🚨हिंदुओ गिरफ्तारी तक RePost/Quote रुकना नहीं चाहिए 🚨
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नाम: रवि
पता: मुज़फ्फरनगर
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@muzafarnagarpol@Uppolice@112UttarPradesh@dgpup कृपया सूचनार्थ एवं आवश्यक कार्यवाही हेतु।
आँखे खोल और देख मस्जिद हॉस्पिटल की जगह में ही निकली है
अहले इस्लाम जामा मस्जिद रघुबीर नगर
गिरेगी मेरी बात याद रखना
May please the enclosed PUC filed by Complainant regarding request for removal of illegal religious structure from hospital reserved land in Raghubir Nagar JJ colony. In this regard it is to inform that as per record available in land section of DUSIB the site in question marked by complainant with red color outline was acquired vide award no. 1199 dated 31.08.1961of village Khayala and transferred to Slum & JJ Department (Now DUSIB) on 02.11.1961.
As the matter relates to unauthorized encroachment so this PUC
You are wrong, @RahulGandhi.
PM @narendramodi is not afraid of President Trump. PM Modi understands the long game and his diplomacy with the U.S. is strategic. Just as @POTUS will always put America’s interests first, so will PM Modi do what is best for India. And I applaud that. That’s what Heads of State do. They do and say what is best for their country.
I don’t expect you to understand this type of leadership because you don’t possess the acumen to be PM of India. Best to return to your “I hate India” tour that has an audience of one - you.
अवैध मस्जिद कब्रिस्तान अतिक्रमण रामलीला मैदान आसफ़ अली रोड का पूरा साथ आप के बीच रखना चाहता हूँ
अरबों रुपये की ज़मीन पर क़ब्ज़ा
क्या @epanchjanya दिखाएगा ?
आप भी मेंशन कर के बाक़ी सब चैनल्स से पूछो
रीट्वीट करना मत भूलना
देश के मेरे सभी परिवारजनों को धनतेरस की अनेकानेक शुभकामनाएं। इस पावन अवसर पर मैं हर किसी के सुख, सौभाग्य और आरोग्य की कामना करता हूं। भगवान धन्वंतरि सबको अपना भरपूर आशीर्वाद दें।
वाल्मीकि समाज सबका है, लेकिन वाल्मीकि का कोई नहीं।😥😥
अगर जब किसी ने क्षत्रिय समाज या ब्राह्मण समाज के महापुरुष के बारे में कुछ गलत बोला है तो सबसे पहले आवाज हमने उठाई है। लेकिन आज जब वाल्मीकि समाज के परम श्रद्धेय महर्षि वाल्मीकि की का अपमान भीम आर्मी गुंडों द्वारा किया गया। कोई ट्रेंड नहीं। सारे हिंदुत्व के पुरोधा सब चुप है।
क्या ऐसे बनेगी हिंदू एकता ?
"किसानों के लिए हम #NextGenGST रिफॉर्म्स के जरिये कम लागत और ज्यादा लाभ का भरोसा लेकर आए हैं...हमारी सरकार किसानों के हित के लिए पूर्णतः प्रतिबद्ध है.."
