लिफ्ट, एस्केलेटर और नए शेड अच्छी बात है 👍
लेकिन सवाल ये है कि जब प्लेटफॉर्म पर इंसानों को खड़े होने की जगह नहीं मिल रही, तब ये सुविधाएं आखिर कितनी राहत दे पा रही हैं?
स्टेशन चमकाने से ज्यादा जरूरी है भीड़ कम करना, पर्याप्त ट्रेनें चलाना और यात्रियों को इंसानों जैसा सफर देना।
क्योंकि जनता को सिर्फ “विकास का पोस्टर” नहीं, जमीन पर राहत चाहिए।
किसानों का कर्ज माफ करना सिर्फ एक फैसला नहीं,
बल्कि उन लाखों परिवारों को राहत देने की कोशिश है जो सालों से कर्ज और संघर्ष के बीच जी रहे थे। 🌾
अगर 14.22 लाख किसानों को सच में इसका लाभ मिलता है,
तो यह ग्रामीण अर्थव्यवस्था और किसानों के आत्मविश्वास दोनों के लिए बड़ा कदम साबित हो सकता है।
उम्मीद है कि अब किसानों को सिर्फ वादे नहीं,
बल्कि जमीन पर असली राहत भी मिलेगी। 🙏
बिहार के लोग मेहनत से नहीं भागते,
लेकिन सवाल ये है कि आखिर उन्हें अपना घर छोड़ने पर मजबूर कौन करता है? 💔
हर साल लाखों युवा पंजाब, हरियाणा, दिल्ली और गुजरात की तरफ निकल पड़ते हैं।
क्यों?
क्योंकि अपने ही राज्य में फैक्ट्री कम, उद्योग कम, और रोजगार के मौके बेहद सीमित हैं।
ये ट्रेन की भीड़ सिर्फ भीड़ नहीं है,
ये सिस्टम की असफलता का चलता-फिरता सबूत है।
कोई इंसान शौक से ट्रेन के दरवाजे पर लटककर हजारों किलोमीटर सफर नहीं करता।
मजबूरी इंसान से सब करवाती है।
दुख की बात ये है कि चुनावों में जाति और धर्म पर सबसे ज्यादा बहस होती है,
लेकिन रोजगार, उद्योग, शिक्षा और पलायन पर सबसे कम।
अगर सच में “नया बिहार” बन रहा होता,
तो बिहार का युवा मजदूरी के लिए दूसरे राज्यों की तरफ नहीं भाग रहा होता।
बिहार में प्रतिभा की कमी कभी नहीं थी,
कमी थी तो सिर्फ अवसरों की।
बॉलीवुड सुपरस्टार रणवीर सिंह का 'डॉन 3' से बाहर होना और उसके बाद फेडरेशन ऑफ वेस्टर्न इंडिया सिने एम्प्लॉइज (FWICE) द्वारा उनके खिलाफ नॉन-कोऑपरेशन डायरेक्टिव जारी करना इस वक्त इंडस्ट्री का सबसे बड़ा विवाद बन चुका है. अब इस पूरे मामले में ड्रामा क्वीन और एक्ट्रेस राखी सावंत की एंट्री हो गई है. हमेशा की तरह अपने बेबाक और आक्रामक अंदाज में राखी ने रणवीर सिंह का खुलकर साथ दिया है और FWICE को आड़े हाथों लिया है.
मुंबई में पैपराजी से बातचीत के दौरान राखी सावंत का गुस्सा सातवें आसमान पर नजर आया. उन्होंने रणवीर को टारगेट किए जाने पर नाराजगी जताते हुए कहा कि जिस इंसान ने अपनी मेहनत के दम पर पहचान बनाई है, उसे इस तरह परेशान करना बिल्कुल गलत है. राखी ने कहा, 'मैं इस कदम की कड़ी निंदा करती हूं. मुझे यह सब देखकर बहुत गुस्सा आ रहा है. रणवीर आज एक सुपरस्टार हैं और यही वजह है कि हर कोई उनसे जलता है.' उन्होंने आगे कहा कि दीपिका पादुकोण और रणवीर सिंह दोनों ने ही बिना किसी गॉडफादर के, सिर्फ और सिर्फ अपनी कड़ी मेहनत के बल पर बॉलीवुड में यह मुकाम हासिल किया है.
अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए राखी सावंत ने इस विवाद में सुपरस्टार सलमान खान का नाम भी लिया. उन्होंने FWICE को सीधे चुनौती देते हुए कहा, 'अगर इन लोगों में इतनी ही ताकत है, तो सलमान खान को बैन करके दिखाएं. सलमान भाई को टच करके तो बताओ, वो अकेले ही सबकी बैंड बजा देंगे.'
Taiwan ने हाल ही में stock market valuation (कुल market capitalization) में India को पीछे छोड़ दिया है और दुनिया का 5वाँ सबसे बड़ा stock market बन गया।
मुख्य कारण 👇
Taiwan की chip company Taiwan Semiconductor Manufacturing Company (TSMC) के शेयरों में AI boom की वजह से भारी तेजी आई।
AI, Nvidia, advanced chips और semiconductor demand ने Taiwan market को बहुत ऊपर पहुंचा दिया।
रिपोर्ट्स के अनुसार:
Taiwan market cap लगभग $4.95 trillion
India market cap लगभग $4.92 trillion रही।
लेकिन एक जरूरी बात ⚠️
India का market ज्यादा diversified है banking, IT, pharma, energy, FMCG जैसे कई sectors पर आधारित।
Taiwan का market काफी हद तक semiconductor sector और खासकर TSMC पर depend करता है।
इसलिए यह कहना सही होगा कि:
“अभी के लिए Taiwan ने stock market value में India को पीछे छोड़ा है, मुख्यतः AI-chip rally की वजह से।”
“SIR को गैर-संवैधानिक नहीं कहा जा सकता, और फ्री एंड फेयर इलेक्शन जरूरी है।”
इसका अर्थ यह है कि सुप्रीम कोर्ट ने पहली नजर में यह माना कि: चुनाव आयोग को मतदाता सूची सुधारने/सत्यापन का अधिकार है, और साफ-सुथरे चुनाव लोकतंत्र के लिए जरूरी हैं। लेकिन इसका मतलब यह नहीं होता कि:
कोर्ट ने हर प्रक्रिया को पूरी तरह सही घोषित कर दिया, या सभी याचिकाएँ खारिज कर दीं।
अक्सर ऐसी सुनवाई में कोर्ट: कुछ हिस्सों को सही मानता है, कुछ पर सवाल पूछता है,
और बाद में विस्तृत फैसला देता है।
फिर दुनिया की पहली यूनिवर्सिटी कौन?
इस पर अलग-अलग दावे हैं:
प्राचीन शिक्षण केंद्र
Takshashila -- बहुत प्राचीन
Nalanda Mahavihara -- संगठित आवासीय विश्वविद्यालय जैसा ढाँचा
Plato's Academy
आधुनिक अर्थ में सबसे पुरानी लगातार चलने वाली यूनिवर्सिटी
अक्सर:
University of al-Qarawiyyin
को माना जाता है, जिसे UNESCO और Guinness भी सबसे पुरानी continuously operating university कहते हैं।
क्या मैकॉले भारतीय संस्कृति से नफरत करता था?
उसके लिखे हुए शब्दों से लगता है कि वह भारतीय पारंपरिक ज्ञान को पश्चिमी ज्ञान से कमतर मानता था। 😐
उसने एक जगह लिखा था कि यूरोप की एक अच्छी लाइब्रेरी की एक शेल्फ भी भारत और अरब के पूरे साहित्य से ज्यादा मूल्यवान है।
इस बयान की वजह से उसकी काफी आलोचना होती है।
लेकिन पूरी कहानी सिर्फ इतनी नहीं है
मैकॉले का उद्देश्य “भारत का विकास” नहीं बल्कि: ब्रिटिश शासन को मजबूत करना,
प्रशासन आसान बनाना,
और सांस्कृतिक प्रभाव बढ़ाना था।
हालाँकि बाद में उसी अंग्रेज़ी शिक्षा से:
आधुनिक विश्वविद्यालय बने, विज्ञान फैला, और भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन के नेता भी निकले।
इसलिए इतिहासकार उसे पूरी तरह “नायक” या “खलनायक” नहीं मानते, बल्कि औपनिवेशिक नीति का महत्वपूर्ण चेहरा मानते हैं।
क्या मैकॉले ने कहा था कि “भारत में कोई चोर नहीं” वाला भाषण?
