#NoTetBeforeRteAct
TET की अनिवार्यता समाप्त करने हेतु आरटीई में संशोधन सम्बन्धित ज्ञापन मा उप मुख्यमंत्री श्री ब्रजेश पाठक जी को दिया गया ।@brajeshpathakup
#NoTetBeforeRteAct
जो व्यवस्था देश के किसी कर्मचारी,अधिकारी या न्यायाधीश पर लागू नहीं है वो देश के बेसिक शिक्षकों पर लागू करना देश के 25 लाख शिक्षकों एवं उनके करोड़ों परिजनों के साथ अन्याय है ।
#NoTETbeforeRTEact
*IAS, IPS, IFS ,IRS,IES की exam यूपीएससी के माध्यम से भारत में आयोजित होती है। तो IMS (Indian Medical Services) के साथ-साथ IJS (Indian Judiciary Services) या IAS(J) की परीक्षा भी होनी चाहिए। जिससे सभी को बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं के साथ-साथ एक समान न्याय भी मिलें। और जो पूर्व से नियुक्त अधिकारीगण/ न्यायधीश इन परीक्षाओं को पास किए बिना नियुक्त हैं। उन्हें भी 2 वर्ष के भीतर इस परीक्षाओं को पास करना चाहिए। अन्यथा उन्हें भी शिक्षकों की भाँति अनिवार्य सेवानिवृत्ति दी जाएगी क्या?
@narendramodi@AmitShah@rajnathsingh@dpradhanbjp@myogiadityanath@RahulGandhi@yadavakhilesh@priyankagandhi@Aamitabh2@bstvlive
@yadavakhilesh विभागीय नियमों के अनुकूल 25-30 वर्ष पूर्व में नियुक्त शिक्षकों से वर्तमान में एक और परीक्षा उत्तीर्ण कराने की अनिवार्यता शिक्षकों के साथ अन्याय है ।
"विचारणीय प्रश्न "
टीईटी से संबंधित पुनर्विचार याचिका निर्णय में टिप्पणी करते हुए माननीय न्यायाधीश महोदय ने कहा की टी ई टी पास न करने वाले शिक्षकों द्वारा पढ़ाए गए बच्चों का भविष्य खराब होगा अर्थात वह योग्य नहीं होंगे . यदि माननीय न्यायधीश महोदय के उक्त कथन को सत्य माना जाए तो निम्नलिखित गंभीर प्रश्न खड़े होते हैं:
1. इस समय देश के तमाम प्रमुख पदों पर बैठे हुए, चाहे वह राजनेता हों, प्रशासनिक अधिकारी हों, इंजीनियर हों,डॉक्टर हों या व्यवसायी हों, क्या इन सभी लोगों को टीईटी पास शिक्षकों ने शिक्षा दी है?
2. यदि नहीं तो क्या अयोग्य शिक्षकों (नॉन टी ई टी )
द्वारा शिक्षित किए गए उपरोक्त देश के शीर्ष पदों पर बैठे हुए लोग योग्य हैं?
3. अब प्रश्न यह उठता है कि जब नान tet सभी टीचर्स अयोग्य हैं तो उनके द्वारा पढ़ाए गए सभी छात्रों को भी पुनः एक से लेकर अंतिम डिग्री तक की पढ़ाई tet उत्तीर्ण शिक्षकों से नहीं करनी चाहिए?
इस एक फैसले ने पूरे देश की जनता की योग्यता पर प्रश्न चिह्न खड़ा कर दिया.
