मुख्यमंत्री @DrMohanYadav51 जी,
इंदौर में ‘छात्रों की गूँज’ कार्यक्रम में OBC वर्ग के छात्रों ने बताया कि चयन प्रक्रिया पूरी होने के बावजूद 27% OBC आरक्षण के तहत 13% पदों पर नियुक्तियां वर्षों से रुकी हुई हैं।
सभी छात्र बहुत पीड़ा में हैं - चार साल से अधिक समय से इंतज़ार कर रहे इन युवाओं का कीमती वक्त अब और ज़ाया नहीं होना चाहिए।
उनकी बात सुनिए, सभी दलों की सर्वसम्मति से पारित 27% OBC आरक्षण लागू कीजिए और सभी चयनित अभ्यर्थियों को नियुक्ति दीजिए।
Vote chori is a crime against the Indian people and a direct attack on our constitution.
The BJP, RSS and EC who organised it have committed an act of treason.
Justice will be served.
No-this is not crass humour. This is not immature behaviour. This is a much-needed long-awaited phenomenon. To fearlessly lampoon a PM is a democratic right long denied to Indians.
दिल्ली में 17 साल की युवती के साथ गैंगरेप हुआ, उसकी हत्या कर शव खुले मैदान में फेंक दिया गया। राजधानी में इतनी बड़ी दरिंदगी और पुलिस को कई दिनों तक भनक नहीं लगती।
दुर्भाग्य है कि दिल्ली आज राजधानी नहीं, महिलाओं के लिए हर दिन की खौफनाक कहानी बनकर रह गई है।
अमित शाह जी, दिल्ली पुलिस आपके अधीन है। महिला सुरक्षा की जिम्मेदारी आखिर किसकी है?
या दिल्ली पुलिस का काम सिर्फ़ आम नागरिकों को डराना-धमकाना रह गया है? क्योंकि अपराधी तो बेखौफ घूम रहे हैं।
दरिंदों की तत्काल गिरफ्तारी हो, कड़ी कार्रवाई और सज़ा मिले, और इस आपराधिक गैर-जिम्मेदारी की जवाबदेही तय हो।
महिलाओं की सुरक्षा के बिना भारत आगे नहीं बढ़ सकता।
बालाघाट में 30 से ज़्यादा आदिवासी बच्चों की बीमारी, कुपोषण और बुनियादी स्वास्थ्य सुविधाओं की कमी के बीच मौत हो चुकी है।
संवेदनहीनता का आलम यह है मासूमों की मौतें होती रहीं, लेकिन कार्रवाई सुस्त रही, सरकार सोती रही।
मुख्यमंत्री जी, दीये जलाने और उत्सव मनाने से फुर्सत मिल गई हो तो ज़रा राज्य की ज़मीनी हालत भी देखिए।
बीमारी, पोषण और साफ पानी की कमी और चरमराती स्वास्थ्य व्यवस्था नन्हें बच्चों की जान ले रही है।
मिलावटी दवाइयां और जहरीली अवैध शराब सैकड़ों परिवारों को तबाह कर रही हैं।
मैं इंदौर आ रहा हूं और लगातार प्रदेश के छात्रों, युवाओं और आम लोगों से feedback ले रहा हूं। सामने आ रही भयावह घटनाएं बता रही हैं कि मध्यप्रदेश की शिक्षा व्यवस्था आज देश भर में सबसे ज़्यादा बर्बाद है।
छात्र, बच्चे, गरीब, दलित, आदिवासी, पिछड़े या महिलाएं - हर वर्ग प्रताड़ित है, कोई खुश नहीं।
मध्य प्रदेश सरकार आज भारत की सबसे भ्रष्ट और सबसे कुशासित सरकार है - यही सच्चाई है।
आज देश के छात्र और युवा हताश हैं। युवा इस ‘करप्ट एजुकेशन सिस्टम’ में अपनी उम्मीद खो बैठे हैं।
