5 हजार करोड़ की नेशनल हेराल्ड डकैती में अपनी अम्मी के साथ नामजद है अधेड़।
पिछले 12 वर्षों से अधेड़ अपनी करतूतों के चलते इस स्थिति को लगातार निमंत्रण दे रहा था।
मेरी आँखें भी पिछले 12 वर्षों से यह नज़ारा देखने के लिये तरस रही थीं। आज उनकी 12 वर्ष से अधिक लंबी प्रतीक्षा बड़ी धूमधाम से पूरी हुईं।
जिस तरह रंगेहाथ पकड़े जाने पर कोई पॉकेटमार सड़क पर पसर जाता है और बचने का नपुंसक प्रयास करता है। ठीक उसी तरह आज देश को अराजकता की आग में झोंकने प्रधानमंत्री आवास पहुंचा अधेड़ उसी तरह सड़क पर लोटने लगा, पसर गया। लेकिन दिल्ली पुलिस का लफंगई के ऐसे हथकंडों से रोजाना सामना होता है। अतः कुछ सेकेंड में ही दिल्ली पुलिस ने अधेड़ को सड़क पर घसीटते हुए बस में फेंका और साथ लेकर रवाना हो गयी।
देश को दो टुकड़ों में बांटकर शेष बचे भारत का 40 हजार वर्गकिमी भूभाग चीन के हाथों गंवाने वाले कुकर्मी नेहरू के उससे अधिक देशघाती, उसके वंशज को सड़क पर लोटते हुए, घसीटे जाते देख कर भारत से प्रेम करने वाले प्रत्येक भारतीय को असीम सुख और परम आनंद की अनुभूति हुई।
कल तीसरी बार हम दिल्लीवासियों ने हुड़दंग, दंगे जैसी स्थिति झेली है!
कोई भी दिल्ली आता है और दंगा कर देता है
मुल्ला और वामपंथी और विपक्ष के लोग अपने कार्यकर्ताओं को उनके साथ कर देते है
यहाँ कुछ भी हो पंजाब से लोग आ कर बॉर्डर पर खड़े हो जाते है
मैं दिल्ली की गली गली गाँव गाँव जा कर लोगो को एकजुट करूँगा
हम अपनी दिल्ली को जलने नहीं देंगे कोई भी आयेगा और यहाँ दंगा भड़का देगा
दिल्ली पुलिस मुझे और मेरे साथियों को बार बार नज़र बंद करती रही और इन्हें जंतर मंतर पर बिठा कर रखा
इन्होंने पुलिस को पीटा और तोड़फोड़ की.
संसद भवन उखाड़ देंगे, भारत को नेपाल बना देंगे।
यह अराजक राक्षसी सपना देख रहे इस लफंगे का चेहरा देखिये... क्या ये NEET का स्टूडेंट है...?
यह फैसला स्वयं कर लीजिये।
कल जंतर-मंतर पर हुए प्रदर्शन के दौरान
टाइम्स नाउ नवभारत की पत्रकार ज्योति मिश्रा के साथ कथित अपहरण और दुर्व्यवहार की खबर बेहद गंभीर और निंदनीय है।
लोकतांत्रिक आंदोलन की आड़ में यदि किसी उपद्रवी तत्व ने किसी महिला पत्रकार के साथ अभद्रता या हिंसा की है, तो ऐसे लोगों के लिए किसी भी प्रकार की सहानुभूति नहीं हो सकती।
उग्र भीड़ से अपनी जान बचाने के लिए ज्योति मिश्रा को एक बैंक में लगभग तीन घंटे तक शरण लेनी पड़ी। इस दौरान कथित रूप से पीसीआर टीम को भी उनकी मदद के लिए पहुँचने से रोका गया, उन पर पथराव किया गया और वे लंबे समय तक बैंक के भीतर फँसी रहीं।
अंततः डीसीपी रोहित राजबीर स्वयं मौके पर पहुँचे और उनका सुरक्षित रेस्क्यू कराया।
पत्रकार की सुरक्षा पर हमला लोकतंत्र पर हमला है। दोषी चाहे किसी भी संगठन, समूह या विचारधारा से जुड़े हों, उनकी निष्पक्ष जांच हो और यदि आरोप सही पाए जाएँ तो कानून के अनुसार कठोर कार्रवाई की जाए।
आंदोलन का अधिकार लोकतंत्र का हिस्सा है, लेकिन
