माननीय मुख्य मंत्री महोदय
आपके संज्ञान मैं एक अत्यंत गंभीर स्थिति लाना चाहूंगी ये घटना नेमी नगर विस्तार,वैशाली नगर की है ।
दिनांक 2 मई दोपहर 2 बजे के आस पास को मेरी बहन अपने 1 साल के बच्चे और मेरी 9 साल की बेटी के साथ सड़क किनारे गई थी, जहाँ पेड़ लगे हुए हैं। मेरी बेटी ने आम तोड़ने की जिद की, और उसी दौरान वहाँ मौजूद घर से एक पति-पत्नी ने अचानक आकर मेरी बहन पर लाठी से उसके मुंह पर जानलेवा हमला करते है जिससे उसे बहुत गंभीर चोट आती है और खून बहना शुरू हो जाता है लेकिन इसके बाद भी वो लोग नहीं रुकते और बहुत बुरी तरह मारपीट शुरू कर देते है ,मेरा 13 साल का बेटा बीच बचाव की कोशिश करता है लेकिन वो लोग उसपर भी ताबड़तोड़ लाठी से वार करते है जिससे उसको बहुत सारी चोटें आई है ।
यह घटना साफ तौर पर महिला और नाबालिग बच्चों के साथ की गई हिंसा है, जो बेहद चिंताजनक है।
इतना ही नहीं, ये लोग लंबे समय से इलाके में डर और असुरक्षा का माहौल बना रहे हैं—• सार्वजनिक (पार्क के लिए आरक्षित) जमीन पर अवैध कब्जा किया हुआ है• वहाँ मंदिर बनाकर और कुआँ बनाकर उसका पानी बेच रहे हैं• ट्रैक्टर बहुत तेज और खतरनाक तरीके से चलाते हैं, जिससे कई बार गाड़ियों को नुकसान हुआ है और जानवर (कुत्ते) तक उनके नीचे आकर मर जाते है ।• आने-जाने वाले बच्चों को डराते हैं और उनके साथ मारपीट करते हैं
इस पूरी घटना के फोटो और वीडियो प्रमाण हमारे पास मौजूद हैं। इस मामले की शिकायत चित्रकूट पुलिस में दर्ज कराई जा चुकी है, लेकिन अभी तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है।
माननीय मुख्यमंत्री जी से निवेदन है कि इस मामले पर तुरंत संज्ञान लिया जाए, दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए और हमारे क्षेत्र में महिलाओं व बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए।
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माननीय मुख्यमंत्री महोदय
सविनय निवेदन है कि एक अत्यंत गंभीर एवं चिंताजनक घटना का वीडियो साक्ष्य उपलब्ध है, जिसमें स्पष्ट रूप से देखा जा सकता है कि एक व्यक्ति अचानक पीछे से आकर एक महिला के हाथ में पकड़ी हुई छड़ी को खींचता है। इस अप्रत्याशित और अनुचित व्यवहार के तुरंत बाद, उस व्यक्ति की पत्नी भी वहाँ पहुँचती है और बिना किसी उकसावे के उक्त महिला पर अत्यंत आक्रामक एवं अमानवीय तरीके से हमला करना शुरू कर देती है।
वीडियो में यह भी स्पष्ट दिखाई देता है कि उस समय एक लगभग 13 वर्ष का बालक, जो उस महिला के साथ मौजूद था, अपनी जिम्मेदारी समझते हुए और महिला की सुरक्षा हेतु आगे आता है। वह अपने बचाव के लिए एक डंडा पकड़ता है और स्थिति को नियंत्रित करने का प्रयास करता है। यह कृत्य किसी आक्रामकता का नहीं, बल्कि अपनी परिवार की महिला की रक्षा करने का स्वाभाविक और साहसिक प्रयास था। इसके बावजूद, उसके साथ भी मारपीट की आशंका और स्थिति उत्पन्न होती दिखाई देती है।
