एक अकेली लड़ जाएगी
जीतेगी और बढ़ जाएगी!
पहले चरण में ही दीदी की सरकार की बेहद मजबूत बुनियाद बन गई है दूसरे चरण में बंगाल की अस्मिता बचानेवाली दीदी की सरकार की बुलंद इमारत खड़ी हो जाएगी।
दीदी हैं, दीदी रहेंगी!
भाजपा सरकार पीडीए की एकता से लड़ नहीं पा रही है तो उनके घरों में तोड़फोड़ करवाने पर उतर आई है। भाजपा अपनी हताशा पीडीए परिवारों पर न निकाले। ��ाजपा ये याद रखे, जिनके ज़रिए वो ये सब करवा रही है, उनमें भी पीडीए हैं, इसीलिए उनके षड्यंत्र खुलते देर नहीं लगेगी। दरारवादी भाजपा एक हाथ को दूसरे हाथ से लड़ाने का सामाजिक अपराध न करे।
भाजपा अन्याय, अत्याचार और अनैतिकता का पर्याय बन गयी है।
घोर निंदनीय!
#गाजीपुर_की_बेटी_हत्याकांड
पांच मिनट में बदल गई किस्मत
SRH के लिए खेल रहे
Praful Prakash Hinge का आज ये IPL का पहला मैच है,
उनके इंस्टाग्राम पेज पर आधा घंटे पहले एक हज़ार
फॉलोअर्स थे,आधा घंटे पहले Hinge ने पहले ही ओवर में तीन विकेट ले लिए
ऐसा करने वाले वो IPL के पहले गेंदबाज हैँ
अगर माननीय मुख्यमंत्री जी नोएडा के मज़दूरों के आंदोलन को किसी की साज़िश बता रहे हैं तो एक सवाल जनता आपसे पूछ रही है कि अगर ये सच है तो आपकी ख़ुफ़िया पुलिस क्या आपके साथ बंगाल प्रचार करने गयी थी या वनस्पति की खोजबीन में लीन थी या उसके प्रभाव में। मज़दूरों के आंदोलन को नक्सलवाद के आरोप से बदनाम करने से पहले आप ये बताए�� कि आपने ऐसा क्या किया है कि 10 सालों में ऐसे हालात बन गये। आप मजदूरों के ज़ख़्मों पर मलहम नहीं लगा सकते तो �� लगाएं लेकिन उन ज़ख़्मों पर नमक तो न छिड़कें। भाजपाई कमीशनखोरी से जन्मी महंगाई के कारण परिवारवाले वैसे ही दुखी है उसके ऊपर अवांछित दोषारोपण करने का जो पाप आप कर रहे हैं, वो घोर निंदनीय है। इससे हालात बद से बदतर हो सकते हैं।
अगर आप से प्रदेश नहीं संभल रहा है तो ससम्मान इस गद्दी से उतरकर जाइए, नहीं तो जनता उतार देगी।
भाजपाई ख़ुद तो अंतिम दौर के भ्रष्टाचार में आकंठ लिप्त हैं, इसीलिए न इनसे देश ��ंभल रहा है, न प्रदेश।
भाजपा का डबल इंजन, जनता के लिए ट्रबल इंजन बन गया है। जनता इन सब इंजनों के पहिए खोल देगी और पूर्ज़े निकालकर, हमेशा के लिए कबाड़खाने में भेज देगी।
.@BeingSalmanKhan Bhai, mere 30 saal ke safar ko sarahne ke liye bahut-bahut shukriya. Aap hamesha ek bade bhai ki tarah raasta dikhate aaye hain. Love you, Bhai, Naman! 😇🙏
सासंद जनता का प्रतिनिधि होता है, मुख्यमंत्री का खिलौना नहीं।
ये भाजपा सरकार है या सर्कस?
