yet?
And the Bihar government must answer why a girl is not safe on a public road at 7 pm?
बिहार के जमुई का एक वीडियो बहुत बेचैन करने वाला है।
10वीं क्लास के एक छात्र और छात्रा को रास्ते में जबरदस्ती रोक लिया गया। उन्हें प्रताड़ित किया गया, अपमानित किया गया और छात्रा के साथ उत्पीड़न किया गया। बच्ची हाथ ��ोड़कर उसे जाने देने की विनती करती रही, मगर गुंडे उसे गलत तरीके से छूते और खींचतान करते रहे।
इन लोगों को ऐसी बदतमीज़ी करने का हक किसने दिया? यह "संस्कृति" नहीं है, यह patriarchy है: ये सोच कि किसी भी पुरुष का किसी लड़की के शरीर, उसके आने-जाने और उसकी पसंद-नापसंद पर नियंत्रण है।
जब नियंत्रण को ही संस्कृति मान कर 'अंधभक्त' ऐसी सोच को सामान्य ठहराते हैं, तो भीड़ को लगने लगता है कि वही कानून है।
उस वीडियो में दिख रहे हर व्यक्ति की पहचान होनी चाहिए और उन अपराधियों पर POCSO के तहत मुकदमा चलाकर उन्हें जल्द से जल्द सजा मिलनी चाहिए। और अगर ये घटना 19 सितंबर की है तो गुनहगार अब तक सलाखों के पीछे क्यों नहीं हैं?
और बिहार सरकार जवाब दे कि शाम 7 बजे कोई लड़की राज्य की सड़कों पर सुरक्षित क्यों नहीं है?
कभी सोचा न था मॉस्को में ये हाल होगा! पिछले क़रीब साढ़े चार सालों में अक्सर यूक्रेन की राजधानी कीव पर बड़े हमले होते रहे हैं! लेक���न ये तो रूस के बहुत भीतर तक की गई मार है!
दिल्ली में एक 17 साल की बच्ची के साथ क्रूरता की सारी हदें पार कर दी गईं और उसके बाद उसे बर्बरता से मार डाला गया। कुछ ही दिनों पहले एक और नाबाल��ग लड़की का बलात्कार किया गया।
देश में महिला सुरक्षा के लिए कोई ज़िम्मेदारी लेने को तैयार ही नहीं है - महिलाओं के विकास की सिर्फ़ खोखली बातें की जाती हैं। सैकड़ों महिलाओं पर अत्याचार होते हैं, हिंसा होती है मगर अपराधियों पर ठोस कार्रवाई की वे उम्मीद नहीं कर सकतीं - FIR दर्ज तक नहीं होते।
समाज और सरकार दोनों, महिलाओं को सुरक्षा, स्वतंत्रता और समानता क��� अधिकार देने में पूरी तरह से विफल हैं।
दिल्ली में 17 साल की युवती के साथ गैंगरेप हुआ, उसकी हत्या कर शव खुले मैदान में फेंक दिया गया। राजधानी में इतनी बड़ी दरिंदगी और पुलिस को कई दिनों तक भनक नहीं ��गती।
दुर्भाग्य है कि दिल्ली आज राजधानी नहीं, महिलाओं के लिए हर दिन की खौफनाक कहानी बनकर रह गई है।
अमित शाह जी, दिल्ली पुलिस आपके अधीन है। महिला सुरक्षा की जिम्मेदारी आखिर किसकी है?
या दिल्ली पुलिस का काम सिर्फ़ आम नागरिकों को डराना-धमकाना रह गया है? क्योंकि अपराधी तो बेखौफ घूम रहे हैं।
दरिंदों की तत्काल गिरफ्तारी हो, कड़ी कार्रवाई और सज़ा मिले, और इस आपराधिक गैर-जिम्मेदारी की जवाबदेही त�� हो।
महिलाओं की सुरक्षा के बिना भारत आगे नहीं बढ़ सकता।
पहले शिवसेना, फिर NCP और अब तृणमूल कांग्रेस।
हर बार एक ही पैटर्न - BJP और चुनाव आयोग मिलकर एक पार्टी को तोड़ते हैं। फिर उसका चुनाव चिन्ह छीन लिया जाता है।
जब पूरी की पूरी पार्टी चोरी हो सकती है, तो करोड़ों भारतीयों के वोट चोरी होना भी हैरानी की बात नहीं।
वोट चोरी। सरकार चोरी। अब पार्टी चोरी - ये हमारे लोकतांत्रिक पतन के प्रतीक बन गए हैं।
ECI की संवैधानिक ज़िम्मेदारी जनादेश की रक्षा करना है - मगर उल्टा वो उन ताकतों की मदद कर रहा है, जो जनता के फैसले को ही पलट देते हैं।
यह लड़ाई सिर्फ़ ममता बनर्जी जी की नहीं है। यह हर राजनीतिक दल, हर मतदाता की लड़ाई है जो स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव चाहता है।
10,000 रुपए के UPI पेमेंट पर 40 रुपए का MDR लगेगा. फिर 40 रुपए पर 18% GST भी लगेगा.