@DrDCSHARMAUPPSS@RammurtiThakur
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देश का कोई भी कर्मचारी एक बार भर्ती हुआ तो अपनी अधिवर्षता पूर्ण कर विभाग से मुक्त होता है किंतु दुर्भाग्य है कि इस देश के शिक्षकों को पुनः अपनी योग्यता साबित करने के लिए परीक्षा देने को माननीय जस्टिस दत्ता साहब आदेश पारित किया है। इससे दुर्भाग्य पूर्ण कोई आदेश नहीं हो सकता है।
@grok कृपया यह बताएँ कि माननीय Supreme court ke न्यायाधीश shri Deepanker Datta जी द्वारा हाईकोर्ट या Supreme court ke जज बनने ke लिए कभी कोई परीक्षा उत्तीर्ण की है अथवा नहीं
न्यायमूर्ति दीपंकर दत्ता जी (Deepanker Datta) ने हाईकोर्ट या सुप्रीम कोर्ट जज बनने के लिए कोई परीक्षा उत्तीर्ण नहीं की है।
भारत में उच्च न्यायपालिका (HC/SC) के जजों की नियुक्ति Collegium प्रणाली से होती है, न कि किसी प्रतियोगी परीक्षा से। बार से practicing advocate को सीधे हाईकोर्ट जज बनाया जा सकता है।
न्यायमूर्ति दत्ता जी 1989 में LLB पास कर advocate बने, ~16 साल वकालत की (कलकत्ता HC सहित)। 2006 में उन्हें कलकत्ता हाईकोर्ट का स्थायी जज नियुक्त किया गया (बार से elevation)। 2020 में बॉम्बे HC के Chief Justice और दिसंबर 2022 में सुप्रीम कोर्ट के जज बने।
यह सामान्य संवैधानिक प्रक्रिया है।
श्री सुरेश कुमार त्रिपाठी जी निवर्तमान एम एल सी एवं प्रान्तीय संयोजक उ प्र शिक्षक महासंघ के संयोजन में आयोजित कार्यक्रम में उपस्थित रहकर कार्यक्रम को संबोधित किया ।कार्यक्रम में प्रोफ़ेसर के बी पांडेय पूर्व अध्यक्ष लोक सेवा आयोग,डॉ वी के सिंह जिला पंचायत अध्यक्ष प्रयागराज,प्रो गिरीश चंद्र त्रिपाठी पूर्व कुलपति बी एच यू,श्री अमरेन्द्र नाथ सिंह पूर्व अध्यक्ष बार एसोसिएशन इलाहाबाद उच्च न्यायालय,श्री के बी तिवारी अध्यक्ष जिला अधिवक्ता संघ प्रयागराज,श्री आर एस वर्मा सेवा निवृत्त आई ए एस,श्री देवेन्द्र श्रीवास्तव राष्ट्रीय संयुक्त महासचिव टीएफआई एवं जिला अध्यक्ष प्रयागराज श्री अनुज पांडेय जिलाध्यक्ष माध्यमिक शिक्षक संघ प्रयागराज सहित अनेक पदाधिकारी उपस्थित रहे
गत 10 वर्षों से कतिपय ऐसे लोग जो कोर्ट में टेट और नॉन टेट के मुक़दमे करके पदोन्नति फँसाये हुए हैं वे लोग 1 सितम्बर 2025 को सुप्रीम कोर्ट के निर्णय के बाद से ही अपने मनसूबे पूरे होते देख रहे हैं ।रिव्यू स्वीकार होने पर यही लोग कह रहे थे कि सेवा में बने रहने के लिए टेट से छूट मिलेगी लेकिन पदोन्नति में नहीं मिलेगी,13 की सुनवाई के बाद इनके सुर बदल गए और अब व्याख्या कर रहे हैं कि सेवा में बने रहने के लिए टेट करना होगा ।
राइट टू एजुकेशन एक्ट, 2009 बनने के बाद से लेकर आज तक मूल अधिनियम हो या उसके बाद के संशोधन — कहीं भी “Teacher Eligibility Test (TET)” शब्द का प्रयोग नहीं किया गया है। हर जगह केवल “Minimum Qualification / न्यूनतम अर्हता” शब्द का प्रयोग हुआ है।
RTE Act की धारा 23(1) के अंतर्गत केंद्र सरकार ने NCTE को Academic Authority बनाया। इसके बाद NCTE ने 23 अगस्त 2010 की अधिसूचना द्वारा पहली बार TET को “Minimum Qualification” का हिस्सा बनाया।
NCTE ने अपने राजपत्र में स्पष्ट किया कि—
• 23 अगस्त 2010 के बाद होने वाली नियुक्तियों की न्यूनतम अर्हता “with TET” होगी।
• 23 अगस्त 2010 से पूर्व नियुक्त/कार्यरत शिक्षकों की न्यूनतम अर्हता “without TET” मानी जाएगी।
