सुप्रीम कोर्ट ने यूजीसी के नए नियमों पर अगले आदेश तक रोक , जजों ने कहा कि प्रावधान अस्पष्ट है इनका दुरुपयोग हो सकता है ,के��द्र सरकार को फिर से नया ड्राफ्ट तैयार करने के आदेश , कोर्ट का कहना है कि आरक्षित समुदाय में अभी ऐसे लोग हैं जो दूसरों से समृद्ध हो चुके हैं..
#UGC जातिगत भेदभाव को एकजुटता से रोका जाना चाहिए। ये काम साफ नियत से करना चाहिए, सियासी उल्लू सीधा करने के लिए नहीं। और नियम जाति के महीन पिरामिड को समझते हुए बनाए जाने चाहिए।
1. सवर्ण छात्र अगर जातिगत भेदभाव करते हैं तो उनपर कार्रवाई हो,मगर उन्हें आपसी रंजिश में फँसाया जाए तो फँसाने वाले पर भी कार्रवाई होनी चाहिए। क़ानून का दुरूपयोग नहीं होना चाहिए।
2. अगर कोई OBC वर्ग का छात्र SC/ST वर्ग से भेदभाव करता है तो उसके खिलाफ कार्रवाई का प्रावधान क्यों नहीं है? भेदभाव के मामले तो यहां भी होते हैं
3. नए नियमों में OBC वर्ग को भी पीड़ित पक्ष में रखा गया है, तो क्या Gen वर्ग को पहले से ��ी दोषी मान लिया गया है?
जातिगत भेदभाव देश के लिए नासूर है। ऐसे मामलों में दोषी के खिलाफ सख़्त सजा का प्रावधान होना चाहिए,मगर निर्दोष को बचने का अवसर भी मिलना चाहिए। 2012 में बने नियम में था कि अगर आरोप ग़लत निकले या फँसाने की मंशा निकली तो जुर्माना लगता था। नए नियम में क्यों नहीं है?
बाक़ी जाति का पिरामिड समझना है तो नियम बनाने वालों को गाँव में घूमकर समझना चाहिए। एसी कमरों में सिर्फ़ हवा ठंडी लगती है,जातिगत गर्माहट नहीं पता लगती।
अंत में- परसाई जी,सच लिख गए हैं। इस देश में हर जाति ने अपने से छोटी जाति खोज रखी है। ये लिखा समझना है तो @TheNewspinch की Documentary Musahar देख लीजिएगा
फ्रांसीसी लेखक फ्रांस्वा रेने - डी शातोब्रिया का कथन है कि जंगल सभ्यताओं से पहले आते हैं और रेगिस्तान उसके बाद। जंगल जीवन का आधार और रेगिस्तान सभ्यताओं के पतन का प्रतीक है।
जब सभ्यताओं का पतन होता है तो वे रेगिस्तान में तब्दील हो जाती हैं। ठीक मोसापोटामिया की तरह ही...