प्रधानमंत्री श्री @narendramodi जी
#PMDhanDhaanya
ओबीसी आरक्षण से संबंधित मध्यप्रदेश शासन के हलफ़नामे के संबंध में स्पष्टीकरण
1.राज्य शासन के संज्ञान में यह आया है कि कतिपय शरारती तत्वों द्वारा सोशल मीडिया पर यह कहते हुए कुछ टिप्पणियां/सामग्री वायरल की जा रही है कि वे टिप्पणियां माननीय उच्चतम न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत मध्यप्रदेश शासन के ओबीसी आरक्षण से संबंधित प्रकरण के हलफ़नामे का भाग हैं।
2.शासन द्वारा उक्त शरारती सामग्री का गंभीरता से परीक्षण कराया गया है। माननीय उच्चतम न्यायालय के समक्ष पिछड़ा वर्ग आरक्षण के प्रचलित प्रकरण में अभिलेख के प्रारंभिक परीक्षण से यह तथ्य सामने आया है कि उल्लेखित सोशल मीडिया की टिप्पणियां एवं कथन पूर्णतः असत्य, मिथ्या एवं भ्रामक हैं तथा दुष्प्रचार की भावना से किए गए हैं।
3.यह स्पष्ट किया जाता है कि वायरल की जा रही सामग्री मध्यप्रदेश शासन के हलफ़नामे में उल्लेखित नहीं है और न ही राज्य की किसी घोषित या स्वीकृत नीति अथवा निर्णय का भाग है।
4.प्रथम दृष्टया यह ज्ञात हुआ है कि वस्तुतः उल्लेखित सामग्री मध्यप्रदेश राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग के अध्यक्ष श्री रामजी महाजन द्वारा प्रस्तुत अंतिम प्रतिवेदन (भाग-1) का हिस्सा है। उक्त आयोग का गठन दिनांक 17-11-1980 को किया गया था और आयोग द्वारा दिनांक 22-12-1983 को अपना अंतिम प्रतिवेदन तत्कालीन राज्य शासन को प्रेषित किया गया था।
5.राज्य शासन ने माननीय उच्चतम न्यायालय में ओबीसी आरक्षण संबंधित प्रकरण में राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग के विभिन्न प्रतिवेदन भी प्रस्तुत किए हैं, जो शासन के अभिलेखों में सुरक्षित हैं। इन प्रतिवेदनों में महाजन आयोग की रिपोर्ट के साथ-साथ 1994 से 2011 तक के वार्षिक प्रतिवेदन तथा वर्ष 2022 का राज्य पिछड़ा वर्ग कल्याण आयोग का प्रतिवेदन भी सम्मिलित है।
6.महाजन आयोग का उक्त प्रतिवेदन माननीय उच्च न्यायालय के समक्ष भी अभिलेख का भाग रहा है। अतः माननीय उच्चतम न्यायालय में भी उक्त प्रतिवेदन स्वतः ही न्यायिक अभिलेख का हिस्सा है।
7.मध्यप्रदेश सरकार ‘सबका साथ, सबका विकास’ एवं सामाजिक सद्भावना के प्रति पूर्णतः प्रतिबद्ध है। शासन स्पष्ट करता है कि वायरल की जा रही सामग्री शासन के हलफ़नामे में उल्लेखित नहीं है और न ही राज्य शासन की किसी स्वीकृत या आधिकारिक नीति या निर्णय का हिस्सा है। यह उल्लेखनीय है कि महाजन रिपोर्ट में 35% आरक्षण की अनुशंसा की गई थी, जबकि राज्य शासन ने 27% आरक्षण लागू किया है। इससे यह स्पष्ट होता है कि राज्य शासन का निर्णय महाजन रिपोर्ट पर आधारित नहीं है।
8. भारत वर्ष में आरक्षण को लेकर विभिन्न विशेषज्ञ समितियों के प्रतिवेदन, समय-समय पर गठित आयोगों की रिपोर्टें एवं वार्षिक प्रतिवेदन तथा अन्य आधिकारिक सामग्री, जो पूर्व से ही शासकीय अभिलेखों का भाग रही हैं और विभिन्न प्रकरणों में भी अभिलेख का हिस्सा रही हैं, माननीय न्यायालय के समक्ष हमेशा प्रस्तुत की जाती रही हैं।
9.ऐसे एकेडमिक विश्लेषण एवं समय-समय पर गठित विभिन्न विशेषज्ञ समितियों के अत्यंत विस्तृत प्रतिवेदन और रिपोर्ट के किसी एक भाग को, बिना संदर्भ स्पष्ट किए, सोशल मीडिया पर दुष्प्रचार के रूप में प्रस्तुत करना एक निंदनीय प्रयास है। इसके संबंध में राज्य शासन द्वारा गंभीरता से जांच कर आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।
ओबीसी आरक्षण से संबंधित मध्यप्रदेश शासन के हलफ़नामे के संबंध में स्पष्टीकरण
