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जय हिन्द।
हम में से बहुत से लोग कभी न कभी यह सोचते रहे होंगे कि काश हम महात्मा गांधी से मिल पाते।
काश हम उनके किसी उपवास में उनके साथ बैठ पाते और सत्य व अहिंसा की जीवंत शक्ति को अपनी आँखों से देख पाते।
आज आपके पास काश को हकीकत में बदलने का एक मौका है।
दिल्ली के जंतर-मंतर जाइए।
वहाँ सोनम वांगचुक अनिश्चितकालीन उपवास पर बैठे हैं, जिन्हें लाखों लोग हमारे समय का गांधी मानते हैं।
जाइए, उनसे मिलिए।
उनकी बात सुनिए।
समझिए कि वे लद्दाख और जलवायु न्याय के लिए किसलिए संघर्ष कर रहे हैं।
उनके साथ खड़े होइए।
और अगर आपका दिल और ज़मीर आपको प्रेरित करे, तो एक दिन का उपवास उनके साथ रखिए।
इतिहास अक्सर अपने सबसे अच्छे लोगों को तब पहचानता है, जब वे हमारे बीच नहीं रहते।
कहीं हम वही गलती दोबारा तो नहीं कर रहे?
आज ही जाइए। कल बहुत देर न हो जाए।
जय हिन्द।
@SonamWangchuk
#SonamWangchuk #SaveLadakh #JantarMantar #FastUntoDeath #ClimateJustice #GandhiOfOurTime #LadakhMatters #IndiaWithSonam
RT करें, शेयर करें और जितने लोगों तक पहुँचा सकते हैं पहुँचाइए।
जंतर-मंतर जाकर उनका समर्थन करें।
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Tweet 1/3
जय हिन्द।
हम में से बहुत से लोग कभी न कभी यह सोचते रहे होंगे कि काश हम महात्मा गांधी से मिल पाते।
काश हम उनके किसी उपवास में उनके साथ बैठ पाते और सत्य व अहिंसा की जीवंत शक्ति को अपनी आँखों से देख पाते।
आज आपके पास काश को हकीकत में बदलने का एक मौका है।
दिल्ली के जंतर-मंतर जाइए।
वहाँ सोनम वांगचुक अनिश्चितकालीन उपवास पर बैठे हैं, जिन्हें लाखों लोग हमारे समय का गांधी मानते हैं।
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जाइए, उनसे मिलिए।
उनकी बात सुनिए।
समझिए कि वे लद्दाख और जलवायु न्याय के लिए किसलिए संघर्ष कर रहे हैं।
उनके साथ खड़े होइए।
और अगर आपका दिल और ज़मीर आपको प्रेरित करे, तो एक दिन का उपवास उनके साथ रखिए।
इतिहास अक्सर अपने सबसे अच्छे लोगों को तब पहचानता है, जब वे हमारे बीच नहीं रहते।
कहीं हम वही गलती दोबारा तो नहीं कर रहे?
आज ही जाइए। कल बहुत देर न हो जाए।
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जय हिन्द। जय लद्दाख।
@SonamWangchuk
#SonamWangchuk #SaveLadakh #JantarMantar #FastUntoDeath #ClimateJustice #GandhiOfOurTime #LadakhMatters #IndiaWithSonam
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पोस्ट करने के टिप्स:
• Tweet 1 को सबसे पहले पोस्ट करें, फिर Reply करके 2 और 3 जोड़ें (ताकि थ्रेड बने)।
• सोनम वांगचुक की कोई अच्छी फोटो या Jantar Mantar का वीडियो/इमेज अटैच करें (खासकर Tweet 1 में)।
• दिन में 2-3 बार अलग-अलग समय पर पोस्ट करें।
• ज्यादा रीच के लिए और टैग जोड़ सकते हैं: @GretaThunberg @fridaysforfuture @RahulGandhi आदि।
क्या आप इसमें कोई बदलाव चाहते हैं? (जैसे और छोटा करना, और टैग जोड़ना, या इंग्लिश वर्जन भी बनाना)
Tweet 1/3
जय हिन्द।
हम में से बहुत से लोग कभी न कभी यह सोचते रहे होंगे कि काश हम महात्मा गांधी से मिल पाते।
काश हम उनके किसी उपवास में उनके साथ बैठ पाते और सत्य व अहिंसा की जीवंत शक्ति को अपनी आँखों से देख पाते।
आज आपके पास काश को हकीकत में बदलने का एक मौका है।
दिल्ली के जंतर-मंतर जाइए।
वहाँ सोनम वांगचुक अनिश्चितकालीन उपवास पर बैठे हैं, जिन्हें लाखों लोग हमारे समय का गांधी मानते हैं।
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जाइए, उनसे मिलिए।
उनकी बात सुनिए।
समझिए कि वे लद्दाख और जलवायु न्याय के लिए किसलिए संघर्ष कर रहे हैं।
उनके साथ खड़े होइए।
और अगर आपका दिल और ज़मीर आपको प्रेरित करे, तो एक दिन का उपवास उनके साथ रखिए।
इतिहास अक्सर अपने सबसे अच्छे लोगों को तब पहचानता है, जब वे हमारे बीच नहीं रहते।
कहीं हम वही गलती दोबारा तो नहीं कर रहे?
