मुझसे जो अच्छा हो सकता था, मैंने किया। इतिहास मेरे प्रति मौजूदा मीडिया के मुकाबले अधिक दयालु होगा।
कूक भरी मूकता बुलाय आप बोलिहै।
जानियेगी टेक टरें कौन धौं मलोलिहै।
कबहूँ तो मेरियै पुकार कान खोलिहै॥
घनानंद और डॉ. मनमोहन सिंह की पंक्तियों में समानता है।
हमारे बाड़मेर जिले की आदर्श ढूंढा, कवास व बांदरा, बाड़मेर मगरा ग्राम पंचायतों के बीच करीब 120 जलाशयों के बारे में बड़े बुजुर्ग बताते हैं।
इन जलाशयों का विकास हो और जलाशयों को आपस में जोड़ा जाये तो हमारे आसपास के गांवों में पेयजल और सिंचाई दोनों की सुविधा उपलब्ध हो सकती हैं।