मतलब 10 हजार पर MDR और GST जोड़कर कुल - 47.20 रुपए वसूले जाएंगे.
मेरा सुझाव है - मोदी सरकार 47.20 रुपए पर Education Cess और Clean Environment Cess भी ठोक दे.
अलग लेवल का मास्टरस्ट्रोक होगा
UPI को चलाने के लिए हर साल ₹20,700 करोड़ रुपये चाहिए। ऐसे में कई भक्त कह रहे हैं कि UPI को चलाने के लिए पैसा नहीं है।
लेकिन FY 2025-26 में 👇
• RBI ने मोदी सरकार को ₹3 लाख करोड़ सरप्लस transfer किए
• देश के लिस्टेड बैंकों का मुनाफा ₹4.11 लाख करोड़ से ऊपर है
• UPI को चलाने वाली NPCI का Pre tax ₹1,888 करोड़ है
✅ यानी- RBI जो पैसा सरकार को दे रहा है, उसके महज़ 7.2% हिस्से से पूरा UPI चल जाएगा
मगर दिक्कत वाली बात ये है कि मोदी सरकार ने संसद में झूठ बोला 👇
मोदी सरकार अगस्त में Taxation and Other Laws Amendment Bill, 2026 लाई, जिसके चलते मुफ्त UPI पर मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) लगाने का रास्ता खुल गया, लेकिन ...
• 6 अगस्त को वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा "MDR पर कोई निर्णय नहीं लिया गया"
• 10 अगस्त को वित्त मंत्री ने सदन में कहा "MDR का कोई फ्रेमवर्क फाइनल नहीं किया गया है"
• 14 सितंबर को नोटिफिकेशन निकाल कर MDR चार्ज लगा दिया गया
✅ UPI से वसूली का मतलब है- UPI को कमज़ोर करना
साफ है- नरेंद्र मोदी ने अपने दोस्त डोनाल्ड ट्रंप के दबाव में UPI को कमजोर किया और डिजिटल payments से कमाई करने का रास्ता अमेरिकी कंपनियों के लिए खोल दिया है।
भारतीय UPI पेमेंट मार्केट का तकरीबन 86% हिस्सा दो अमेरिकी कंपनियों के पास है।
फोनपे की मुख्य पेरेंट कंपनी Walmart है जिसकी फोनपे में सबसे बड़ी 71.77% की हिस्सेदारी है। यानी मालिकाना उसी के पास है।
गूगल पे का मालिकाना हक गूगल और इसकी मूल कंपनी अल्फाबेट इंक के पास है।
ट्रेड डील के स्टेटमेंट में कहा गया कि भारत ट्रेड बैरियर हटाने पर काम करेगा। इसके एक महीने बाद अमेरिका ने कहा कि UPI पर जीरो चार्ज ट्रेड बैरियर है, जिसे हम स्वीकार नहीं करते। इसके तीन हफ्ते बाद UPI पर चार्ज लगाने का ��िल पास हो गया।
अब सोचिए कि भारत सरकार किसके दबाव में UPI पर चार्ज लगा रही है?
राहुल गांधी का आरोप सही है। नरेंदर एक बार फिर सरेंडर बोल गए।
परिसीमन की बेईमानी और सत्ता में होने के बावजूद भाजपा निकाय में अधिकांश जगह पिछड़ती नजर आई। परिसीमन के नाम पर भाजपा सरकार ने ऐसा खेल रचा कि कहीं 4 हजार की आबादी का वार्ड, तो कहीं 35 हजार का वार्ड। कहीं 600 मतदाता तो उसी शहर में 2,900 मतदाताओं का वार्ड!
भाजपा ने वोट काटने और सत्त��� कब्जाने की साजिश की, फिर भी जनता ने आईना दिखा दिया।
- वार्ड 31 की आबादी 13,499, जबकि वार्ड 135 की आबादी 32,272 यानी एक ही नगर निगम में दो वार्डों की आबादी में 2.4 गुना का अंतर!
- सवाल सीधा है.. अगर परिसीमन निष्पक्ष था तो इतनी बड़ी असमानता क्यों?