आज ही जाइए। कल बहुत देर न हो जाए।
(3/3)
If you ever wished you could have met Mahatma Gandhi in person...
If you ever wished you could have sat beside him during one of his fasts...
If you ever wished you could have witnessed the power of truth and non-violence with your own eyes...
You still can.
Go to Jantar Mantar in New Delhi.
There, a man inspired by the same spirit of courage, simplicity, and non-violence is sitting on an indefinite fast for the future of Ladakh and the environment.
Many call him the Gandhi of our times.
Go and meet Sonam Wangchuk.
Listen to him.
Stand with him.
And if your heart and conscience compels you , fast with him for a day.
History rarely gives us a second chance to stand beside those who choose sacrifice over silence.
Tomorrow may be too late.
🙏🏽🙏🏽🙏🏽🙏🏽🙏🏽🙏🏽🙏🏽🙏🏽🙏🏽
जय हिन्द।
राम मंदिर हो या दूसरे मंदिर, मस्जिद, गुरुद्वारे और चर्च सिर्फ़ पत्थरों की इमारतें नहीं हैं।
वे हमारी श्रद्धा , आस्था और संस्कृति के प्रतीक हैं।
लेकिन बड़ा अजीब विरोधाभास है—
हम भगवान की पूजा अर्चना तो प्रकाश में करते हैं, पर हिसाब-किताब को अंधेरे में रखते हैं।
अगर धर्म प्रकाश है, तो धर्म के नाम पर किया गया लेन-देन भी प्रकाश में होना चाहिए।
क्यूंकि जहाँ अंधेरा होता है, वहाँ भ्रष्टाचार की संभावना पैदा होती है
और जहाँ संभावना हो, वहाँ प्रलोभन भी होगा।
सवाल यह नहीं है कि कौन ईमानदार है और कौन बेईमान।
सवाल यह है कि क्या हम ऐसी व्यवस्था बना सकते हैं जिसमें बेईमानी करना ही लगभग असंभव हो जाए?
आज तकनीक ने हमें वह अवसर दिया है।
UPI जैसी व्यवस्था ने सिद्ध कर दिया है कि हर छोटी से छोटी लेन-देन का भी स्पष्ट और पारदर्शी रिकॉर्ड रखा जा सकता है।
कल्पना कीजिए—
सरकार कोई ऐसा क़ानून बना दे
धार्मिक संस्थानों में नकद दान पेटियाँ रखना ग़ैरक़ानूनी हों।
सारा दान डिजिटल हो।
हर रुपये का हिसाब उपलब्ध हो।
तब न केवल भ्रष्टाचार कम होगा,
बल्कि श्रद्धालु का विश्वास भी गहरा होगा।
याद रखिए,
अगर धर्म पारदर्शी नहीं तो वह सिर्फ़ पाखंड है और कुछ नहीं
जय हिन्द।
हम भारत को विश्व गुरु बनाना चाहते है।
लेकिन आज दुनिया को विश्व गुरु से ज्यादा ज़रूरत है, एक ऐसे विश्व बंधु की ,
जो सीखे भी और सिखाए भी;
जो सहयोग करे, उपदेश नहीं दें।
जो जोड़े , बाँटे नहीं :
जो साथ खड़ा हो , ऊपर नहीं ।
इसलिए बेहतर होगा, हम ,
“विश्व गुरु “
नहीं
“विश्व बंधु “
बने
🙏🏽👍
आप क्या सोचते हैं?