इस दुनियां में कभी भी रेगिस्तान को बचाने के लिए कोई आंदोलन नहीं हुआ और हुआ है तो कृपया उसे मेरी दृष्टि में लाने का श्रम करें लेकिन जंगल और पेड़ों को बचाने के लिए ना जाने कितने ही आंदोलन हो चुके हैं और होते रहेंगे।
लेकिन राजस्थान में अब यह मानव सभ्यता के इतिहास में एक बिरला काम हो रहा है कि रेगिस्तान के रहवासी खुद को अधिक रेगिस्तानी होने के प्रयासों में पूरे दमखम से लगे बैठे हैं।
वैसे तो सदियों से पश्चिमी राजस्थान के लोगों ने एक प्राकृतिक बुराई को जिस गौरव के साथ ढोया है वह इनके संकीर्ण होने की अभद्रता से अधिक कुछ नहीं है। वरना तो दुनिया में ऐसे उदाहरण मौजूद है�� कि बहुत से देशों में अपने रेगिस्तानों को हरे - भरे जंगल में तब्दील कर दिया है। अनेक वैज्ञानिक तरीके ईजाद किए जा चुके हैं और अगर वहां के लोगों में मजबूत इच्छाशक्ति हो तो आज के युग में ये संभव है कि रेगिस्तान बदला जा सकता है।
लेकिन सदियों से राजस्थान में हुआ इसका ठीक उल्टा है। एक बुराई को अच्छाई बनाकर जिस तरह से ग्लोरीफाई किया गया है वह बहुत अधिक शर्मनाक है। जबकि कमजोरी, लाचारी और बुराई कभी भी ��तिहास, साहित्य और संस्कृतिक गौरव नहीं हो सकती।
हमारी बर्बाद मानसिक चेतना ऐसे अपराध करती है। जैसे गुलामी के दौर में हिंदुस्तान के एक बहुत बड़े वर्ग को लगता था कि अंग्रेजों का शासन ही हमारे भाग्य का निर्माता है। ठीक उसी तरह राजस्थान में रेगिस्तान के लोगों की मानसिकता पैठ हो चुकी है कि उनकी पहचान और धाती सिर्फ और सिर्फ ये रेगिस्तान ही है।
वरना ये कभी भी संभव नहीं था कि पांच लाख खेजड़ी हलाल ह�� जाने के बाद भी रेगिस्तान के लोगों ने एक चींटी तक नहीं मारी और उसे विकास का नाम देकर रेगिस्तान को फैल जाने का निमंत्रण दे रहे हैं।
यह विकास नहीं है बल्कि विनाश की कगार पर खड़े समाज की तस्वीर है।
ब्रिटेन ने दुनिया को रेल दी लेकिन उसके बाद वह खुद बेपटरी हो गया। जब ब्रिटेन में रेल लाइन बिछाई जा रही थी तो लकड़ी कॉलोनियन देशों से मंगवाई गईं। लेकिन जरूरत पड़ने पर ब्रिटेन ने खुद के जंगल भी काट डाले और रेल से व्यापार तो सुलभ हुआ ही बल्कि युद्ध लड़ना उससे भी ज्यादा आसान हो गया। इस उतावलेपन में ब्रिटेन द्वितीय विश्वयुद्ध में जा कूदा और उस युद्ध ने ब्रिटेन के इतनी चपत लगा दी कि फिर कभी कोई युद्ध नहीं लड़ा। वो दौर खत्म हो गया कि ब्रिटेन का सूरज कभी अस्त नहीं होता।
रेगिस्तान का इलाका विकास की आंधी में खुद की छाती पर सोलर प्लेट झेलकर पूरे देश को भले एनर्जी दे दे लेकिन इसके एवज में उसकी खुद की ए���र्जी एक दिन ये ही सोलर प्लेट निचोड़ डालेंगी और फिर शोकगीत के सिवाय कुछ नहीं बचेगा।
आदरणीय शिखा जी,
सामोद बालाजी मंदिर के विकास हेतु बजट स्वीकृत करवाने के लिए आपका सहृदय आभार...