- कांग्रेस के मजबूत इलाकों को बड़े-बड़े वार्डों में बांटकर वोटों का प्रभाव कम किया गया और भाजपा के पक्ष वाले इलाकों में छोटे वार्ड बनाकर वोटों को ज्यादा प्रभावी बनाया गया—क्या ये सुनियोजित वोट मैनेजमेंट नहीं था?
इस बेईमानी का असर देखिए.. 4,097 वार्डों में से 1,316 में भाजपा की जीत का अंतर 100 से भी कम रहा। इनमें 772 वार्ड ऐसे हैं जहां जीत का अंतर 50 वोट से भी कम रहा। और सबसे चौंकाने वाली बात... 13 वार्ड ऐसे हैं जहां भाजपा ने महज 1 वोट के अंतर से जीत हासिल की.. क्या ये सत्ता का खेल नहीं?
बावजूद इसके भाजपा का वोट शेयर निकाय चुनाव में लोकसभा चुनाव से करीब 15% कम और विधानसभा चुनाव से करीब 7% कम रहा। ये अंतर अचानक इतना कैसे बदल गया?
जयपुर, टोंक और करौली जैसे जिलों में कांग्रेस का वोट शेयर भाजपा से अधिक रहा, फिर भी सीटें भाजपा को ज्यादा मिलीं। वोट कांग्रेस के ज्यादा, लेकिन सीटें भाजपा की ज्यादा.. आखिर ऐसा क्या खेल है?
मोदी सरकार ने चुपचाप UPI पर फ़ीस लगाने का रास्ता खोल दिया है।
अब ₹2,000 से ऊपर के merchant UPI लेन-देन पर MDR लगाया जा सकता है। इन ट्रांजैक्शंस की संख्या भले ही सिर्फ़ 5% हो, लेकिन UPI के कुल transaction value का करीब 65% इन्हीं में है।
सरकार कहती है कि ग्राहक से कोई फ़ीस नहीं ली जाएगी। लेकिन दुकानदार पर लगने वाली फ़ीस आखिर आएगी कहां से? कीमतों में जुड़कर ग्राहक की जेब से।
अमेरिकी payment कंपनियां लंबे समय से भारत की zero-MDR नी��ि का विरोध करती रही हैं। अब मोदी सरकार ने ठीक उसी दिशा में नीति बदलने का रास्ता खोल दिया है।
US Trade Deal की तरह ही, Compromised PM मोदी एक बार फिर अमेरिकी दबाव के सामने surrender कर रहे हैं।
नाम बदलनेवाले अब ‘प्रेस वार्ता’ का नाम बदलकर ‘प्रेस एकालाप’ कर दें क्योंकि जब सिर्फ़ बयान दिया जाना है और प्रेस को सवाल पूछने का अधिकार ही नहीं है तो बिना वार्तालाप ‘वार्ता’ शब्द का क्या अर्थ रह जाता है? माननीय सबका समय क्यों ख़राब कर रहे हैं, प्रेस रिलीज़ भेजकर ही काम चलाएं और दोनों का समय बचाएं।
सत्य ये है कि उप्र में सवालों की भरमार है लेकिन इनके पास जवाब ही नहीं हैं। मुँह मोड़ कर जाना, मैदान छोड़कर भागना भी कहलाता है।
ये शासन में पक्षपात करते हैं ��र प्रेस वार्ता में एकतरफ़ा बयानबाज़ी। अब क्या ये भी कहेंगे कि ‘प्रश्न सुनने के मूड में नहीं है।’
#प्रेस_एकालाप
मनमाने तरीके से परिसीमन, पूरी सरकारी मशीनरी का इस्तेमाल, मुख्यमंत्री के रोड शो आदि के बावजूद नगरीय निकाय चुनावों में हार से बौखलाई भाजपा अब मेयर बनाने के लिए अब पुलिस का दुरुपयोग कर रही है। 10 नगर निगमों में से पाली, बीकानेर, अजमेर ���र भरतपुर नगर निगमों में हार चुकी भाजपा अब जोधपुर और अलवर में पुलिस के द्वारा निर्दलीय और कांग्रेस के पार्षदों को डरा-धमकाकर अपने पक्ष में करना चाहती है।
पुलिस और जिला प्रशासन सुनिश्चित करें कि ऐसा पक्षपातपूर्ण काम न हो। कांग्रेस इस कृत्य को बेहद गंभीरता से ले रही है। ऐसे अनुचित कृत्यों में शामिल अधिकारियों की जवाबदेही तय की जाएगी।