हम अक्सर भारत को विश्व गुरु कहते है।
लेकिन क्या दुनिया को एक और गुरु की ज़रूरत है?
शायद नहीं।
आज दुनिया को ज़रूरत है ऐसे बंधुओं की, ऐसे मित्रों की,
जो जोड़ें, बाँटें नहीं;
जो सीखें भी और सिखाएँ भी;
जो सहयोग करें, उपदेश नहीं दें।
गुरु ऊपर खड़ा होता है,
बंधु साथ खड़ा होता है।
अच्छा होगा, अगर हम ,
“विश्व गुरु “
नहीं
“विश्व बंधु “
बने।
आपकी क्या राय है?
🙏🏽👍
जय हिन्द।
जब मैं भारतीय वायुसेना में कार्यरत था तो हमें ट्रेनिंग दी जाती थी कि बाहरी दुश्मनों से कैसे लड़ना है
परन्तु आज मुझे अन्दर के दुश्मनों से ज्यादा ख़तरा नज़र आ रहा है
क्योंकि जिस देश में लोग धर्म के नाम पर आपस में लड़ते हों, वह देश कभी भी सुरक्षित नही हो सकता
मुझे समझ में नहीं आता कि लोग धर्म के नाम पर एक दूसरे से लड़ते क्यों हैं
धर्म तो लोगों को प्यार से रहना सिखाता है
फिर इतनी नफ़रत आती कहाँ से है?
थोड़ा गहराई से सोचा तो समझ में आया
“लोग अपने आप इतना नहीं लड़ते, जितना उन्हें लड़ाया जाता है।
“यह धर्म की नहीं, सत्ता की लड़ाई है।”
पहले लोग तलवार और बन्दूक से लड़ते थे
आज लोगों के दिमाग पर क़ब्ज़ा करना होता है
और इस लड़ाई में सबसे घातक हथियार होता है?
डर। भय ख़तरा
क्योंकि डर इंसान की सबसे बड़ी कमजोरी है।
जो आपको डरा सकता है, वह आपके दिमाग़ को कंट्रोल कर सकता है।
एक उदाहरण देखिए।
1947 के विभाजन के बाद बहुत से मुसलमानों के मन में असुरक्षा की भावना थी।
एक पार्टी ने उनसे कहा—
“आप खतरे में हैं।”
“आपका धर्म खतरे में है।”
“हमें वोट दीजिए, हम आपकी रक्षा करेंगे।”
बड़ी संख्या में मुसलमानों ने उस
पार्टी पर विश्वास किया और वर्षों तक उनका समर्थन किया।
लेकिन एक आम मुसलमान को क्या मिला?
क्या उसके बच्चों को आधुनिक शिक्षा मिली?
क्या उसकी आर्थिक स्थिति बेहतर हुई?
क्या समाज सुधार और वैज्ञानिक सोच को बढ़ावा मिला?
कुछ नहीं
सुरक्षा के नाम पर, पुरानी सोच और कट्टर वाद को बढ़ावा दिया गया जिससे मुसलमानों की छवि भी ख़राब हुई
परिणाम यह हुआ कि आज भी बड़ी संख्या में मुसलमान गरीबी, अशिक्षा और पिछड़ेपन के शिकार हैं।
फिर राजनीति का दूसरा दौर आया।
एक दूसरी पार्टी ने हिंदुओं के मन में भी डर पैदा करना शुरू किया।
उन्हें बताया गया—
“हिंदू धर्म खतरे में है।”
“मुसलमान तुम्हारे लिए खतरा हैं।”
वे अपनी संख्या बढ़ा रहे हैं
वे आपके घरों पर क़ब्ज़ा कर लेंगे
वे सबको मुसलमान बना लेंगे
वे देश पर क़ब्ज़ा कर लेंगे
हमें वोट दो
“सिर्फ हम ही तुम्हारी रक्षा कर सकते हैं।”
हथियार वही था—
डर।
पात्र बदल गए।
कल एक डरा हुआ मुसलमान बिना कुछ सोचे वोट देता था।
आज एक डरा हुआ हिंदू वही कर रहा है।
सच्चाई यह है कि डर की राजनीति से न हिंदुओं का भला होता है और न मुसलमानों का।
फ़ायदा होता है तो सिर्फ़ और सिर्फ नेता का
अपने अपने लम्बे अनुभव के आधार पर मैं हिंदू और मुसलमान दोनों को बड़ी विनम्रता से यह अपील करना चाहता हूँ
मुसलमानों भाइयों. आपने पचास वर्ष तक डर कर वोट दिया
कुछ फ़ायदा नहीं हुआ । हो भी नहीं सकता
इससे अच्छा होता अगर आप बिना डरे, योग्य और ईमानदार लोगों को चुनते चाहे वो किसी भी धर्म या जाति का हो
आपका भी फ़ायदा होता और देश का भी
आजकल हिंदूओं को डराया जा रहा है
अभी जब भारत में 80% हिंदू हैं और फिर
भी कोई कहे कि हिन्दू धर्म ख़तरे में है उससे ज्यादा कोई बेतुकी, तर्कहीन बात नहीं हो सकती
वास्तविकता यह है कि हिंदू जिस मुसलमान से डर रहा है वो मुसलमान हिन्दू से डर रहा है
