गरीबों, मजलूमों, शोषितों-वंचितों, नौजवानों, किसानों, मजदूरों की आस एवं विश्वास, PDA के महानायक, @samajwadiparty के राष्ट्रीय अध्यक्ष आदरणीय श्री @yadavakhilesh जी के "जन्मदिन"
हार्दिक शुभकामनाएं
किसान पूछ रहे हैं जब माननीय मुख्यमंत्री जी ने कृषि का ‘हवा-हवाई सर्वेक्षण’ किया था तो हवाई पट्टी से उड़ने के बाद, मजबूरी में सड़क पर मक्का सुखाने से बनी ये ‘मक्का पट्टी’ दिखाई दी थी क्या?
भाजपा किसानों की समस्या क्यों नहीं समझती है। समतल के अभाव में सड़कों पर मक्का सुखाने का विकल्प हर तरह से असुरक्षित है। किसानों की मजबूरी को समझकर सरकार विशेष प्रबंध करे। यातायात और परिवहन के लिए आवागमन का मार्ग सुरक्षित होना चाहिए। ये किसानों के जीवन के लिए भी ख़तरनाक है।
"समाजवादी पार्टी स्कूलों के मर्जर के फैसले के खिलाफ है। अगर स्कूल घर से दूर होगा तो बच्चे कैसे पहुंचेंगे, खासकर बेटियां कैसे पहुंचेंगी।"
- माननीय राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री अखिलेश यादव जी, कन्नौज
आदरणीय समस्त शिक्षक समुदाय
एक शिक्षक का बेटा होने के नाते हर शिक्षक से मेरा पारिवारिक संबंध है और उनका दर्द मेरा दर्द है।
- स्कूल मर्जर के कारण शिक्षकों की संख्या और भी घट जाएगी। गाँवों में पब्लिक ट्रांसपोर्ट नहीं होने से व असुरक्षा की वजह से मर्जर के बाद बच्चियाँ दूर के स्कूलों में नहीं भेजी जाएंगी, इससे स्त्री शिक्षा कम होगी, लोग अपने बच्चों को स्कूल से निकाल लेंगे लेकिन ये सब बातें परिवारवाले ही समझ सकते हैं।
- शिक्षक संघ की माँगों के समर्थन में हम हमेशा रहे हैं और रहेंगे।
- बेसिक शिक्षक भर्ती प्रयागराज आंदोलनकारियों को हमारा समर्थन जारी रहेगा।
- 69000 सहायक शिक्षक भर्ती आंदोलनकारियों के हक़ की लड़ाई हम लड़ते रहेंगे।
- शिक्षा मित्र आंदोलनकारियों को हमारा साथ हमेशा मिलता रहा है और मिलता रहेगा।
शिक्षकों और बच्चों के अभिभावकों को जितनी जल्दी ये बात समझ आ जाएगी कि भाजपा सरकार शिक्षक और शिक्षा के ख़िलाफ़ है और भाजपा की वजह से परिवारवालों के बच्चों का भविष्य अंधकारमय है, उतनी ही जल्दी परिवर्तन के लिए ज़मीन बननी तैयार हो जाएगी। भाजपा रूढ़िवादी है और ये जानती है कि पढ़ा-लिखा व्यक्ति सवाल उठाता है, वो विभाजनकारी राजनीति का विरोध करता है इसीलिए स्कूल जितने कम होंगे, उतना ही भाजपा का विरोध कम होगा। शिक्षित नौकरी मांगेगा। सरकारी नौकरी होगी तो आरक्षण भी देना पड़ेगा। इसीलिए आरक्षण विरोधी भाजपा के एजेंडे में नौकरी है ही नहीं ।
भाजपा शिक्षकों को विरोध का एक ऐसा आंदोलन शुरू करने के लिए बाध्य न करे जिससे हर क्षेत्र में ठहराव आ जाए। भाजपा शिक्षकों की समस्याओं के प्रति हमेशा बेरुख़ी का नज़रिया अपनाती है। भाजपा की सरकार एक हृदयहीन सरकार है। जिसमें संवेदना न हो वो सरकार नहीं चाहिए।
सबको याद है कि हमने ‘ऑनलाइन हाज़िरी’ के आंदोलन के समय कहा था कि शिक्षकों का सम्मान और उन पर विश्वास करने से ही अच्छी पीढ़ी जन्म लेती है।
गुरुओं के साथ जो अभद्र भाषा बोलते हैं, उनका अपमान करते हैं वो अशिक्षित के समान ही हैं। अहंकार लोगों को अनपढ़ बना देता है क्योंकि अहंकारी न तो किसी की तकलीफ़ दुख को पढ़ता है, न सुनता है। शिक्षकों पर अविश्वास जताकर और उनका तिरस्कार करके भाजपा सरकार ने साबित कर दिया है कि वो न तो शिक्षा का सम्मान करती है, न शिक्षकों का।भाजपा ने अध्यापकों का भरोसा खो दिया है।
हम सदैव शिक्षक और शिक्षा के साथ हैं।
आपका अखिलेश
हम समस्त शिक्षक वर्ग और उनके परिवारों के साथ हैं:
- जिन सम्माननीय सेवानिवृत्त शिक्षकों का वाचिक-अभद्रता द्वारा अपमान किया गया, उनके साथ भी
- जिन्हें वेतन के नाम पर चंद पैसे मिल रहे हैं उनके साथ भी और
- जो भाजपा सरकार आने के बाद से सालों साल से शिक्षक बनने का कभी न ख़त्म होने वाला इंतज़ार कर रहे हैं, उनके साथ भी।
शिक्षा जगत कहे आज का, नहीं चाहिए भाजपा!
भाजपा है तो गुंडागर्दी है, सामंतवाद है।
प्रदेश की क़ानून व्यवस्था का हाल तो सबको पता है,लेकिन आपको शायद ही पता होगा कि इस बिगड़ी कानून व्यवस्था के पीछे भाजपा है। अपराधी खुलेआम प्रधानमंत्री तक से गलबहियां कर रहे है।
एक बात साथ है जितना बड़ा गुंडा,उतना बड़ा भाजपाई।
"सरकार जो फैसला लेना चाहे, ठोस कदम उठाना चाहे आतंकवाद को जड़ से खत्म करने के लिए, सरकार के साथ समाजवादी पार्टी है।"
- माननीय राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री अखिलेश यादव जी
"मैं चौहान समाज के लोगों को धन्यवाद देना चाहता हूं, उन्हें भरोसा दिलाता हूं कि जब भी समाजवादी सरकार बनेगी तो उन्हें सम्मान दिलाने का काम करेंगे।"
- माननीय राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री अखिलेश यादव जी
समाजवादी पार्टी के दलित सांसद
रामजी सुमन के काफिले पर हमला, टायर फेंके गए
भाजपा सरकार दलित सांसद रामजीलाल सुमन की हत्या करवाना चाहती है
जंगलराज ... पुलिस कहां थी ?? और रामजीलाल जी को सुरक्षा क्यों नहीं दी गई थी??
अब बुलडोज़र भी छिन गया क्या? अब बुलडोज़र कोई और चलवा रहा है और कोई और चला रहा है। अब क्या विदाई की बेला में पद के साथ पहचान भी छीन लेंगे। ये अच्छी बात नहीं।