इसलिए आइए… हम से जुड़िए, हमें अपनी समस्या बताइए और अपने अनुभव साझा करिए।
हम आपके साथ पूरी मजबूती से खड़े हैं ✊
#ChaatronKiGoonj
🔗 https://t.co/LfqznJLz47
मेरे प्यारे छात्रों, युवाओं और भारत के Gen Z,
आपके साथ सारा देश देख रहा है कि आज एक टूटी हुई शिक्षा व्यवस्था ने आपकी उम्मीदों की लौ को बुझा कर आपके भविष्य को अंधेरे में धकेल दिया है।
‘छात्रों की गूंज’ के माध्यम से मैं अलग-अलग शहरों में आपसे मिलकर आपकी चुनौतियां समझ रहा हूं। इसी मुहिम के साथ 19 सितंबर को मैं फिर आपके बीच, इंदौर में रहूंगा।
मगर इस सिस्टम को बदलने के लिए पूरे देश के हर छात्र की आवाज़, उनका दर्द और उनकी राय सुनी जानी ज़रूरी है।
नीचे दिए लिंक पर जाकर बताइए - आपको अपने सपने पूरे करने से क्या रोक रहा है? आप वीडियो बनाकर भी अपनी बात हम तक पहुंचा सकते हैं।
आपकी समस्याएं। आपके सुझाव। हम मिलकर उम्मीद फिर से लौटाएंगे।
https://t.co/LJKkkNMrGM
#ChhatronKiGoonj
पंजाब की AAP सरकार में एक खतरनाक पैटर्न दिख रहा है - सरकारी नाकामी पर सवाल करोगे, तो जवाब धमकी और torture से मिलेगा।
अपने बेटे को नशे का शिकार बनते देखने वाले, दलित समुदाय से आने वाले गुलज़ार सिंह जी ने वित्त मंत्री से सिर्फ़ इतना पूछा कि सरकार ड्रग्स का कारोबार रोकने में इतनी बुरी तरह नाकाम क्यों है?
बस इस बात पर उन्हें इतना प्रताड़ित और अपमानित किया गया, माफ़ी मांगने के लिए इतना दबाव बनाया गया कि उन्होंने ज़हर खा लिया। एक अस्पताल से दूसरे अस्पताल भटकते हुए, इलाज के अभाव में, आखिरकार वो ज़िंदगी की जंग हार गए।
पिछले हफ्ते मैंने एक युवा मोहनजीत सिंह से भी बात की, जिन्हें मुख्यमंत्री भगवंत मान के खिलाफ़ प्रदर्शन करने पर प्रताड़ित किया गया।
सरकार का काम जनता को जवाब देना है, सवाल पूछने वालों को कुचलना नहीं। गुलज़ार सिंह जी के परिवार को जल्द से जल्द न्याय मिले। मुख्यमंत्री तत्काल वित्त मंत्री का इस्तीफा लें और सुनिश्चित करें कि एक स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच हो जिसकी FIR में उनका नाम दर्ज किया जाए।
सोचिए, ऐसा क्या गुनाह किया था इन बच्चों ने कि इन्हें गोली मार दी गई?
इन्होंने सरकार से सिर्फ़ तीन चीज़ें माँगी थीं - शिक्षा, रोज़गार, और जवाबदेही।
एक छात्र के पैर की हड्डी AK 47 की गोली से टूट गई। सेना में जाकर देश की सेवा करने का उसका सपना भी उसी के साथ चला गया। दो और छात्रों के कंधों को गोली चीरती हुई निकल गई।
ये अपराधी नहीं थे। ये ग़रीब घरों के वो बच्चे थे जो अपने परिवार के सपने लेकर पढ़ने निकले थे - किसी को अच्छी नौकरी चाहिए थी, किसी को अपने घर के हालात बदलने थे।
गोली के घाव भर जाएंगे - पर जो डर इन बच्चों के भीतर बैठ गया है, उसका इलाज किस अस्पताल में होता है?
प्रधानमंत्री जी, मुख्यमंत्री जी - इनकी टूटी हड्डी तो जुड़ जाएगी। क्या इनका टूटा हुआ सपना आप लौटा सकते हैं?