सोशल मीडिया पर एक लंबा “मैकॉले भाषण” बहुत वायरल है जिसमें वह भारत की महानता की तारीफ करता है।
इतिहासकारों के अनुसार उसका कोई विश्वसनीय प्रमाण नहीं मिला। उसे ज्यादातर नकली या गलत तरीके से जोड़ा गया उद्धरण माना जाता है। ⚠️
क्या सच में लाइब्रेरी महीनों तक जलती रही थी?
यह दावा बहुत प्रसिद्ध है कि:
“नालंदा की लाइब्रेरी इतनी बड़ी थी कि वह कई महीनों तक जलती रही।”
लेकिन इसका कोई समकालीन ठोस प्रमाण नहीं मिलता।
यह बाद की लोककथाओं और लोकप्रिय लेखों में ज्यादा दिखाई देता है। इतिहासकार इसे निश्चित तथ्य नहीं मानते।
मुख्य स्रोत एक फ़ारसी इतिहासकार Minhaj-i-Siraj की किताब Tabaqat-i-Nasiri है।
उसमें लिखा है कि लगभग 1193–1200 CE के बीच बख्तियार खिलजी ने बिहार क्षेत्र पर हमला किया था और एक बड़े बौद्ध शिक्षा केंद्र को नष्ट किया। अधिकांश इतिहासकार मानते हैं कि इसमें नालंदा और आसपास के बौद्ध विश्वविद्यालय शामिल थे।
@FabulasGuy पिज़्ज़ा शौक है, पेट्रोल ज़रूरत।
शौक छोड़ सकते हैं, लेकिन रोज़मर्रा की ज़िंदगी नहीं। इसलिए लोग पिज़्ज़ा की नहीं, पेट्रोल की कीमत पर चर्चा करते हैं।
शर्म अपराधी को आनी चाहिए, अपराध के खिलाफ खड़े होने वाले को नहीं।
जब रेपिस्टों के समर्थन में रैलियाँ निकलती हैं,
जब बेल के लिए अभियान चलाए जाते हैं,
जब पीड़िता के चरित्र पर सवाल उठाए जाते हैं,
तब समाज का एक बड़ा हिस्सा चुप रहता है।
फिर किसी अधिकारी या नागरिक के अपराध के खिलाफ आवाज़ उठाने पर ही लोगों को “मर्यादा” याद आ जाती है।
न्याय की मांग करना शर्म नहीं है,
अपराध पर मौन रहना शर्म की बात है। ⚖️
@Khanaf00 जनता को कहा जाता है खर्च कम करो, पेट्रोल बचाओ, सुविधाओं में कटौती करो...
लेकिन सत्ता के गलियारों में आराम और सुविधाओं पर कोई मितव्ययिता लागू नहीं होती। यही दोहरे मानदंड लोगों को नाराज़ करते हैं।
समस्या यह है कि हर व्यक्ति ₹600 की पिज़्ज़ा नहीं खाता।
देश में करोड़ों लोग रोज़मर्रा के खर्च, किराया, दूध, गैस और पेट्रोल के बजट से जूझते हैं। महंगाई का असर उस परिवार से पूछिए जिसकी आय नहीं बढ़ी लेकिन खर्च लगातार बढ़ रहे हैं।
पिज़्ज़ा से पेट्रोल की तुलना करना ज़मीनी हकीकत से दूर तर्क है।
@RADHIKA_INF मेट्रो में सफर करना अच्छी बात है, लेकिन जनता नेताओं का मूल्यांकन एक दिन की फोटो या वीडियो से नहीं, उनके फैसलों और कामकाज से करती है।
सरलता स्वागतयोग्य है, पर असली परीक्षा शासन और नतीजों की होती है।
अगर किसी 10 साल की बच्ची के साथ हुई दरिंदगी और हत्या पर बुलाई गई प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान अधिकारी हंसते या मुस्कुराते दिखाई दें, तो जनता का आक्रोश स्वाभाविक है।
ऐसे मामलों में हर शब्द, हर हावभाव और हर संदेश पीड़ित परिवार के सम्मान और न्याय की भावना से जुड़ा होता है। संवेदनशीलता केवल जांच में नहीं, सार्वजनिक आचरण में भी दिखनी चाहिए।
एक मासूम की मौत कोई मज़ाक नहीं है।