जख्म कहां-कहां से मिले छोड़ इन बातों को
जिंदगी और तू बता यह सफर और कितना बाकी है जुल्म के
सारे हुनर हम पर ही आजमाए गए
जुल्म भी सहा हमने जालिम भी कहलाए गए
मान्यवर कांशीराम जी की पुण्यतिथि पर शत-शत नमन: बहुजन समाज के स्वाभिमान और सामाजिक परिवर्तन के महानायक
“जिस समाज के पास सत्ता की ताकत नहीं होती, उसकी आवाज़ अक्सर दबा दी जाती है। इसलिए समाज को अपने अधिकारों के साथ सत्ता में भागीदारी भी हासिल करनी होगी।”
भारत के सामाजिक और राजनीतिक इतिहास में मान्यवर कांशीराम जी का नाम एक ऐसे महानायक के रूप में दर्ज है, जिन्होंने बहुजन समाज को केवल अपने अधिकारों के प्रति जागरूक ही नहीं किया, बल्कि उसे अपने पैरों पर खड़ा होना और सत्ता में अपनी भागीदारी सुनिश्चित करना भी सिखाया। उनकी पुण्यतिथि पर उन्हें याद करना केवल श्रद्धांजलि देना नहीं, बल्कि उनके विचारों, संघर्षों और अधूरे सपनों को आगे बढ़ाने का संकल्प लेना है।
संघर्ष से सत्ता में भागीदारी तक का ऐतिहासिक सफर
15 मार्च 1934 को पंजाब के रोपड़ जिले में जन्मे कांशीराम जी ने अपना पूरा जीवन सामाजिक असमानता, जातिगत भेदभाव और शोषण के विरुद्ध संघर्ष को समर्पित कर दिया। उन्होंने डॉ. भीमराव आंबेडकर के विचारों से प्रेरणा लेकर बहुजन समाज को संगठित करने का ऐतिहासिक अभियान चलाया।
उन्होंने BAMCEF और DS-4 जैसे संगठनों के माध्यम से समाज के शिक्षित, कर्मचारी और वंचित वर्गों को जोड़ने का प्रयास किया। इसके बाद 1984 में बहुजन समाज पार्टी की स्थापना करके उन्होंने सामाजिक आंदोलन को राजनीतिक शक्ति में बदलने की दिशा में बड़ा कदम उठाया।
उनका मानना था कि केवल शिक्षा प्राप्त कर लेना पर्याप्त नहीं है; जब तक समाज को निर्णय लेने की प्रक्रिया और सत्ता में उचित भागीदारी नहीं मिलेगी, तब तक सामाजिक न्याय का सपना अधूरा रहेगा।
कांशीराम जी ने बहुजन समाज को क्या सिखाया?
कांशीराम जी का सबसे बड़ा योगदान यह था कि उन्होंने वंचित समाज को अपनी ताकत पहचानना सिखाया। उन्होंने दलितों, पिछड़ों और अन्य वंचित वर्गों को यह संदेश दिया कि उनकी सामाजिक और राजनीतिक भागीदारी किसी की कृपा नहीं, बल्कि लोकतांत्रिक अधिकार है।
उन्होंने समाज को बताया कि वोट केवल सरकार बनाने का साधन नहीं, बल्कि अपने भविष्य, सम्मान और अधिकारों की रक्षा करने की शक्ति भी है।
उनकी राजनीति का मूल उद्देश्य केवल चुनाव जीतना नहीं, बल्कि उन वर्गों को राजनीतिक प्रतिनिधित्व दिलाना था, जिनकी आवाज़ लंबे सम�� तक सत्ता के गलियारों में कमजोर रही थी।
बहुजन आंदोलन के सामने आज सबसे बड़ा सवाल
कांशीराम जी की पुण्यतिथि पर सबसे महत्वपूर्ण प्रश्न यह है कि क्या आज बहुजन समाज उनके विचारों के अनुसार संगठित है? क्या समाज में शिक्षा, रोजगार, सामाजिक सम्मान और राजनीतिक प्रतिनिधित्व को लेकर पर्याप्त जागरूकता है? क्या बहुजन आंदोलन अपने मूल उद्देश्यों की दिशा में आगे बढ़ रहा है?