प्रदेश की जनता दुख-दर्द-दिक़्क़तों का सामना कर रही है और भाजपा सरकार के लोग आपस में विदूषक-विदूषक ���े खेल का आनंद ले रहे हैं। ऐसे जन प्रतिनिधियों के कारण ही गोरखपुर आज शर्मिंदा है।
वैसे इस बात का खुलासा करने के लिए सांसद जी को दंड ज़रूर मिलेगा कि मुख्यमंत्री जी ‘स्ट्रैस’ में हैं। जब सत्ता जाना तय हो गया है और उनके अत्याचार व भ्रष्टाचार के कारण जनता आक्रोशित है, ऐसे हालातों में उनको तनाव तो होगा ही।
अब ये भी डपट खाएंगे।
अब जब अवैध खनन के साक्षात सबूत के वीडियो देखेंगे तो माननीय फिर कहेंगे ये तो ‘एआई जनरेटेड’ है।
लगता है इस मामले में दिल्ली-लखनऊ की मिलीभगत है तभी न दिल्ली के ड्रोन को ये दिनदहाड़े का अवैध खनन दिखाई दे रहा है और न ही दूरबीन को… और रही बात लखनऊवालों की तो उन्होंने तो पहले ही बहाने की तरह काला चश्मा लगा लिया है, जिससे न दिखेगा अपराध, न करनी पड़ेगी कार्रवाई, घर तक अपने आप पहुँच जाएगी हिस्से-बाँट की मलाई।
आशा है : पर्यावरण को बचाने की अपनी लड़ाई में लगी ऐसी साहसी पत्रकारिता अवैध खनन को पूरी तरह ख़त्म करके ही दम लेगी।
आँख और मुँह कितने सेंटीमीटर खुल सकते हैं, ये शर्त भी रख देते…
किसी को ‘हाता नहीं भाता’, इसीलिए वो ‘श���्तों’ का है अंबार लगाता।
भाजपाई सनातन का सम्मान नहीं कर सकते हैं तो भले न करें परंतु अपमान भी न करें। उप्र की अहंकारी सरकार जिस समाज विशेष के मान की बाँह मरोड़ रही है, वो बात उस समझदार समाज को समझ आ रही है। यहाँ तक कि उस समाज के जो लोग भाजपा सरकार में मंत्री, सांसद, विधायक, पार्षद या कहें किसी और तरह के जनप्रतिनिधि हैं, वो भी इस मामले में अपने समाज से मुँह छिपा रहे हैं लेकिन भाजपा की भट्टी पर अपने स्वार्थ की रोटी सेंकनेवाले ऐसे भाजपाई जनप्रतिनिधि, अपने ही समाज में सम्मान खो चुके हैं। जनता अगले चुनाव में उनको सबक सिखाएगी। इन जनप्रतिनिधियों में से जो कुछ लोग अपने समाज के सच्चे शुभचिंतक हैं वो उन अन्य दलों के संपर्क में हैं जो सदैव सनातन और इस समाज का सम्मान भी करते रहे हैं और जिन्होंने उन्हें सदैव यथोचित मान-स्थान भी दिया है।
और हाँ… ‘कोविड-19’ अभी भी चल रहा है क्या? अगर ये सच है तो सरकार की अपनी किस मीटिंग या भाजपा के किस आयोजन में इसका आख़िरी बार अनुपालन हुआ, उसका प्रमाण दिया जाए। भाजपाई और उनके संगी-साथियों की भूमिगत बैठकों में क्या ये लागू होता है। कहीं ऐसा तो नहीं कि इसी कारण ‘बाटी-चोखा’ वाली बैठक पर पाबंदी लगाई गयी थी।
अतार्किक बंदिशें लगाना कमज़ोर सत्ता की पहचान होती है।
निंदनीय!
घोर आपत्तिजनक!!
विनाशकाले विपरीत बुद्धि!!!
बिहार के इतिहास का सबसे बड़ा अपहरण!
ये दिखने में राजनीतिक अपहरण है, लेकिन दरअसल ये बिहार का आर्थिक अपहरण है।
भाजपा ने तो फिरौती में पूरा बिहार माँग लिया।
अगला नंबर… समझदार को इशारा काफ़ी।