उपद्रव, हिंसा और महिला पत्रकारों के साथ दुर्व्यवहार किसी भी परिस्थिति में स्वीकार्य नहीं हो सकता।
@jyotimishra999@RubikaLiyaquat@TNNavbharat
अखिलेश भैया, सुबह की राम राम।
एक बात बताइये मित्र। क्या आपकी पार्टी के लोगों को गरीबों, पिछड़ों और दलितों को सताने में मज़ा आता है क्या? ये बात इसलिए पूछ रहा हूं क्योंकि लगभग हर रोज़ कहीं ना कहीं अपराध की ख़बरें सामने आती हैं और जब जांच होती है तो पता चलता है कि घटना के पीछे “आपके लोग” शामिल हैं।
हत्या, हुड़दंग से लेकर चोरी-छिनैती तक जैसी घटनाओं में आपके लोगों का हाथ क्यों रहता है? ऐसे लोगों को क्यों पार्टी में भर रखें हैं महाराज।
ये पार्टी है या गैंग? बात आजमगढ़ की कर लेते हैं। आजमगढ़ के लालगंज के सपा सांसद का नाम भले 'दरोगा' प्रसाद सरोज हो मगर काम 'लुटेरा' वाला करते हैं। आपको उनका कांड पता चल ही गया होगा।
दरोगा नाम के लुटेरे को सांसद बनाये किस लिए हैं? ये सांसद सिर्फ गरीब पिछड़ों और दलितों पर जुल्म ही कर रहे हैं? जब देखो तब बदसलूकी और धमकी देकर ज़मीन क़ब्ज़ा करने वाला कांड इनके रोज़ की आदत में शामिल हो गया है। इसके कांड के बारे में मेरी बात पर यक़ीन ना हो तो अपने भाई धर्मेंद्र जी से पूछ लीजिए। वो सब जानते हैं।
आजमगढ़ के मोहनपुर पटवास गांव में गरीब दलित महिला का हक़ मारने वाले लुटेरा जी को समझाइए। गीता सरोज की ज़मीन कब्जा करने के लिए दरोगा उर्फ़ लुटेरा जी ने अपने दबंग बेटा-पोता को काम पर लगा रखा है। शराब के नशे में गाली-गलौज, धमकी देकर ज़मीन हड़प कर रहे हैं। 50 बीगहा ज़मीन-तलाब हड़प कर उस पर स्विमिंग पूल वाला फॉर्म हाउस बना लिए हैं और आप चुप बैठे हैं।
क़ब्ज़ा तो किए ही हैं, क़ब्ज़े वाली ज़मीन पर चारों ओर से करेंट वाला तार अलग से लगवा दिए हैं ताकि कोई पिछड़ा दलित अगर वहां जाये तो करेंट से मर जाये। ये समाजवादी नहीं बल्कि सामंती सोच का नतीजा है।
मित्र, हम चाहते हैं कि अगले साल नई सरकार में हमें मज़बूत विपक्ष मिले। अच्छा विपक्ष बनने के लिए आपको मेहनत करनी होगी। इसलिए राजभर आपको सुझाव दे रहा है कि लुटेरे दारोग़ा जैसे लोगों पर क़ाबू रखिए वरना नेता प्रतिपक्ष का पद भी गंवा बैठेंगे।
जय भारत, जय श्रीराम, जय श्री कृष्ण, जय महाराजा सुहेलदेव।
@yadavakhilesh
माननीय @yadavakhilesh जी,
क्या आप सच में यदुवंशी हैं? मुझे तो शक होता है। क्योंकि अगर आप सच्चे यदुवंशी होते तो दो टके के मौलाना जरजिस अंसारी के बयान पर आपका खून ज़रूर खौला होता। मौलाना जरजिस हम सब के आराध्य भगवान श्रीकृष्ण को लेकर लगातार आपत्तिजनक बयानबाजियां कर रहा है और आप वोट बैंक की राजनीति के चक्कर में मुंह सिलकर पूरे यदुवंश की नाक कटा रहे हैं।
वैसे आपसे अपेक्षा ही क्या की जा सकती है। आप तो वोटबैंक की राजनीति में इतने गिर चुके हैं कि कोई मौलाना आपकी धर्मपत्नी पर भी अभद्र टिप्पणी करके आप का चहेता बना रह सकता है।
खैर, अपनी धर्मपत्नी पर टीका-टिप्पणी को आप बर्दाश्त कर सकते हैं, ये आपका निजी मामला है। मगर, भगवान श्रीकृष्ण पर टिप्पणी करने वालों के लिए भी आपके मन में सहानुभूति देखकर आप पर तरस आता है।
