दस हजार का नोट-
कभी सोचा है कि हमारे देश में ₹10000 के नोट भी हुआ करते थे? सुनने में अजीब लगता है, लेकिन 1938 में आरबीआई ने वाकई में ऐसा नोट जारी किया था, खासतौर पर बड़े व्यापारियों और कारोबारियों के लिए। उस वक्त यह नोट काफी बड़ी बात हुआ करता था। फिर 1946 में अंग्रेजी हुकूमत ने इसे बंद कर दिया, वजह थी—कालाबाजारी पर रोक लगाना।
लेकिन कहानी यहीं खत्म नहीं हुई। आज़ादी के बाद 1954 में सरकार ने फिर से ₹10000 के नोट को वापस ला दिया। यह नोट एक बार फिर कारोबारियों के बीच लोकप्रिय हो गया। मगर 1978 में मोरारजी देसाई की सरकार आई और काले धन पर शिकंजा कसने के लिए ₹10000 और ₹5000 के नोट को हमेशा के लिए बंद कर दिया।
दिलचस्प बात यह थी कि इतने बड़े नोटों का आम लोग इस्तेमाल करते ही नहीं थे। इसलिए जब ये बंद हुए, तो आम जनता को कोई खास फर्क नहीं पड़ा।
You are today's Hero Gaurav❤🔥
Everything that went down favoured you big time.💯
Exposed the real hypocrisy of other contestants.👏
Loving this clean game, GK’s got his eyes on the trophy while others just wanna stop him.🔥
#BiggBoss19#BB19#GauravKhanna
जैसे सूर्य की पहली किरण अंधकार को मिटा देती है,
वैसे ही प्रभु राम के नाम का स्मरण जीवन से सभी दुखों को हर लेता है। 🌞
राम नाम ही जीवन का आधार है,
राम भक्ति से ही मिलती है सच्ची शांति और आनंद।
हर श्वास में बस एक ही नाम — श्री राम 💛
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POLITICS
Even a poor person's audio goes viral and is accepted as true.
Even a video of someone with money and power was proven false...
Wow, politics, what will happen to you now?
@INCIndia@RahulGandhi@GovindDotasra@ashokgehlot51
बीजेपी इस गलत फहमी में ना रहे कि राइट विंग बीजेपी का समर्थन करती है।
हम लोग बीजेपी का समर्थन नहीं बल्कि राष्ट्रवादियों का समर्थन करते है। जैसे
नूपुर शर्मा
टाइगर राजा सिंह
योगी जी
हेमन्त बिस्वा शरमा
हिंदुत्व की विचारधारा से कोई समझौता नहीं