इन सवालों पर गंभीरता से विचार ���रने की जरूरत है। किसी भी महान नेता के प्रति सच्ची श्रद्धांजलि केवल उनकी तस्वीर पर फूल चढ़ाना नहीं, बल्कि उनके विचारों को अपने जीवन और समाज में उतारना है।
आज आवश्यकता है कि बहुजन समाज आपसी मतभेदों से ऊपर उठकर शिक्षा, संगठन, सामाजिक न्याय और संवैधानिक अधिकारों को मजबूत करे। राजनीतिक दलों और नेताओं से भी यह सवाल पूछा जाना चाहिए कि वे कांशीराम जी के विचारों को कितना आगे बढ़ा रहे हैं और समाज के कमजोर वर्गों को वास्तविक अवसर दिलाने के लिए क्या कर रहे हैं।
सच्ची श्रद्धांजलि संकल्प से मिलेगी
मान्यवर कांशीराम जी का जीवन हमें सिखाता है कि बड़े सामाजिक परिवर्तन के लिए दृढ़ इच्छाशक्ति, संगठन, निरंतर संघर्ष और स्पष्�� विचारधारा की आवश्यकता होती है। उन्होंने दिखाया कि लोकतंत्र में संगठित समाज अपनी आवाज़ बुलंद कर सकता है और सत्ता में अपनी जगह बना सकता है।
उनकी पुण्यतिथि हमें यह संकल्प लेने का अवसर देती है कि हम जातिगत भेदभाव और सामाजिक अन्याय के विरुद्ध खड़े होंगे, शिक्षा को प्राथमिकता देंगे, संविधान के मूल्यों की रक्षा करेंगे और समाज के हर वंचित व्यक्ति को सम्मान तथा अवसर दिलाने का प्रयास करेंगे।
मा���्यवर कांशीराम जी हमारे बीच भले ही शारीरिक रूप से मौजूद नहीं हैं, लेकिन उनके विचार आज भी सामाजिक न्याय और राजनीतिक भागीदारी की लड़ाई को दिशा देते हैं।
आइए, उनकी पुण्यतिथि पर हम संकल्प लें कि उनके संघर्ष को केवल नारों तक सीमित नहीं रखेंगे, बल्कि उसे शिक्षा, संगठन, समानता और सामाजिक परिवर्तन के माध्यम से आगे बढ़ाएंगे।
मान्यवर कांशीराम जी को उनकी पुण्यतिथि पर कोटि-कोटि नमन एवं विनम्र श्रद्ध���ंजलि।
जय भीम! जय भारत! बहुजन एकता ज़िंदाबाद!
बीजेपी तो हिन्दुओं की पार्टी है, हिन्दुओं की ही हेल्प करती है. बिलकुल गलत है ये. कैसे??
2014 में मुस्लिम साक्षरता डर 68.5% थी
2026 में ये बढ़कर 79.5 % हो गयीं
2014 में 8.5% मुस्लिम ही उच्च शिक्षा वाला थे
2026 में 21.8% मुस्लिम उच्च शिक्षा वाले हैँ
2014 में 6% मुस्लिम औरतें कॉलेज जाती थी
2026 में 20% मुस्लिम औरतें कॉलेज जाती हैँ
2014 में 15% मुसलमानो के बैंक अकॉउंट थे
2026 में 95% मुसलमा��ो के बैंक अकॉउंट हैँ
2014 में 26% मुस्लिम प्रॉपर्टी रजिस्टर्ड थी
2026 में 96% मुस्लिम प्रॉपर्टी रजिस्टर्ड है
2014 में 16% मुस्लिम हिस्सेदारी थी राजनीती में
2026 में 68%मुस्लिम हिस्सेदारी है राजनीती में
मतलब कुल मिलाकर मोदीजी ने हिन्दुओं से ज्यादा फायदा मुसलमानो का ही किया है
वोट हमसे उनको टाइट करने के नाम पर लिए
और टाइट हमको ही कर दिया.
मान्यवर कांशीराम जी को सच्ची श्रद्धांजलि केवल उनके चित्र पर फूल चढ़ाना नहीं, बल्कि उनके संघर्ष से प्रेरणा लेकर सामाजिक न्याय, समान अवसर ��र संवैधानिक अधिकारों के लिए काम करना है।
कांशीराम जी का जीवन एक संदेश देता है—जब समाज जागरूक होता है, संगठित होता है और अपने अधिकारों के लिए लोकतांत्रिक तरीके से खड़ा होता है, तभी परिवर्तन की राह मजबूत होती है।
मान्यवर कांशीराम जी अमर रहें!
जय भीम! जय भारत!