क्यों यदुवंशियों का सिर झुकाने पर तुले हैं। अब तो देश और प्रदेश का यादव भी देख रहा है कि किस तरह वोट बैंक के लिए आप मौलानाओं के तलवे भी चाट सकते हैं। उनके सामने नाक भी रगड़ सकते हैं।
कम से कम हमारे प्रेरणापुंज महाराजा सुहेलदेव जी से ही कुछ सीख ले लिये होते, जिन्होंने राष्ट्र और धर्म पर आंख उठाने वाले सालार मसूद गाजी का वध करके एक नजीर पेश किया था। ये दिखा दिया था कि कोई कितना बड़ा सिपहसालार हो, राष्ट्र और धर्म की बात आएगी तो शीश उतारने में देर नहीं लगेगी। कभी आजमा लीजिएगा, अगर महाराज सुहेलदेव जी के सम्मान पर कभी बात आई तो पूरा राजभर समाज ऐसा सबक सिखाएगा कि ऐसे मौलानाओं की पीढ़ियां याद रखेंगी।
🚨77 दिन का मौन चीत्कार और भीड़तंत्र का बहरापन!
रवींद्र जठेड़ी जी पिछले 77 दिनों से भेदभावपूर्ण SC/ST एक्ट और आरक्षण व्यवस्था के खिलाफ आमरण अनशन पर हैं।
उनकी हालत दिन प्रतिदिन नाजुक होती जा रही है। लेकिन सबसे बड़ा और कड़वा सच यह है कि वह आज भी उतने ही अकेले हैं, जितने पहले दिन थे।
रवींद्र जी, आपको एक बहुत ही कठोर वास्तविकता समझनी होगी।
आप CJP के कोई 'दिपके' नहीं हैं। आपके पीछे कोई विदेशी फंडिंग, पीआर एजेंसी या मोमबत्ती लेकर घूमने वाला इकोसिस्टम नहीं है जो आपके लिए रातों रात नेशनल मीडिया को इकट्ठा कर ले।
और जिन कथित सवर्ण (GC) राजनीतिक संगठनों से आप उम्मीद लगाए बैठे हैं, वह भी कभी आपके समर्थन में नहीं आएंगे।
मुख्यधारा की राजनीतिक पार्टियों की तरह ही, इन संगठनों को भी इस मुद्दे से सिर्फ अपना राजनीतिक स्वार्थ साधना है।
वह चाहते हैं कि यह मुद्दा सुलगता रहे ताकि उनकी दुकान चलती रहे।
जब कोई व्यक्ति सच में इस लड़ाई के लिए अपने प्राण दांव पर लगाता है, तो ये संगठन सबसे पहले गायब हो जाते हैं।
यह देश केवल भीड़तंत्र और शक्ति प्रदर्शन की भाषा समझता है।
जहां पीछे उग्र भीड़ नहीं होती, वहां सत्ता के कान पर जूं तक नहीं रेंगती।
आपसे हाथ जोड़कर विनती है कि कृपया अपना यह अनशन तुरंत समाप्त करें।
यह संवेदनहीन सिस्टम आपके इस बलिदान के लायक बिल्कुल नहीं है।
कृपया अपनी सेहत पर ध्यान दें, आपके प्राण आपके परिवार के लिए बहुत कीमती हैं। 🙏🚩
#RavindraJatheri #SystemFailure #RealityCheck #ReservationSystem
प्रिय अखिलेश जी,
जौहर यूनिवर्सिटी पर कानून अपना काम कर रहा है तो उम्मीद है आप बेचैन ज़रूर होंगे। हैं ना? सच सच बताइए?
जिस जौहर यूनिवर्सिटी को आपकी सरकार में बनाया गया, उसमें अरबों रुपए और जमीन किसकी थी? सरकार की, अवैध यूनिवर्सिटी किसने खड़ी की? आजम खान ने। संसाधन किसका लगा? सरकार का। ट्रस्ट किसने बनाया? आजम खान ने। टैक्स किसने दिया? हिंदुओं ने। नौकरी किसको मिली? आजम खान के रिश्तेदारों को।
आजम खान ने जौहर यूनिवर्सिटी के लिए आपके सैफई परिवार के साथ मिलकर जो जौहर दिखाया है- उस पर किसी को भी शर्म आ जाए। अब कार्रवाई हो रही है बेचैनी क्यों बढ़ रही है?