बाद में 2017 के संशोधन में यह कहा गया कि 31 मार्च 2015 तक नियुक्त या कार्यरत शिक्षकों को Section 23(1) के अंतर्गत निर्धारित न्यूनतम अर्हता प्राप्त करनी होगी। अब यदि कोई शिक्षक 23 अगस्त 2010 से पहले नियुक्त है, तो उसकी निर्धारित न्यूनतम अर्हता वही होगी जो उस समय लागू थी, अर्थात without TET।
जिस एनसीटीई को TET लागू करने की शक्ति है तो क्या उसे परिस्थितियों के अनुसार relaxation देने की शक्ति नहीं है? यह विषय अभी भी न्यायिक व्याख्या के अधीन है और आवश्यकता पड़ने पर पुनः न्यायालय के समक्ष रखा जाएगा।
यदि आरटीई में कहीं टेट प्रयोग हुआ है तो उपलब्ध करायें ।चाहे सुप्रीम कोर्ट से हो या संसद से एनसीटीई के राजपत्र 23अगस्त 2010 से टेट आया है उसी के आधार पर mimimum qualification decide होगी ।
मा सुप्रीम कोर्ट द्वारा टेट की अनिवार्यता के संबंध में दिनांक 1 सितम्बर 2025 को दिये गये निर्णय के बाद इस मुद्दे पर संघ द्वारा की जा रही कार्यवाही के संबंध में सबाल करने वाले साथियों को हमने सदैव कहा कि लोकतंत्र में संसद सर्वोपरि है ।हमारी समस्या का निराकरण संसद द्वारा ही होगा ।इसलिए टीएफआई द्वारा देश के सभी सांसदों को ज्ञापन सौंप कर अपनी बात संसद तक पहुँचायी गई ।संसद में सत्ता पक्ष और विपक्ष के अधिकांश सदस्यों ने इस मुद्दे को उठाया और समस्या के निराकरण की मांग की ।टीएफआई द्वारा सभी जनपदों के मुख्यालय पर धरना प्रदर्शन करते हुए जिला मजिस्ट्रेट के माध्यम से मा प्रधान मंत्री जी को ज्ञापन प्रेषित किये गये ।
टीएफआई द्वारा 4 अप्रैल को दिल्ली के रामलीला मैदान में विशाल रैली आयोजित करके भारत सरकार तक अपनी बात पहुँचाई गई ।रैली में भारत सरकार के प्रतिनिधि के रूप में मा सांसद श्री जगदंबिका पाल जी को आमंत्रित किया गया और श्री पाल साहब ने आपकी लाखों की उपस्थिति और आप के मुद्दे की जानकारी सरकार तक पहुँचाई ।
माननीय केन्द्रीय शिक्षा मंत्री श्री धर्मेन्द्र प्रधान जी , भाजपा उत्तर प्रदेश के प्रदेश अध्यक्ष
श्री पंकज चौधरी जी एवं केंद्रीय राज्यमंत्री श्री जितिन प्रसाद जी से मिलकर उच्च स्तरीय वार्ता एवं निराकरण की मांग की गई ।
चूँकि आदेश सुप्रीम कोर्ट से आया है इसलिए कानूनी लड़ाई मजबूती से लड़ना आवश्यक है ।रिव्यू स्वीकार होने पर ओपन कोर्ट में सुनवाई के लिए टीएफआई ने सीनियर एडवोकेट श्री पी एस पटवालिया एवं श्री वी गिरि जी को कोर्ट में उतारा ।श्री पटवालिया जी ने टीएफआई के महासचिव श्री राम मूर्ति ठाकुर के राज्य संगठन अखिल झारखंड प्राथमिक शिक्षक संघ के रिव्यू में तथा श्री वी गिरी जी द्वारा उ प्र प्राथमिक शिक्षक संघ की ओर से श्री मेघराज सिंह एवं 232 अन्य के नाम से दाखिल रिव्यू में अपना पक्ष रखा ।जिसको आप वीडियो में देख सकते हैं ।
सुनवाई के दौरान सभी विद्वान अधिवक्ताओं ने भारत सरकार (श्री मनमोहन सिंह सरकार)के दौरान संसद द्वारा आरटीई एक्ट के लागू होने पर दिनांक 23 अगस्त 2010 के द्वारा इससे पूर्व में नियुक्त शिक्षकों को टेट से छूट देने का तर्क दिया गया ।लेकिन जज साहब भारत सरकार (श्री मोदी सरकार) के दौरान संसद द्वारा पारित किए गए संशोधन के क्रम में निर्गत राजपत्र दिनांक 10 अगस्त 2017 के द्वारा 31 मार्च 2015 को नियुक्त एवं कार्यरत सभी शिक्षकों पर टेट परीक्षा पास करने की अनिवार्यता लागू करने पर ही अडिग दिखे ।
सुनवाई के दौरान 10 राज्य सरकारों के अधिवक्ता मौजूद थे लेकिन किसी ने भी यह स्वीकार नहीं किया कि गत 8 वर्षों में किसी भी राज्य सरकार द्वारा सभी शिक्षकों पर टेट लागू करने हेतु कोई भी नोटिस या आदेश जारी नहीं किया है ।
