उत्कृष्ट शिक्षण सेवा हेतु महामहिम राष्ट्रपति से सम्मानित व मेरे शैक्षक्षिक अभिभावक रहे, परिनिर्वाण प्राप्त बड़े भाई श्री सालिक राम मौर्य जी को अन्तिम विदाई एवं श्रद्धासुमन अर्पित किया।
आज भरहुत में वो स्तूप नहीं है, जिसे सम्राट असोक ने ईंटों से बनवाया था। कनिंघम ने लिखा है कि भरहुत गांव में 200 से अधिक घर भरहुत स्तूप से उखाड़ कर लाई गई ईंटों से बने हैं। अनुमान किया जा सकता है कि भरहुत का स्तूप कितना विशाल और भव्य रहा होगा!
ऋषिपतन के ऋषि लोग और साक्यमुनि के मुनि लोग यही ऋषि-मुनि थे.
यही लोग जंगल और गुफाओं में ध्यान-तप करते थे.
भारत को इसीलिए ऋषि-मुनियों का देश कहा जाता है.
महाराष्ट्र में तो हर पहाड़ी पर ही इन ऋषि- मुनियों का वास रहा है.