#इति_सिद्धम
वे अपने लिये संसद के बनाये क़ानून को भी नहीं मानेंगे ,क्योंकि उनको न्यायिक स्वतन्त्रता चाहिये ।
बिना किसी परीक्षा में सम्मिलित हुए केवल अनुभव और सिफारिश के आधार पर नियुक्ति और प्रमोशन लेते रहेंगे ।
आप पर वे नियम थोपे जाएँगे जो संसद ने आपके लिए बनाए ही नहीं हैं
2017 के संशोधन सहित आरटीई में कहीं टेट का उल्लेख नहीं है आरटीई के 23(1) के द्वारा प्रदत्त शक्ति से एनसीटीई ने 23 August 2010 को minimum qualification परिभाषित की है जोकि नियुक्ति वर्षों के अनुसार with tet और without tet है लेकिन माननीय जी ने minimum qualification को TET लिख दिया तो लिख दिया ।
आपको नियुक्ति हेतु निर्धारित परीक्षा उत्तीर्ण करने के नियुक्त होने के 20-25 वर्षों बाद भी परीक्षा में बैठायेंगे ।
अनुभव के आधार पर पदोन्नति तो दूर नौकरी (उस नौकरी में जिसमें नियुक्ति की प्रक्रिया में कोई दोष या आपत्ति नहीं है)में भी आप नहीं रहेंगे ।20-25 lakhलाख शिक्षकों की नौकरी जाये तो जाये उन पर कोई फ़र्क़ नहीं पड़ता।
हमने सदैव कहा कि रास्ता संसद से निकलेगा ।इसलिए अब minimum qualification को parliament से define कराने हेतु आगे बढ़ेंगे ।
@narendramodi@AmitShah@dpradhanbjp@myogiadityanath
@PMOIndia@dpradhanbjp@DrDCSHARMAUPPSS TFI के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ दिनेश चंद्र शर्मा के नेतृत्व में 4 अप्रैल को दिल्ली में हो रही विशाल रैली में प्रतिभाग करने के लिए गोरखपुर जिले से कौड़ीराम एवं ब्रह्मपुर ब्लॉककेशिक्षकोंको राजेश धर दूबे एवं ज्ञानेंद्र ओझानेहरीझंडीदिखाकररवानाकिया
आदरणीय पाठक जी
यह सरकार तो ब्राह्मण और बनियों की सरकार कही जाती है। कैसे ब्राह्मणों के खिलाफ इस तरह की गालियां दी गई।कैसे पेपर बनाने वालों ने इतनी धृष्टता कर दी,जरा भी उसे भय नहीं लगा। कड़ी कार्यवाही होनी चाहिए। अब तो पानी नाक के ऊपर हो रहा है।
उत्तर प्रदेश पुलिस भर्ती परीक्षा में आए एक प्रश्न को लेकर जो विकल्प दिए गए उन पर हमे कड़ी आपत्ति है ।सरकार ने गंभीरता से संज्ञान में लिया है। किसी भी प्रश्न से किसी समाज या वर्ग की गरिमा को ठेस पहुँचती है तो यह बिल्कुल स्वीकार्य नहीं है।
मैं स्पष्ट कहना चाहता हूँ कि किसी भी जाति, समुदाय या परंपरा के प्रति अपमानजनक शब्दों को कोई स्थान नहीं मिलना चाहिए। इस पूरे मामले की तत्काल जांच के निर्देश दिए गए हैं ।संबंधित जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
उत्तर प्रदेश सरकार सभी समाजों के सम्मान, समानता और संवेदनशीलता के सिद्धांत पर काम करती है। प्रदेश के हर नागरिक की गरिमा हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता है।
सरकारी स्कूलों का मर्जर न केवल निजीकरण को बढ़ावा देना बल्कि निजी विद्यालय में पढ़ने वाले बच्चों एवं उनके माता पिता के आर्थिक शोषण को बढ़ावा देगा वहीं दूसरी ओर युवा बेरोजगारों के शोषण को बढ़ाएगा जो कि कहीं न कहीं सामाजिक असंतोष एवं अपराध को बढ़ाएगा
#Justiceforschoolschildren