मुझे आशा नहीं थी कि @RahulGandhi जी की सच में ट्वीट करेंगे अब मुझे राहुल गांधी जी जैसे बड़े नेता का साथ मिल चुका है अब मुझे न्याय मिल कर रहेगा और स्वतंत्र भारद्वाज जेल जाकर रहेंगे..
निशु, घबराने की ज़रूरत नहीं है। मैं तुम्हारे साथ हूँ।
साफ है कि तुम्हें इसलिए निशाना बनाया गया क्योंकि तुम अपने समुदाय और छात्रों के हक़ की आवाज़ उठाती हो।
अमित शाह की दिल्ली पुलिस एक तरफ़ छात्रों के साथ अमानवीय बर्बरता करती है। दूसरी तरफ़ एक दलित लड़की के पिता का सिर फोड़ने वाला अपराधी खुलेआम घूम रहा है।
@narendramodi जी, @AmitShah जी - ऐसे अपराधी को आपका और आपकी पार्टी के लोगों का संरक्षण क्यों है? अब भी कार्रवाई होगी या किसी को बचाते रहेंगे?
निशु, तुम्हारी लड़ाई अकेली नहीं है। हम तब तक नहीं रुकेंगे जब तक न्याय नहीं मिल जाता।
जय भीम। जय संविधान।
दिल्ली NCR महिलाओं के लिए इतना असुरक्षित हो चुका है कि एक नाबालिग बच्ची के साथ एक स्लीपर बस में 47 किलोमीटर तक गैंगरेप हुआ - ग्रेटर नोएडा से दिल्ली तक।
हैरानी की बात है कि पूरी दिल्ली या नोएडा पुलिस को इसकी भनक तक नहीं लगी। यह बस नोएडा-ग्रेटर नोएडा एक्सप्रेसवे, दिल्ली का रिंग रोड, बॉर्डर - सब पार कर गई, बिना एक भी चेकपोस्ट पर रोके गए।
बस की सीटों पर पर्दे लगे थे, ताकि अंदर क्या हो रहा है कोई देख न सके। और अपराधियों में प्रशासन का कोई डर भी नहीं।
निर्भया के बाद इतने सालों में, इतनी घटनाओं के बाद भी ऐसी बसों की जाँच और निगरानी के नियमों का पालन क्यों नहीं हो रहा?
पर्दे सिर्फ़ उस बस में नहीं डाले गए थे - साल दर साल सरकार द्वारा प्रशासन की नाकामियों पर डाले गए पर्दों का नतीजा है कि देश की राजधानी में भी महिलाएं एक सुरक्षित सफर नहीं कर सकतीं।
और कितनी महिलाओं और बच्चियों के साथ ऐसा होना बाक़ी है, तब जाकर केंद्र और राज्य सरकारें इस व्यवस्था को ठीक करेंगी?
क्या अमित शाह के अधीन दिल्ली पुलिस और आदित्यनाथ के अधीन UP पुलिस की जवाबदेही तय की जाएगी? कोई गुंजाइश ही नहीं - इस अपराध पर भी एक पर्दा डाल दिया जाएगा।
देश के हर दलित व्यक्ति का जन्म से मृत्यु तक, हर जगह, हर कदम अपमान किया जाता है।
उनकी जितनी बुलंद आवाज़ होती है, उनपर उतना तेज़ हमला होता है।
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे जी के साथ हल्द्वानी में जो भी हुआ वो "शुद्धिकरण" का नाम दे कर उनके खिलाफ़ छुआछूत है - और छुआछूत भारत के संविधान के अनुसार दंडनीय अपराध है।
इस बात को 20 दिन हो गए - मगर अब तक कोई कार्रवाई नहीं की गई, कोई FIR दर्ज नहीं हुई।
नरेंद्र मोदी जी, देश के हर दलित व्यक्ति को आपकी यह दलित विरोधी विचारधारा साफ़ दिखाई दे रही है।
अब गेंद BJP के पाले में है - जल्द से जल्द SC-ST क़ानून के तहत FIR दर्ज हो, कार्रवाई हो और न्याय हो - वरना कांग्रेस पार्टी न्याय हासिल करना अच्छे से जानती है।