भारतीय इतिहास में आतंकवाद का सबसे प्राचीन और क्रूर रूप, जो मरने के बाद भी इंसान का पीछा नहीं छोड़ता — वह है जातिवादी आतंकवाद, यानी “जातंकवाद”।
यह वो आतंक है जो एक ओर कहता है “ जात-पात की करो विदाई,हम सब...... भाई-भाई ” और दूसरी ओर उसी “भाई” की निर्वाण क्रिया तक को रोक देता है व निर्वाण यात्रा में शामिल भाईयों पर पथराव भी करता हैं।हद तो यह है कि यह आतंकवाद का ये रूप “जात की करो विदाई” जैसे ढोंग करता है, लेकिन असल में हर मोड़ पर जात की दीवार खड़ी करता है — चाहे जीवन हो या मृत्यु।
मध्य प्रदेश के श्योपुर जिले की वीरपुर तहसील में बहुजन समाज के जगदीश जाटव जी की निर्वाण क्रिया में भी जातीय नफरत दिखाई। न केवल निर्वाण क्रिया को रोका, बल्कि निर्वाण यात्रा में शामिल भाईयों पर पथराव तक किया गया। घटना के बाद प्रशासनिक अधिकारियों के सुबह से चले अथक प्रयासों के बाद शाम 5 बजे जाकर दलित समाज को एक वैकल्पिक रास्ते से उस ज़मीन तक पहुँचने दिया गया, जहाँ एक तरफ कोने में अंततः निर्वाण क्रिया संपन्न हो पाई। यह क्रूरता और अमानवीयता की पराकाष्ठा के दुर्लभ और शर्मनाक उदाहरणों में से एक है।
हम @MP_MyGov से माँग करते हैं:
दोषियों की तुरंत गिरफ्तारी हो,
दोषियों के खिलाफ SC/ST अत्याचार निवारण अधिनियम और BNS की सख्त धाराओं के तहत तत्काल कार्रवाई हो।
पीड़ित परिवार को सरकारी सुरक्षा और सम्मानजनक मुआवजा मिले।
दलित समुदाय को निर्वाण कार्य के लिए स्थायी और सम्मानजनक भूमि का शीघ्र आवंटन किया जाए, ताकि भविष्य में ऐसी अपमानजनक स्थिति की पुनरावृत्ति न हो।
जातीय हिंसा जातंकवाद के खिलाफ सख्त और मिसाल बनने वाली कार्रवाई हो।
अब और चुप रहना गुनाह है।
जातंकवाद के खिलाफ निर्णायक संघर्ष का समय आ गया है!
@CMMadhyaPradesh@DrMohanYadav51
पाकिस्तान क्रिकेटर शाहिद अफरीदी का कहना है पहलगाम हमला भारत ने ही कराया है, खुद करते है और इल्जाम पाकिस्तान पर लगाते हैं.
मैच फिक्सिंग कर पैसा कमाने वाला शाहिद अफरीदी से पूछना चाहता हूं अजमल कसाब कहां से आया था ?
कंधार हवाईजहाज हाईजैक कांड में जिस आतंकवादी छुड़ाया गया वो पाकिस्तान में खुलेआम घूम रहा है.
और इस आदमी के साथ अभी कुछ माह पहले BJP के नेता साथ बैठकर गुफ्तगू कर रहे थे. यहां तक अफरीदी गृहमंत्री के बेटे के साथ भी गुफ्तगू कर चुका है.
अगर शाहिद अफरीदी की फ़ोटो राहुल गांधी, अखिलेश यादव, तेजस्वी यादव या विपक्ष के किसी अन्य नेता के साथ दिखी होती तब BJP और द-लाल पत्रकार तो उछल उछलकर देशद्रोह का आरोप लगाते.
पूछता है पहलगाम का पर्यटक:
- ख़तरों के बीच मेरी रक्षा करनेवाला कोई वहाँ क्यों नहीं था?
- कुछ ऐसे लोगों को सरकार की ओर से चारों तरफ़ से चाक-चौबंद सुरक्षा घेरा क्यों दिया जाता है जो बाद में ठग साबित होते हैं?
