चुनाव आयोग ध्यान दे कि ऐसे अधिकारियों को चुनाव से हर हाल में दूर रखा जाये जिनकी प्रतिनियुक्ति, सेवा नियमावली के विरूद्ध जाकर भाजपा सरकार द्वारा सिर्फ़ इसलिए बढ़ायी गयी है क्योंकि ऐसे अधिकारी सरकार की मंशा के हिसाब से कुछ ख़ास लोगों को प्रताड़ित करने का काम करते हैं।
चुनाव आयोग ऐसे सभी अधिकारियों का स्वत: संज्ञान ले और न्यायपूर्ण निर्णय लेकर इन्हें किसी भी तरह चुनाव प्रक्रिया का हिस्सा न बनने दे। ये चुनाव आयोग की स्वच्छ छवि और साख का मामला है। आशा है चुनाव आयोग निष्पक्षता और ईमानदारी के नये मानक स्थापित करेगा।
सच की हुकूमत हर बार फिर आबाद होती है
क्योंकि नाइंसाफ़ी की भी एक मियाद होती है
#अस्सी_हराओ_भाजपा_हटाओ
उप्र में भाजपा के तथाकथित अमृतकाल की इससे दुर्भाग्यपूर्ण तस्वीर और क्या हो सकती है कि देश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ समझे जानेवाला किसान आज अपनी ज़मीन को बचाने के लिए ख़ुद को आग लगाने पर मजबूर हो रहा है।
मेरठ में वन विभाग द्वारा अपनी ज़मीन हड़पे जाने के बाद कई बार कोशिश करने पर भी सुनवाई न होने से हताश होकर ख़ुद को आग लगानेवाले किसान को सबसे पहले अच्छे से अच्छा इलाज सुनिश्चित कर बचाया जाए और फिर उसकी ज़मीन लौटाई जाए।
भाजपा खेती और किसान दोनों को विरोधी है। जबसे भाजपा आई है तबसे उसकी बुरी नज़र किसानों की ज़मीन पर भी है और उनकी पैदावार पर भी। चाहे भूमि के अधिग्रहण का क़ानून रहा हो, खाद की बोरी में चोरी, महँगे बीज, बिजली, सिंचाई के रूप में लगातार बढ़ती कृषि लागत और फसल की लगातार घटती क़ीमत या काले क़ानून सब भाजपा की किसान विरोधी सोच का उदाहरण हैं।
किसान भाजपा का दाना-पानी उठा देंगे।
#नहीं_चाहिए_भाजपा
उप्र के व्यापारियों, कारोबारियों और दुकानदारों के समर्थन में:
भाजपा सरकार राजनीतिक दुर्भावना से ग्रस्त होकर, जिस तरह व्यापार और कारोबार को चौपट करने में लगी है वो सबको दिख रहा है। दरअसल भाजपा बड़े-बड़े पूँजीपतियों के लिए उत्तर प्रदेश के छोटे कारोबारियों के व्यापार पर छापेमारी करके उन्हें बंद करवाना चाहती है। पहले से ही मंदी की मार झेल रहे उप्र के हताश व्यापारी किसी तरह अपना काम-कारोबार करके अपना पेट पाल रहे हैं और रोज़गार देकर कुछ और लोगों का भी, उस पर राजनीतिक विद्वेष की वजह से की जा रही ऐसी कार्रवाइयों से वो और हतोत्साहित होते हैं। भाजपा सरकार ख़ुद तो कारोबार-रोज़गार बढ़ाने में पूरी तरह नाकाम रही है और जो लोग किसी प्रकार अपना काम कर रहे हैं और दूसरों को भी काम दे पा रहे हैं, भाजपा उन पर भी हमले कर रही है।
दिन-प्रतिदिन के हिसाब-किताब के नाम पर छापेमारी से उप्र के व्यापार और व्यापारियों की छवि ख़राब करने की साज़िश व्यापारी भी समझ रहे हैं और जनता भी।
- क्या ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था ऐसी ही संकीर्ण मानसिकता से बनेगी?
- क्या यही है व्यापार के लिए रेड कार्पेट बिछाने की पॉलिसी का असली चेहरा?
- क्या यही है निवेश को आकर्षित करने की झूठी नीति की सच्ची नीयत?
- क्या यही है ‘वन डिस्ट्रिक्ट, वन प्रॉडक्ट’ के झूठे दावों का सच?
- कहीं ये उप्र के व्यापार-कारोबार को बाहरी लोगों के फ़ायदे के लिए बर्बाद करने या उप्र से बाहर ले जाने की साज़िश का हिस्सा तो नहीं है?
भाजपा हार रही है तो हार को स्वीकार करे और व्यापार को राजनीति से दूर रखे। जीएसटी के नाम पर व्यापारियों का शोषण तुरंत बंद करे।
भाजपा के व्यापार-विरोधी हर हथकंडे के ख़िलाफ़ हम प्रदेश के व्यापारियों के साथ संघर्ष करने के लिए हमेशा कंधे-से-कंधा मिलाते रहे हैं। समाजवादी पार्टी उप्र के हर एक व्यापारी, कारोबारी, कारख़ाना मालिक, दुकानदार के साथ खड़ी है।
‘भाजपाई भ्रष्ट्राचार की नींव पर बना भवन गिरा!’ : लखनऊ में गिरे घर के लिए जनता में यही चर्चा है।
जाँच हो और कार्रवाई भी क्योंकि इससे आस-पड़ोस के घरों के लिए भी जान-माल की हानि की पूरी आशंका है।