लेकिन शायद इतिहास के वास्तविक पक्ष पर आपकी दृष्टि नहीं पहुंच पाई है। लेकिन पढ़े - लिखे जन प्रतिनिधि होने के कारण आपकी ये जिम्मेदारी है कि मंदिर के विकास के साथ ही मंदिर के वास्तविक इतिहास को भी चौमू के लोगों के सामने रखा जाए।
असल में सामोद के जिस मंदिर को वीर हनुमान मंदिर ब���ाकर आस्था प्रकट की जाती है वह हनुमान जी का विग्रह नहीं है।
वास्तविक इतिहास यूं है
आमेर के राजा हुए उदयकरण जी और इनके अनेक पुत्रों के एक थे राजकुमार बाला जि��्हें आमजन द्वारा सम्मान से बालाजी कहा गया।
बालाजी के ही पुत्र मोकल हुए और इन्हीं मोकल के पुत्र राव शेखा थे जिनके नाम पर शेखावाटी भू-भाग को पहचाना जाता है।
बालाजी को बरवाड़ा में 12 गांवों की जागीर इनायत हुई थी। सामोद में 7 गांवों की जागीर उदयकरण के ही पुत्र नापा को इनायत हुई जिन्हें सम्मान से नापजी के नाम से पहचाना गया।
बालाजी के दो रानियों से कुल 12 पुत्र पैदा हुए। पहली रानी लोकदेवता रामदेवजी की भतीजी और दूसरी रानी माचैडी के सोहढदेव बडगूजर की पुत्री थी। इन्हीं बालाजी के पुत्र मोकल और मोकल के पुत्र राव शेखा।
रियासतकाल में अपने पुरखों के मंदिर, देवरे बनाने का प्रचलन था और कालांतर में बालाजी के वंशजों ने उनका मंदिर बरवाड़ा - सामोद के बीच एक पहाड़ी पर बनवा दिया।
मौका देख पंडे - पुजारियों ने बालाजी की मूर्ति के पास एक गदा रख दी और उन्हें हनुमान जी का विग्रह कहकर प्रचारित कर दिया। थोड़ा गौर से देखने पर मालूम चलता है कि सामोद बालाजी के मंदिर में रखी मूर्ति हनुमान जी के स्वरूप में नहीं है बल्कि यह मूर्ति साफा लगाए एक योद्धा पुरुष जैसी प्रतीत होती है।
स्वतंत्रता, स्वाभिमान के वैश्विक प्रतिमान, मातृभूमि की रक्षा के लिए अपना सर्वस्व समर्पित करने वाले वीर शिरोमणि महाराणा प्रताप जी के स्मृति दिवस पर कोटिश नमन।
#महाराणा_प्रताप
सोमनाथ में वीर हमीरजी गोहिल को श्रद्धांजलि अर्पित की। वे बर्बरता और हिंसा के दौर में साहस और दृढ़ संकल्प के प्रतीक बनकर खड़े रहे। उनकी वीरता देशवासियों की स्मृति में युगों-युगों तक अंकित रहेगी। उनका साहस और पराक्रम बताता है कि भारतवर्ष की संस्कृति को किसी भी प्रकार ��े बल प्र��ोग से कमजोर नहीं किया जा सकता।
I visited the Chittorgarh Fort when I was 10, on a family holiday.
Have never been back.
But I should.
Because when I checked online, it turns out it’s the largest fort in the world!
Approximate Global Ranking:
🥇 Chittorgarh Fort, India ~700 acres (2.8 sq. km)
🥈 Kumbhalgarh Fort, India ~1,100 acres (4.5 sq. km), walls 36 km long
🥉 Nanjing City Wall, China
Yes, Kumbhalgarh is the second largest in the world.
(Chittorgarh and Kumbhalgarh are fort cities, not boundary walls.
They enclosed self-sufficient communities and were built to withstand sieges, not to demarcate empires.)
And yet, they rarely appear on the ‘must-visit’ lists for global travellers.
They’re not even on the extended Rajasthan “Golden Circuit”:
Jaipur → Jodhpur → Jaisalmer → Udaipur.
We need to tell their stories differently.
“A kingdom that refused to yield. A fort that never fell.”
Illustrate these stories through specialised experiences:
sunset drives along the ramparts, private storytelling sessions, and expanded comfortable accommodation.
We already have a Club Mahindra at Kumbhalgarh, and we’re pleased to have helped build its popularity.
Perhaps it’s time for one at Chittorgarh too.