- कोई भी कुछ बनकर इतने संवेदनशील इलाक़े में सुरक्षा कैसे पा सकता है क्या पहले कोई जाँच-पड़ताल नहीं होती है?
- ’जश्नजीवी भाजपाई’ जब यहाँ विवादित निजी कार्यक्रम आयोजित करते हैं तो लगभग 250 वीवीआईपी के लिए हज़ारों सुरक्षाकर्मियों के कई घेरे बना दिये जाते हैं, वो भी उनके निजी कार्यक्रम में जिनका काम किसी और के शब्दों को स्वर देना है। जिनका स्वयं कोई अस्तित्व नहीं है, जो न्यायलय तक की अवमानना करते हैं, ऐसे लोगों को सुरक्षा किस आधार पर मिलती है और पर्यटकों को क्यों नहीं?
ये अति गंभीर प्रश्न हैं, जिन्होंने अपनों को खोया है, उन पर दबाव डालकर बयान भले बदलवा दिये जाएं लेकिन भाजपाई याद रखें ‘बयान बदलवाने से सच नहीं बदल जाता है’।
उत्तरप्रदेश के अलीगढ़ में जिस दलित लड़के को कल मनुवादी सोंच वाले लोगों के द्वारा पीटा गया था उसको सुनिए। ख़बर है कि उल्टा इसके ऊपर ही मुकदमा कर दिया गया है।
देखिए कैसे उनलोगों को बाबा साहब से समस्या है। कैसे वो नीले रंग से नफ़रत करते हैं।
@MukeshMohannn@DrLaxman_Yadav@KanojiaPJ
@MGGSUpdateN कुछ नहीं होना जाना है। जो जहाँ है वहीं काम करता रहे। जो स्कूल्स हिंदी माध्यम में परिवर्तित होगीं तो उनका स्टाफ कहाँ जाएगा उसका भी तो समायोजन होगा । नाम मात्र की जगहों पर पदस्थापन होगा
तीव्र नहीं कछुए की चाल से भी धीमी चाल से काम हो रहा है।
भाजपा नेताओं को तकलीफ इस बात से है कि कमजोर, शोषित और पीड़ितों के बच्चे अंग्रेजी शिक्षा हासिल करके कहीं इनकी बराबरी न कर लें।
भाजपा सरकार द्वारा अंग्रेजी माध्यम स्कूलों के रूपांतरण की समीक्षा हेतु कमेटी बनाने का निर्णय दर्शाता है कि इनका विजन प्रदेश को पीछे धकेलने एवं निजी अंग्रेजी स्कूलों को लाभ पहुंचाने का है। भाजपा सरकार नहीं चाहती कि गरीब-मध्यम वर्ग और अभावग्रस्त तबके के बच्चे अंग्रेजी शिक्षा हासिल करे। जबकि भाजपा नेताओं के बच्चे इंग्लिश मीडियम स्कूलों और विदेशों में पढ़ते हैं।
सरकार द्वारा गठित समीक्षा कमेटी राजनीतिक दुर्भावना से प्रेरित एवं पूर्वाग्रही प्रतीत होती है। चार सदस्यीय कमेटी में न तो कोई शिक्षाविद है और न ही कोई विशेषज्ञ, कमेटी में सिर्फ सरकार के मंत्री हैं। प्रदेश में जब से भाजपा की सरकार बनी है, शिक्षा मंत्री से लेकर इनके नेता अंग्रेजी माध्यम स्कूलों पर ताला लगाने की तरफदारी कर रहे हैं।
पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार ने शिक्षा में क्रांतिकारी निर्णय करते हुए हर वर्ग के बच्चों के लिए महात्मा गांधी अंग्रेजी मीडियम स्कूल खोले। आज प्रदेश में 3700 से ज्यादा सरकारी अंग्रेजी माध्यम स्कूलों में हर वर्ग के लाखों बच्चे पढ़ाई कर रहे हैं। भाजपा सरकार ने समीक्षा के नाम अगर अंग्रेजी माध्यम स्कूलों को लेकर कोई भी जनविरोधी निर्णय किया तो ईंट से ईंट बजा देंगे, कांग्रेस पार्टी पूरे प्रदेश में जन आंदोलन करेगी।