संत दादू जी का प्रमाण संत दादू जी ने अपनी वाणी में कबीर साहेब को सृजनहार, कर्ता और पूर्ण परमात्मा बताया। उन्होंने कहा कि कबीर के अतिरिक्त कोई दूसरा भगवान नहीं है।#काशी_वाला_कबीर_ही_भगवान_है
Sant Rampal Ji Maharaj
संत दादू जी का प्रमाण संत दादू जी ने अपनी वाणी में कबीर साहेब को सृजनहार, कर्ता और पूर्ण परमात्मा बताया। उन्होंने कहा कि कबीर के अतिरिक्त कोई दूसरा भगवान नहीं है।#काशी_वाला_कबीर_ही_भगवान_है
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संत गरीबदास जी ने अमरग्रन्थ साहिब में स्पष्ट किया है कि काशी वाला कबीर ही भगवान है।
गरीब, परमेश्वर एक कबीर है, दूजा नहीं आधार।
दास गरीब सकल सृष्टि का, यो ही सिरजन हार।।
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#काशी_वाला_कबीर_ही_भगवान_है
संत गरीबदास जी ने अमरग्रन्थ साहिब में स्पष्ट किया है कि काशी वाला कबीर ही भगवान है।
गरीब, परमेश्वर एक कबीर है, दूजा नहीं आधार।
दास गरीब सकल सृष्टि का, यो ही सिरजन हार।।
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#काशी_वाला_कबीर_ही_भगवान_है
स्वामी रामानंद जी का प्रमाण स्वामी रामानंद जी ने कबीर साहेब को करतार अर्थात सृष्टि के रचयिता भगवान कहा। उन्होंने स्वीकार किया कि विभिन्न रूपों में कार्य करने वाले वही एक परमात्मा कबीर हैं।
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#काशी_वाला_कबीर_ही_भगवान_है
स्वामी रामानंद जी का प्रमाण स्वामी रामानंद जी ने कबीर साहेब को करतार अर्थात सृष्टि के रचयिता भगवान कहा। उन्होंने स्वीकार किया कि विभिन्न रूपों में कार्य करने वाले वही एक परमात्मा कबीर हैं।
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#काशी_वाला_कबीर_ही_भगवान_है
#काशी_वाला_कबीर_ही_भगवान_है
इस विषय में गुरुग्रंथ साहिब के पृष्ठ 721 में आदरणीय नानक जी ने कहा है:
हक्का कबीर करीम तू, बेएब परवरदिगार।
नानक बुगोयद जनु तुरा, तेरे चाकरां पाखाक।।
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#काशी_वाला_कबीर_ही_भगवान_है
इस विषय में गुरुग्रंथ साहिब के पृष्ठ 721 में आदरणीय नानक जी ने कहा है:
हक्का कबीर करीम तू, बेएब परवरदिगार।
नानक बुगोयद जनु तुरा, तेरे चाकरां पाखाक।।
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#काशी_वाला_कबीर_ही_भगवान_है
श्री कृष्ण द्वारका जाने के बाद कभी वापस गोवर्धन की पूजा करने क्यों नहीं आए?
जानने के लिए अवश्य देखिए सनातनी पूजा के पतन की कहानी, संत रामपाल जी महाराज की जुबानी, भाग-6 Factful Debates यूट्यूब चैनल पर
Sant Rampal Ji Maharaj
#काशी_वाला_कबीर_ही_भगवान_है
श्री कृष्ण द्वारका जाने के बाद कभी वापस गोवर्धन की पूजा करने क्यों नहीं आए?