#SundayWanderer
(Aerial view of Chittorgarh Fort courtesy @MayankRighteous )
भाटी राजाओ द्वारा निर्मित #देरावर_किला#पाकिस्तान के पंज���ब के बहावलपुर में स्थित इस किले को विभाजन के बाद बहुत नुकसान हुआ लेकिन आज भी यह किला पाक के #रेगिस्तान में जहाँ दूर दूर तक कोई बस्ती नहीं है, अपनी पूरी #राजपूती शानो शौकत के साथ वक्त के थपेड़ो को अपने अंदर समाये खड़ा है।
मारवाड़ की माटी के लाल, पूर्व सैन्य अधिकारी, भारत के पूर्व वित्त, विदेश और रक्षा मंत्री एवं पूरे विश्व में अपनी विशेष पहचान रखने वाले राजस्थान के रत्न स्व. श्री जसवंत सिंह जी जसोल की पुण्यतिथि पर सादर नमन।
कई दिनो से एक तकलीफ़ से गुजर रहा हूँ व्यक्तिगत बातचीत में तो बहुत सारे साथियो से कहता रहता हूं पर कोई हल ओर रास्ता नही निकल रहा।विशेष रूप से नौजवान साथियो को कहना चाह रहा हूं।बाड़मेर जैसलमेर बालोतरा शेष राजस्थान के लिए भी।इतने हेत प्रेम के इलाक़े में हमारी आपसी समझदारी में कितनी कमी आ गई ।कैसे इस ���ोशल मीडिया के माध्यमों को हमने युद्ध का मैदान बना दिया ।एक जाति के लोग दूसरी जाति को ओछा करने के लिए कितना नीचा गिरते है फिर इससे मन नहीं भरता तो धर्म पर आ जाते है फिर इससे मन नही भरता तो तो जाति में जो आपसी गोत्र है उन पर आ जाते है।मेरे प्यारे नौजवान साथियों भगवान ने उपर वाले ने हमको इंसान पैदा किया है चार दिन की जिंदगी दी है क्यों कीचड़ उछालने की कंपीटिशन कर रहे हो?हमें अपने आप पर लज्जा नहीं आत��� कि कैसे क��सी को ओछा हल्का बोल के हम बड़े बन जाऐंगे ।यहाँ मर्यादा पुरुषोत्तम राम हुवे रावण से युद्ध हुवा ओर अपने भाई लक्ष्मण को उसी रावण से नीति का पाठ विनम्रता पूर्वक सीखने भेजा।महाभारत के विश्व युद्ध में दिन भर बल भर लड़के एक दूसरे के केंप में जाकर कुशल क्षेम पूछना।इस देश में तमाम उदाहरण है।अपराध व घटनाएँ हर समय होती है मानव समाज में हर तरह के लोग हैं घटना के बाद हम सोचते हैं कि घटना करने के लिए जैसे अ���राधी के समाज ने एकमत होकर उसको भेजा हो?पूरे वर्ग के चरित्र चित्रण में लग जाते है।हर वर्ग को लगता है कि सारे वर्ग मिलकर उसी को मिटाना चाहते है हमसे पीड़ित इस भारत भूमि पर कोई नही है।हर वर्ग को लगता है हम तो बड़े महान है बाकि कीड़े मकोड़े है।प्रिय नौजवान साथियों इस कीचड़ उछाल प्रतियोगिता से बाहर निकलिए ।इस भारतवर्ष में ऐसा कोई वर्ग नही है जिसका DNA अलग हो यह वैज्ञान��क ओर ऐतिहासिक सच है किससे ओर क्यू लड़ रहे हो?करने लायक़ बहुत काम है खूब पढ़िए अपना कैरियर अच्छा बनाइए अपने वर्ग व देश की तरक़्क़ी के लिए काम करिये फिजिकल फिटनेस के लिए वक्त दीजिए ।कोई स्किल सीखिए हुनर सीखिए कोई नई भाषा सीखिए पेड़ लगाइए ज़रूरतमंद की मदद करिये ।जिस भगवान की हम सब औलाद है उसका नाम जप करिये ध्यान करिये आध्यात्म जानिए।कितने काम है मतलब के इन सब में प्रतिस्पर्धा करिये खूब ।नौजवान साथियों इतना सुंदर देश है अपना इलाका है अपने रीत रिवाज आदर प्रेम है इस पर तेज़ाब मत डालिए।