इसके अतिरिक्त, आरोपित पक्ष द्वारा पीड़ितों को जान से मारने की धमकी भी दी गई है, विशेष रूप से यह कहा गया कि यदि वे उस रास्ते से दोबारा गुजरते हैं तो उनके साथ गंभीर अनहोनी की जा सकती है। यह स्थिति अत्यंत भयावह है, क्योंकि वह स्थान एक आम रास्ता है, जिसका उपयोग करना नागरिकों का अधिकार है। ऐसे में यह प्रश्न स्वाभाविक है कि पीड़ित पक्ष कैसे विश्वास करे कि भविष्य में उनके साथ कोई गंभीर घटना नहीं होगी।
आरोपित पक्ष ट्रैक्टर के माध्यम से पानी सप्लाई करने का कार्य करते हैं। इस कारण यह आशंका और भी बढ़ जाती है कि भविष्य में वे किसी सुनियोजित तरीके से नुकसान पहुँचाकर उसे दुर्घटना का रूप देने का प्रयास कर सकते हैं। ऐसी संभावनाओं को नज़रअंदाज़ करना अत्यंत जोखिमपूर्ण होगा।
उक्त पूरी घटना सीसीटीवी कैमरे में रिकॉर्ड है, जिसमें स्पष्ट रूप से देखा जा सकता है कि किस पक्ष द्वारा पहले हमला किया गया, किसने हिंसा को बढ़ावा दिया और किस प्रकार मारपीट की गई। यह साक्ष्य निष्पक्ष जांच के लिए पर्याप्त एवं महत्वपूर्ण है।
यह घटना एक सार्वजनिक स्थल—पार्क क्षेत्र—में घटित हुई है, जो किसी की निजी संपत्ति नहीं है। अतः वहाँ उपस्थित किसी भी व्यक्ति द्वारा किसी सामान्य गतिविधि (जैसे पेड़ से आम तोड़ना) के आधार पर इस प्रकार की हिंसात्मक प्रतिक्रिया देना पूरी तरह अनुचित एवं कानूनन अपराध है। यदि सार्वजनिक स्थानों पर भी आम नागरिक सुरक्षित नहीं रह सकते, तो यह अत्यंत गंभीर विषय है।
दुर्भाग्यवश, इस मामले में पुलिस प्रशासन की भूमिका भी अत्यंत निराशाजनक रही है। पीड़ित पक्ष को बार-बार पुलिस से अनुरोध करना पड़ रहा है कि वे उचित कार्रवाई करें। प्रत्येक चरण के लिए बार-बार पूछताछ करनी पड़ रही है, जबकि यह जिम्मेदारी स्वयं पुलिस प्रशासन की होती है। मेडिकल प्रक्रिया में भी अनावश्यक देरी की गई, लगभग दो दिन का समय लिया गया, जो कि गंभीर लापरवाही को दर्शाता है। न तो तत्काल प्रभाव से एफआईआर दर्ज की गई और न ही अब तक आरोपियों के विरुद्ध कोई ठोस प्रतिबंधात्मक कार्रवाई (पाबंद करना) की गई है।
वर्तमान स्थिति यह है कि पीड़ित पक्ष स्वयं न्याय के लिए गुहार लगाने को विवश है और पुलिस से अनुरोध कर रहा है कि वे आगे की प्रक्रिया को स्पष्ट करें और उसे आगे बढ़ाएं।
अतः आपसे निवेदन है कि इस पूरे प्रकरण की निष्पक्ष एवं त्वरित जांच कर उचित कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित की जाए, ताकि दोषियों को दंड मिले और भविष्य में इस प्रकार की घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो। साथ ही, आम नागरिकों की सुरक्षा एवं कानून व्यवस्था पर विश्वास बनाए रखने हेतु आवश्यक कदम उठाए जाएँ। .@RajGovOfficial .@RajCMO .@BhajanlalBjp .@KumariDiya .@OfficeofRR .@Ra_THORe .@MinistryWCD .@WCDRajasthan .@PoliceRajasthan .@RajPoliceHelp .@jaipur_police .@rpbreakingnews .@RakheeRathore_ .@nagar_jaipur .@DcDmJaipur .@jdajaipur .@CgstJaipur@Rajasthan_Tak
@SonuSood 🙏
My younger brother Ashish Vasistha ,age 41 years is admitted to KIMS Hospital in lungs transplant section.
Patient name- Ashish
UMR no. - UMR0001184731
Admn. No. - IP2122006671
Attendant- Vineet Vasistha
Ph-9829615000
Currently my brother needs 15 units of blood.
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