पिताजी के अंतिम संस्कार में कंधा देकर मुखाग्नि दिया। यह क्षण मेरे लिए अत्यंत दुःखद, भावनात्मक और हृदय विदारक है। उनकी विदाई ने मेरे हृदय में एक गहरा घाव छोड़ दिया है, जो कभी भर नहीं पाएगा।
पिताजी की यादें, स्नेह व मार्गदर्शन हमेशा मेरे साथ रहेंगी। उनकी क्षति अपूरणीय है और उनके बिना जीवन अधूरा सा लग रहा है।
भावभीनी श्रद्धांजलि!