जानने के लिए अवश्य देखिए सनातनी पूजा के पतन की कहानी, संत रामपाल जी महाराज की जुबानी, भाग-6 Factful Debates यूट्यूब चैनल पर
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#परमात्मा_चारों_युगमें_आतेहैं
द्वापरयुग में 'करुणामय' रूप में आए कबीर साहेब ने रानी इन्द्रमती और उनके पति चंद्रविजय को अपनी शरण में लिया था। जब सर्प ने रानी इन्द्रमती को डसा, तब कबीर साहेब ने उनके गुरु रूप में प्रकट होकर उनकी रक्षा की थी:
God Kabir In 4Yugas
#परमात्मा_चारों_युगमें_आतेहैं
केवल कलियुग ही नहीं ,बल्कि चारों युगों में प्रकट होते हैं। महाभारत युद्ध के उपरांत पांडवों ने श्रीकृष्ण जी के सान्निध्य में जो धर्म यज्ञ किया था, उसे परमात्मा कबीर जी ने अपने भक्त सुपच सुदर्शन के रूप में आकर पूर्ण करवाया था:
God Kabir In 4Yugas
#परमात्मा_चारों_युगमें_आतेहैं
त्रेतायुग में कबीर साहेब मुनीन्द्र ऋषि के रूप में प्रकट थे और नल-नील को अपनी शरण में लिया। जब रामचंद्र जी सीता जी को रावण की कैद से मुक्त कराने के लिए समुद्र पर पुल बनाना था,तब मुनीन्द्र ऋषि के रूप में कबीर जी ने ही वह पुल बनवाया
God Kabir In 4Yugas
#परमात्मा_चारों_युगमें_आतेहैं
सतयुग में कबीर परमेश्वर, विष्णु जी के वाहन पक्षीराज गरुड़ से मिले और उन्हें वास्तविक ज्ञान से परिचित कराया:
ज्ञानी गरुड़ है दास तुम्हारा, तुम बिन नाहीं जीव निस्तारा।
इतना कह गरुड़ चरण लिपटाया, शरण लेवो अविगत राया।।
God Kabir In 4Yugas
#परमात्मा_चारों_युगमें_आतेहैं
'कबीर सागर' (बोध सागर खंड) के अध्याय 'ज्ञान बोध', पृष्ठ 29 में कबीर परमात्मा ने अपनी जानकारी स्वयं दी है:
सतयुग सतसुकृत कहलाये। त्रेता नाम मुनीन्द्र धराये।
द्वापर में करुणामय कहाये। कलियुग नाम कबीर रखाये।।
God Kabir In 4Yugas
#परमात्मा_चारों_युगमें_आतेहैं
'कबीर सागर' (बोध सागर खंड) के अध्याय 'ज्ञान बोध', पृष्ठ 29 में कबीर परमात्मा ने अपनी जानकारी स्वयं दी है:
सतयुग सतसुकृत कहलाये। त्रेता नाम मुनीन्द्र धराये।
द्वापर में करुणामय कहाये। कलियुग नाम कबीर रखाये।।
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सतयुग में कबीर परमेश्वर, विष्णु जी के वाहन पक्षीराज गरुड़ से मिले और उन्हें वास्तविक ज्ञान से परिचित कराया:
ज्ञानी गरुड़ है दास तुम्हारा, तुम बिन नाहीं जीव निस्तारा।
इतना कह गरुड़ चरण लिपटाया, शरण लेवो अविगत राया।।
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त्रेतायुग में कबीर साहेब मुनीन्द्र ऋषि के रूप में प्रकट थे और नल-नील को अपनी शरण में लिया। जब रामचंद्र जी सीता जी को रावण की कैद से मुक्त कराने के लिए समुद्र पर पुल बनाना था,तब मुनीन्द्र ऋषि के रूप में कबीर जी ने ही वह पुल बनवाया
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केवल कलियुग ही नहीं ,बल्कि चारों युगों में प्रकट होते हैं। महाभारत युद्ध के उपरांत पांडवों ने श्रीकृष्ण जी के सान्निध्य में जो धर्म यज्ञ किया था, उसे परमात्मा कबीर जी ने अपने भक्त सुपच सुदर्शन के रूप में आकर पूर्ण करवाया था:
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द्वापरयुग में 'करुणामय' रूप में आए कबीर साहेब ने रानी इन्द्रमती और उनके पति चंद्रविजय को अपनी शरण में लिया था। जब सर्प ने रानी इन्द्रमती को डसा, तब कबीर साहेब ने उनके गुरु रूप में प्रकट होकर उनकी रक्षा की थी:
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