कविवर प्रसिद्ध नारायण सिंह जी की सुप्रसिद्ध कविता है -
“जब सन्ताबनि के रारि भइलि, बीरन के बीर पुकार भइलि।
बलिया का ‘मंगल पांडे के, बलिबेदी से ललकार भइलि ॥
‘मंगल‘ मस्ती में चूर चलल, पहिला बागी मसहूर चलल।
गोरन का पलटनि का आगे, बलिया के बाँका शूर चलल ॥
गोली के तुरत निसान भइल, जननी के भेंट परान भइल।
आजादी का बलिवेदी पर, ‘मंगल पांडे‘ बलिदान भइल ॥
जब चिता-राख चिनगारी से, धुधुकत तनिकी अंगारी से।
सोला निकलल, धधकल, फइलल, बलिया का क्रान्ति पुजारी से..।” ❤️🙏
यूँ तो आज़ादी की लड़ाई में अविभाज्य हिंदुस्तान के हर जिले, गाँव, कस्बे ने बढ-चढ़ कर हिस्सा लिया। लेकिन ये सौभाग्य बस एक ही जिले के हाथ आया कि अंग्रेजों और उस के पिठ्ठू हिन्दुस्तानी राजाओं को उस जिले का नाम ही "बागी" रखना पड़ा । ब्रितानी हुकूमत को सीधी चुनौती देने वाले उसी बाग़ी बलिया के शेर, प्रथम स्वातंत्र्य समर के प्रथम हुतात्मा, वीर योद्धा मंगल पांडेय को उनकी जयंती पर कृतज्ञ राष्ट्र का स्मरण और वंदन 🇮🇳❤🙏
@queen_liberal @Bhasadbuster He thinks speaking slowly makes him full of wisdom..... actually it now makes sense...he speaks slow cuz of some condition....