कमलाकांत प्रभु कमलनयन स्वामी,
घट घट वासी अंतर्यामी ।
नारायण दीनदयाल, जय जगदीश हरे ।
निज भक्तन के प्रतिपाल, जय जगदीश हरे ॥
जय श्री हरि 🙏🚩
#शुभ_प्रभात_वंदन
छोटा सा शब्द...... !
पढने में सेकंड लगता हैं
सोचने में मिनट लगता हैं
समझने में दिन लगता हैं
और साबित करने मे...
पूरी जिंदगी लग जाती हैं
वो है विश्वास ...
कोई सुबह ऐसी नहीं जिसकी शाम न हो और कोई शाम ऐसी भी नहीं जिसकी सुबह न हो। यहाँ कोई रात ऐसी नहीं जो प्रभात को जन्म न दे ।
परिवर्तन इस प्रकृति का शाश्वत नियम है। हम उन चीजों को सँभालने की कोशिश में लगे हैं जो सदा एक जैसी नहीं रह सकती।
हमारी अवस्था भी नित्य बदल रही है। जैसे हम कल थे वैसे आज नहीं हैं और जैसे आज हैं वैसे कल नहीं रहेंगे। शरीर का कोई भरोसा नहीं इसलिए जो श्रेष्ठ कर्म करना चाहो वो तुरंत कर लेना। समय कभी भी किसी का प्रतिक्षा नहीं करता।
विचारों का परिवर्तन भी हमारे भीतर चल रहा है। सदैव नयें विचार, नयें उद्देश्य, नईं दौड़ जन्म ले रही है। तुम स्वयं भी तो अपने भीतर हो रहे परिवर्तन को देख रहे हो। तुम भी तो नित बदल रहे हो फिर दूसरों के बदल जाने पर क्रोध क्यूँ करते हो ? नवीनता के लिए जीवन का परिवर्तन भी आवश्यक हो जाता है।
नमः पार्वतीपतये🔥🏵️
🌹🌺 हर हर हर महादेव