मायावती सरकार: 13 मई 2007–15 मार्च 2012
उत्तर प्रदेश विधानसभा के रिकॉर्ड के अनुसार मायावती इस अवधि में मुख्यमंत्री थीं। �
UP Vidhan Sabha Proceedings +1
विभाग/क्षेत्र
उपलब्ध आंकड़ा
स्थिति
पुलिस
35,000 कांस्टेबल
भर्ती/चयन की पुष्टि विभिन्न समकालीन रिपोर्टों में
पुलिस में नए पद
2.04 लाख पद
पद सृजित किए गए; यह 2.04 लाख भर्तियाँ ���हीं थीं
शिक्षा
88,000 शिक्षक
2011 की रिपोर्ट में नियुक्तियों का आंकड़ा
└ मदरसा शिक्षक
28,000
88,000 शिक्षकों में शामिल
सफाई क��्मचारी
1 लाख से अधिक
2011 की रिपोर्ट में नियुक्ति का दावा
स्वास्थ्य/डॉक्टर
1,400 डॉक्टर
2007 में संविदा पर नियुक्ति की योजना
स्वास्थ्य/डॉक्टर
2,500 नए डॉक्टर
2010 में भर्ती अभियान प्रस्तावित
पुलिस उपनिरीक्षक
3,700 पद
2010 में भर्ती प्रक्रिया शुरू करने की घोषणा
इनमें सबसे ठोस समकालीन रिपोर्ट Business Standard की है, जिसने 2011 में पिछले चार वर्षों के लिए 88,000 शिक्षक, 1 लाख से अधिक सफाई कर्मचारी और 35,000 पुलिसकर्मी नियुक्त होने की बात लिखी थी। �
Business Standard +1
पुलिस: 35,000 कांस्टेबल की भर्ती को New Indian Express और अन्य रिपोर्टों ने भी दर्ज किया है। � 2010 में 3,700 सब-इंस्पेक्टर भर्ती की प्रक्रिया शुरू होने की भी रिपोर्ट थी। �
The New Indian Express
The Indian Express
शिक्षक: जुलाई 2007 में मायावती सरकार ने प्राथमिक विद्यालयों में लगभग 88,000 खाली पद भरने की घोषणा की थी। � बाद की 2011 की रिपोर्ट में 88,000 शिक्षकों की नियुक्ति होने की बात कही गई। �
The Times of India
Business Standard
स्वास्थ्य: मई 2007 में सरकार ने सरकारी अस्पतालों/PHC/CHC में डॉक्टरों की कमी को देखते हुए 1,400 डॉक्टरों को संविदा पर नियुक्त करने की योजना बताई थी। � 2010 में 1,058 डॉक्टरों को हटाने के बाद 2,500 नए डॉक्टरों की भर्ती की प्रक्रिया की बात सामने आई। �
The Economic Times
The Times of India
फिर 91,000 सरकारी नौकरियों का आंकड़ा क्या है?
बाद में उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा प्रस्तुत तुलनात्मक आंकड़ों में 2007–2012 मायावती सरकार के दौरान 91,000 सरकारी नौकरियाँ दिए जाने का आंकड़ा इस्तेमाल हुआ है। दैनिक जागरण ने भी यही आंकड़ा रिपोर्ट किया है। �
Jagran
लेकिन यहाँ एक महत्वपूर्ण विसंगति है:
एक तरफ बाद के सरकारी तुलनात्मक आंकड़े 91,000 कुल सरकारी ��ौकरियाँ बताते हैं। �
Jagran
दूसरी तरफ 2011 की समकालीन रिपोर्ट अकेले 88,000 शिक्षक + 1 लाख से अधिक सफाई कर्मचारी + 35,000 पुलिसकर्मी बताती है। �
Business Standard
इसलिए 91,000 को मायावती शासनकाल की हर तरह की नियुक्तियों का अंतिम/सर्वसमावेशी आंकड़ा मानना सही नहीं होगा, जब तक यह स्पष्ट न हो कि 91,000 की गणना में कौन-कौन से विभाग और किस प्रकार की नियुक्तियाँ शामिल की गई थीं।
सबसे सुरक्षित निष्कर्ष
अगर आपको किसी बहस, वीडियो या लेख में तथ्यात्मक रूप से बोलना है, तो मैं इसे इस तरह रखने की सलाह दूँगा:
“2007 से 2012 के मायावती शासनकाल क�� लिए बाद में सरकारी तुलनात्मक आंकड़ों में करीब 91 हजार सरकारी नौकरियों का आंकड़ा दिया गया है। लेकिन समकालीन रिपोर्टों में अकेले 88 हजार शिक्षक, एक लाख से अधिक सफाई कर्मचारी और 35 हजार पुलिसकर्मियों की नियुक्तियों का उल्लेख मिलता है। इसलिए 91 हजार को सभी विभागों की कुल नियुक्तियों का अंतिम आंकड़ा बताने से पहले उसकी गणना-पद्धति स्पष्ट करना जरूरी है।” �
Jagran +1
अगर आपका उद्देश्य मायावती बनाम अखिले�� बनाम योगी—2007 से 2022 तक किस सरकार ने कितनी सरकारी नौकरियाँ दीं, इसका एक स्रोत सहित तुलनात्मक चार्ट बनाना है, तो उसके लिए भी मैं अलग-अलग सरकारों के आंकड़े एक ही परिभाषा में रखकर दे सकता हूँ।
@TheSengarSahab मुझे इस बात को एहसास हुआ है कि ब्रह्म ऋषि को भी जिन का सर आ गया है तो तभी यह मौलाना की वीडियो डाले हैं उनके चक्कर में ना पढ़ना नहीं कहीं तुम्हार��� ऊपर जिन आ जाए वापस ब्रह्म ऋषि
@RizwanahmadIND शहजाद पूनावाला से महाशय ने पूछा ह�� गाली नहीं भोसड़ी के शहजाद पूनावाला को भोसड़ी के मतलब आप कैसे हो बता दो रिजवान भाई नहीं वह सीरियस ले लेंगे और फिर भोकरताल कर लेंगे फिर ��ेहत खराब हो जाएगी
@RizwanahmadIND अरे शहजाद भाई पर लगी हो नहीं लगी हो लेकिन आपको क्यों दर्द हो रहा है अब तो वह कांग्रेस में भी नहीं है बीजेपी में भी नहीं है अभी वह बजरंग दल जॉइंट कर लिया
लोनी विधायक चुनाव जीतने के लिए पूरी जान लगाए हुए हैं.लाइव आकर कह रहे हैं गाजियाबाद का कोई वकील हाज़ी सलमान का मुकदमा ना लड़े.क्यों ना लड़े विधायक जी? ओर आप गाजियाबाद के वकीलों को दिशा निर्देश देने वाले कौन हैं.वकील तो इस देश में "निर्भया" कांड के अभियुक्तों को भी मिला है.फिर हाजी सलमान का क्या गुनाह है?? बस इतना कि लोनी की सड़कों पर भरे पानी ओर ग���्ढों पर सवाल कर लिया.ओर ��िर कुछ लोग हाजी सलमान की चौखट पर खड़े होकर उसे चैलेंज करते हैं..."जो पाड़ सके पाड़ ले" बोलते हैं.जिनकी मोहल्ले के लोग थोड़ी मरम्मत कर देते हैं.ओर हाजी सलमान पर 25 हजार का इनाम हो जाता है..
मतलब मेरे घर आकर कोई धमकी दे ,, क्षेत्र का माहौल खराब करे ओर मेरे ही ऊपर 25 हजार का इनाम हो जाए लोनी पुलिस राजस्थान से हाजी सलमान को पकड़ लाई है.तो विधायक जी लाइव आकर ऐसे शोर मचा रहे हैं जैसे पुलिस अबू सलेम को पकड़ लाई हो.विधायक जी लोनी की बदहाल सड़कों ओर ड्रेनेज सिस्टम को बेहतर करने की बजाय ,, हिंदू _ मुस्लिम करके चुनाव जीतना चाहते हैं..हम सोच रहे है इस सब के बावजूद विधायक जी चुनाव हार गए तो क्या होगा...
UP: सहारनपुर के कलक्ट्रेट परिसर में बनी मस्जिद आज सुबह 5 बजे ढहा दी गई!
कल रात भी इसे तोड़ने की सूचनाएं फैली तो DM ने भीड़ को ऐसा कहकर शांत किया कि मस्जिद सिर्फ सील की जाएगी। आज सुबह लोग नींद से उठे तो मस्जिद जमींदोज हो चुकी थी। 16 जुलाई को जिला प्रशासन ने इस मस्जिद का निर्माण "अवैध" बताया था।
मस्जिद कमेटी ने कोर्ट में 1 जनवरी 1911 का बिजली बिल दिखाकर बताया कि कलक्ट्रेट से पहले ही यहां मस���जिद बन गई थी। जबकि प्रशासन ने सबूत रखा कि सहारनपुर में पहली बार बिजली ही 1912 में आई थी।
The mosque inside the Saharanpur Collectorate premises was demolished by the administration.
The mosque committee had presented an electricity bill dated January 1, 1911, claiming the mosque was over a century old.