जब तक आप डरते डराते रहेंगे, नेताओं की दुकान चलती रहेगी और आप मरते रहेंगे
अगर आप सच में अपनी और अपने धर्म की रक्षा चाहते हैं,
तो पहले आप को भारत को सुरक्षित करना होगा
भारत सुरक्षित है तो सभी धर्म सुरक्षित हैं
और भारत तभी सुरक्षित हो सकता है जब भारत के नागरिक निर्भीक हो और मानसिक रूप से इतने विकसित हों कि किसी नेता के बहकावे में आकर ग़लत फ़ैसला न ले ।
और भारत एक ऐसा देश हो जहां हर नागरिक , चाहे वो किसी भी धर्म, जाति का हो यह महसूस करे कि देश में उसकी बराबर की हिस्सेदारी है और यह देश उतना ही उसका है जितना किसी और का ।
याद रहे
United India is Strong India
Divided India is weak India
आप हिंदू हैं या मुसलमान, मैं यह नहीं कह रहा कि आपकी हर आशंका निराधार है ऐसी कोई चिंता या चुनौती, आपके मन में है तो please share it with us, we will discuss it and try to find an honest solution to the problem.
अगर आप इस सोच से सहमत हैं तो आइए हर भारतीय नागरिक की सोच बदलेक्योंकि किसी भी देश का भविष्य उसके नागरिकों की सोच पर निर्भर करता है
जय हिंद
Modi ji , used to boast that he addresses President Barack Obama as Barack.
Why he is addressing President Trump as Excellency
?????
There has to be a reason ####
Future generations may look back at us in disbelief:
“Did billions of humans really believe that the Creator of infinite galaxies could feel insecure or become jealous if someone worshipped another god?”
And:
“Did over a billion people truly believed that the supreme lord of the universe cut off a child’s head for blocking his path… then replaced it with an elephant’s head… and people worshipped this as divine wisdom?”
Perhaps the problem was never the stories.
The problem was that questioning them became more dangerous than believing them.
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Wg Cdr JS Chadda
Is it true that India did not help rescue the crew of the Iranian Frigate which was going back to Iran after joint exercises with Indian Navy and which was drowned by American Navy in Indian Ocean and was rather helped by SriLankan Navy?
एक Gen-Z की आवाज़ दूसरे Gen-Z से पूछ रही है:
क्या भारत को वास्तव में इन अनपढ़ नेताओं की ज़रूरत है, या हम उन्हें वोट देकर बाहर कर देंगे बजाय इसके कि उनकी मूर्खता के साथ जीना चुनें?
Reel from: Kartikey Bhardwaj
Why is Sonam Wangchuk in Jail?
He was only demanding what the BJP itself had promised in its manifesto!
Why are people silent?
Why is there no mass outrage?
When peaceful voices like Wangchuk — who believe in reason, dialogue, and nonviolence — are ignored or punished, it sends a dangerous message. It tells people that only confrontation or unrest gets attention.
If the grievances of honest, peaceful citizens are not addressed, frustration will inevitably push others toward unlawful and violent means. That would be a tragedy for our democracy.
This issue must go viral on social media — not for politics, but for justice, truth, and the right to peaceful dissent.