कोर्ट ने फैसला सुरक्षित रखा है जिसके शीघ्र ही आने की उम्मीद है ।वकीलों का अपना मत है लेकिन हम कामना करते हैं कि निर्णय आपके पक्ष में हो ।
निर्णय अनुकूल होने पर सभी को बधाई और यदि प्रतिकूल हो तो हतोत्साहित न हो ।हम अपना आंदोलन आगे बढ़ाते हुए आगे बढ़ेंगे और श्री मोदी सरकार से कहेंगे कि जो पाप/अन्याय /संशोधन आपकी सरकार के दौरान हुआ है ।ऐसे संशोधन को वापस लेकर देश के 25 लाख शिक्षकों के करोड़ों परिजनों के साथ न्याय करें ।🙏🙏
श्री मनोज पांडेय जी माननीय विधायक ऊँचाहार रायबरेली को उ प्र सरकार में कैबिनेट मंत्री बनाये जाने पर अपने साथी पदाधिकारी श्री संजय सिंह जी महामन्त्री,श्री शिव शंकर पांडेय जी कोषाध्यक्ष,श्री राजेश शुक्ला जी जिलाध्यक्ष रायबरेली एवं मांडलिक मंत्री लखनऊ एवं श्री पंकज द्विवेदी आदि के साथ मिलकर बधाई एवं शुभकामनाएँ दीं ।
माननीय रीता बहुगुणा जोशी जी पूर्व कैबिनेट मंत्री एवं पूर्व सांसद के प्रयाग राज स्थित आवास पर पहुँच कर उनके स्वर्गीय पति श्री पी सी जोशी जी को श्रद्धांजलि अर्पित की ।मेरे साथ में श्री सुरेश कुमार तिवाठी जी पूर्व एम एल सी एवं प्रान्तीय संयोजक उ प्र शिक्षक महासंघ ,श्री संजय सिंह जी महामन्त्री,श्री शिव शंकर पांडेय जी कोषाध्यक्ष,श्री देवेन्द्र श्रीवास्तव जी संयुक्त महामन्त्री एवं श्री अनुज पांडेय जिलाध्यक्ष माध्यमिक शिक्षक संघ प्रयागराज एवं श्री अनिल पांडेय मंडलिक मंत्री भी रहे ।
विद्यालय की साफ़ सफ़ाई के सम्बन्ध में @DmSambhal के स्पष्ट एवं सराहनीय निर्देश ।शिक्षकों के साथ यह कार्य हम सबने विद्यार्थी जीवन में किया है जोकि शिक्षा का ही एक हिस्सा है परंतु वर्तमान में छात्रों द्वारा अपने स्वयं के भोजन किए वर्तन धोने या अपने कक्षा कक्ष में कोई सफाई करने जैसी खबरों पर अनेक शिक्षकों पर कार्रवाई की गई है ।अब इससे राहत मिलेगी ।जिलाधिकारी महोदय को धन्यवाद 🙏
उत्तर प्रदेश के 1.86 लाख सहित देश में लगभग 20 लाख ऐसे शिक्षक जो आरटीई लागू होने से पूर्व में नियुक्त हुए हैं उन पर टेट उत्तीर्ण करने की अनिवार्यता समाप्त करने हेतु 4 अप्रैल को रामलीला मैदान दिल्ली में हुई रैली के बाद आज टीएफआई के प्राधिनिधि मण्डल की पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार मा सांसद श्री जगदंबिका पाल जी के साथ श्री पंकज चौधरी जी प्रदेश अध्यक्ष भाजपा उ प्र एवं मा वित्त राज्यमंत्री भारत सरकार से विस्तृत वार्ता हुई ।सुप्रीम कोर्ट के आदेश से देश के लाखों शिक्षकों पर पड़ने वाले कुप्रभाव से बचाने हेतु कानून बनाने की पूरी पैरवी की गई ।मा प्रदेश अध्यक्ष जी ने शीघ्र ही शीर्ष नेतृत्व से वार्ता एवं समाधान हेतु आश्वस्त किया ।प्रतिनिधि में टीएफआई के वरिष्ठ उपाध्यक्ष श्री संजय सिंह एवं राष्ट्रीय उपाध्यक्ष श्री राधेरमण त्रिपाठी जी उपस्थित रहे ।
@jagdambikapalmp@mppchaudhary@narendramodi@AmitShah@TFI4India@UPPSS1921
#NoTetBeforRteAct
महाराष्ट्र के दो दो शिक्षक संघ भी आये @TFI4India के साथ
श्री श्रीकांत देशपांडे जी पूर्व एमएलसी एवं संस्थापक अध्यक्ष शिक्षक अघाड़ी विदर्भ प्रदेश
तथा
श्री दत्तात्रेय सावंत पूर्व एमएलसी एवं महासचिव महाराष्ट्र शाला क्रुती समिति महाराष्ट्र से कल दिल्ली स्थित महाराष्ट्र सदन में टेट की अनिवार्यता को समाप्त करने के आंदोलन पर विस्तार से चर्चा हुई,दोनों ही नेताओं ने टीएफआई के प्रयास की सराहना की एवं टीएफआई से संबद्ध होने की इच्छा व्यक्त की ।महाराष्ट्र के दोनों संगठन शीघ्र ही टीएफआई के सदस्य होंगे ।