यह खूबसूरत तस्वीर हमारे नूंह (मेवात) ज़िले की है। जी हाँ, उसी मेवात की जहाँ से तब्लीगी जमात की शुरुआत हुई थी। मेवात की पहचान हमेशा से अपने बुज़ुर्गों की दुआओं, अमन, इंसानियत और भाईचारे से रही है। यही हमारी असली पहचान है।
मुंह में राम, बगल में... राजनीति।
कल तक जो खुद को मर्यादा पुरुषोत्तम का सबसे बड़ा भक्त बताते थे।
आज उनके ही राज में आस्था के केंद्र पर सवाल उठ रहे हैं।
जब नीयत साफ न हो, तो धर्म की आड़ भी आपको नहीं बचा सकती।
जवाब तो देना ही पड़ेगा!