फूलन देवी एक ऐसी शख्सियत, जिसके साथ अन्याय उसके अपने लोगों ने ही किया, आज़ाद भारत के सबसे बड़े लोकतांत्रिक संस्थान संसद में चुन के आने के बाद भी इस देश ने उसे न कबूल करके उससे ज्यादा बड़ा अन्याय किया। मगर फूलन न डरी, न झुकी, ललकार कर खड़ी हो गईं। इसलिए हम फूलन को याद करते हैं।