1.राज्य शासन के संज्ञान में यह आया है कि कतिपय शरारती तत्वों द्वारा सोशल मीडिया पर यह कहते हुए कुछ टिप्पणियां/सामग्री वायरल की जा रही है कि वे टिप्पणियां माननीय उच्चतम न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत मध्यप्रदेश शासन के ओबीसी आरक्षण से संबंधित प्रकरण के हलफ़नामे का भाग हैं।
2.शासन द्वारा उक्त शरारती सामग्री का गंभीरता से परीक्षण कराया गया है। माननीय उच्चतम न्यायालय के समक्ष पिछड़ा वर्ग आरक्षण के प्रचलित प्रकरण में अभिलेख के प्रारंभिक परीक्षण से यह तथ्य सामने आया है कि उल्लेखित सोशल मीडिया की टिप्पणियां एवं कथन पूर्णतः असत्य, मिथ्या एवं भ्रामक हैं तथा दुष्प्रचार की भावना से किए गए हैं।
3.यह स्पष्ट किया जाता है कि वायरल की जा रही सामग्री मध्यप्रदेश शासन के हलफ़नामे में उल्लेखित नहीं है और न ही राज्य की किसी घोषित या स्वीकृत नीति अथवा निर्णय का भाग है।
4.प्रथम दृष्टया यह ज्ञात हुआ है कि वस्तुतः उल्लेखित सामग्री मध्यप्रदेश राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग के अध्यक्ष श्री रामजी महाजन द्वारा प्रस्तुत अंतिम प्रतिवेदन (भाग-1) का हिस्सा है। उक्त आयोग का गठन दिनांक 17-11-1980 को किया गया था और आयोग द्वारा दिनांक 22-12-1983 को अपना अंतिम प्रतिवेदन तत्कालीन राज्य शासन को प्रेषित किया गया था।
5.राज्य शासन ने माननीय उच्चतम न्यायालय में ओबीसी आरक्षण संबंधित प्रकरण में राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग के विभिन्न प्रतिवेदन भी प्रस्तुत किए हैं, जो शासन के अभिलेखों में सुरक्षित हैं। इन प्रतिवेदनों में महाजन आयोग की रिपोर्ट के साथ-साथ 1994 से 2011 तक के वार्षिक प्रतिवेदन तथा वर्ष 2022 का राज्य पिछड़ा वर्ग कल्याण आयोग का प्रतिवेदन भी सम्मिलित है।
6.महाजन आयोग का उक्त प्रतिवेदन माननीय उच्च न्यायालय के समक्ष भी अभिलेख का भाग रहा है। अतः माननीय उच्चतम न्यायालय में भी उक्त प्रतिवेदन स्वतः ही न्यायिक अभिलेख का हिस्सा है।
7.मध्यप्रदेश सरकार ‘सबका साथ, सबका विकास’ एवं सामाजिक सद्भावना के प्रति पूर्णतः प्रतिबद्ध है। शासन स्पष्ट करता है कि वायरल की जा रही सामग्री शासन के हलफ़नामे में उल्लेखित नहीं है और न ही राज्य शासन की किसी स्वीकृत या आधिकारिक नीति या निर्णय का हिस्सा है। यह उल्लेखनीय है कि महाजन रिपोर्ट में 35% आरक्षण की अनुशंसा की गई थी, जबकि राज्य शासन ने 27% आरक्षण लागू किया है। इससे यह स्पष्ट होता है कि राज्य शासन का निर्णय महाजन रिपोर्ट पर आधारित नहीं है।
https://t.co/GEOnR8qymAवर्ष में आरक्षण को लेकर विभिन्न विशेषज्ञ समितियों के प्रतिवेदन, समय-समय पर गठित आयोगों की रिपोर्टें एवं वार्षिक प्रतिवेदन तथा अन्य आधिकारिक सामग्री, जो पूर्व से ही शासकीय अभिलेखों का भाग रही हैं और विभिन्न प्रकरणों में भी अभिलेख का हिस्सा रही हैं, माननीय न्यायालय के समक्ष हमेशा प्रस्तुत की जाती रही हैं।
9.ऐसे एकेडमिक विश्लेषण एवं समय-समय पर गठित विभिन्न विशेषज्ञ समितियों के अत्यंत विस्तृत प्रतिवेदन और रिपोर्ट के किसी एक भाग को, बिना संदर्भ स्पष्ट किए, सोशल मीडिया पर दुष्प्रचार के रूप में प्रस्तुत करना एक निंदनीय प्रयास है। इसके संबंध में राज्य शासन द्वारा गंभीरता से जांच कर आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।
विजयादशमी के पावन अवसर पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की स्थापना के गौरवशाली 100 वर्ष पूर्ण हो रहे हैं। देशभर में इसके लाखों स्वयंसेवक पिछली एक सदी से ‘राष्ट्र प्रथम’ की भावना के साथ मां भारती की सेवा में समर्पित रहे हैं। कल 1 अक्टूबर को सुबह करीब 10.30 बजे नई दिल्ली में आरएसएस शताब्दी समारोह में शामिल होने का सौभाग्य मिलेगा। यहां एक विशेष डाक टिकट और स्मृति सिक्का भी जारी किया जाएगा।
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