कबीर साहेब जी कहते हैं कि..
ज्यों नैनो मे पुतली, त्यों खालिक घट माहि
मूरख लोग ना जानही, बाहिर ढूढ़न जाहि।
अर्थ:-
आंखों में पुतली की भाॅंति हीं प्रत्येक शरीर में प्रभु विराजमान है।
��ह मुर्ख और अज्ञानी नहीं जानते और उन्हें काशी-कावा,मंदिर-मस्जिद में खोजने जाते हैं।
Ram Ram Ji🙏🥰
कबीर साहेब जी कहते हैं कि
आज कहै मैं काल भजू, काल कहै फिर काल
आज काल के कर�� ही, औसर जासी चाल।
अर्थ:-
लोग आज कहते हैं कि मैं कल से प्रभु का भजन करुॅंगा और कल कहतें हैं कि कल से करुॅंगा।
इसी आज कल के फेरे में प्रभु के भजन का अवसर चला जाता है और जीवन व्यर्थ बीत जाता है।
राम राम जी
कबीर साहेब जी कहते हैं कि...
राम नाम तिहुं लोक मे सकल रहा भरपूर
जो जाने तिही निकट है, अनजाने तिही दूर।
अर्थ:-
तीनों लोक में राम नाम व्य��प्त है। ईश्वर पूर्णाता में सर्वत्र वत्र्तमान हैं।
जो जानता हे-प्रभु उसके निकट हैं परंतु अनजान-अज्ञानी के लिये बहुत दूर हैं।
राम राम जी 🙏🥰