सुनिए, ये डबल इंजन की सरकार है, अवैध इमारतों पर बुलडोजर तो चलेगा ही। बेचैन मत होइए। पश्चाताप के समय बेचैन नहीं हुआ जाता, आत्मग्लानि महसूस करनी चाहिए। इसीलिए हमारे पुरख़ों ने कहा है, “जैसी करनी, वैसी भरनी”।
जय भारत, जय श्री राम, जय श्री कृष्ण, जय महाराज सुहेलदेव।
@yadavakhilesh
अखिलेश यादव जी, सुन लीजिए।
चुनाव में हार पक्की देखकर अब आपकी पूरी गैंग गाली-गलौज और जातिवादी जहरीलेपन पर उतर आई है! आपका गुंडा, मऊ का पूर्व सपा जिलाध्यक्ष और वर्तमान में सांसद प्रतिनिधि, आपके स्वजातीय की हिम्मत तो देखिए। राजभर और 'चमारो' को खुलेआम गरिया रहा है। मां और बहन की गाली दे रहा है। ‘चमार’ शब्द का इस्तेमाल तो नहीं करना चाहिए लेकिन आपके लोगों की हरकतों की वजह से मुझे इसका इस्तेमाल करना पड़ रहा है।
आपके लोडर तो गदहिया गोल के भी दर्शन नहीं किये हैं... मगर आप तो विदेश से अंग्रेजी में पढ़े लिखे हैं। आपके चेले पढ़ लिख नहीं सकते इसलिए आप उन्हें कभी राजभरों और 'चमारों' का इतिहास बता दीजिएगा। उनसे बताइयेगा कि हम लोग महाराजा सुहेलदेव और महाराज चंवर सेन के वंशज हैं, योद्धा कौम वाले मार्शल रेस कहलाते हैं।
विश्वयुद्ध में चमार रेजिमेंट के शौर्य की गाथाएं नागालैंड कोहिमा से लेकर सिंगापुर तक फैली हैं। जीता 'चमार' तो आपके इटावा क्षेत्र के ही वीर थे, क्रांतिकारी थे, योद्धा थे।
खैर, आप अपनी जाति के इतने मोह में रहते हैं कि नाम भी नहीं सुने होंगे। समय निकालकर पढ़ लीजिएगा उनके बारे में। सन 1857 की क्रांति में जीता चमार जी ने अपने शौर्य से इटावा से अंग्रेजों को ऐसा खदेड़ा था कि 100 मील तक एक भी फिरंगी दिखाई नहीं दिया था।
बहुत विनम्रता के साथ समझा रहा हूं आपको क्योंकि हमें पता है कि आप और आपके स्वजातियों की नजर में हम आपके 'पैरों की जूती' और 'कीड़े-मकोड़े' हैं। आपकी नज़र में हम इंसान हैं ही नहीं।
सच बताइये, यादवों के नजर में क्या राजभर और 'चमार' इंसान नहीं होते??
इस सोच को बदलिए, जितनी जल्दी हो सके इस भ्रम से बाहर निकल आइये। समझा लीजिए अपने लोडरों को। केवल सोशल मीडिया में रंगदारी वाले गाना पर नकली गुंडई दिखाने से वीरता नहीं आती। देश के खातिर राजभर-चमार जेतना करेजा होए के चाही।
अखिलेश जी दोबारा आपके गुंडे गाली दिए तो राजभर और 'चमार' आपके सपा की ईंट से ईंट से बजा देंगे। गाली देना हो तो ओमप्रकाश राजभर को दीजिए। किसी और को नहीं।
जय भारत, जय श्री राम, जय श्री कृष्ण, जय महाराज सुहेलदेव, जय महाराज चंवर सेन!
