“अब मेरे पास कोई रास्ता नहीं बचा” - कल प्रयागराज में एक छात्र ने मुझसे यही कहा। सालों की तैयारी, घर की ज़मीन बेची, माँ-बाप का कर्ज़ और फिर भी हाथ में कुछ नहीं।
यह हार उसकी नहीं है। यह उस व्यवस्था की हार है जिसने उसकी मेहनत का दाम देने से इनकार कर दिया।
तेरह दिन हो गए - गृह मंत्री अमित शाह के मुंह से एक शब्द नहीं निकला। मोदी जी माफी मांगने की जगह क्षमा बाँट रहे हैं।
@AmitShah जी, यह मत समझिए कि हम जवाबदेही मांगना बंद कर देंगे। राजधानी की सड़कों पर बच्चों पर लाठियां और पैलेट चले - और आपने एक शब्द नहीं कहा। आज नहीं तो कल, इस जुर्म का जवाब आपको देना ही पड़ेगा।
छात्र देश की रोशनी हैं, और मैं उनकी पूरी शक्ति के साथ खड़ा हूं।
#ChhatronKiGoonj
देश के छात्रों ने system के फैलाए अंधेरे के बीच, अपने डर का सामना कर, रौशनी की मशाल जलाई है।
ये मशाल अब पूरे देश को अपने अधिकारों का रास्ता दिखा रही है।
BJP-RSS और अडानी के System को अब खतम, tata, bye-bye कहने का वक्त आ गया है।
संसद में पूर्व प्रधानमंत्री पंडित नेहरू को अय्याश कहा गया,वो असंसदीय शब्द नहीं था ? मूर्ख शब्द पर सत्ता पक्ष को आपत्ति है,मूर्ख या अय्याश कौनसा शब्द असंसदीय है ?
स्कूल शिक्षा विभाग की स्थिति बेहद ख़राब है.
छत्तीसगढ़ में 16 जून से नया शैक्षणिक सत्र शुरू हो गया, लेकिन छात्रों को समय पर न तो स्कूल बैग मिले और न ही गणवेश. प्रदेश के कई स्कूलों में शिक्षकों की भारी कमी है लेकिन सरकार नई भर्ती नहीं कर रही है. इसका सीधा खामियाजा छात्रों को भुगतना पड़ रहा है.
स्वामी आत्मानंद अंग्रेजी माध्यम स्कूलों का नाम भी बदल दिया गया है. इतना ही नहीं, अब इन स्कूलों में फीस भी वसूली जा रही है. पहले गरीब और आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के बच्चे इन स्कूलों में निःशुल्क अंग्रेजी माध्यम से पढ़ाई कर रहे थे, लेकिन अब उनसे भी फीस ली जा रही है.
दूसरी ओर अतिथि शिक्षक धरना प्रदर्शन कर रहे हैं.
धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा हमारे education system को फिर से संवारने की दिशा में बहुत बड़ा कदम है।
शाबाश देश भर के छात्रों, आप सभी पर गर्व है।
सड़कों पर आ कर लोकतंत्र, संविधान और अपने भविष्य की रक्षा में डट कर खड़े होने वाले हर एक युवा, हर छात्र को बहुत-बहुत बधाई।
2 मांगें अभी भी बाकी हैं - प्रधानमंत्री छात्रों और भारत के भविष्य को सम्मान देते हुए माफ़ी मांगें और छात्रों पर हिंसा के दोषियों पर कार्रवाई हो।
ये समाज के दूसरे वर्गों किसानों, मजदूरों, गरीबों, हर वो व्यक्ति जिसे इस सरकार ने दबाया है, कुचला है - अपने सम्मान के लिए संवैधानिक तरीके से डटकर खड़े होने में ही असली साहस है।
इस सरकार को हटाने का वक्त आ गया है।
डरो मत!
हद में रहिए भाजपा वालो!!!
कल घेराव के नाम पर भाजपा के लोगों ने रायपुर में कांग्रेस मुख्यालय पर हमला किया.
भाजपा के सारे मंत्री भी लोकतांत्रिक और संवैधानिक मर्यादाओं को ताक में रखकर इसमें शामिल हुए.
आदतन उपद्रवी इन तत्वों ने कांग्रेस मुख्यालय और हमारे कार्यकर्ताओं पर पत्थर फेकें, पुलिस ने पानी की बौछारें छोड़ी.
सारा हमला भाजपा और पुलिस की ओर से कांग्रेस कार्यकर्ताओं पर.
जिसमें बड़ी संख्या में कांग्रेस कार्यकर्ता घायल हुए, पत्रकार साथियों को भी चोटें आईं.
और पुलिस ने FIR भी हमारे ही लोगों पर दर्ज कर ली.
वाह!!!
साफ़ है कि यह पुलिस के संरक्षण में “भाजपा सरकार” द्वारा किया गया सुनियोजित हमला था.
ठीक उसी तरह जिस तरह दिल्ली में छात्रों के साथ हुआ.
भाजपा से तो हम निपट लेंगे लेकिन छत्तीसगढ़ पुलिस के अधिकारी ध्यान रखें, भाजपा कुछ ही महीनों की मेहमान है. फिर मिलेंगे..