अपनी बोली व्यवहार से किसी का दिल मत दुखाओ हम सामने वाले को कितना आदर दे सकते है इस बात की प्रतिस्पर्धा करो।इस सोशल मीडिया की गंदी क्रिया प्रतिक्रिया से कुछ भी नहीं निकलेगा ।जो नेता गण ओछी भाषा बोलते है वो धर्म का पालन नहीं कर रहे नेता का एक मात्र धर्म है 36 क़ौम के दुख तकलीफ़ ��ो दूर करना इसके सिवाय वो जो ज़हर घोलते है उससे दूर हट जाईए ।कहने को बहुत कुछ है कोई ऐसा प्लेटफार्म बनाइए ग़ैर राजनीतिक जिस पर बैठ कर हम सब बात करे अपनी जाति वर्ग के इतर लोगों को मित्र बनाइए उनको समझिए ।हम मानव समाज है हम सब में कमियाँ है हम सब में गुण है ।गुण को सीखिए कमी को सुधारिए ।मुझे आपको उपदेश करने का हक नहीं है मुझमें भी असंख्य कमिया पर मुझे हमारे इलाक़े में फैल रहे आपसी ज़हर नफ़रत व हल्केपन को देखकर तकलीफ़ हुई इसलिए कुछ लिखा है।आप सुझाव दीजिए हम सब मिलकर क्या करें जिससे आने वाली पीढ़ी को हम एक बेहतर समाज देकर जा सके।सादर 🙏🙏🙏🙏
राजस्थान उच्च न्यायालय के आदेश (S.B. सिविल रिट याचिका संख्या 13806/2024 - कैलाश चंद शर्मा एवं अन्य बनाम राज्य सरकार एवं अन्य) के आधार पर, न्यायालय ने स्वयं सब-इंस्पेक्टर (एसआई) भर्ती 2021 प्रक्रिया को रद्द नहीं किया है। इसके बजाय, न्यायालय ने राज्य सरकार को निर्देश दिए हैं कि वह यह निर्णय ले कि इस भर्ती प्रक्रिया को रद्द किया जाए ।
“Petition allowed” लिखकर न्यायालय यह कह रहा है:
याचिकाकर्ताओं की मुख्य आपत्तियाँ उचित पाई गईं, और उन्होंने जो राहत मांगी थी (जांच, कार्रवाई, और संभावित रद्दीकरण), उसे न्यायालय ने स्वीकार किया है। हालांकि, अंतिम निर्णय कि भर्ती रद्द की जाए , यह जिम्मेदारी सक्षम प्राधिकारी यानी राज्य सरकार पर छोड़ी गई है, जिसे निर्धारित समय सीमा के भीतर निर्णय लेना होगा।
उज्जैन में वीर योद्धा दुर्गादास जी के पुण्य स्मृति स्थल को उनके विराट व्यक्तित्व और प्रेरक चरित्र की गरिमा के अनुरूप एक प्रेरणा स्थल के रूप में विकसित करने हेतु मध्यप्रदेश सरकार ने माननीय मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव जी के नेतृत्व में एक वृहत योजना बनाई है।
इस योजना के प्रथम चरण में 57 करोड़ रुपये की लागत से विकास कार्य होंगे। आज माननीय मुख्यमंत्री जी के साथ इस हेतु भूमिपूजन का सौभाग्य प्राप्त हुआ।
@DrMohanYadav51
केंद्रीय रक्षा मंत्री माननीय राजनाथ सिंह जी ने जब जोधपुर में मंच से पूछा विधायक रवींद्र सिंह जी भाटी का हालचाल तो पंडाल में उपस्थित जन समूह ने तालियों से बता दिया उनकी पॉपुलरिटी का ग्राफ। @RavindraBhati__
भारत की केन्द्रीय सत्ता की अंग्रेजों से मु��्ति के दिवस 'स्वतंत्रता दिवस' की हार्दिक शुभकामनाएं।
आयें, हम इस अवसर पर ईश्वर से प्रार्थना करें कि वे हमें स्वच्छंदता से स्वतंत्रता और स्वतंत्रता से स्वाधीनता की ओर अग्रसर करें।
@shri_kys @Shri_PF @rewantpatoda
#IndependenceDay2025