@yadavakhilesh
जनपद-आजमगढ़ स्थित श्रीरामकृष्ण जूनियर हाईस्कूल, मेहियापार चौक में सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी के तत्वाधान में आयोजित "विजय संकल्प महासम्मेलन एवं स्वागत समारोह" में मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित होकर कार्यक्रम को संबोधित किया।
इस अवसर पर विशिष्ट अतिथि के रूप में राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) मा. श्री हंसराज विश्वकर्मा जी, सुभासपा के राष्ट्रीय मुख्य प्रवक्ता मा. श्री अरुण राजभर जी, कार्यक्रम संयोजक डॉ. घनश्याम विश्वकर्मा जी, वरिष्ठ भाजपा नेता एवं पूर्व राज्य मंत्री श्री कृष्ण मुरारी विश्वकर्मा जी, गोरखपुर मंडल उपाध्यक्ष श्री रोहन विश्वकर्मा जी, जिला अध्यक्ष आजमगढ़ श्री राजेश विश्वकर्मा जी, जिला अध्यक्ष अंबेडकर नगर श्री अनुज विश्वकर्मा जी, विधानसभा अध्यक्ष अतरौलिया श्री दिनेश विश्वकर्मा जी, मंडल उपाध्यक्ष आजमगढ़ श्री संतोष विश्वकर्मा जी, भाजपा पिछड़ा मोर्चा के जिला उपाध्यक्ष श्री उमेश विश्वकर्मा जी सहित अनेक गणमान्य अतिथिगण, पदाधिकारी एवं सम्मानित कार्यकर्ता उपस्थित रहे।
सभी सम्मानित अतिथियों, आयोजकों एवं उपस्थित जनसमूह का हार्दिक आभार।
@narendramodi@AmitShah@rajnathsingh@myogiadityanath@NitinNabin@JPNadda@blsanthosh@idharampalsingh@mppchaudhary@BJP4India@BJP4UP@kpmaurya1@PMOIndia@brajeshpathakup@sunilbansalbjp@hanshraj4bjp
केजरीवाल की पंजाब सरकार ने खन्ना में आठ महीने से सैलरी न मिलने पर प्रोटेस्ट कर रहे पंजाब के कर्मचारियों को डायरेक्ट पैसा ट्रांसफर किया..केजरीवाल ने सभी कर्मचारियों को साफ कह दिया है: “मैं नरेंद्र मोदी नहीं हूं, जो तुम्हें मेरे खिलाफ बैठकर प्रोटेस्ट करने दूंगा🥰
जय श्री राम❤️🙏
25 साल पहले तक कांग्रेसी शासन में NCERT की किताबों हमे पढ़ाया जाता था कि गुरु तेग बहादुर डाकू थे।
जरा सोचिए, किताब लिखने वालों की मानसिकता थी।
मुरली मनोहर जोशी ने इसे हटाया था।
सद्दाम का बच्चा मौत से लड़ रहा था
तो कासगंज की मीना देवी ने उसे 90 हज़ार रु दिए, बच्चे का इलाज हुआ और बच्चा बच गया
एक साल बाद मीना देवी ने पैसे वापस मांगे तो
सद्दाम ने मीना को मारकर गंगा जी में फेंक दिया..
फेंकते हुये एक साधू ने देख लिया तो सद्दाम ने उसकी झोपड़ी में आग लगाकर उसे जिन्दा जला दिया...
वाह क्या सिला दिया अल्ला के बन्दे ने ✍️
🇮🇳 रोंगटे खड़े कर देने वाली दौड़ ...आखिरी 400 मीटर... सांसें थम गईं, दिल की धड़कनें तेज हो गईं... और फिर चीन की धरती पर लहराया तिरंगा! 🥇
ओरडोस (चीन) के ट्रैक पर मिक्स्ड 4×400 मीटर रिले का फाइनल अपने चरम पर था। स्टेडियम में हजारों दर्शकों का शोर गूंज रहा था। मेजबान चीन की टीम बढ़त बनाए हुए थी, जबकि भारत के सामने फिलीपींस की चुनौती भी थी। हर किसी को लग रहा था कि गोल्ड अब चीन की झोली में जाने वाला है।
भारत की ओर से पहली लेग में आस्तिक प्रधान ने शानदार शुरुआत दिलाई। दूसरी लेग में सैंड्रा मोल साबू ने टीम को मुकाबले में बनाए रखा। तीसरी लेग में सेटू मिश्रा ने पूरी ताकत झोंक दी, लेकिन तेज रफ्तार प्रतिद्वंद्वियों के कारण भारत पिछड़ गया। जब आखिरी लैप के लिए बैटन श्रावणी सचिन सांगले के हाथों में पहुंचा, तब भारत काफी पीछे था। चीन की धाविका करीब 10 मीटर से भी अधिक की बढ़त बना चुकी थी। ट्रैक पर मौजूद हर किसी को लग रहा था कि अब भारत के लिए स्वर्ण पदक जीतना लगभग असंभव है।
लेकिन श्रावणी ने हार मानने के बजाय अपने कदम और तेज कर दिए। शुरुआती 100 मीटर तक उन्होंने अपनी लय बनाई रखी और फिर धीरे-धीरे चीन और फिलीपींस के बीच बने फासले को कम करना शुरू किया। हर कदम के साथ भारत उम्मीद की ओर बढ़ रहा था। स्टैंड में बैठे भारतीय समर्थक लगातार चीख रहे थे—"चलो भारत... चलो श्रावणी!"