मोदी जी, अहंकार छोड़िए।
छात्रों की गूंज सुनिए, उनकी 3 मांगें पूरी कीजिए।
- नाकाम शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान से तत्काल इस्तीफा लीजिए।
- छात्रों पर बर्बरता करने वाले गुनहगारों की जवाबदेही तय कीजिए।
- छात्रों के साथ हुए हर अन्याय के लिए उनसे माफ़ी मांगिए।
मैं, कांग्रेस पार्टी और पूरा विपक्ष छात्रों और उनकी इन मांगों के साथ मजबूती से खड़े हैं।
सही पकड़े हैं आप 😅
RG की फोटो एकदम पोस्टर साइज और NM की फोटो कोने में पासपोर्ट साइज...
फर्क साफ दिख रहा है।
बाक़ी राजनीति में फोटो का साइज भी बहुत कुछ बोल देता है 😉
छात्रों पर हमला हर भारतीय परिवार पर हमला है।
प्रधानमंत्री मोदी को लगता है कि वो बिना जवाब दिए, बिना किसी नतीजे का सामना किए बच निकलेंगे - नहीं कर पाएंगे, इस बार तो बिल्कुल नहीं।
मैं हर उस देशभक्त भारतीय से अपील करता हूं जो मानता है कि हमारे छात्रों को न्याय मिलना चाहिए - प्रधानमंत्री आवास के सामने हमारे धरने में शामिल हों।
भारत के छात्रों की आवाज़ को नज़रअंदाज़ नहीं किया जा सकता।
An attack on students is an attack on every Indian family.
PM Modi believes he can get away without answers, without consequences. He cannot. Not this time.
I ask every patriotic Indian who believes our students deserve justice - join us in dharna in front of the Prime Minister’s residence.
The voice of India’s students will not be ignored.
प्रधानमंत्री जी,
श्री राम मंदिर में करोड़ों श्रद्धालुओं ने आस्था के साथ अपनी कमाई अर्पित की - वहां हुई चंदा चोरी अब किसी से छुपी नहीं है।
ट्रस्ट के हर सदस्य को आपकी सरकार ने चुना था। इस चंदा चोरी पर आपकी चुप्पी अस्वीकार्य है।
तत्काल स्वतंत्र जांच कराइए, पूरा हिसाब सार्वजनिक कीजिए और दोषियों को कानून के कटघरे में लाइए।
आपकी सरकार की विश्वसनीयता अब आपकी कार्रवाई पर निर्भर है।
शांतिपूर्ण विरोध एक अटूट और मौलिक अधिकार है।
भारत के निर्दोष छात्रों पर हमला करने के आदेशों का आँखें बंद करके पालन करने वाले हर पुलिस अधिकारी और सरकारी कर्मचारी ये बात ध्यान रखें:
संविधान ही आपका मालिक है।
सत्ता हमेशा के लिए नहीं रहती।
जवाबदेही ज़रूर तय की जाएगी।
Peaceful protest is a sacred and fundamental right.
Every police officer and govt official blindly following orders to attack India’s innocent students should keep in mind:
The Constitution is your master.
Power is not permanent.
Accountability will follow.
5 साल रोज़ाना 10 घंटे की तैयारी और औसतन ₹9 लाख - हर छात्र की मेहनत और उसके परिवार का त्याग।
10 साल में 152 पेपर लीक, सीट-नौकरी का रेट कार्ड, 0 सज़ा, 7.5 करोड़ युवाओं का बर्बाद भविष्य - System की हालत।
इस भ्रष्ट Education System को जड़ से बदलना होगा - बनानी होगी 21वीं सदी की परीक्षा व्यवस्था, स्वतंत्र और जवाबदेह संस्था जहां छात्रों को मिले पूरी सुरक्षा।
#ChhatronKiGoonj
भ्रष्ट, अन्यायी, पक्षपाती, बेईमान - ये चार शब्द मेरे नहीं, ये देश के छात्र आज भारत की शिक्षा व्यवस्था के लिए इस्तेमाल कर रहे हैं।
और सच यही है - भारत की शिक्षा व्यवस्था अब एक बेईमान वसूली तंत्र बन चुकी है।
जो व्यवस्था बच्चों के भविष्य को तैयार करने के लिए बनी थी, वो आज उन्हें और उनके परिवार को कर्ज़, तनाव और निराशा में धकेल रही है।
इसी भ्रष्टाचार ने पेपर लीक माफ़िया को जन्म दिया - जो तैयारी कर रहे लाखों छात्रों की सालों की मेहनत एक झटके में लूट लेता है।
यहां दोषी vendors और अधिकारियों को मिलती है tender और तरक्की। और सजा किसे मिलती है? छात्रों को, जिन्हें टूटे सपनों के साथ अकेले छोड़ दिया जाता है।
मोदी सरकार और शिक्षा मंत्री यह सब देख रहे हैं। पर उन्होंने चुप्पी चुनी है - जवाबदेही से मुँह मोड़ लिया है। और मीडिया में? बस एक लंबा सन्नाटा।
अब बहुत हुआ - अब वक़्त है शिक्षा में Revolution का।
17 जुलाई, देहरादून - मेरे साथ आइए, ‘छात्रों की गूँज’ को और बुलंद करें।
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#ChhatronKiGoonj