मेरा सीधा सवाल भारत के मुख्य न्यायाधीश से है , अगर #सप्रीम_कोर्ट और #हाई_कोर्ट समानता के सिद्धांत पर काम करते है तो पिछले ७० सालों से सिर्फ़ ३०० परिवारों का एकाधिकार कियु है वहाँ ,
कोलिजियम सिस्टम की जगह निस्पक्ष परीक्षा कियु नहीं आयोजित की जाती है ?