अंतिम 150 मीटर में श्रावणी की रफ्तार तूफान बन चुकी थी। अब चीन की बढ़त लगातार घट रही थी। अंतिम 100 मीटर में उन्होंने चीन की एंकर को लगभग पकड़ लिया और फिर दोनों धाविकाएं कंधे से कंधा मिलाकर दौड़ने लगीं। पूरा स्टेडियम अपनी सीटों से उठ चुका था। किसी की पलकें तक नहीं झपक रही थीं।
फिर आया आखिरी 50 मीटर...
श्रावणी ने अपने शरीर की बची-खुची सारी ताकत ट्रैक पर झोंक दी। फिनिश लाइन से ठीक पहले उन्होंने बेहतरीन लंज (Dive) लगाया। दोनों धाविकाएं लगभग एक साथ फिनिश लाइन पार कर गईं। कुछ पल के लिए पूरा स्टेडियम शांत हो गया। सभी की निगाहें इलेक्ट्रॉनिक स्कोरबोर्ड पर टिक गईं।
कुछ सेकंड बाद परिणाम सामने आया...
🇮🇳 भारत – 3:18.64
🇨🇳 चीन – 3:18.74
सिर्फ 0.10 सेकंड... और गोल्ड भारत के नाम!
पूरा भारतीय दल खुशी से झूम उठा। श्रावणी ने दोनों हाथ आसमान की ओर उठा दिए। साथी खिलाड़ी दौड़कर उन्हें गले लगाने पहुंचे। चीन की धरती पर तिरंगा सबसे ऊंचा लहराया और राष्ट्रगान की धुन गूंजने लगी।
यह केवल एक स्वर्ण पदक नहीं था, बल्कि आखिरी क्षण तक संघर्ष करने, हार न मानने और असंभव को संभव बना देने की मिसाल थी। करीब 10 मीटर से अधिक के अंतर को पाटकर श्रावणी सांगले ने जो वापसी की, उसने इस रेस को एशियाई अंडर-23 एथलेटिक्स चैंपियनशिप के सबसे यादगार मुकाबलों में शामिल कर दिया। 🇮🇳🥇🔥
#फर्रुखाबाद में हिंदुओं की आस्था पर गहरी चोट, बदहाली के आसूँ रो रही है मोक्षदायिनी #गंगा#मुस्लिम बस्तियों ने दर्जनों गंदे नालों का रुख सीधे गंगा नदी की तरफ मोड़ा
सोतबहादुरपुर से #मुस्लिमों के मल-मूत्र का.. घरों में होने वाली #कुर्बानी का खून तक सीधे गंगा में
मुस्लिम बस्तियों ने अपने दर्जनों गंदे नाले सीधे गंगा नदी से जोड़े
#हिंदुओं के लिए “माँ” समान गंगा का पानी लगातार हो रहा दूषित
STP से ट्रीटेड वॉटर के नाम पर गंगा में बहाया जा रहा है #जहरीला काला पानी
@cleanganganmcg@ChiefSecyUP@swatantrabjp@CMOfficeUP@DMFarrukhabadUP@myogioffice@CommissionerKnp
आज सब "राम भक्त" बन रहे हैं!
पर इन "राम भक्तों" का दस - बीस - तीस सालों का इतिहास की बात भूल भी जाएं तो क्या आपको मालूम है कि इन नए नए "राम भक्तों" ने साल 2025 में कर्नाटक में राम नगर जिले का नाम बदल कर साउथ बेंगलुरु कर दिया है ! #DoTook
In Taj Mahal case the Hon’ble Allahabad High court has issued notice to the ASI and has directed them to file their counter affidavit. The question pertains prayer for survey in taj mahal by advocate commissioner.