इतिहास में पहली बार चुनाव लड़ रही समाजवादी छात्रसभा के उम्मीदवार विशेष यादव 129 वोटो से संयुक्त सचिव का चुनाव हार गए।
सोचने वाली बात ये है कि AVBP के लक्ष्यराज सिंह 19 राउंड पीछे ही रहे जबकि NSUI का गोपाल चौधरी कुछ राउंड आगे भी आया।
और 19 राउंड तक विशेष यादव 35 वोट से आगे भी था लेकिन 20 राउंड में सीधे AVBP के लक्ष्यराज 129 वोट से जीत गए।
मतलब जो बंदा 19 राउंड तक टक्कर में नहीं था वो आखिरी राउंड में जीत भी गया खैर विशेष का प्रदर्शन भी विशेष ही रहा।🔥
अइसे ही थोड़ी Legend नाम धरावां,
कहा था ना #राष्ट्रीय_बेरोजगार_दिवस ट्रेंड करवा दूंगा आज,
मोदी जी के नाम के ऊपर पांचवे नंबर पर ट्रेंड कर रहा है #राष्ट्रीय_बेरोजगार_दिवस ,
अभी तो ये पहले नंबर पर जाएगा,
जवानों थोड़ा और जोर लगाओ,
नया भारत Paper leak, unemployment, महंगाई, भुखमरी, में Full Speed में आगे बढ़ रहा है। अब इस बर्बादी की रफ्तार में ब्रेक लगाना जरूरी है!
#राष्ट्रीय_बेरोजगार_दिवस
जनता समझ रही है भाजपा जिस यूसीसी की बात कर रही है दरअसल उसकी Full Form कुछ और है :
UCC =
Underground Communal Conspiracy
हम तो बस इतना कहेंगे :
पहले पिछले वादे निभाओ
यूसीसी फिर बाद में लाओ
नया जुमला न लेकर आओ
और न जनता को बहकाओ
15 लाख खाते में पहुँचाओ
यूसीसी फिर बाद में लाओ
2 करोड़ नौकरी दिलवाओ
यूसीसी फिर बाद में लाओ
सबका साथ कर दिखाओ
यूसीसी फिर बाद में लाओ
सबका विकास ढूँढ दिखाओ
यूसीसी फिर बाद में लाओ
स्कूलों को बंदी से बचाओ
यूसीसी फिर बाद में लाओ
बेटी को दहशत से बचाओ
यूसीसी फिर बाद में लाओ
माता को अपमान से बचाओ
यूसीसी फिर बाद में लाओ
युवाओं को काम दिलाओ
यूसीसी फिर बाद में लाओ
"नंदलाल निषाद जो दस्तखत करना नहीं जानते थे, भारतीय जनता पार्टी ने उनके नकली दस्तखत कराकर वोट कटवाने का काम फर्जी फॉर्म 7 भरवाकर कराया।"
• माननीय राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री अखिलेश यादव जी
UP सरकार से विज्ञापन रूपी पैसा खाकर सरकारी खबरें दिखाने वाला the ल्ला मीडिया भी मान रहा है कि
2027 में होने वाले विधानसभा चुनाव में समाजवादी पार्टी के नेतृत्व वाला गठबंधन तेजी से सरकार बनाने की ओर अग्रसर है,
PDA तेजी से एकजुट हो रहा है,
अखिलेश यादव ने वाकई चवन्नी को रुपया बनाया है।
2014 लोकसभा चुनाव में अजीत सिंह और जयंत चौधरी अपना चुनाव हार गए थे, 2017 विधानसभा चुनाव में RLD पार्टी ने सिर्फ 1 सीट जीती थी छपरौली बाद में वो भी पार्टी छोड़कर चले गए थे।
2019 लोकसभा चुनाव में अखिलेश यादव ने RLD पार्टी को अपने साथ गठबंधन में लिया, उन्हें 3 सीटे दी बागपत, मुजफ्फरनगर और मथुरा लेकिन पार्टी तीनों ही सीटे हार गई थी।
0 विधायक 0 सांसद वाली RLD पार्टी को अखिलेश यादव ने 2022 विधानसभा चुनाव में 33 सीटे दी, जिनमें से पार्टी 8 सीटों पर कामयाब हुई , RLD को गठबंधन में लेने के बावजूद पश्चिम उत्तर प्रदेश में अखिलेश यादव को कोई खास फायदा नहीं हुआ।
2022 में सपा की सरकार बनती तो जयंत चौधरी शायद उपमुख्यमंत्री बनते, चूंकि सरकार नहीं बनी, अपने वादे के मुताबिक RLD के पास सिर्फ 8 विधायक होने के बावजूद अखिलेश यादव ने उन्हें राज्यसभा भेजा, RLD को खतौली उपचुनाव जितवाकर सपा ने 8 से 9 विधायक कर दिए।
2024 लोकसभा चुनाव में अखिलेश यादव RLD पार्टी को 6–7 सीटे दे रहे थे, जबकि जयंत चौधरी भाजपा के साथ सिर्फ 2 सीटों पर मान गए।
यदि अखिलेश यादव, जयंत चौधरी को राज्यसभा ना भेजते तो क्या भाजपा उन्हें राज्यसभा भेजे कर केन्द्रीय मंत्री बना देती..!?
छात्रों पर बर्बरतापूर्ण लाठीचार्ज और AK-47 चलाने वाले निर्मम अधिकारियों पर कार्रवाई नहीं करने में विरुद्ध 19 अगस्त को पटना में विशाल राजभवन मार्च होगा।
ओ भाई सुनने में आ रहा है कि कल बसपा ने भी अपना चुनावी बिगुल फूंक दिया है।
अभी दो दिन पहले ही तो कह रहा था मैं कि बसपा क्यों नहीं बाहर आ रही है? लेकिन उनके समर्थक गाली देने लगते है।
चलो अच्छा हुआ मायावती जी ने मेरठ की सरधना सीट से अपना एक प्रत्याशी घोषित कर दिया है जहां से सपा के विधायक अतुल प्रधान जी हैं।
सबसे मजेदार बात की मायावती जी ने जाति का बहुत तगड़ा गेम खेला है और गुर्जर के सामने जाट को मैदान में उतारा है।
मायावती जी हर सीट पर ऐसा ही कॉन्सेप्ट रखकर चलने वाली हैं ताकि तीसरे को फायदा हो लेकिन यहां सपा के तेजतर्रार अतुल प्रधान को हराना काफी मुश्किल होगा।