@iamarunsinghydv@KSHTRIYAaa@grok कृष्ण ने खुद को क्या कहा? शूरसेन महाजनपद क्षत्रिय था, अंधक वृष्णि संघ रिपब्लिक थे और क्षत्रिय लीनिएज थी,जिसे एल वंश कहते हैं,मनु की पुत्री इला से चला चन्द्र वंश...कुछ राजतंत्रीय तो कुछ रिपब्लिक थे इनमें जैसे यदु क्लेन.
@iamarunsinghydv@kshatriyaBihari हां रहे हैं, मंडल, राव वीरेंद्र सिंह, डीपी राय, राम नरेश यादव....लेकिन तब कांग्रेस के टाइम कास्ट बेस नहीं था, उनका तो सिस्टम ही अलग था, एलीट क्लास का.... हाइकमान से नजदीकी.अब कास्ट बेस ही पॉलिटिक्स है मंडल कमीशन के बाद....
@oppatel_sp विवाद का कोई विषय तो रहा होगा, जाति के चलते ऐसा हो तो हर तीसरा आदमी सिंह लगाए घूम रहा है, दलित ओबीसी सबसे ज्यादा सिंह लगाने लगे हैं...हर बात में एक ही एंगल नहीं होता...
@AsheeshYad65743 अहीर थे अब यदुवंशी भी हो गए आरक्षण के मंगते... शूद्र हो , क्षत्रिय लिखने से थोड़े ही क्षत्रिय हो जाओगे, समाज तुम्हे जानता है कौन हो...
@iamarunsinghydv@grok अक्लमंद महोदय, मनु वैवस्वत एक ही हैं...पुराणों से निकलो, ऋग्वेद को देखो, ग्रोक से पूछो..शुंग काल में जन्मी मनोहर कहानियां कम पढ़ो.
@kshatriyaBihari सपा का जो अहीर वोटर है वो खुली दुश्मनी आज भी और कल भी रखेगा, क्योंकि कुछ जातियों को जिनका राजनीतिक उत्थान वीपी सिंह ने करवाया, वो राजपूतों के ऊपर चढ़ कर बैठने की हसरत लिए हैं....इसका इलाज कुछ और है, राजनीति से हटकर
@BabuSahab_0003 कृपया रामायण और महाभारत भी पढ़ें, वहां भी इन्हें पापी और दस्यु लिखा गया है, पुराने राजपूत अभिलेखों में भी इन्हें खदेड़कर जनता को भयमुक्त बनाने के उल्लेख हैं ..आदतन दस्यु,आर्य विरोधी कबीले.यदुवंश तक को लूटा, मूसल पर्व महाभारत.
@GangeticTribal सूर्य उपसना वैदिक है, लेकिन मूर्ति के साथ और सूर्य मंदिर शक शासन में बनने शुरू हुए, ग्रीक्स से मूर्तिकला गांधार पहुंची जहां बुद्ध की मूर्तियां बनीं, कुषाण राजाओं ने अपने सिक्कों पर भी देवी देवता उकेरे....मूर्ति पूजा वैदिक नहीं.